2/27/2010 06:50:00 PM
Ratan Singh Shekhawat

देश में सिर्फ १४११ बाघ ही बचे है यह गिनती सही है या गलत इस पर सवाल उठाया जा सकता है पर यह सच है कि हमारे देश के जंगलों व अभ्यारण्यों में तस्करों द्वारा किये गए अवैध शिकार के चलते बाघों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है और यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब बाघ सिर्फ चिड़ियाघरों तक ही सिमित हो जायेंगे | हमारे नन्हे ब्लोगर आदि की आशंका भी निराधार नहीं कि अगली बार बाघ चिड़ियाघर में भी देखने को ना मिले |
बाघों की कमी के चलते जंगलों में जीवो की संख्या का संतुलन भी बेतहासा बिगड़ा है यही कारण है कि बाघ की कमी के चलते जंगलों में रहने वाली नील गायों की संख्या पर अंकुश नहीं लग पाने के कारण नील गायें जंगल से निकलकर हमारे खेतों तक पहुँच गयी है और उनके द्वारा फसलों का नुकसान करने पर हमारा किसान आज दुखी है | यदि जंगलों में बाघ होते तो वे नील गायों की संख्या नहीं बढ़ने देते और हमारे किसान नील गायों के आतंक से आतंकित नहीं होते | और ना ही कभी हम ब्लॉगजगत में नील गायों को मारने देने या ना देने पर कभी बहस करते | जंगल में जीवों की संख्या के संतुलन बिगड़ने का यह तो मात्र एक उदहारण है ऐसे कई उदहारण और हो सकते है जिनसे जंगल में बाघों की महत्ता उजागर होती है |
बाघों को शिकारियों के शिकार से बचाने के लिए सरकार भी इतने सुरक्षा कर्मी जंगलों में तैनात नहीं कर सकती जो इन शिकारियों पर अंकुश लगा सके | इसके लिए हमें जंगल के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के सामने ही बाघ की महत्ता के उदहारण पेश उन्हें समझाना होगा कि बाघ उनके खेतों से दूर जंगल रह कर भी कैसे उनकी खेतों में कड़ी फसल की रखवाली कर सकता है नील गाय का उदहारण देकर हम किसानों को समझा सकते है कैसे जंगल में जीवों की संख्या का संतुलन बिगड़ने का प्रभाव उन पर पड़ता है | और इस असंतुलन से बचने के लिए जंगल में बाघ का होना हमारे लिए कितना जरुरी है |
यदि जंगल के आस पास के ग्रामीणों में बाघ बचाने के बारे में जाग्रति फ़ैल जाये तो वे ही सही मायने में बाघों के अवैध शिकार पर अंकुश लगा सकते है |
ग्रामीणों द्वारा शिकार पर अंकुश लगाने का उदहारण हमारे सामने है -
जोधपुर और उसके आस पास के क्षेत्र में बसे विश्नोई जाति के लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते किसी भी व्यक्ति को अपने क्षेत्रों में हिरण सहित किसी भी वन्य जीव का शिकार नहीं करने देते , सलमान खान जैसे सेलिब्रेटी को भी उन्होंने अवैध शिकार करने के जुर्म में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया | विश्नोई समाज द्वारा शिकार पर अंकुश लगाने के चलते ही आज जोधपुर जाते समय जब सुबह सुबह ट्रेन की खिड़की से बाहर झांकते ही हिरणों के झुण्ड के झुण्ड कुलांचे भरते नजर आते है |
इसी तरह जंगल के आस पास के ग्रामीणों में बाघों को बचाने के पार्टी जागृत किया जा सके तो बाघों के अवैध शिकार पर पूर्णरूप से अंकुश लगाया जा सकता है जो सरकारी सुरक्षाकर्मी तो कभी नहीं लगा सकते |
यदि बाघ है तो हमारे जंगलों में अवैध कटाई भी नहीं होगी यानि जंगल भी बचेंगे और जंगल हमारा पर्यावरण भी बचाए रखेंगे |
यदि बाघ है तो जंगल में जंगल में जीवों की संख्या का संतुलन भी बना रहेगा |
यदि हमारे जंगलों में बाघ होंगे तभी नील गायों से हमारी फसलें उजड़ने से बचेंगी |
अब अनुमान लगा सकते है कि आपके रसोई में इस्तेमाल होनी वाली दाल व अनाज के सही उत्पादन में बाघों का भी अप्रत्यक्ष कितना योगदान होता है |
ताऊ डॉट इन: "खाये वो जूते तेरी गली में सनम"हार्ट अटैक से कैसे बचे
2/24/2010 09:12:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
2/22/2010 10:20:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
यदि आप अपने स्कूल मेनेजमेंट का कंप्यूटर रिकॉर्ड रखने के लिए किसी सोफ्टवेयर की तलाश में है तो हेडमास्टर सोफ्ट .कॉम का महज २०००रु. का सोफ्टवेयर आपके बहुत काम आ सकता है यह सोफ्टवेयर आप यहाँ चटका लगाकर इस वेब साईट से खरीद सकते है |
| इस सोफ्टवेयर की विशेषताएँ :- Available features: 1-Student information management 2-Class information management 3-Teaching sessions management 4-Students attendance management 5-Students initial scores report 6-Students exam scores report 7-Temporary tutors report 8-Canceled sessions report 9-User management 10-Multiuser work over LAN 11-Reporting via MS Office 12-Reporting via Open Office | |
