जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटरसाईकिल से

बुलेट मोटर साईकिल की भी पूजा होती है, और बाकायदा लोग उस मोटर साईकिल से भी मन्नत मांगते है और हाँ इस चमत्कारी मोटर साईकिल ने आज से लगभग २१ साल पहले सिर्फ स्थानीय लोगों को ही नहीं बल्कि सम्बंधित पुलिस थाने के पुलिस वालो को भी चमत्कार दिखा.

भूतों का महल : भानगढ़ का सच

राजस्थान के भानगढ़ का उजड़ा किला व नगर भूतों का डरावना किले के नाम से देश विदेश में चर्चित है.

"उबुन्टू लिनक्स" इसका नाम तो बाली होना चाहिए था

उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी.

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी शेखावत

आज भी बलजी को नींद नहीं आ रही थी वे आधी रात तक इन्ही फिरंगियों व राजस्थान के सेठ साहूकारों द्वारा गरीबों से सूद वसूली पर सोचते हुए चिंतित थे तभी उन्हें अपने छोटे भाई भूरजी की आवाज सुनाई दी|

राजस्थानी प्रेम कहानी : ढोला मारू

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है.

May 16, 2015

गूगल एडसेंस से ज्यादा कैसे कमायें ?

अपने ब्लॉग या वेब साईट के माध्यम से कमाई करने के लिए गूगल की विज्ञापन सेवा (Google Adsense)से बेहतर कोई माध्यम नहीं. आज बहुत से ब्लॉग लेखक और वेबसाइट के मालिक गूगल एडसेंस से काफी मोटी कमाई करते है.

लेकिन वर्तमान में मोबाइल फोन पर इन्टरनेट प्रयोग के बढ़ते चलन ने गूगल विज्ञापन सेवा से कमाई के लिए आवश्यक कर दिया है कि आपकी वेब साईट या ब्लॉग मोबाइल फ्रेंडली हो जो मोबाइल फोन में आसानी से खुल जाए और विज्ञापन भी सही ढंग से दिखाई दे. जो वेब साइट्स या ब्लॉग मोबाइल फ्रेंडली नहीं है उनकी विज्ञापन से कमाई मोबाइल फ्रेंडली साईट से आधी ही होगी.

यदि आपका ब्लॉग मोबाइल फ्रेंडली नहीं है तो इसे मोबाइल फ्रेंडली बनाकर आप एक ही दिन में विज्ञापन से कमाई में अंतर साफ़ देख सकते है. आपका ब्लॉग या वेब साईट मोबाइल फ्रेंडली (mobile-friendly) है या नहीं इसे जांचने के लिए यहाँ क्लिक करें और निम्न तरीके से अपने ब्लॉग को mobile-friendly बनायें

१- यदि आपकी वेब साईट है तो अपने वेब मास्टर से मिलकर उसे मोबाइल फ्रेंडली बनवायें.
२- यदि आपका टेम्पलेट पुराना है तो कोशिश करें Responsive Blog Template लगायें
२- यदि आपका ब्लॉग ब्लॉगर पर है तो इसे मोबाइल फ्रेंडली करने के लिए निम्न चरण पुरे करे या चित्र की मदद लें
- सबसे पहले ब्लॉग डेशबोर्ड में लॉग इन करें
- 1- टेम्पलेट पर जाएँ, जहाँ आपको निम्न चित्र के अनुसार मोबाइल लिखा दिखेगा जिस पर क्लिक करें
- 2- Select Yes. Show mobile template on mobile devices.
- 3- Selct Defaut or Custom
- 4- Save



- यदि आपका टेम्पलेट Responsive नहीं हों तो Default चुनें और यदि आपने अपने ब्लॉग का टेम्पलेट Responsive अपडेट कर दिया हो तो Custom Setting चुनें.
- कस्टम सेटिंग चुनने के बाद आपका ब्लॉग मोबाइल फ्रेंडली है या नहीं, इसे एक बार चैक अवश्य करें|
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May 13, 2015

गौ-सेवक या अड़ंगेबाज

आजकल शहरी युवाओं में गौ-सेवा के नाम पर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढाने की होड़ सी चल रही है. पशु तस्करी रोकने के नाम पर ऐसे दुस्साहसी युवक गौवंश पालकों द्वारा गायों को ईलाज या खरीद फरोख्त कर इधर उधर लाने ले जाने के दौरान हमला कर उसे गौ तस्कर प्रचारित कर वाह वाही लुट रहे है. सोशियल साइट्स पर इस तरह गौ-पालकों पर हमले कर गायें बचाने का दावा करने व फोटो अपडेट करने की खासी संख्या देखी जा सकती है.

