राजस्थानी प्रेम कहानी : ढोला मारू

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है .

जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटरसाईकिल से !

मै यहाँ एक ऐसे स्थान की चर्चा करने जा रहा हूँ जहाँ इन्सान की मौत के बाद उसकी पूजा के साथ ही साथ उसकी बुलेट मोटर साईकिल की भी पूजा होती है.

भूतों का महल : भानगढ़ का सच

राजस्थान के भानगढ़ का उजड़ा किला व नगर भूतों का डरावना किले के नाम से देश विदेश में चर्चित है.

"उबुन्टू लिनक्स" इसका नाम तो बाली होना चाहिए था

उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी.

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी शेखावत

आज भी बलजी को नींद नहीं आ रही थी वे आधी रात तक इन्ही फिरंगियों व राजस्थान के सेठ साहूकारों द्वारा गरीबों से सूद वसूली पर सोचते हुए चिंतित थे तभी उन्हें अपने छोटे भाई भूरजी की आवाज सुनाई दी |.

Apr 24, 2015

सरकारी लीपापोती का एक नमूना

फरवरी के प्रथम सप्ताह में ही किसी कार्यवश पंचायत समिति, दांतारामगढ जाना हुआ. पंचायत समिति के दफ्तर में चर्चाएँ चल रही थी कि विकास अधिकारी के कार्यालय की छत टूट गई है और गनीमत है अधिकारी उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे, यदि वे वहां होते तो उनकी जान जा सकती थी. मैंने भी उस कमरे को देखा, अपने मोबाइल से फोटो भी लिए, विकास अधिकारी से उस निर्माण की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही का अनुरोध भी किया.

कुछ समय बाद लगा कि अधिकारी ने जो जांच कराई है, उसे देखना तो चाहिए सो जाँच रिपोर्ट की प्रति पाने हेतु आरटीआई आवेदन भेज दिया. जिसके जबाब में मुझे जो प्रत्युतर मिला यानी जो दस बारह लाइंस की जांच रिपोर्ट मिली वह देखने लायक थी. जिसमें न निर्माण एजेंसी को दोषी ठहराया गया, ना उस अभियंता को दोषी ठहराया गया जिसने उक्त निर्माण की जाँच कर ठेकेदार को भुगतान देने का रास्ता साफ़ कर दिया था.

कुल मिलाकर जांच रिपोर्ट में किसी पर कोई आरोप नहीं, कोई दोषी नहीं. दोष निकाला गया तो सिर्फ उस इमारत पर ही कि वह पुरानी थी आदि आदि. इस तरह एक घटिया निर्माण के बाद हुए हादसे की जांच के बहाने लीपापोती कर दी गई| इस तरह के लीपापोती वाले शानदार उदाहरण को आप भी रिपोर्ट निम्न चित्र में देख सकते है.








Panchayat samiti, dantaramgarh, bdo office danta ramgarh, vikas adhikari, danta ramgarh

Apr 23, 2015

एक किसान की आत्महत्या के बाद ...................!!

कल दिल्ली के जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की किसान रैली के दौरान के राजस्थान के दौसा जिले के एक किसान गजेन्द्र सिंह द्वारा पेड़ से लटककर आत्महत्या करने के बाद टीवी चैनल्स, अख़बारों, सोशियल मीडिया में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. सभी राजनैतिक दल इस आत्महत्या को लेकर दुसरे दल को घेरने के चक्कर में उलटे सीधे बयान देकर, एक किसान के बलिदान की मजाक उड़ाए हुए है.

