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Feb 14, 2009

पगड़ी को भैंस खा गई

पगड़ी नै भैंस खायगी = पगड़ी को भैंस खा गई |

सन्दर्भ कथा :- आज सुबह ताऊ के शनिवारीय खूंटे पर आपने पढ़ा कि कैसे ताऊ ने एक ईमानदार जज से भी हारने वाला केस जीत लिया आज मै ताऊ के एक ऐसे ही मुकदमे का जिक्र कर रहा हूँ जिसकी सुनवाई करने वाली कचहरी का हाकिम बेईमान था बात-बात में रिश्वत लेता था और ताऊ का मुकदमा साधन संपन और तेज तर्रार बनिए के साथ चल रहा था | बनिया हाकिम साहब की न्यायप्रियता से परिचित था अतः बनिए ने हाकिम साहब के घर जाकर एक बहुत ही बढ़िया पगड़ी उपहार में दे दी | लेकिन कहते है न कि हवा के भी कान होते है और फ़िर ताऊ तो ठहरा ताऊ ! कही से ताऊ को इस बात का पता चल गया और ताऊ ने अमावस्या की रात को हाकिम साहब के घर एक भैंस हाकिम साहब के बच्चों को दूध पिने के लिए पहुँचा दी अमावस्या की रात को इसलिए क्योकि अमावस्या की रात काली होती है और भैंस का रंग भी काला सो किसी को पता तक नही चलेगा | चूँकि भैंस का मूल्य भी पगड़ी से ज्यादा होता है और भैंस का दूध पुरे परिवार के लिए स्वास्थ्य वर्धक भी | और बनिए की पगड़ी तो सिर्फ़ हाकिम साहब का सिर ही ढक सकती थी | भैंस का दूध मिलने से हाकिम साहब का पुरा परिवार भी ताऊ के पक्ष में हो गया | जब फैसले की बारी आई तब हाकिम ने ताऊ के पक्ष में फैसला सुनाया जिसे सुनकर बनिया बौखला गया और अपनी पगड़ी हाथ में लेकर इशारे से हाकिम को समझाने की कोशिश करने को कहने लगा , हुजुर मेरी पगड़ी की तो लाज रखनी थी | हाकिम भी कोई कम समझदार नही था और हाजिर जबाब भी था सो हाकिम ने बनिए को तुंरत जबाब दिया - सेठजी थारी पगड़ी तो भैंस चरगी | बनिए क्या करता सो सहमते हाथो से अपनी पगड़ी सिर पर रखी और ताऊ के आगे से टका-सा मुंह लेकर चला गया |

9 comments:

पगड़ी नै भैंस खायगी = पगड़ी को भैंस खा गई |
" हा हा हा हा बहुत मजेदार किस्सा"

Regards

ओह एक नुक्शा -भैस के पीछे की और देखते रहिये जी गोबर के साथ पगडी भी निकलेगी भाई थोड़ा सबर करना पडेगा. आपकी पोस्ट पढ़कर आनंद भयो जी

कैसे मेरी पगड़ी खा गयी,
लाला जी को आया तैंश।
अंधेरी नगरी में आ गयी,
मोटी , तगड़ी भैंस।
दूध बिन छाई उदासी है।
ये ताऊ सत्यानाशी है।।

हाँ भाई! ऐसे थोडे कहा गया है - अकल बडी कि भैंस. ज़ाहिर है, भैंस ही बडी है.

मजेदार रहा. आभार.

भैंस और वो भी ताऊ कि,ये किस्सा सच ही होगा, कुछ भी खा सकती है ।

बहुत बढिया किस्सा. आखिर शेर को भी कभी कभी सवा शेर मिल ही जाता है. :)

रामराम.

ताऊ तो गोटू के ही बस का है...

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