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चलता फिरता मोबाइल डी. जे. ( संगीत यंत्र )

एक जमाना था जब बरातों में नाच गाने के लिए एक पेटी बाजा (हारमोनियम) व ढोलक लिए एक मण्डली होती थी जिसमे एक व्यक्ति जनाना कपडे पहन नाचा करता था | इस मण्डली के संगीतकारों को कहीं ढोली , कहीं जांगड़ तो कहीं लंगा या मांगणियार के नामो से जाना जाता था | राजस्थान में राजपूत समाज के शादी समोरोहों में एक जगह जाजम बिछा महफ़िल जम जाया करती थी | महफ़िल के एक किनारे यही ढोली व जांगड़ पेटी बाजा से निकले सुर व ढोलक की तान पर लोक संगीत की शमा बाँध दिया करते थे | मय के प्यालों से छलकती महफ़िल में इनके द्वारा गाये जाने वाले गीत " केशरिया बालम पधारों न म्हारे देश " व "कलाळी भर ल्याए प्यालो, सेज में झूमे मतवालो " श्रोताओं को झुमने को मजबूर कर दिया करते थे | बचपन में ऐसी महफिले व संगीत लगभग हर शादी ब्याहों में देखने सुनने को मिल जाया करते थे लेकिन धीरे -धीरे इनका चलन बंद सा ही हो गया | हाँ आजकल जयपुर ,जोधपुर आदि शहरों में शादी समरोहों स्थलों पर जैसलमेर बाड़मेर के लंगा या मांगणियार गायक यदा कदा जरुर दिख जाया करते है |
शहरों की देखा देखि व आधुनिकता की होड़ के चलते बारातों में इनकी जगह बैंड बाजे ने ले ली | लेकिन टेक्नोलोजी बढ़ी तो संगीत के भी नए नए यंत्र बाजार में आ गये जिनमे से डी जे आजकल किसी भी समारोह में नाचने गाने व झुमने के लिए युवाओं की पहली पसंद है | शहरों में हर एक शादी समारोह स्थल के एक कोने में बारातियों को डी जे के संगीत पर थिरकते देखा जा सकता है |
अब जब शहरी बाराती डी जे की धुन पर थिरकने के मजे ले रहे है तो गांव वाले क्यों पीछे रहें ? गांवों में भी डी जे की बढती मांग ने मोबाइल डी जे का अविष्कार करा दिया आजकल गांवों के हर शादी समारोहों में आपको चलता फिरता मोबाइल डी जे दिख जायेगा | यह मोबाइल डी जे एक महिंद्रा जीप में स्थाई तौर पर फिट कर दिया जाता है जीप के आगे के बम्पर पर रौशनी व पावर के लिए एक छोटा जनरेटर फिट होता है , जीप के पिछले भाग में इसके बड़े बड़े स्पीकर व कुछ मरकरी लाइटें फिट होती है , बीच में एक व्यक्ति कंप्यूटर लिए बैठा रहता है जिसके लिए गर्मी से बचने के लिए एक कूलर की व्यवस्था होती है कंप्यूटर पर बैठा व्यक्ति बारातियों की फरमाइश पर उनकी मनपसन्द का गाना कंप्यूटर के एक क्लिक से बजा देता है |
हरियाणा और राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में तो डी जे वाले अपने डी जे की सुरक्षा के लिए साथ में आठ दस बाउंसर ( लठैत ) साथ लेकर चलते है | दरअसल इन गांवों में बाराती नशे में टूल्ल होने के बाद असहनशील हो जाते है उनकी फरमाइश का गाना एक सैकिंड देर होते ही डी जे वाले पर हमला बोल देते है तो कई बार बारातियों में अपनी अपनी फरमाइश को लेकर खेमा बंदी हो जाती है और वो भुगतना पड़ता है बेचारे डी जे वाले को | ऐसी ही परिस्थितयों से निपटने के लिए इन गांवों में डी जे के साथ बाउंसर चलते है |
अप्रेल 09 में रविन्द्र की शादी में भीलवाडा से आये रविन्द्र जी जाजू इस मोबाइल डी जे को देख रामोंचित व विस्मृत थे तो नरेशसिंह जी राठौड़ ने हरियाणा राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में इन डी जे के चलते शादियों में होने वाले झगड़े व तनाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अभी झुंझुनू के सूरजपुर कस्बे के आस पास तो जिलाधीश ने इनकी वजह से शादियों में होने वाले तनाव को मध्यनजर रखते हुए इन पर पाबंदी लगा रखी है |

खैर जो भी है यह मोबाइल डी जे है बड़ा मजेदार जुगाड़ |

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11 comments:

  1. मस्त मोबाईल चौधरी डी जे. मजा आया जानकर!! :)

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  2. इसे तो देखकर ही नाचने का जी कर रहा है जी ! क्या मस्त डी.जे है !!

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  3. रतन सिंग जी-ये तो जुगाड़ों का भी जुगाड़ है। जोरदार डी जे दिखाए। आभार्।

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  4. जय जुगाड़! ये तकनीक भारत में ही सम्भव है! मुझे अपनी एक पोस्ट याद आती है - टिर्री!

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  5. जाने कितने बैंड्बाजे वालों के पेट पर लात मारी है इस डी जे ने और विवाहस्थल पर इसके चलते तो आपस मे बात तक नही कर पाते है.. सिर्फ शोर ..संगीत नदारद ।

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  6. वाह ये लाजवाब है.

    रामराम.

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  7. :) जुगाड बढीया है।

    बहुत दिनो बाद लिखे हैं

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  8. बहुत अच्छी जानकारी दी है ।

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  9. अब ये फैशन बन गया है

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