
भगवान जी माँ बाबा को कभी तो मेरा बना दो.
भैया को कभी तो डांट पिलवा दो.
माँ सारी चीजे भैया की पसंद की बनाती हैं .
एक बार तो बाबा के हाथो से मुझे भी एक प्यार का निवाला खिलवा दो.
बाबा सारा प्यार भैया पे क्यों लुटाते हैं .
भैया के हाथो में तो सिक्का देते हैं.
और पानी पीकर खाली गिलास मेरे हाथो पकड़ा देते हैं.
मेरी जीती बाजी छिनकर भैया खुद जीत जाते हैं.
एक बार तो भैया को हरा के मुझे जितवा दो .
अब तो इस घर से नाता भी ना रहेगा .
बस प्यार से विदा करवा दो .
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शुक्रिया भगवान जी आपने मुझे जितवा दिया,
मेरे प्यारे भैया को मुझ पे प्यार आ ही गया .
आखिर बूढ़े माँ बाबा को भैया ने हमेशा के लिए मेरे घर भिजवा दिया ..............:-}
केशर क्यारी. . (उषा राठौड)
wah sa baton baton me kya khub kahi sa very nice panktiyan hai usha ji
जवाब देंहटाएंशुक्रिया भगवान जी आपने मुझे जितवा दिया,
जवाब देंहटाएंमेरे प्यारे भैया को मुझ पे प्यार आ ही गया .
आखिर बूढ़े माँ बाबा को भैया ने हमेशा के लिए मेरे घर भिजवा दिया ..............:-}
inn lines mein kitna dard hai,woh jeet gayi par dil se dukhi bhi hai ke usske maa baap ki aaj yeh haalat hai jis par unhe naaz tha ussi ne aaj unki yeh durdasa kar di.Woh kehte hain na Jaisi karni waisi bharni.Ussne jo chaha usse mila par dukh iss baat ka hai ki khushi ko tutte hue dilon se gujarna pada.Inn bhavnao ko ek aurat ya beti hi samjh sakti hai.Hats off dear bahut acche aur khoobsurat tarike se tumne sukh,dukh,pyar aur dard ko prastut kiya hum sabke sammne.Well Done Keep It Up Proud Of You. :-)
मार्मिक रचना
जवाब देंहटाएंआभर
समाज मे पनपी लिंग भेद समस्या व बुढे माता पिता के साथ वर्तमान पीढी के व्यवहार पर आपने बहुत धारदार चोट की है,
जवाब देंहटाएंएक कडवे सत्य व्यंग्य के साथ मार्मिक रचना
व्यंग्य के साथ मार्मिक रचना
जवाब देंहटाएंहमेशा की तरह नाइस :)
जवाब देंहटाएंबेटियों के प्रति सामाजिक सोच पर प्रहार करती बढ़िया मार्मिक रचना के लिए धन्यवाद
जवाब देंहटाएंबड़ी गहरी बात कह गये.....
जवाब देंहटाएंआपकी रचनाओं की यही खासियत है साधारण तरीके से गहरी बात कही जाती है | इस बढ़िया रचना के लिए आभार |
जवाब देंहटाएंhamesha ki tarah is baar bhi boht achha likha he aapne .... bohat hi achhi kaveeta he aapki....... :)
जवाब देंहटाएंइसके अधिक सशक्त, चुभ सी जाती और भावप्रधान कणिका मैंने आज तक नहीं देखी। आपको व आपकी लेखनी को प्रणाम।
जवाब देंहटाएंबहुत ही मार्मिक रचना है दिल को छू लिया इस रचना ने तो इसके लिए उषा जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद
जवाब देंहटाएंहमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
मालीगांव
साया
आपकी पोस्ट यहा इस लिंक पर भी पर भी उपलब्ध है। देखने के लिए क्लिक करें
लक्ष्य
उफ़्………आखिरी लाइन पढते ही रोंगटे खडे हो गये………………एक सिहरन सी दौड गयी…………………बेहद मार्मिक और सत्य को दर्शाती संवेदनशील रचना।
जवाब देंहटाएंwonder ful expression
जवाब देंहटाएंbahut achchi rachana sachchi or gahari bat kam shabdo me bahut kuch kah diya padh kar achcha laga
जवाब देंहटाएंह्रदय स्पर्शी व मार्मिक
जवाब देंहटाएंबेहत सम्बेदनशील रचना |
धन्यबाद
बहुत बढ़िया!
जवाब देंहटाएं--
ह्रदय स्पर्शी व मार्मिक
बेहत सम्बेदनशील रचना |
कितनी बड़ी-बड़ी बातें कितने छुटपन से कही जा सकती हैं. सुंदर. बहुत सुंदर.
जवाब देंहटाएंईमल द्वारा मिली टिप्पणी-
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर पर मार्मिक कविता के लिए हार्दिक आभार ,धन्यवाद
सादर,
Dr.Bhoopendra Singh
T.R.S.College,REWA 486001
Madhya Pradesh INDIA
मैने तो ऎसा आज तक नही देखा, हमारे घरो मै तो बिटिया को बेटे से ज्यादा प्यार ओर अधिकार मिलते है, लेकिन कविता सुंदर लगी धन्यवाद
जवाब देंहटाएंकम शब्दों में गहरी बात...
जवाब देंहटाएंGreat......Great...........THANKs.
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