राजस्थानी प्रेम कहानी : ढोला मारू

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है .

जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटरसाईकिल से !

मै यहाँ एक ऐसे स्थान की चर्चा करने जा रहा हूँ जहाँ इन्सान की मौत के बाद उसकी पूजा के साथ ही साथ उसकी बुलेट मोटर साईकिल की भी पूजा होती है.

भूतों का महल : भानगढ़ का सच

राजस्थान के भानगढ़ का उजड़ा किला व नगर भूतों का डरावना किले के नाम से देश विदेश में चर्चित है.

"उबुन्टू लिनक्स" इसका नाम तो बाली होना चाहिए था

उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी.

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी शेखावत

आज भी बलजी को नींद नहीं आ रही थी वे आधी रात तक इन्ही फिरंगियों व राजस्थान के सेठ साहूकारों द्वारा गरीबों से सूद वसूली पर सोचते हुए चिंतित थे तभी उन्हें अपने छोटे भाई भूरजी की आवाज सुनाई दी |.

Dec 14, 2014

गौ-सेवा हेतु एक अनुकरणीय तरीका

देशी नस्ल की गायों की विदेशी नस्लों की गायों व भैंस से कम मात्रा में दूध देने की क्षमता के चलते पशुपालकों के लिए देशी नस्ल की गाय पालना आर्थिक तौर पर घाटे का सौदा हो गया. इसी के चलते पशुपालक दूध के व्यापार से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में देशी नस्ल छोड़ विदेशी नस्ल की गायें पालते है| हालाँकि स्वास्थ्य की दृष्टि से देशी नस्ल की गायों के दूध की गुणवत्ता ज्यादा बेहतर है पर वर्तमान आर्थिक युग में हर व्यवसाय करने वाले के लिए आर्थिक लाभ ही ज्यादा महत्त्व होता है|

इसी आर्थिक पक्ष के चलते आज पशुपालक जहाँ देशी नस्ल की गायों को पालने से बचते है वहीं जिनके पास पहले से देशी नस्ल की गायें है उन्हें वे आवारा छोड़ देते है जिसकी वजह से आज उस देश में जिस देश में गाय को माता का दर्जा प्राप्त था, गाय की पूजा होती थी, उसी देश में गायों की दुर्गति हो रही है और देशी गायों के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे है|

लेकिन इस देश में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो गाय के प्रति आज भी मन में श्रद्धा रखते है और वे गायों के संरक्षण के लिए कृत संकल्प है| ऐसे लोगों ने कई जगह गायों को संरक्षण देने व उन्हें पालने के लिए गौ-सेवा शालाएं खोल रखी है जहाँ गौ-माता के प्रति श्रद्धा रखने वाले अपना सहयोग देकर गाय के संरक्षण के प्रति अपना कर्तव्य निभाते है|

कई शहरों में देखा है गौ-शाला संचालक शहर के विभिन्न स्थानों पर एक वाहन खड़ा कर देते है जिसमें गाय के प्रति श्रद्धा रखने वाले व्यक्ति चारा डाल देते है और गाड़ी नियत समयानुसार उस चारे को गायों तक पहुंचा देती है| इसी तरह गाय के प्रति प्रेम व श्रद्धा रखने वालों को दूर गौ शाला में जाए बगैर अपने नजदीक गायों के लिए चारा डालने की सुविधा मिल जाती है| इस तरह की गाय के लिए चारा एकत्र करने का तरीका तो बहुत जगह देखा है पर अभी हाल में अपनी ही गली में नित्य आने लगे एक रिक्शा द्वारा गायों के लिए भोजन एकत्र करने के अलग ही तरीका देखने को मिला| प्रया: हर घर के सदस्य चाहते है कि उनके घर की रसोई में बनने वाली रोटियों में से एक रोटी जरुर गाय को खिलाई जाए, लेकिन समस्या यह है कि गाय को दूर रोटी खिलाने जाने के लिए समय किसके पास है| लेकिन जिस तरह हमारी गली में गौशाला का एक रिक्शा नित्य प्रति आता है और हर से रोटी, बची हुई हरी सब्जियां आदि लेकर उन्हें गौशाला की गायों तक पहुंचाता है वह गायों के संरक्षण के लिए अपनाये जाने वाले तरीकों में एक अनुकरणीय तरीका है| इस तरह हर घर से बची रोटियां व सब्जी बनाते समय काटने के बाद बचा वेस्ट, जो ज्यादातर लोग कचरे में डालते है वह गायों के लिए भोजन के रूप में प्रयुक्त हो जाता है| इस तरीका से जहाँ गायों के लिए भोजन एकत्र हो जाता है वहीं घर में बचा भोजन कूड़े में जाने से बच जाता है और गली, मुहल्ले साफ़ रहते है|

यदि आप भी किसी गौ-शाला से जुड़े है, या आपके पास कोई गौ-शाला है और वह इस तरह का तरीका नहीं अपना रही है तो उन्हें इस तरीके से अवगत कराकर गौ-सेवा जैसे पवित्र यज्ञ में अपनी आहुति दें|


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Dec 10, 2014

ब्लॉग पर गूगल विज्ञापन कैसे लगायें ?