ताऊ पहेली - 62 : विजेता : श्री ललित शर्मा
फ्री में किताबे यहाँ से प्राप्त करे |
2/21/2010 05:27:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
जब से अमर सिंह जी समाजवादी पार्टी से बाहर हुए है | मोबाइल फ़ोन पर क्षत्रिय एकता के एस एम् एस की बाढ़ सी आई हुई है | क्षत्रियो जागो ,उठो , एक हो जावो , आज स्वाभिमान रैली है , आज गर्जना रैली है ,आज रथ यात्रा फलां शहर पहुंचेगी उसका जोश के साथ स्वागत करें , क्षत्रिय एकता जिंदाबाद , रैली में ठाकुर अमर सिंह जी मुख्य वक्ता होंगे आदि आदि |
आज से पहले क्षत्रिय समाज के उत्थान पतन की न अमरसिंह जी को कभी चिंता था न इस समय एस एम् एस भेजने व इन रैलियों को आयोजित करने वाले आयोजकों को | अब जब सपा से बाहर होने के बाद अमर सिंह जी को अपनी राजनैतिक जमीन तलाशनी है तब अचानक ये रैलियां आयोजित होनी लगी है अमर सिंह जी अब अपने नाम के साथ ठाकुर लगाने लगे है | जातीय भावनाओं का दोहन कर इन रैलियों में जातीय भीड़ इक्कठा कर इनके माध्यम से अपनी राजनैतिक ताकत व व्यापक जनाधार दिखाने का अमर सिंह जी का मंसूबा साफ़ दिखाई दे रहा है और क्षत्रिय एकता के नाम पर राजपूतों की इन रैलियों में उमड़ती भीड़ देखकर वे अपने इस मिशन में सफल होते भी दिखाई दे रहे है |
प्राय: अक्सर देखा गया कि जब भी किसी कम जनाधार वाले नेता पर कोई राजनैतिक संकट आया है सभी ने किसी न किसी रूप में अपनी जाति या धर्म का सहारा लेकर अपना संकट दूर करने की कोशिश की है संकट दूर होने के बाद अक्सर फिर वे अपनी जाति व धर्म को भूल जाते है शायद ठाकुर अमर सिंह जी भी क्षत्रिय एकता के नाम पर अपना व्यापक जनाधार व ताकत दिखाने व राजनैतिक जमीन हासिल करने बाद फिर सिर्फ अमर सिंह ही बन जाये | पर फ़िलहाल तो वे सपा से निकलने के बाद अपने आप को क्षत्रिय नेता के तौर पर स्थापित करने में लगे है |
उनके द्वारा प्रायोजित रैलियों से क्षत्रिय समाज का तो कितना भला व उत्थान होगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन यह तय है कि वे क्षत्रियों समाज की जातीय भावनाओं का दोहन कर अपनी राजनैतिक जमीन हासिल करने में कामयाब जरुर हो जायेंगे |
ताऊ डॉट इन: ताऊ पहेली - 62एलो वेरा जेल ह्रदय रोगी के लिए आशा की नई किरणकसर नही है स्याणै मै
2/18/2010 07:37:00 PM
Ratan Singh Shekhawat

भाग -१ से आगे .....
जिसने रावण जैसे आततायी को भी मारने से पहले उसे सुधरने का मौका दिया और युद्ध टालने की हर संभव और उचित चेष्टा की -
लक्ष्मण के मूर्छित होने पर जिस भाई की आँखों में प्रेमाश्रुओं की अविरल धारा बहने लगी और जो संयोग-वियोग रहित होकर भी साधारण लोगों की भांति फूट-फूट कर विलाप करने लगा -
अपनी ही प्रियतमा पर अटूट विश्वास होते हुए भी पुनर्मिलन पर उससे अग्नि में अपनी पवित्रता को तपा कर जिसने निष्कलंकता का प्रमाण माँगा - वह राम ही था |
जिसने वैभव संपन्न स्वर्णिम लंका पर विजय प्राप्त करने पर भी उस राज्य को पराजित रावण के भाई विभीषण के लिए त्याग दिया -
जिसने लोक मर्यादा कायम रखने के लिए परीक्षित सीता जैसी पतिपरायण पत्नी को केवल लोकरंजन के लिए अपने हृदय पर पत्थर रखकर सदा के लिए निर्वासित किया -
तीन लोकों का अधिपति और सर्वसमर्थ होकर भी जो जीवन भर दुखों और कष्टों की आग में जलता रहा - वह राम ही था |
जिसने अकेले ही हजारों अजेय राक्षसों का संहार किया -
जिसने कर्तव्य की कठोरता को भावनाओं की कोमलता के आगे कभी झुकने नहीं दिया और कर्तव्य की घडी उपस्थित होने पर अपने ही खून के टुकड़ों का खून करने के लिए , अपने ही हाथों अपने वंश को निर्वंश करने के लिए , जीवन की सुरम्य वाटिका में आग लगाकर अपने ही हाथों उजाड़ने के लिए लव और कुश जैसे पुत्रों से युद्ध करने के तैयार हो गया - वह राम ही था |
जिसके महान चरित्र पर कलम चलाकर संस्कृत में वाल्मीकि , अवधि में गोस्वामी तुलसीदास और खड़ी बोली में मैथिलीशरण गुप्त महाकवि बन गए और जिसका मुक्तक वर्णन कर कई तुकबंदी करने वाले भी कविराज बन गए , उस दिव्य चरित्र का अधिष्ठाता जो था - वह राम ही था |
वेद और पंडित जिसका आज भी वर्णन करते थकते नहीं , मुनिगण अपने चित्त को एकाग्र कर जिसका आज भी ध्यान धरते है और जिसकी भक्ति में भक्तों ने इस पुनीत भारत में भक्ति की सुरसरी बहाई है - वह राम ही था |