इसी तरह कल बरसाना की एक गौ-शाला की कुछ बीमार गायों का दिल्ली के एक अस्पताल से ईलाज करवाकर वापस बरसाना स्थित गौ-शाला ले जाते समय बल्लभगढ़ के समीप इसी तरह के कथित गौ-रक्षकों द्वारा हमला किया गया और गायों को ले जाने वालों को बुरी तरह पीटा भी गया. इन कथित गौ-सेवकों ने तर्क चालकों से पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई और उन्हें पीट पीट कर घायल कर दिया.

इस तरह के कुकृत्यों से कुछ लोग भले अपने आपको गौ-रक्षक व महान गौ-सेवक साबित भले कर लें लेकिन उनका इस तरह का कुकृत्य गौ-वंश की रक्षा नहीं, गौ-वंश का बुरा ही करने वाला है.

यह बहुत ही अफसोसजनक व चिंतनीय है कि गौ-संरक्षण के नाम पर ऐसे लोग जिनकी कई पुश्तों ने कभी गाय नहीं पाली और ना वे उन्होंने कभी गाय पालने की सोची होगी पर गौ-संरक्षण के नाम पर अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा चमकाने में लगे है.
ऐसे अराजक तत्व गौ-पालकों के लिए एक और जहाँ मुसीबत बन रहे है, वहीं दूसरी और इनके दुष्प्रचार से साम्प्रदायिक सौहार्द भी बिगड़ रहा है.

May 9, 2015

जाने कैसे ली कर्नल नरुका ने पौन बीघा कृषि भूमि में 13 लाख रूपये की उपज

यदि कोई व्यक्ति दावा करे कि उसने मात्र पौन बीघा कृषि भूमि में तेरह लाख रूपये मूल्य की उपज ली. इस बात को कोई भी किसान कोरी गप्प मानेगा. लेकिन अलवर में कोठीराव के रहने वाले पूर्व कर्नल राजेन्द्र सिंह नरुका ने अपने खेत में अपनी बुद्धि, समझ और मेहनत से मात्र पौन बीघा भूमि में तेरह लाख से ज्यादा की उपज बेची. यही नहीं जब कर्नल ने अपनी यह कृषि आय आयकर रिटर्न में दर्शायी तो आयकर विभाग के भी कान खड़े हो गए. आयकर अधिका

May 8, 2015

सामाजिक समरसता के प्रतीक महाराज शारिवाहन

आजादी के बाद इस देश में क्षत्रिय शासकों के चरित्र हनन का एक फैशन सा चला है. ऐसा कोई राजनैतिक दल नहीं जिसनें समय समय पर क्षत्रिय शासकों को शोषक, आय्यास आदि की

May 3, 2015

व्यक्ति बनाओ, देश अपने आप बन जायेगा.

एक दिन शहर से कुछ लोगों का एक दल अपने बाबा श्री ताऊ महाराज से मिलने आया. ताऊ महाराज ने उस दिन मौनव्रत धारण कर रखा था. सो आगुन्तक दल से बातचीत नहीं कर पाये. शहर आये दल के समय बाबा के आश्रम में कुछ गांव वाले भी बैठे थे. शहरी दल के शिक्षित लोगों ने ताऊ महाराज से देश के विकास व निर्माण हेतु कुछ उपाय बताने का आग्रह किया, लेकिन ताऊ महाराज मौनव्रत में थे सो बातचीत संभव नहीं थी. फिर भी ताऊ महाराज ने पास ही पड़ा अपने देश का नक्शा उठाया और उसके कई टुकड़े कर दिए तथा एक कागज पर शहरी लोगों को लिखकर दिया कि इस नक़्शे को जोड़कर फिर देश बना दो.

शहरी लोगों का पूरा दल कागज के टुकड़ों को जोड़ने में लग गया पर पूरी कोशिश करने बावजूद वे देश के नक़्शे को सही तरीके से नहीं जोड़ पाए. आखिर ताऊ महाराज ने गांव वालों की और इशारा किया कि वे भी कोशिश करें. गांव वालों ने पहले ही प्रयास में नक़्शे को ठीक तरह से जोड़ दिया. तब शहरी लोगों ने पूछा कि उन्होंने इतनी आसानी से व जल्द देश के नक़्शे को कैसे जोड़ दिया?