गूगल द्वारा हिंदी ब्लॉगस पर विज्ञापन देना शुरू करने के बाद उन ब्लॉग लेखक मित्रों जिनके पास अप्रूव एडसेंस खाता है, के फोन व सन्देश आ रहे है कि ब्लॉग पर विज्ञापन दिखाने के लिए एडसेंस कोड कैसे जोड़े जाये ?

इसी जिज्ञासा के उत्तर में आज हम चर्चा करते है कि अपने ब्लॉग से गूगल एडसेंस सेवा में माध्यम से कमाने के लिए ब्लॉग पर विज्ञापन कोड कैसे लगाये - 1-बी सबसे पहले अपने गूगल एडसेंस खाते में लॉग इन करें|
2-डेशबोर्ड में ऊपर My ads टैब पर क्लिक कर कोड इकाई (Adsense Code Unit)बनायें|



3- चित्र में दिखाए अनुसार New Ad Unit पर क्लिक करें|



4- सबसे पहले अपनी विज्ञापन इकाई का नाम दें|
5- विज्ञापन का आकार (Ad size and Ad Type, Display,style etc)चुनें व कोड प्राप्त करने के लिए नीचे सेव व गेट कोड (Save and get code) बटन पर चटका लगायें| निम्न चित्र अनुसार एक विंडो खुलेगी, जिसमें लिखे कोड नोट पेड (Notepad) पर सहेज लें|





- अब अपने ब्लॉग के डेशबोर्ड में लॉग इन करें और ब्लॉग के लेआउट (Blog Layout) पर क्लिक करें|
- एड ए गडगेट (Add a Gidget) पर क्लिक कर एक HTML/ JavaScript विजेट लें, और अपने विज्ञापन कोड (adsense code)उसमें चिपका (paste)कर सहेज (Save) दें| यह विजेट आप अपने ब्लॉग में जहाँ चाहें लगा सकते है|
आप जहाँ भी इस विजेट पर कोड लगाकर सहेजेंगे वहां वहां आपके ब्लॉग पर विज्ञापन नजर आयेंगे|

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Dec 9, 2014

सूचना के अधिकार का कैसे प्रयोग करें ?

फेसबुक पर अक्सर मित्र पूछते है कि सूचना के अधिकार के द्वारा सूचना कैसे प्राप्त की जाये, कैसे आवेदन किसको भेजा जाए आदि आदि| अत: आज हम इसीइसी प्रश्न पर चर्चा करेंगे कि इस  कानून का इस्तेमाल करते हुए आरटीआई के माध्यम में कैसे किसी विभाग से सूचना मांगी जाय -

किसी भी विभाग से हमें जो सूचनाएं चाहिए या दस्तावेज चाहिए उनका हम सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत निरीक्षण कर सकते है और अपनी जरुरत के दस्तावेजों की फोटो प्रतियाँहासिल कर सकते है|

आरटीआई आवेदन के साथ 10 रु. बतौर फीस भेजनी होती है जिसे हम संबंधित विभाग में रोकड़ जमा करा सकते है या फिर पोस्ट ऑफिस से 10 रूपये मूल्य का पोस्टल आर्डर लेकर साथ भेज सकते है|

जिन दस्तावेजों की हमें फोटो प्रतियाँ चाहिए, उन प्रतियाँ का विभाग 2 रूपये बतौर फ़ीस प्रति फोटो प्रति वसूल करेगा जो हम जमा करा कर ले सकते है|