ताऊ डॉट इन: विशेष ब्लागर सम्मान पुरस्कार - 2010 की घोषणा.कसर नही है स्याणै मैएलो वेरा जेल ह्रदय रोगी के लिए आशा की नई किरण
2/17/2010 07:35:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
जिस पुरुषोतम ने अजन्मा होकर भी महाभाग दशरथ के यहाँ जन्म लिया -
जिसकी सेवा के लिए स्वर्ग के सुख भोगकर अनेक देवता इस पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में अवतरित हुए थे -
जिसके द्वार पर सदैव भगवान् शंकर योगी का भेष धारण कर केवल उसका दर्शन करने आते थे - वह राम ही था |
जिसने मार्ग चलते ही विश्वामित्र के सानिध्य में धनुर्विद्या ही नहीं सम्पूर्ण युद्ध विद्या में अद्भुत कौशल की शिक्षा प्राप्त करली थी -
जिसके चरण स्पर्श मात्र से पत्थर की मूर्तियाँ सजीव होकर उन चरणों की महिमा गाने लगती लगती थी -
दुरमति राक्षसों द्वारा वध किये गए ऋषि मुनियों की हड्डियों के पर्वतनुमा ढेर को देखकर जिसने राक्षसों का समूल नाश करने का व्रत लिया था , वह राम ही था |
जिसने स्वयम अहिल्या का उद्दार किया था, जिसके नाम का आश्रय लेकर आज भी असंख्य आत्माओं का संसार सागर में अनायास ही उद्दार हो जाता है -
दस हजार हाथियों के बल वाले राजा जिस धनुष को उठा ही नहीं सकते थे उसे जिसने खेल ही खेल में तोड़ डाला -
इक्कीस बार पृथ्वी को अपने संहारक परशु से नि:क्षत्रिय करने वाले प्रबल पराक्रमी परशुराम भी अपना क्रोध जिसके प्रभाव के सन्मुख पी गए - वह राम ही था |
जिसने अपने पूज्य पिता की इच्छा पूर्ति के लिए राज्य सुख के वैभव त्याग कर जंगलों की कठिन भूमि पर बल्कल वस्त्र पहनकर शयन करना स्वीकार किया -
मृग को मारकर भाई लक्ष्मण के साथ जब पंचवटी के आश्रम में आए तो सीताहरण से कुटिया सुनी देखकर जिस भगवान् की आँखों में सामान्य मनुष्यों के आंसू छलक आये - वह राम ही था |
सात सात ताड़ के विराट वृक्षों का छेदन कर बाली का वध करने वाले बाण जिसके हाथों से छूटते थे -
जिसने अपनी प्राण -प्रिय के अपहरण के वियोगजन्य दुःख को सहन कर धेर्य पूर्वक लोक-संग्रह कर बन्दर और भालुओं की सेना खड़ी कर दी -
जिसके नाम से पत्थर अपने डूबने के स्वभाव भूलकर समुद्र में तैरने लग जाया करते थे - वह राम ही था |
क्रमश:.......
ताऊ डॉट इन: विशेष ब्लागर सम्मान पुरुष्कार - 2010 की घोषणा.मोजिला फायर फोक्स का सबसे महत्त्व पूर्ण एड ओन्स औषधियों का महाराजा है एलो वेरा जेल
2/16/2010 05:55:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
छोटे व्यापारियों व दुकानदारों के लिए बिल बनाने से लेकर स्टॉक तक हिसाब किताब रखने के लिए इनफ्लो इन्वेंट्री सोफ्टवेयर बहुत बढ़िया है | इन्टरनेट पर मुफ्त मिलने वाला यह सोफ्टवेयर बहुत सारी खूबियों से लेस होने के चलते बहुत ही बढ़िया व काम का है | यदि आप अपनी दुकान में बार कोड का इस्तेमाल करते है तो यह स्केनर की सहायता से बार कोड पढ़कर बिल बनाने में भी सक्षम है |

इनफ्लो इन्वेंट्री सोफ्टवेयर की खूबियाँ -
1-Product List
Keep your products organized with pictures, prices, and categories. inFlow can easily handle 10,000+ products on a regular PC.
2-Barcode!
Use barcode scanners to manage your inventory more quickly and accurately. inFlow is compatible with most barcode scanners you can plug into your computer
3-Multiple Units of Measurement
Use multiple units of measurement, e.g. buy by the case, track inventory by the piece, and sell by the dozen.
4-Multiple Locations & Sublocations
Track inventory in multiple locations. Use sublocations to more precisely track aisle numbers, bin numbers, etc.
5-Full Movement History
Get a full history of any inventory movements or adjustments to track down any problems or theft.
6-Assemble Products from Bill of Materials
Automatically assemble finished products or packages from raw materials, updating the inventory accordingly.
7-One-Click Simple Workflow
Use simple workflow to take orders and deduct inventory with one click!
8-Complete Advance Workflow
Use advanced workflow to track more detailed things like shipping information, specialized picking, and customer returns
9-Print or Email Invoices
Look good with professionally designed invoices. You can customize the logo, color, and fonts to suit your business' style.