यही नहीं सोशियल मीडिया पर अपनी अपनी राजनैतिक पार्टी के भक्तगण अपने अपने हिसाब से मृतक किसान पर टिप्पणियाँ लिखकर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे है. कोई मृतक को शहीद का दर्जा दे रहा है तो कोई उसके कृत्य को कायराना साबित करने पर तुला है. वहीं कुछ लोग इसे सोचे समझे एक ड्रामा का दुर्घटना में बदलना साबित करने में लगे. कुल मिलाकर सोशियल मीडिया पर लोग अपना अपना दिमाग लगाकर साबित करना चाहते है कि जो वे सोच रहे है वही सही है. पर मृतक की भावनाओं को कोई भी समझने की कोशिश नहीं कर रहा. एक बारगी मान भी लिया जाय कि मृतक किसान ध्यान आकर्षित करने के लिए कोई नाटक कर रहा था, पर उसके पीछे भी उसकी भावनाएं देखें कि इतना खतरनाक नाटक जिसमें उसकी जान तक चली गई, कर तो किसानों के हित में रहा था. लेकिन नहीं जी, कुछ लोगों को उसका किसान होना भी इतना अखर गया कि वे सोशियल मीडिया पर उसके द्वारा पूर्व में पोस्ट की गई फोटो, उसके विधानसभा चुनाव लड़ने की ख़बरें, उसके द्वारा पगड़ियां बांधने की बातें तलाश कर भ्रम फैला रहे है कि वह किसान था ही नहीं. और ये सब कर रहे है एक आध राजनीतिक दलों के अंध भक्तगण और और एक जाति विशेष के लोग, जिन्हें किसी राजपूत द्वारा अपने आपको किसान कहना ही अखरता है. क्योंकि वे सोचते है कि किसान तो सिर्फ वे ही हो सकते है, कोई राजपूत जिसे उन्होंने सामंत, शोषक, अत्याचारी,क्रूर घोषित कर रखा है वह किसान शब्द का प्रयोग कैसे कर सकता है. उन्हें इस बात से चीड़ है कि कोई राजपूत किसान के नाम पर अपना बलिदान देने के बावजूद शहीद का दर्जा कैसे पास सकता है? क्योंकि किसान शब्द पर तो अपनी जाति का पेटेंट समझते है.

और इसी जलन का नतीजा है कि कई लोग सोशियल साइट्स पर ऐसी टिप्पणियाँ लिख रहे है जो उसके किसान होने पर भ्रम पैदा करे. अंग्रेजों के जमाने का एक पुलिस अधिकारी किसान केसरी हो सकता है, जीवन भर राजनीति करने वाले, कई बार मंत्री बनने वाले, कॉर्पोरेट घराने चलाने वाले, शिक्षा के कई संस्थान चलाने वाले, शराब की ठेकेदारी करने वाले किसान व किसान नेता हो सकते है!

पर दो-चार बीघा जमीन पर खेती करने वाले किसी राजपूत किसान ने यदि कभी विधानसभा चुनाव लड़ लिया, साफे बांधने जैसा कोई सिजनेबल काम कर लिया, किसी की गाड़ी के साथ खड़े होकर फोटो खिंचवा ली तो वो किसान नहीं है !

किसान आन्दोलन में जेल में बना मुफ्त का ज्यादा हलवा खा कर कोई मर गया, शराब का अवैध धंधा करने वाला, कोई बदमाश किसी एनकाउन्टर में मर गया तो वो शहीद है और कल जंतर-मंतर पर आत्महत्या करने वाला किसान ड्रामा कर रहा था. ड्रामे में मर गया. क्योंकि वो राजपूत था और ऐसे तत्वों की नजर में कोई भी राजपूत भले वो कृषि पर आश्रित हो, कितना भी गरीब क्यों ना हो, वो सामंत है, शोषक है, क्रूर ही हो सकता है, किसान नहीं| क्योंकि किसान शब्द पर तो उनका जातीय पेटेंट है| अब इन बावली बूचो को कौन समझाएं कि किसान गजेन्द्र सिंह यदि ड्रामा भी कर रहा था, तो इतना खतरनाक ड्रामा जिसमें जान चली गई वो भी तो किसानों के हक में कर रहा था.



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Apr 21, 2015

बीघा दो बीघा जमीन होती तब पता चलता पटवारी क्या होता है ?

गाँव में तैनात पटवारियों के नखरे, मोटी रकम लेकर काम करना आदि अदि देख ताऊ ने सोचा सब धंधे कर लिए फिर भी लखपति तो क्या हजारपति भी नहीं बन पाए| अत: क्यों ना किसी तरह जुगाड़ लगाकर पटवारी बन धन कमाया जाय|

और ताऊ ने किसी तरह पटवारी भर्ती परीक्षा (Patwari Recruitment Test)पास कर पटवारी की नौकरी पर नियुक्ति (Patwari Bharti) पा ली| जिस गांव में ताऊ की नियुक्ति थी, उस गांव वाले ताऊ पटवारी के आगे हाथ जोड़े खड़े रहते थे| जिनका पटवारी से अब तक कोई काम नहीं पड़ा पर बीघा दो बीघा भूमि का मालिक भी ताऊ पटवारी को कभी नाराज करने की हिमाकत नहीं करता, पता नहीं कब पटवारी से काम पड़ जाये| इस तरह पटवारी पद पर नियुक्ति मिलते ही ताऊ की मौज ही मौज थी|

