Nov 4, 2011

भक्तों की मनसा पूर्ण करती - मनसा माता

उदयपुर (शेखावाटी) तहसील मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर खोह- गुड़ा ग्राम के पहाड़ो में मनसा माता पीठ स्थित है| मनसा देवी का मंदिर जीवन के तामझाम व कोलाहल से दूर प्रकृति माँ की गोद में “खोह“ से लगभग 5 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में गगन चुंबी पर्वत श्रंखलाओं की गोद में विराजमान है|

उदयपुर वाटी क्षेत्र में प्रसिद्ध तीर्थस्थल लोहार्गल शाकम्भरी माता मंदिर और माँ मनसादेवी प्रमुख दर्शनीय स्थल व आस्था के केन्द्र है, उल्लेखनीय है की लोहार्गल एवं शाकम्भरी किसी परिचय का मोहताज नहीं है, सावन -भादों मास में यहाँ के पर्वत पूर्ण रूप से श्रंगारित रहते है या यूँ कहूँ कि हरियाली से आच्छादित किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं लगते तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी| यहाँ के प्राकृतिक वातावरण में आने वाले व्यक्ति प्रकृति माँ के सामीप्य व् चित की शांति का अनुभव करतें है| सावन मास में कावड़िये यहाँ के कुण्डों से पवित्र जल ले जाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करतें है|


टीबाबसई के "बाबा रामेसर दास जी महाराज" ने यहाँ वर्षों साधना की है, पहले वो अपना आश्रम यहीं बनाना चाहते थे, फिर उन्होंने टीबा बसई में अपना आश्रम बनाया| कहतें है यहाँ पर स्थाई रूप से जो भी रहने की कोशिश करता है,उसे कुछ ऐसे संकेत मिल जाते है,जिससे कुछ दिनों बाद इस पवित्र स्थान को स्वतः ही छोड़ना पड़ता है, क्योंकि जिस अभीष्ट की प्राप्ति के लिए साधक यंहा पर आता है उसकी प्राप्ति शीघ्र ही उसे हो जाती है,तो भला वह क्यों रुकेगा? मंदिर के गर्भ गृह के पास "लान्कड़ बाबा"(भेरू मंदिर)स्थित है| जिनके दर्शन के बिना माँ के दर्शन का कोई फलाशिर्वाद प्राप्त नहीं हो सकता |अत: यहाँ आने वाले सभी श्रद्धालु बाबा लान्कड़ के मंदिर में भी अनिवार्य रूप से शीश नवाते है|

सरल व् घुमावदार रहस्यमयी चढ़ाई पर चढ़ते हुए यात्री की उत्सुकता बढती जाती है| एवं थकान का अहसास भी नहीं होता है| दो पहाड़ों के बीच में एक दर्रानुमा मार्ग से माँ 'मनसा माई की जय " के जयकारे लगाते हुए हुए भक्त माँ के दरबार में शीश नवाते है, चारों तरफ हरियाली से आच्छादित पेड़ व् सकरे दर्रे में से कलकल बहता शीतल जल का झरना बरबस ही आने वालों का मन मोह लेता है, विगत सालों में माँ के भवन निर्माण एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास हुआ है, यहाँ पर माँ के प्रसाद बनाने का पूरा साजो सामान उपलब्ध है, लोग अपनी मांगी मुराद पूरी होने पर यहाँ आकर 'सवामनी"( दाल-चूरमा ) का भोग लगाते है, प्राकृतिक रूप से बहने वाले शीतल जल के झरने द्वारा बनाया हुआ परसाद सुपाच्य व् सवादिष्ट बनता है|

माँ के प्राकट्य के बारे में बताते है की लगभग ५०० साल पूर्व से यहाँ पर लोगों का आगमन शुरू हुआ, पूर्व में यहाँ पहाड़ों में गडरिये पशुओं को चराते थे| ये क्षेत्र जंगल की लकड़ी व् पशुओं के चारे का उत्तम चारागाह था| कहते है कि एक दिन एक गडरिये के सामने माँ साक्षात् प्रकट होकर बोली “में यहाँ पर प्रकट होउंगी, इसलिए तुम डरना मत”! भीषण गर्जना के साथ पहाड़ों को चिर कर माँ का स्वरूप निकलने लगा| गडरिया डर के मारे चिल्लाने लग गया,जिसके फलस्वरूप मनसा का आकर छोटा रह गया, पहाड़ी की कंदराओं के बीच में अंगुली के आकर में माँ की ममतामयी मूर्ति है| इतना भीषण जंगल होते हुए भी आज तक किसी भी भक्त के साथ किसी अप्रिये घटना का घटित नहीं होना माता का चमत्कार ही है| शेखावाटी के प्रवासी लक्ष्मी पुत्र अपने बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए जब भी अपने पैत्रक गाँव आते है , तो माँ के दरबार में बच्चों व् नवविवाहित जोड़ों की धोक लगाते है,"मनसा सेवा समिति" के नाम से संस्था बनी हुई जिसमें इनका योगदान है| “सेवा समिति” यहाँ की व्यवस्थाओं का संचालन करती है |