इसकी उपरोक्त खूबियों के अलावा भी अन्य ढेरों विशेषताएँ आप यहाँ चटका लगाकर देख सकते है |
इस सोफ्टवेयर का मुफ्त संस्करण आप यहाँ चटका लगाकर डाउनलोड कर सकते है |
ताऊ डॉट इन: ताऊ पहेली - 61 : विजेता : श्री प्रकाश गोविंदस्वाइन फ्लू से बचें Immune System को बढ़ाकरमेरी शेखावाटी: कसर नही है स्याणै मै
2/14/2010 08:06:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
पिछले एक साल से ज्यादा से उबुन्टू लिनक्स का इस्तेमाल करते रहने के बाद विंडो एक्सपी चलाने का मन ही नहीं करता | कारण एक तो लिनक्स के इस्तेमाल के बाद रोज रोज वाइरस से कंप्यूटर ख़राब होने से छुटकारा मिल गया और दूसरा धीमी गति का ब्रॉडबैंड इन्टरनेट कनेक्शन होने के बावजूद उबुन्टू में नेट बढ़िया चल जाता है | जबकि इसी कनेक्शन से यदि विंडो एक्सपी का इस्तेमाल करते हुए नेट चलाता हूँ तो कोई वेब साईट जल्दी से खुलती ही नहीं जिससे झुंझलाहट बढ़ जाती है | पिछले दिनों कुन्नु सिंह ने भी उबुन्टू को आजमाने के बाद बताया कि इसमें नेट एक्सपी के बजाय ज्यादा तेज चलता है |
मेरे कंप्यूटर में उबुन्टू लिनक्स की परफोर्मेंस देखने के बाद मेरे एक मित्र जो एक प्राइवेट कम्पनी में प्रबंधक है ने भी अपने लेपटोप व अपने ऑफिस पी.सी में मुझे बुलाकर उबुन्टू इंस्टाल करवा लिया | जिस दिन उनके कंप्यूटर में उबुन्टू इंस्टाल किया गया उन दिनों उनके ऑफिस के ब्रॉडबैंड कनेक्शन के मोडम में आई तकनीकी खराबी के चलते पिछले तीन दिनों से आउटलुक मेल में मेल ही डाउनलोड नहीं हो रहे थे | उबुन्टू इंस्टाल करने के बाद जब मेरे मित्र ने उबुन्टू की एव्लुशन मेल कॉन्फ़िगर कर जैसे ही मेल डाउनलोड करने के सेंड रिसीव बटन दबाया कुछ ही देर में वे सभी मेल डाउनलोड हो गयी जो विंडो एक्सपी की आउटलुक मेल में तीन दिनों तक भी नहीं हो पाई थी | जिससे उनके ऑफिस में सभी को लगा कि नेट की पूरी स्पीड ये उबुन्टू खिंच रहा है कई कर्मचारियों ने उनसे आग्रह किया कि सर उबुन्टू को वापस निकलवा दीजिए वरना हमारे कंप्यूटर पर तो नेट चल ही नहीं पायेगा | इस पर हमारे मित्र ने उनको समझाया " बावलीबूचो उबुन्टू तो आज आया है पिछले तीन दिनों से तुम्हारी नेट क्यों नहीं चल रही थी जावो एयरटेल वालों से कम्प्लेंट करो और नेट ठीक करावो | उसके बाद जब एयरटेल के कर्मचारी आये तो पता लगा उनके मोडम में कुछ तकनीकी खराबी थी जो ठीक कर दी गयी फिर भी आज उनके ऑफिस में नेट की जो स्पीड उबुन्टू में मिलती है उसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है और उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी ठीक उसी तरह ये उबुन्टू भी आस पास के कंप्यूटरस की ताकत खींचकर अपने में समा लेता है | अक्सर मेरे से भी जब उनकी उबुन्टू के बारे में बात होती है तो वे इसे बाली कहकर ही पुकारते है | अपने एलोवेरा प्रोडक्ट वाले रामबाबू भी उबुन्टू से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भी अपने लेपटोप व डेस्कटॉप दोनों से विंडो एक्सपी को निकाल बाहर किया और अब उबुन्टू का ही इस्तेमाल कर रहे है |

ताऊ डॉट इन: ताऊ पहेली – 61
कसर नही है स्याणै मै
2/11/2010 05:55:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
पिछले का शेष .....