गांव वालों में एक व्यक्ति बोला - हमने देश नहीं, व्यक्ति को जोड़ा और देश अपने आप बन गया. कहते हुए ग्रामीण ने नक़्शे के दूसरी और बना एक व्यक्ति का चित्र दिखाया.

तभी ताऊ महाराज ने अपना मौनव्रत तोड़ते हुए शहरी लोगों को समझाया कि यदि हम व्यक्ति निर्माण करने में सफल हो जाए तो समझो देश बन गया. और हाँ हम बिना व्यक्ति निर्माण के देश बनाने की कोशिश करें तो असफल होंगे. अत: भारत का सही मायने में निर्माण करना है, विकास करना है तो व्यक्ति बनाने की कोशिश करो, भारत का निर्माण व विकास अपने आप हो जायेगा.

May 2, 2015

प्राचीन गणेश्वर सभ्यता और चर्म रोग मुक्ति कुण्ड

अपने गृह जिले सीकर की प्राचीन गणेश्वर सभ्यता (Ganeshwar Civilization) व गणेश्वर धाम (Ganeshwar Mahadev) के बारे में कई मित्रों से सुना था पर कभी वहां जाना नहीं हुआ. जबकि इस स्थान से छ: सात किलोमीटर दूर से बचपन से (सीकर-कोटपुतली-दिल्ली मार्ग) आना जाना रहता है, लेकिन इतने पास से गुजरने के बावजूद कभी यहाँ जाना नहीं हुआ. पिछले माह दिल्ली से सीकर कार से जाने का कार्यक्रम बना तो तय किया कि इस बार इस स्थान की यात्रा अवश्य की जाएगी.

इस यात्रा में पाटन से निकलते ही हमने गणेश्वर की और मुड़ने वाला रास्ता खोजना शुरू कर दिया. आखिर नीमकाथाना (Neem Ka Thana) बाईपास पर हमें वो सडक मिल गई जो प्राचीन सभ्यता वाले गांव गणेश्वर धाम की और जा रही थी. गांवडी नामक गांव गणेश्वर के पास होने की वजह से गणेश्वर को "गांवडी गणेश्वर" (Ganwari Ganeshwar) भी कहा जाता है. सीकर जिले के नीमकाथाना कस्बे से लगभग 10 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत श्रंखला की सुरम्य वादियों के बीच बसे इस गांव के भवन निर्माण को देखते ही आभास हो जाता है कि यह एक प्राचीन गांव है. इस गांव में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई भी की गई थी, जिसमें कई ताम्बे के पाषाण औजार मिले. चूँकि राजस्थान की खेतड़ी की तांबे की खदाने यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है अत: उत्खनन में इतने प्राचीन ताम्र औजार मिलने से साफ़ है कि यहाँ के निवासियों के पास प्राचीन काल से तांबा निकालने की तकनीक मौजूद थी. उत्खनन ने यह साफ़ कर दिया कि कभी यहाँ भी एक उन्नत संस्कृति, सभ्यता मौजूद थी, जो समय के थपेड़ों के साथ बनती बिगड़ती रही.

गांव में गणेश्वर मंदिर के बारे में पूछताछ के बाद पता चला कि उंचाई पर एक धाम बना हुआ है जहाँ सभी देवताओं के अलग-अलग मंदिर बने है. धाम पर पहुंचे ही देखा सामने एक द्वार बना है, द्वार से प्रवेश करते ही चारों और छोटे-बड़े विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर नजर आते है, और नजर आते है ऊँची चार दिवारी के भीतर बने एक कुण्ड में नहाते कई लोग. इस कुण्ड में निर्बाध पहाड़ियों से पानी आता रहता है जिसमें सल्फर की मात्रा है यही वजह है कि यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु इस कुण्ड में चर्म रोग के निदान हेतु डुबकी लगाना नहीं भूलता. चर्म रोगी भी यहाँ अपने रोग का निदान करने हेतु नहाने आते है. इस तरह प्राचीन सभ्यता, धार्मिक महत्त्व व स्वास्थ्य लाभ हेतु यह गांव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना है.