सूचना पाने के लिए आवेदन का कोई फॉर्म या फोर्मेट तय नहीं है आप सादे कागज पर अपनी भाषा में सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लिखकर कोई भी सूचना किसी भी सरकारी विभाग से प्राप्त कर सकते है या सरकारी कार्यालय के काम का निरीक्षण कर सकते है| आरटीआई कैसे लिखे यह निम्न उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है -
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लोक सूचना अधिकारी                                                 दिनांक :
उप-निदेशक, कृषि विस्तार,
जिले का नाम (राज)- पिन -
विषय : सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत सूचना प्राप्त करने हेतु
महोदय,
सूचना के अधिकार कानून के तहत आपके कार्यालय से सम्बंधित निम्न दस्तावेजों का निरिक्षण करना चाहता हूँ
1-      आपके कार्यालय का नवंबर 2014 महीने का भौतिक व वित्तीय मासिक प्रगति प्रतिवेदन (M.P.R)
2-      उप-निदेशक द्वारा नवंबर 2014 महीने में किये गए दौरा का प्रतिवेदन (Visit Report)
3-      आपके कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (RTI) के तहत प्राप्त आवेदन और आपके कार्यालय द्वारा उन पर की गई कार्यवाही के विवरण से संबंधित दस्तावेज|
निरीक्षण के पश्चात् मैं आवश्यक दस्तावेज की प्रतियाँ नियमानुसार शुल्क जमा करवाकर प्राप्त कर लूँगा |
मुझे आपके कार्यालय के उस जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी का पदनाम व फोन न. बता दें जिनके पास जाकर मैं दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकता हूँ |
भवदीय 
नाम 
पता 


सलंग्न – पोस्टल आर्डर नंबर                      मूल्य 10/-रूपये
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उपरोक्त उदाहरण के अनुसार किसी भी विभाग को इस तरह लिखकर आप डाक द्वारा संबंधित विभाग के पते पर भेज सकते है| यदि आपके पास के पोस्ट ऑफिस कार्यालय का पोस्ट मास्टर

लोक सूचना अधिकारी के तौर पर नियुक्त है तो आप कहीं भी किसी विभाग का आवेदन उसे दे सकते है, उसकी जिम्मेदारीहैकिवहआपकाआवेदनसंबंधितअधिकारीतकपहुंचाएगा|

कई बार हमें पता नहीं होता कि हम किस विभाग में किस तरह की जानकारी मांगे, यदि आपको किसी भी विभाग के क्रियाकलापों का पता नहीं है तो आप उपरोक्त उदाहरण आवेदन में मांगी गई तीन सूचनाएं हर विभाग से मांग सकते है! आपको जानकार ताज्जुब होगा कि हमारे द्वारा कर के धन से सरकारी अधिकारी दौरों के नाम पर मौज करते है अत: उनके दौरों का विवरण मांगिये, उनकी गाड़ी की लोग बुक मांगिये, किसी भी सरकारी कार्यालय की मासिक प्रगति रिपोर्ट मांगिये, आप द्वारा मात्र ये मामूली सूचनाएं मांगते रहने व इनका निरीक्षण करते रहने के बाद यह पक्का है कि आपके क्षेत्र के अधिकारी कार्य के प्रति जिम्मेदार होंगे व भ्रष्टाचार में गिरावट अवश्य आएगी !!

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Dec 5, 2014

सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करें

केंद्र व राज्य सरकारें जनहित में विभिन्न योजनाएं चलाती है, पर सरकारी दफ्तरों में अधिकारीयों व बाबुओं की निष्क्रियता, लापरवाही, कामचोरी के चलते इनमें से बहुत सी योजनाएं फाइलों में दबकर पड़ी रह जाती है, या फिर अधिकारी व कर्मचारी मिलीभगत कर कागजों में उन योजनाओं को पूरी कर बजट डकार जाते है| कई जनहित के कार्यों के ठेकों में भ्रष्ट नेता, अधिकारी, ठेकेदार मिलकर जमकर सरकारी माल उड़ाते है और जनता को पता तक नहीं चलता|

लेकिन जब से सूचना का अधिकार कानून बना है| जागरूक नागरिक इस कानून द्वारा मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन योजनाओं की जानकारी हासिल करते है और योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों का निरीक्षण कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम कर देश व समाज हित में अपना योगदान दे रहे है|

राजस्थान में “अभिनव राजस्थान” के नाम से एक छोटा सा समूह बनाकर कुछ जागरूक नागरिकों ने सूचना पाने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपने जिला प्रशासन के कार्यों पर नजर रखना शुरू किया| परिणाम हुआ कि जो विद्यालय खुलने के 2007 में आदेश में हुए थे, वो इस समूह द्वारा जबाब तलब करने के बाद इस वर्ष खुले| वर्षों से कृषि सुधार के लिए कृषकों की सहायता के लिए बजट आता था, पर वह कभी खर्च ही नहीं हुआ| लेकिन जब इस समूह ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी ली और किसानों को लेकर गए तो एक ही दिन में अधिकारीयों ने 100 कृषकों को 15 लाख की सहायता राशी बाँट दी| वन्य जीवों की सुरक्षा के बजट नहीं था, जब सूचना के अधिकार का इस्तेमाल किया तो बजट उपलब्ध हो गया|