और विदा पाकर अभिमन्यु तीर की भांति चला युद्ध क्षेत्र में |
'सप्य्क सप्य्क क्लाक ' तलवार चल रही थी जैसे मछली पानी में क्रीडा कर रही हों | सधे हुए हाथो से छूटे हुए ब्रह्मास्त्र की भांति वह टूट पड़ता था और जिस पर टूटता था उसके जीवन और मृत्यु को रौंद डालता था | भाद्रपद मास की कडकती बिजली के समान छोटे शिशु की भांति वह कड़क उठता था और जिस पर कड़कता था उसके भाग्य को कुचल डालता था ; क्रोधित रणचंडी के उद्दंड भैरव की भांति वह उछल पड़ता था | कौरवों के रथी , महारथी और अतिरथी विस्मयविमुध होकर किंककर्तव्यविमूढ़ हो गए | आकाश में दर्शनार्थी देवी देवताओं और यक्ष -गन्ध्रवों का जमघट लग गया था | वे कुहनियों के हल्के धक्कों से अपने लिए बनाये मार्गों पर पंजों के बल खड़े होकर देख रहे थे - युद्ध के मूर्तिमान अवतार को कुरुक्षेत्र की क्रीडा स्थली पर नर मुंडों से खेलते हुए और उधर विधाता क्रूरतापूर्वक खेल रहे थे अबोध पांडव कुमार के भाग्य से | तलवार टूट गयी तो उसने रथ का पहिया उठा लिया | वह आगे बढ़ना जानता था , हार कर जिन्दगी के लिए लौटना नहीं जानता था | वह प्रपंचो को तोड़ सकता था किन्तु उनकी रचना नहीं कर सकता था | वह भाग्य से अड़ना जानता था किन्तु उसे खुश नहीं करना जानता था |
हलाहल विष ने अमृत कलश को चारों और से घेर लिया | कौरवों के सात महारथियों के बीच अकेला अभिमन्यु इस प्रकार घिर गया जैसे सात निर्दयी यमदूतों के बीच किसी वीर पुरुष की अंतिम श्वास लोमहर्षक संघर्ष कर रही हो | अन्याय ने न्याय की छाती पर चढ़कर निर्लज्जतापूर्वक अपना सिर ऊँचा उठा लिया , कायरता ने बल के हाथों अपना सतीत्व लुटाकर वीरता को कुचल डाला , पशुता ने विजय के साथ गठबंधन कर पांडव कुल की निर्दोष दीप शिखा को बुझा दिया | एक और धर्मक्षेत्र में धर्म-राज्य के लिए युद्ध हो रहा था और दूसरी और अवसर पाकर अधर्म फुफकारता हुआ हावी हो रहा था |
विधाता की वह अमूल्य कृति कौड़ियों के मूल्य बड़ी बेरहमी से लुटी गयी , रूद्राणी की वीणा का सबसे सुरीला तार आलाप भरते ही टूट गया | सुभद्रा की कोख और उत्तरा की मांग ने युद्ध के जाज्वल्यमान इतिहास में अनमोल कड़ी जोड़ कर सदा के लिए विदा ले ली | कुरुक्षेत्र की रणभूमि के चप्पे -चप्पे को याद है कि वह अभिमन्यु भी एक क्षत्रिय था |
चित्रपट चल रहा था और दृश्य बदलते जा रहे थे |

ताऊ डॉट इन: संतू गधे को नटखट बच्चे से बचाओ!
एलोवेरा के संग, लायें जीवन में नया उमंग |
2/10/2010 07:03:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
"मै युद्ध प्रयाण कर रहा हूँ | पिताजी आज यहाँ नहीं है | अपने हाथ दिखाने का स्वर्णिम अवसर आया है | श्री कृष्ण ने कहा है कि ऐसा अवसर भाग्यवान क्षत्रिय को ही मिलता है | मुझ पर आज भाग्य प्रसन्न हुआ है |"
उसकी आँखे नीची ही रही |
' मै महारथियों से भिडूगा - अकेला होते हुए भी उनके दांत खट्टे करूँगा | दुनियां को दिखा दूंगा कि पुत्र पिता से भी बढ़कर है | माता जी से स्वीकृति ले आया हूँ |'
उसने आँखे नीची ही रखी |
' मै तुमसे विदा लेने आया हूँ -शायद इस संसार की यह अंतिम विदा ही हो |'
वह उठ खड़ी हुई पर उसने अपने आँखे नहीं उठाई |
' क्या तुम भी माता जी की भांति सोच रही कि मै छोटा हूँ ,अनुभवी नहीं हूँ | मेरा कितना दुर्भाग्य है कि लोग मुझे बच्चा ही समझते है ,कैसे सिद्ध करू कि प्रोढ़ता की कसौटी उम्र नहीं ,दायित्वों के प्रति तीव्र और गहन तादात्म्य है | मै कितना ही छोटा हूँ -मेरे सामने मेरा नहीं मेरे कुल की प्रतिष्ठा का प्रश्न है , मेरे स्वजनों के सम्मान का सवाल है , माँ के दूध और तुम्हारे सुहाग को मै लज्जित नहीं कर सकता | क्या तुम्हे मुझ पर इतना भी विश्वास नहीं है ?'
' मुझे विश्वास तो है परन्तु ..........'
परन्तु क्या ?.............
' मेरे सामने मेरे कर्तव्य का प्रश्न है मै क्या करूँ ? आप तो रण में अपना कौशल दिखायेंगे और मेरे कौशल के क्षेत्र तो सभी रुंधे हुए है | आपके कर्तव्य पालन को तो सभी लोग देखेंगे किन्तु मेरा भी तो कोई कर्तव्य होगा और मेरे उस कर्तव्य पालन को कौन देखेगा ? स्त्री योनी में जन्म देकर भगवान ने आप जैसे पति के साथ लगाकर भी मुझे कितना पीछे रख दिया है ? हमारे अरमान कोई नहीं समझता , हमारी आकांक्षाएं कोई नहीं सुनता ,हमारे कर्तव्य को कोई नहीं देखता ,हमारे दुखों को हमारे सिवाय सहन ही कौन कर सकता है ?'