श्री सतपाल सिंह शेखावत पूर्व सरपंच गुड़ा ने अथक परिश्रम करके यहाँ के दुर्गम रास्तों,कुंडो का निर्माण,जल व्यवस्था आदि को पूर्णतया समर्पित भाव से स्वयं उपस्तिथ रहकर पूर्ण करवाया है|उनके इस कार्य की जितनी सराहना की जाय कम है| यहाँ पर पानी के समुचित प्रबंध के लिए दो विशाल बाँधों का निर्माण भी हुआ है,जिससे साल भर पीने के पानी के रूप में काम लिया जाता है,यहाँ के पहाड़ों में औषधियों के भंडार है, जड़ी बूटियों के जानकर वैध रोगों के निदान में इनका उपयोग करतें है,
माँ मनसा के दरबार में आने का सबसे उपयुक्त समय सावन-भादवा है,यंहा पर पहुँचने के लिए सीधी उदयपुरवाटी व् गुढा से निजी बस सेवा उपलब्ध है| उदयपुरवाटी राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में सीकर,नीमकाथाना,कोटपुतली सड़क पर स्थित है|

मंदिर का विगंहम दृश्य


पहाड़ों के ऊपर से देखने पर मंदिर का दृश्य







लेखक :गजेन्द्र सिंह शेखावत

18 comments:

  1. यात्रा का सुन्दर वर्णन

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  2. यहाँ जा चुकी हूँ...... सच में पहाड़ों में स्थित बहुत सुंदर स्थल है ....

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  3. बढिया जानकारी।
    अच्‍छा यात्रा वृतांत।
    आभार.....

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  4. अच्छी जानकारी | ज्ञानदर्पण का अलेक्सा रैंक "1711839" है |
    टिप्स हिंदी में

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  5. @ वनीत नागपाल जी

    आज से एक साल पहले जब ज्ञान दर्पण पर पाठक संख्या आज से आधी थी तब अलेक्सा रैंक दो लाख के अंदर था अब जबकि इस वक्त उस वक्त की तुलना पाठक संख्या और पृष्ठ व्यू दुगना है तब भी अलेक्सा रैंक में ज्ञान दर्पण आगे बढ़ने के बजाय पिछड़ता जा रहा है साथ ही जब से पिछड़ने की शुरुआत हुई है अलेक्सा का विजेट भी ज्ञान दर्पण पर शो नहीं हो रहा जबकि कोड लगे हुए है|

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  6. यदि आप को सही लगे तो आप एक बार अलेक्सा कोड को अलेक्सा की साईट से दोबारा से लेकर लगाएं तब यदि फर्क महसूस हो तो इसे लगाएं रखे नहीं तो इस कोड को खत्म कर दीजिए | मैंने तकरीबन २० दिन पहले ही इस कोड का इस्तेमाल किया है | मैंने अलेक्सा का टूलबार इंस्टाल किया हुआ है | अब आप का रैंक "1659606" है | ये प्रतिदिन पेजों की देखी गई संख्या के अधर पर घटता बढ़ता रहता है |

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  7. राजस्थान बचपन में गया था। कुछ भी याद नहीं। जाने की बहुत इच्छा है। देखें कब सौभाग्य होता है। आपकी पोस्ट ने तो तीव्र आकर्षण जगा दिया है।

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  8. मनसा माता का दर्शन करना शांतिदायक लगा।
    शुभकामनाएं।

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  9. भक्तिमयी उपयोगी जानकारी,आभार!

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  10. yeh toh mere village ka hain bahut bahut thnku ji ratan singh ji mere village ke baare mein publish karne ke liye.



    thnks
    anand singh shekhawat.

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  11. रतन सिंह जी में स्क्रीन शाट कैसे लिया गया है से सम्बंधित लेख प्रकाशित कर दिया है | आपकी जानकारी के लिए प्रस्तुत है | एक नए विषय पर लेख लिखने के लिए उत्साहित करने के लिए धन्यवाद |
    टिप्स हिंदी में

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  12. Khammaghani Ratan Singh Sa,
    mujhe achcha laga ki aapne mansa mata ke bare lekh prakashit kiya aur sath me hamare lekh ko bhi link diya. mansa mata humari aaradhya hai. waise to mai pahle bhi jata raha hu darshano ke liye lekin http://www.konstantinfo.com ki puri team se sath jane me kafi achcha laga logo ko mata ke bare me jankari mili aur prakrati ka anutha najara bhi dekhne ko mila. ek baat aur batana chahunga ki mata ke mandir ke piche ek sundar aur vishal dam bhi hai jo pahado ke pani ko store karne ke liye banaya gaya hai.

    Gagan singh shekhawat (jaipur)

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