History of Karkeri Fort : करकेड़ी किले का इतिहास

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History of Karkeri Fort : करकेड़ी का किला एक पहाड़ी बना है, जो किशनगढ़ से लगभग 33 किलोमीटर दूर परबतसर पुष्कर मार्ग पर स्थित है। यह किला कब बना, किसने बनाया यह शोध का विषय है, हमें डॉ. अविनाश पारिक द्वारा लिखित "किशनगढ़ के इतिहास" पुस्तक में जो जानकारी मिली वो यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।   

1756 में महाराजा सावंत सिंह जी के भाई बहादुर सिंह जी और उनके पुत्र सरदार सिंह जी के मध्य समझौता होकर किशनगढ़ राज्य का बंटवारा हुआ तब करकेड़ी वीर सिंह जी को मिली, वीर सिंह जी महाराजा सावंतसिंह जी के छोटे भाई थे।  इससे पहले करकेड़ी किले बहादुर सिंह जी ने मरम्मत कराई थी, इसका मतलब करकेड़ी का किला उनके समय से काफी पहले अस्तित्व में था।  

रूपनगर के महाराजा प्रताप सिंह जी जिनका कार्यकाल 1788-1798ई.) तक रहा, वे करकेड़ी के वीरसिंह जी के पुत्र अमर सिंह जी से नाराज थे, उनकी नाराजगी का कारण अमरसिंह जी द्वारा किशनगढ़ राज्य से रुष्ट होकर जोधपुर महाराजा विजय सिंह जी के पास चले जाना था।  प्रताप सिंह जी महाराजा विजय सिंह जी से द्वेषभाव रखते थे और वे मराठों से मिले हुए थे।  चूँकि जयपुर और जोधपुर मराठों को राजस्थान से निकालना चाहते थे, पर प्रताप सिंह जी मराठों का सहयोग कर रहे थे, यही नहीं जब जयपुर जोधपुर की सेनाओं ने मराठों पर हमला किया तब सरदार आम्बाजी एंगलिया को प्रताप सिंह जी ने सरवाड़ के किले में शरण दे दी थी, तब नाराज होकर जोधपुर महाराजा ने रूपनगर और किशनगढ़ पर सेना भेज दी, जो सात महीने तक लड़ाई चलती रही आखिर महाराजा प्रताप सिंह जी को समझौता करना पड़ा तब महाराजा जोधपुर ने रूपनगर करकेड़ी के अमर सिंह जी को दिलवा दिया।  

किसनगढ़ के महाराजा पृथ्वी सिंह जी (1840/ 1879) के तीन पुत्र हुए - शादूलसिंह, जवान सिंह, रघुनाथ सिंह, जवान सिंह का जन्म 1861 में हुआ और आपको 1878 में 32 हजार रूपये आय वाली करकेड़ी की जागीर मिली, इस जागीर में आठ गांव थे, जवानसिंह जी का विवाह मंडावा छोटे पाने के ठाकुर आनन्द सिंह जी की पुत्री तखत कुंवर के साथ हुआ।  जवान सिंह जी के एक पुत्र यज्ञ नारायण सिंह और एक पुत्री हुई।  

शादूलसिंह जी किशनगढ़ के राजा हुए, उनके बाद उनके पुत्र मदन सिंह जी राजा बने | मदन सिंह जी के कोई पुत्र नहीं था इसलिए जवान सिंह जी करकेड़ी के पुत्र यज्ञ नारायण सिंह जी गोद आये और 1926 से 1939 तक किशनगढ़ पर शासन किया।  

महाराजा यज्ञ नारायण सिंह जी ने करकेड़ी दुर्ग का विकास करा कर उसे सुन्दर बनाया और करकेडी में ही अपने पिता जवान सिंह जी का सुन्दर स्मारक बनाया, जिसे छोटे ताजमहल की संज्ञा दी जाती है।   

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