जर्जर हो चुके बूढ़े द्वारपाल

अस्त्र शस्त्र ,वेद शास्त्र , विद्या दान सब सिखाया
क्षत्राणी का धर्म निभाया
कूद के जौहर में
रण भूमि में तुम्हारा मान बचाया
वैधव्य भी नहीं डिगा सका मेरा स्वाभिमान
पुत्र रक्त से रक्तिम धरा देख कर भी रहा ह्रदय पाषण
ब्रहमांड की उत्पति प्रक्रिया मे
ज्यों अणु टूट टूट के एक हो जाते हैं
और एक नया ब्रहमांड रचते हैं
ठीक उसी तरह देख रक्तिम कण
अनगिनित शुर पुत्रो को जन्म देती हूँ
तुम्हारा रणभूमि में शहीद होना ..
भी नहीं बढ़ने देता था विरोधी सेना को आगे
एक दिवार तैयार होती थी मेरे पास उन्हें रोकने के लिए
मैं क्षत्राणी हूँ , साधारण स्त्रीत्व नहीं .....
राज काज, गद्दी भार .....
सब संभाल लिया मैंने उस वक्त
जब तुम अनवरत युद्ध मे तल्लीन थे
तुम्हारी इतनी व्यस्तता भी नहीं डिगा पाई मुझे मेरे धर्म से
क्योंकि मुझे विदित थे उस वक्त की परीक्षा के सभी मापदंड
अनगिनत विजय प्राप्ति के पश्चात् आज भी युद्ध जारी है अनवरत ..............................
अब बदल गए हैं युद्ध के मापदंड
रणभूमि बदल गई, विरोधी बदल गए
और आक्रमण के तरीके भी
और मैं अब अनभिज्ञ हूँ इन नए मापदंडो से
रिवाजों, रस्मों और कुछ परम्पराओं के नाम के द्वारपाल
खड़े कर गए थे जाते वक्त मेरी सुरक्षा के लिए
मुझे रोकते हैं अब वो बन के प्रहरी
एक आदेश भिजवा क्यों नहीं देते तुम ??
पुराने जर्जर होते द्वारपालों को कहलवा दो
कि खोल दे ये ऊँचे अडिग द्वार
तभी सीख पाऊँगी , नए अस्त्रों का प्रयोग
नए शस्त्रों का ज्ञान ...
वेदों के विन्यास भी बदल गए होंगे अब तो
नहीं माप पाई अगर ये नए प्रयोगों के मापदंड
तो कैसे सम्भालुंगी तुम्हारे पीछे का कार्यभार ?
कैसे कर पाऊँगी आने वाली पीढ़ी को तैयार
नहीं देखा जायेगा तुम्हारा यूँ उदेश्य विहीन शहीद होना
विरोधी जीतेंगे ....तुम्हारा ये युद्ध जायेगा बेकार .....
कभी सोचते क्यों नहीं ?
असंख्य विरोधी काटते हो रोज
फिर क्यों विरोधी सेना दोगुनी चोगुनी होती जाती हैं ?
क्योंकि विरोधियो ने सेवानिवृत कर दिए हैं
उन जर्जर हो चुके बूढ़े द्वारपालों को
जो रोकते थे रास्ता उनकी स्त्रियों का

केशर क्यारी....उषा राठौड़
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About pagdandi

Ratan Singh Shekhawat, Bhagatpura, Rajasthan.
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9 comments:

  1. बहुत सुन्दर एक सास्वत शंदेस देने वाली कबिता
    धन्यवाद.

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  2. फिर क्यों विरोधी सेना दोगुनी चोगुनी होती जाती हैं ?
    क्योंकि विरोधियो ने सेवानिवृत कर दिए हैं
    उन जर्जर हो चुके बूढ़े द्वारपालों को
    जो रोकते थे रास्ता उनकी स्त्रियों का
    @ सही कहा आपने यदि आज के प्रतिस्पर्धी युग में आगे बढ़ना है तो सबसे पहले समाज की महिलाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना होगा और इसके लिए उन परम्पराओं रूपी द्वारपालों को हटाना पड़ेगा जो महिला शिक्षा व महिला सशक्तिकरण का रास्ता रोके खड़े है|

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  3. बन सशक्त जो साथ खड़ी हो..

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  4. ओजपूर्ण सुन्दर रचना अभिव्यक्ति ... आभार

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  5. बहुत खूब... आप की आज की रचनाओं में सबसे सुंदर लगी सा........दीदी

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  6. बहुत ओजपूर्ण उत्कृष्ट गहन अभिव्यक्ति बहुत पसंद आई बधाई है आपको

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  7. नहीं देखा जायेगा तुम्हारा यूँ उदेश्य विहीन शहीद होना
    विरोधी जीतेंगे ....तुम्हारा ये युद्ध जायेगा बेकार .....
    अत्यंत ओजस्वी एवं गहन चेतावनी देती उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ...

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