' देवी ! मैंने तुम्हारा पाणिग्रहण किया है | तुम्हारे साहचर्य में रहकर मैंने तुम्हारी आकांक्षाओं ,अरमानो और कठिनाईयों का अनुभव किया है | मेरा कर्तव्य ही तुम्हारा कर्तव्य है | मुझे हंस कर विदा दो , कुमकुम लगाकर विदा दो | मै जनता हूँ मेरे कर्तव्य से तुम्हारा कर्तव्य कठिन है | तुम्हे मेरी धरोहर को सुरक्षित रखना है , मेरे वियोग की आग में जलना है , हृदय पर पत्थर रखकर भी विदा देना है | मेरा सरल कर्तव्य निभाने में योग दो , तुम्हारा कठिन कर्तव्य निभाने में भगवान तुम्हारी सहायता करेंगे |'
और विदा पाकर अभिमन्यु वीर की भांति चला युद्ध में |
क्रमश :.........
ताऊ डॉट इन: संतू गधे को नटखट बच्चे से बचाओ!एलो वेरा जेल कुदरत का चमत्कार ( एच आई वी / एड्स प्रभावित के लिए )
2/08/2010 06:06:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
ज्ञान दर्पण पर पिछली पोस्ट “अब ब्लोगिंग के साथ करें कमाई भी !” पर भी एक ब्लोगर मित्र ने टिप्पणी के माध्यम से प्रश्न किया कि क्या हम गूगल के ब्लॉग पर भी एसा कर सकते है ? दरअसल यह पिछली पोस्ट ई स्टोर बनाकर उसका कोड ब्लॉग में इस्तेमाल कर उत्पाद बेचने के तरीके पर थी |
लेकिन आज चर्चा करते है कि क्या हम कैसे अपने ब्लॉग पर कोई सामान या सेवा बेचकर उसका सीधा भुगतान प्राप्त कर सकते है |
यदि आप अपने ब्लॉग पर कोई सेवा या उत्पाद बेचना चाहते है तो यह बहुत आसान है आईये समझते है इसके लिए जरुरी बाते चरणबद्ध तरीके से -
A- सबसे पहले paypal.com पर अपना खाता खोले | पेपल.कॉम आपको अपनी वेब साईट या ब्लॉग पर आपके ग्राहक से सीधे क्रेडिट कार्ड से भुगतान प्राप्त करने की सुविधा देता है | जिसके बदले पेपल .कॉम आपके लेनदेन पर कुछ प्रतिशत सेवा शुल्क वसूल करता है | पेपल में आया पैसा आप अपने बैंक खाते में मंगवा सकते है |
B- पेपल में आपका खाता बनने के बाद पेपल आपके क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते से कुछ थोड़ी सी रकम निकालकर वापस कर देता है | आपको अपने बैंक या क्रेडिट कार्ड विवरण से इस लेनदेन की प्रविष्टि का नंबर अपने पेपल खाते में लिखकर वेरीफाई करना होता है | यह कार्य पेपल आपका खाता जांचने के लिए करता है |
C - अपने ब्लॉग पर अपनी सेवा या उत्पाद की जानकारी देते हुए एक पोस्ट लिखिए और उस पोस्ट में पेपल से एक बटन ( Buy Now, Add To cart ) का कोड प्राप्त कर लगा दीजिए ताकि आपकी सेवा या उत्पाद खरीदने वाला ग्राहक उस बटन पर चटका लगाकर आपको भुगतान कर सके |
पेपल से बटन का कोड प्राप्त करने का तरीका
- सबसे पहले अपने पेपल खाते में लोग इन करें
- अब product & services पर क्लिक करें उसके बाद web site payment standard -- create a payment button पर क्लिक करें

१- अब सबसे पहले प्रोडक्ट या सेवा आदि में से एक चुने जो आप बेच रहे है |
२- Add to Cart या Buy Now में से जो बटन आप लगाना चाहे चुने |
३- अपने उत्पाद , सेवा का नाम और उसका कोई आई . डी नंबर लिखे |
४- अपने उत्पाद या सेवा की कीमत लिखे |
५- यदि आपको उत्पाद कोरियर आदि से भेजना है तो उसका होने वाला खर्चा लिखे |
६- यदि आपके उत्पाद या सेवा पर कोई कर लगता है तो वह भी लिखे |
७- अब क्रियेट बटन पर चटका लगा दें |
क्रियेट बटन पर चटका लगाते ही एक विंडो खुलेगी जिसमे आपके बटन का कोड होगा जो कॉपी करके अपने ब्लॉग पोस्ट में अपने उत्पाद या सेवा के साथ लगादे |
इस तरह हो गया आपका ब्लॉग आपका ई स्टोर |
उदहारण के तौर पर देखिये इस ताऊ टिप्पणी खेंचू ताबीज के बटन को |
डिस्क्लेमर- उपरोक्त ताबीज का स्टॉक उपलब्ध नहीं है इसे सिर्फ डेमो के लिए लगाया है कृपया इसे खरीदने के लिए कोई भुगतान ना करें |
ताऊ पहेली –60
कब्ज ( Constipation ) के लिए रामबाण है एलो वेरा जूस |
2/07/2010 10:48:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
सड़क पर चलते अक्सर स्कूटर का इंजन लगे साईकल रिक्शा दिखाई दे जाते है ऐसे जुगाड़ का इस्तेमाल ज्यादातर शहरो के आस-पास सब्जी उगाने वाले किसान सब्जी की ढुलाई के लिए या सामान ढ़ोने वाले रिक्शा चालक करते है |
लेकिन अब सवारी ढ़ोने वाले रिक्शों में भी बैटरी का इस्तेमाल होने लगा है एक बार बैटरी चार्ज करने के बाद ये साइकल रिक्शा ९० की.मी. तक फासला तय कर लेते है | कम लगत के इन बैटरी चालित साइकल रिक्शों का छोटे शहरों में व कॉलोनियों में ऑटो रिक्शा के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर प्रदूषण से बचा जा सकता है | फरीदाबाद की ग्रीन फिल्ड कालोनी की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी कालोनी में रहने वाले परिवारों के लिए किफायती शुल्क पर ऐसे रिक्शों की सेवा की शुरुआत है |
ताऊ डॉट इन: ताऊ पहेली - 60राजनीती का घिनोना चेहरा |
2/05/2010 10:06:00 PM
Ratan Singh Shekhawat
अक्सर ज्ञान दर्पण के पाठकों के फ़ोन आते रहते कि कंट्रोल पेनल में वेब साईट कहाँ अपलोड करे ? क्या कही इसका टुटोरियल मिल जायेगा ?
