हठीलो राजस्थान-19

बिण ढाला बांको लड़े, सुणी ज घर-घर वाह | सिर भेज्यौ धण साथ में, निरखण हाथां नांह ||९७|| युद्ध में वीर बिना ढाल के ही लड़ रहा है | जिसकी घ...
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हठीलो राजस्थान-18

सूरापण सु-नसों सकड़, ढील न लागै ढिंग्ग | पीवै नीं वो डगमगै , पीधां बणे अडिग्ग ||११५|| शौर्य का नशा भी बड़ा प्रबल है | जिसके चढ़ने पर व्यक्ति ...
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हठीलो राजस्थान-17

गूद गटककै गोधणयां, हड्ड चटककै स्याल | बूथ बटककै बैरियाँ, मंडै रण मतवाल ||९४|| जब रण के मतवाले शूरवीर क्रुद्ध होकर युद्ध करते है,तो उनके द्...
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