एक दिन ताऊ गांव के रास्ते से गुजरते हुए पटवार कार्यालय जा रहा था, कि एक कुत्ते ने ताऊ की भोंकना शुरू कर दिया| ताऊ को लगा कि इससे बचना ही ठीक है, सो ताऊ एक दूकान के आगे बने चबूतरे पर चढ़ गया और सोचने लगा कि कुत्ता जब चला जायेगा तब आगे का रास्ता तय करेगा| पर कुत्ता भी ताऊ से कम ना था शायद वह कुत्तों में पक्का ताऊ था| ताऊ जब भी चबूतरे से उतरने की कोशिश करे, कुत्ता उसे काटने को दौड़े और भौंके भी| ऐसा क्रम कई देर तक चलता रहा|

आखिर ताऊ से रहा नहीं गया और वह कुत्ते को बोला- अबे कुत्ते ! तेरे पास बीघा दो बीघा भी जमीन होती तब तुझे पता चलता कि पटवारी क्या होता है?


Patwari bharti 2015-2016
Patwari Recruitment 2015-2016

Apr 3, 2015

फरीदाबाद : 26 अप्रेल को राज्यपाल रखेंगे क्षत्रिय फेडरेशन भवन की नींव

हरियाणा के महामहिम राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी 26 अप्रेल को अखिल भारतीय क्षत्रिय फेडरेशन के फरीदाबाद में बनने वाले भवन की नींव रखेंगे. इस अवसर केन्द्रीय मंत्री अशोक गणपति राजू, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सहित केन्द्रीय मंत्री कृष्णपाल गुजर, विधायक विपुल गोयल, विधायक मूलचंद शर्मा, विधायक सीमा त्रिखा व गणमान्य समाज बंधूओं के उपस्थित होने की सम्भावना है. कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री के आने की भी सम्भावना है|

क्षत्रिय फेडरेशन के उपाध्यक्ष पूर्व आई.ए.एस. हुकम सिंह राणा के अनुसार क्षत्रिय युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं यथा आई.ए.एस,आई.पी.एस., जुडिसियल, एन.डी.ए, बैंक अधिकारी आदि नौकरियों की तैयारी के लिए एक कोचिंग सेंटर हेतु 6 करोड़ की लागत से भवन बनाया जायेगा. भवन के लिए हरियाणा सरकार से 2800 वर्ग गज का भूखण्ड पहले ही आवंटित किया जा चूका है. 2 अप्रेल को राणा के आवास पर इसी संबंध में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय कई प्रतिष्ठित क्षत्रिय बंधुओं में भाग लिया. बैठक में 26 अप्रेल के कार्यक्रम की रुपरेखा सहित भवन निर्माण के लिए फंड जुटाने पर चर्चा हुई. इसी बैठक में शामिल लगभग 18 क्षत्रिय बंधुओं यथा- राजवीर सिंह अजरौंदा गांव, ऋषिपाल चौहान जीवा आयुर्वेद समूह, अशोक सिंह, भूपेन्द्र सिंह यमुनानगर, दीपेन्द्र सिंह एडवोकेट चंडीगढ़, बलजीत सिंह, स्पटर सिंह, सी.पी.सिंह नरावली, कँवर पाल सिंह पुराना फरीदाबाद, हेम सिंह राणा, जगत सिंह भूपानी, बाल किशन सिंह चौहान, राकेश कुमार सिंह अजरौंदा, ठाकुर राजाराम सिंह, सुरेश सिंह परमार, रमेशपाल सिंह डीएसपी, धर्मपाल सिंह सरपंच असावटी, पद्म श्री डा. ब्रह्मदत्त सिंह भाटी ने भवन निर्माण हेतु एक एक लाख रूपये की सहायता देने का वादा किया जिनमें से कई बंधुओं ने हाथों हाथ फेडरेशन उपाध्यक्ष राणा को चैक भी सौंपे|

बैठक संबोधित करते हुए पद्म श्री डा.ब्रह्मदत्त सिंह भाटी ने इस योजना की सराहना करते इसे समाज के लिए भागीरथी प्रयास बताया साथ ही खुद की और से एक लाख की सहायता देने के साथ समाज के अन्य बंधुओं से भी भवन निर्माण हेतु आर्थिक सहायता दिलवाने का वादा किया. इस असवर पर हरियाणा के प्रख्यात समाज सेवी प्रेमनारायण शास्त्री ने भी अपने विचार रखे और इस भागरथी प्रयास को सफल बनाने हेतु समाज बंधुओं को कर्मठता से जुड़ने का आव्हान किया|

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