2/01/2012 05:55:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
रामा-रामा कैसा ये गजब हो गया,
आजकल का रंग -ढंग कैसा अजब हो गया|
जो वस्त्र होता था नीचा वो ऊँचा ,
और जो होना था ऊँचा वो नीचा हो गया|
...
जब तक "जोकी" लिखा न दिखे ,इनको आता चैन नहीं
अगर करे कोई टोका-टोकी होता इनको सहन नहीं
कन्यायें भी त्याग रही पहनावे के सरे संस्कार
टॉप हो रहा ऊँचा -ऊँचा,भूल गयी सूट-सलवार|
अब हम भी क्या कहें,कई माँ-बाप ही देते हैं उनका साथ,
फैशन करने में वो भी आगे हैं उनसे दो हाथ|
माँ ये सोचे,समझें सब उसको बेटी की बहन,
बाप को भी बेटी की सहेली का अंकल कहना नहीं सहन|
हे मेरे मालिक तुमने "अमित" के साथ ये क्या गजब किया
क्या मैं इसके लायक था, जो मुझे ये सब देखने भेज दिया|
मेरे भाइयो और बहनों न भूलो अपना सनातन इतिहास
आधुनिक बनो पर ऐसे कि कोई उड़ा न सके आपका उपहास||
''जय श्री राम''
AMIT KUMAR SINGH
1/31/2012 04:44:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
"गेट्स-बी" का हेयर जैल, और "जिलेट" का हो शेव जैल
"फा" का हो आफ्टर शेव और "रे -बैन" का हो गोगल|
"जोकी" का होना चाहिए अंडरवियर और बनियान
"नाईक" के हों जूते,और मोज़े भी उसी के श्रीमान
"लेविस" की हो जींस, और "पीटर इंग्लॅण्ड" की कमीज
"हाय बड्डी-वाज़ -अप", वाली होनी चाहिए आपमें तमीज|
"मेक-डोनाल्ड" वाला पिज्जा,और हो "हेवर्ड्स" की बियर
लाज हया शर्म हो न किसी की,बस बोलें "जस्ट-चीयर"
लड़का हो या हो लड़की,ना मानें किसी का भी फियर
माँ-बाप को भी बुलाएँ कहकर "यार" कम ऑन डियर|
अगर आप कर सकते हो ये सब मेरी सरकार
तभी माना जाएगा आपको "आधुनिक" मेरे यार
ना करो किसी से शर्म, ना सीखो कोई भी संस्कार
बस करले "अमित" इन सब "ब्रांडेड" चीजों से प्यार|
यही रह गयी है बस आधुनिकता की पहचान
ऐसे ही बन जाएगा "मेरा भारत महान"
जय जय हो मेरे भारत के नौजवान||
1/22/2012 10:51:00 PM
KESAR KYARI........usha rathore...
कुछ जरुरी काम हैं , बहुत जरुरी काम हैं
ना जाने कितने समारोह छोड़ दिए थे मैंने
यही कह कहकर कि काम है
बहनों की शादी हो या भाइयो की सगाई
बस एक दिन पहले ही पहुंच पाती हूँ
कैसे पहुँचती काम ही जो इतना होता हैं
कई बार मन करता हैं , सखियों से घंटो बतियाऊ
पर नहीं हो पाता ...मन मारना पड़ता है
क्योंकि काम बहुत होता हैं
याद भी नहीं न जाने कितनी गर्मियां निकल गई
और न जाने कितने इतवार पर मुझे छुट्टी नहीं मिली
कैसे मिलती ? काम ही जो इतना होता हैं
अब कैसे समझाऊ की कितना काम होता हैं
काम ही कर रही थी ना मैं
जब उस घनघनाती घंटी ने बताया कि
एक दुर्घटना ने मुझ से सुहागन होने का हक छीन लिया हैं
सफ़ेद चादर में लिपटे अपने पिता को देख सहम ना जाये
बच्चो को खुद से लिपेटे खड़ी थी मैं
जाने अनजाने कुछ चहेरो की भीड़ में से तभी
किसी ने फुसफुसाया
क्या करेगी बेचारी अब ,कैसे चलेगा इसका संसार
''कुछ काम भी तो नहीं करती !''