तो क्यों न आज ऐसे साथियों के लिए इस प्रश्न पर चर्चा कर ही ली जाये |
वेब साईट होस्टिंग सेवा प्रदाताओं द्वारा कई तरह के कंट्रोल पेनल उपलब्ध करवाए जाते है उन्ही में से सबसे ज्यादा लोकप्रिय सी-पेनल में वेब साईट कहाँ और कैसे अपलोड की जाये इसी का तरीका --
१ - कोई भी वेब साईट सी-पेनल के फाइल मेनेजर में Public_html फोल्डर में अपलोड की जाती है जिसे हम सीधे फाइल मेनेजर में उपलब्ध अपलोड सुविधा से अपलोड कर सकते है इसके लिए
अ- सबसे पहले हमें अपने वेब साईट फोल्डर को जिप फाइल में बदलना होगा |
ब- इसके बाद इस जिप फाइल को अपलोड कर public_html में अपलोड करें
स- इस जिप फाइल को public_html फोल्डर में Extract करदें |
२ - सी-पेनल में वेब साईट अपलोड करने का सबसे बढ़िया व मुफ्त मिलने वाला औजार है filezila जिसकी सहायता से आप अपनी वेब साईट अपने कंप्यूटर से सर्वर पर सी-पेनल में आसानी से अपलोड कर सकते है filezila आप यहाँ चटका लगाकर डाउनलोड कर सकते है |
filezila के माध्यम से अपलोड करते समय भी अपनी वेब साईट public_html फोल्डर में ही अपलोड करें filezila का इस्तेमाल करने के बारे में ज्यादा जानकारी आप यहाँ से ले सकते है |
2/03/2010 07:07:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
भाग -१ ,भाग-२ ,भाग-३ का शेष ...........
चित्रगुप्त ने चंद्रसेन की ओर देहकर फिर कहना शुरू किया ....
एक दिन इसने सोचा -क्यों नहीं रक्षा के आक्रमणात्मक पहलु पर विचार किया जाये और उसके घोड़े अजमेर की ओर मुड गए | सरवाड़ के शाही थाने में एक दिन बड़ी अवर कुहराम मच गया | 'भागो ,भागो ! जान बचाओ ! या अल्लाह ,चंद्रसेन आ गया है | मुल्लाओं की घिग्घी बंध गयी , रोते हुए बच्चे चुप हो गए , दौड़ते हुए शत्रुओं की किसी की टोपी किसी का जूता तो किसी का शस्त्र गिर जाता था पर वे किसी तरह जान बचाकर भागे जा रहे थे | चंद्रसेन का इतना आतंक फैला कि उसका नाम सुनकर शाही कर्मचारियों की पिंडलीयां कांपने लग जाती थी | अकबर ने पायन्दा मोहम्मद खां को भेजा किन्तु चंद्रसेन अजमेर लुटता हुआ अरावली की घाटियों में जा पहुंचा |
चित्रगुप्त ने निश्वास खिंच कर चंद्रसेन की उन्नीसवीं लड़ाई का हाल कहना शुरू किया |
' धर्मराज ! राव चंद्रसेन की अंतिम रणस्थली सोजत थी | शत्रु की वहां भी करारी मात हुई | चंद्रसेन की लपलपाती तलवार के आगे सोजत ने आत्म समर्पण कर दिया | उसके जीवन की पहली और अंतिम लड़ाई सोजत में हुई |
' राजगद्दी उन्नीस वर्ष पुरे हुए और आपने इसे यहाँ बुला लिया , सारन के पहाड़ों में सचियाय गांव क्व निवासियों ने चंद्रसेन के अंतिम दर्शन किये और इसकी चिता के साथ पांच सतियों ने जलकर अपनी ज्योति अखंड ज्योति में मिला दिया |
' धर्मराज ! भगवान् की अनोखी कृतियाँ इस संसार में स्वतंत्रता की पूजा करती आई है और करेंगी | संसार के हर कोने में देश भक्त अपने देश की स्वतंत्रता के लिए युद्ध करते आये है और करेंगे भी , लेकिन चंद्रसेन की भांति उपेक्षित , नि:सहाय, निर्धन और एकाकी होकर भी मातृभूमि के लिए उन्नीस वर्षों तक अंगारों पर सो कर राष्ट्रीय और जातीय गौरव पर जीवन देने वाले बहुत कम मिलेंगे |
इतना कह कर चित्रगुप्त चुप हो गया |
धर्मराज ने चंद्रसेन की आत्मा को संबोधित करते हुए कहा - ' तुम्हे तुम्हारी इच्छा का लोक दिया जायेगा | बोलो कोनसा लोक चाहते हो ?