एक व्यक्ति ने किसी बैंक से 15 लाख का आवास ऋण लिया था| जिस पर बैंक ने 8 प्रतिशत ब्याज की जगह 14 प्रतिशत वसूल करना शुरू कर दिया| उक्त व्यक्ति द्वारा बहुत सी मिन्नतें करने के बाद भी बैंक ने नहीं सुनी| जब उसी व्यक्ति ने सूचना के अधिकार द्वारा बैंक के चेयरमैन के दौरों, खर्च के साथ विभिन्न जानकारियां मांगी तब चेयरमैन ने नाराजगी का कारण पुछवाया और तुरंत 5 प्रतिशत ब्याज कम करते हुए उस व्यक्ति से समझौता कर लिया| यह सूचना के अधिकार का ही कमाल है कि कभी आरटीआई (सूचना का अधिकार) कार्यकर्त्ता पर ढेरों फर्जी मुकदमें दायर करवाने वाला राजस्थान का एक आईपीएस पुलिस अधिकारी आज कानून के शिकंजे में परिवार सहित फंसा है|

राजस्थान के झुंझनु जिले में 45 करोड़ की सड़क पर लागत के बदले 220 करोड़ रूपये टोल टैक्स के रूप में वसूलने वाले दो विधयाकों ने टोल टेक्स वसूलने की समयावधि पूरी होने पर उसी सड़क के किनारे एक करोड़ रूपये की नाली के निर्माण का बहाना लेकर फिर अगले साढ़े वर्ष के लिए टोल टेक्स वसूली का ठेका हासिल कर लिया| लेकिन उनकी इस कारस्तानी की जानकारी सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हुए लेकर, यशवर्धन सिंह शेखावत ने उसकी जाँच करवा कर मुकदमा दायर करवा दिया| यह यशवर्धन सिंह की सक्रियता का ही कमाल है कि आज उक्त सड़क पर टोल वसूली की रकम मुकदमें का निपटारा होने तक न्यायालय के आदेश से सरकारी खाते में जमा हो रही है|

इस तरह के बहुत से उदाहरण गिनाये जा सकते है जो वर्षों से अटके काम सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने के बाद अधिकारी हरकत में आये और वो काम पुरे हुए| कई मामलों में भ्रष्टाचारियों के गठबंधन द्वारा किया गया भ्रष्टाचार उजागर हुआ और उन पर कार्यवाही हुई| इस तरह सूचना के अधिकार के इस्तेमाल से मिले परिणामों से प्रेरित होकर “अभिनव राजस्थान” समूह में जोश का संचार हुआ और समूह के संस्थापक डॉ. अशोक चौधरी ने सोशियल मीडिया के उपयोग द्वारा समूह को विस्तार देने की रणनीति बनाई और उनकी यह रणनीति काम आई| सोशियल मीडिया पर चलाये जागरूकता अभियान व समूह द्वारा आव्हान करने पर राजस्थान के कोने कोने से एक हजार से ज्यादा लोग 30 नवंबर को जयपुर के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में एकत्र हुए और प्रण लिया कि अब वे अपने अपने जिले, तहसील, पंचायत में चलने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं पर सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगवाएंगे| फाइलों में दबी पड़ी योजनाओं को शुरू करवाएंगे और इस तरह सरकारी तन्त्र पर निगरानी रखकर राजस्थान को अभिनव राजस्थान बनायेंगे|

आप भी जहाँ रहते है उस राज्य को अभिनव बनाने के लिए, अपने आस-पास विकास की गंगा बहाने के लिए, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए, सरकारी काम में पारदर्शिता लाने के लिए, अपने मन में यह अहसास करने के लिए कि इस लोकतंत्र में चपरासी से लेकर राष्ट्रपति तक लोक सेवक है और मैं इस लोकतंत्र का लोक हूँ और मैं लोक सेवकों मतलब अपने नौकरों पर इस अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इनके कार्य पर निगरानी रख रहा हूँ के लिए सूचना के अधिकार के तहत विभिन्न सरकारी विभागों से सूचनाएं मांगे|

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ - आपके सक्रीय होते ही आपके क्षेत्र में भ्रष्टाचार की दर में कमी आनी शुरू हो जायेगी|
तो आईये और हम अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारत को विकसित भारत, भ्रष्टाचार मुक्त भारत, अभिनव भारत बनाने के अपने कर्तव्य पालन की दिशा में कदम बढायें!


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