चूँकि गांव पहाड़ी पर बसा है अत: यहाँ से दूर दूर तक अरावली पर्वत माला की तलहटी का सुन्दर नजारा भी देखने को मिलता है. कुलमिलाकर घुमक्कड़ों के लिए यह गांव यात्रा हेतु एक शानदार जगह है. जो शहरी कोलाहल से दूर एक शांत जगह है. br/>


नोट : यहाँ जाने के लिए सीकर-नीमकाथाना- कोटपुतली रोड़ पर नीमकाथाना बाईपास पर गांवडी के लिए सड़क जाती है उसी सड़क पर बाईपास से लगभग सात किलोमीटर दूर गणेश्वर गांव स्थित है!


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May 1, 2015

जीवा आयुर्वेद का ऑनलाइन आयुर्वेद केंद्र : जीवा टेली मेडिसिन सेंटर

26 अप्रेल की फरीदाबाद स्थित विश्व में भारतीय आयुर्वेद का झंडा बुलंद करने वाली संस्था "जीवा आयुर्वेद" Jiva Ayurved का अपनी तरह का पहला और विश्व का सबसे बड़ा "ऑनलाइन आयुर्वेद केंद्र" Online Ayurved Call Center "जीवा टेली मेडिसिन सेंटर" देखने का अवसर मिला. 1994 में शुरू हुए इस आयुर्वेद केंद्र में 400 आयुर्वेद डाक्टर्स देशभर से रोगियों के आने वाले फोन पर रोग के बारे में चर्चा कर उन्हें निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श देते है, साथ ही जरुरत की अच्छी गुणवत्ता वाली आयुर्वेद दवा जो वे खुद बनाते है डाक या कुरियर से सस्ते दामों में रोगी के घर तक उपलब्ध करा देते है. इस तरह दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले रोगी को जिसे अपने क्षेत्र में विश्वसनीय चिकित्सा सुविधा की कमी के चलते नीम हकीमों पर निर्भर रहना पड़ता है कोप घर बैठे विशेषज्ञ डाक्टर्स के परामर्श से दवा उपलब्ध हो जाती है.

जीवा समूह के चेयरमैन ऋषिपाल चौहान के अनुसार उनके संस्थान के 400 डाक्टर प्रतिदिन 1800 से ज्यादा शहरों व गांवों के छ: हजार से ज्यादा रोगियों को फोन पर निशुल्क परामर्श देते है. चौहान बताते है कि हम जो दवा देते है उसका उत्पादन हम खुद करते है तथा अपने किसी उत्पाद को बाजार की किसी दूकान पर बेचने के बजाय हम सीधे रोगी को दवा देते है, यदि मेरी दवा से रोगी ठीक नहीं हुआ तो यकीनन मेरी दूकान बंद हो सकती है. अत: हम अपनी दवाओं की गुणवत्ता पर ख़ास ध्यान देते है. यही हमारी सफलता का राज है. साथ ही चौहान बताते है कि एक रोग की दवा उसी रोग वाले हर रोगी का उपचार नहीं कर सकती. चौहान उदाहरण देते है कि यदि एक दवा जो केरल के रोगी का सही उपचार कर देगी जरुरी नहीं कि वही दवा कश्मीर में रहने वाले उसी रोगी के रोग का उपचार कर दे. अत: रोगी की प्रकृति, रोगी के क्षेत्र की प्रकृति के आधार पर हमारे संस्थान के विशेषज्ञ आयुर्वेदाचार्य रोगियों का इलाज करते है.

अपने इस ऑनलाइन आयुर्वेद केंद्र के निर्माण को भी चौहान ने आयुर्वेद व प्रकृति से जोड़ रखा है. केंद्र के एक फ्लोर पर दीवारों की सजावट व कुर्सी टेबल्स सिर्फ बांस की बनी है तो दुसरे फ्लोर पर जहाँ कम्प्यूटर्स का ज्यादा इस्तेमाल होता, दीवारों आदि की लिपाई-पुताई गोबर से की गई है. गोबर से पुताई के बारे में चौहान बताते है कि गोबर कम्प्यूटर्स से निकलने वाले विकिरण को सोख लेता है, वहीं कमरे का तापमान बढ़ने से रोकता है. जो निश्चित ही वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक है.

यदि आप भी जीवा आयुर्वेद से घर बैठे परामर्श चाहते है 0129-4040404 पर फोन करें