14
दीपावली के जमागते पर्व पर ज्ञान दर्पण परिवार की और से सभी को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएँ |

दीप अमावस रातड़ी, दीपक लड़ी सुहाय |
जाणे जगमग जगमगै, आभो धरती आय ||

दीपमालिका की अमावस्या की रात्री में दीपों की पंक्तियाँ ऐसी शोभायमान हो रही है ,जैसे तारों से जगमग करता आकाश ही धरती पर उतर आया है |

दालद नासण परब ओ, घर दालद धुल जाय |
दीपक लडियां देखतां , मन-दालद जल जाय ||

दीपावली दारिद्रय नाशक पर्व है , जिससे घर का दारिद्र्य धुल जाता है | दीपकों की लड़ियाँ देखते ही मन की दरिद्रता नष्ट हो जाती है |

पूजै लिछमी सेठ जी, गैणों ढेर सजाय |
लाज लुकाती चीथडां , (बा) जीमण मांगण जाय ||

एक और ढेर सारे गहने सजाकर सेठजी लक्ष्मी की पूजा कर रहे है तो दूसरी और ऐसी स्त्रियाँ भी है जो चिथड़ों से अपनी लाज ढंकती हुई भोजन मांगने जा रही है | कैसी विषमता है |


"दिवाली खूब मनाओ "

Post a Comment

 
Top