चंद्रसेन ने कहा ,- भगवन ! मुझे मृत्युलोक चाहिए !
उत्तर को सुनकर यमराज और चित्रगुप्त दोनों ही चौंक पड़े | चंद्रसेन ने कहा - भगवान् ! मेरी मातृभूमि अपने कल्याण के लिए कराह रही है | यवनों के अपवित्र शासन से मुक्त होकर जब तक मेरे देश बन्धु स्वतंत्र्ताकाश में स्वतंत्रता से सांस नहीं लेंगे तब तक मुझे सत्यलोक में भी शांति नहीं हो सकती | भारत की स्वतंत्रता मुझे पुकार रही है , मेरी पेतृक और परम्परा प्राप्त भूमि के अपहृत अधिकार मुझे कोस रहे है , मेरे जीवन का अधुरा स्वप्न मुझे मेरी प्रतिज्ञा याद दिला रहा है,परकीय शासन मेरी शक्तियों को ललकार रहा है | यदि एक बार मुझे वापस भेज दो तो मै अपने मन की निकल लूँ | सिर्फ पांच साल के लिए भेज दो , यदि आपका अनुग्रह हो तो मै मृत्युलोक ...............................................|
' धन्य है , चंद्रसेन , धन्य है ! तुम तो देवताओं के देवता हो | अब मृत्यु लोक में तुम्हारा छोड़ा हुआ अधुरा कार्य मेवाड़ के महाराणा प्रताप करेंगे | उसके बाद भी कई क्षत्रिय व देशभक्त योद्धा जन्म लेकर इस संघर्ष का ज्वलंत और जीता जागता इतिहास बनायेंगे | एक दिन आएगा जब तुम्हारी संतान भारत-भूमि को देवभूमि बनाकर छोड़ेंगे | तुम निश्चिंत होकर ब्रह्मलोक में आओ |'
इस आश्वासन से चंद्रसेन को कुछ संतोष मिला और उस दिन से वे ब्रह्मलोक में बैठे हुए इतिहास की उथल पुथल को देख रहे है |
यमराज की धर्मपत्नी में कहा - ' नाथ आज इतनी देर से कैसे आये ? और वह वीरता का साकार सा रूप आपके न्यायालय में कौन खड़ा था जिसके लिए आपने आज अप्रत्याशित रूप से इतना अधिक समय लगाया है ?
यमराज ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया - ' वह भी एक क्षत्रिय था |'
चित्रपट चल रहा था और दृश्य बदलते जा रहे थे |
समाप्त |
स्व.श्री तन सिंह जी द्वारा लिखित
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2/02/2010 06:06:00 AM
Ratan Singh Shekhawat
भाग-१ व
भाग -२ से आगे ...........
चित्रगुप्त कहे जा रहा था -
' अजमेर से अकबर ने अपनी सेना की दुर्दशा का हाल सुना तो तैयब खान , खुर्रम अजमत खान आदि को दुगुनी फ़ौज देकर भेजा | चंद्रसेन ने रामपुरा की पहाड़ियों की शरण ली और शाही फ़ौज अपने आपको विजयी समझकर लौट गई लेकिन अकबर ने बहुत फटकारा . ' सिवाणे आदि के किलों की मुझे जरुरत नहीं है ,मुझे जरुरत है चंद्रसेन के सिर की जो या तो मेरे आगे झुक जाये अन्यथा टूट जाये | परन्तु अकबर का वह अरमान कभी पूरा नहीं हुआ | इस चंद्रसेन का सिर न झुका न टुटा |
यमराज बड़े ध्यान से सुन रहा था और चित्रगुप्त बही खाते उलटता हुआ कहे जा रहा था --
' अकबर णे फिर प्रयास किया | इस बार जलाल खां और उसके साथ सैयद अहमद , हासिम और शिमाल खां भी थे | उन्होंने पहाड़ों की सब कन्दराएँ छान डाली | बादलों में चाँद की तरह कभी चंद्रसेन दिख जाता था और कभी लुप्त हो जाता था | जीवन के गहरे समुद्र में जीवट का यह खिलाडी कभी साँस लेने बाहर आता और फिर गहरा गोता लगा जाता था | शाही सैनिक बुरी तरह मार खा रहे थे , घोड़े थक गए थे और उनके सवार भी हैरान होकर जलाल खां के साथ वापिस लौट पड़े |'
यमराज के मुंह से एक बार फिर निकला - ' वाह !'
' सुराग लगने पर अलिकुली खां और बीकानेर के राम सिंह ने फिर जलाल खां को बुलाया | युद्ध हुआ और चंद्रसेन फिर पहाड़ों में अंतर्ध्यान हो गया | रामगढ़ के किले को भी छान डाला पर चंद्रसेन नहीं हाथ आया सो नहीं आया |'
चित्रगुप्त सुनाये जा रहा था -
' इतने में बगडी के ठाकुर देविदास ने आकर ठीक समय में सहायता दी | मध्य रात्रि के समय जब जब चाँद अँधेरे में जंगल में भटक गया तो चंद्रसेन ने उसी अँधेरे में जलाल खां को ढूंढ़ निकाला | तलवार के एक ही वार से जलाल खां के तीन जलाल खां हो गए | ऐसी करारी मात पर जलाल खां की कब्र अब भी सिसकियाँ भर रही है और उसकी आत्मा बादशाहों के बादशाह को अपनी पराजय का दर्दनाक विवरण सुनाने के लिए क़यामत के दिन की प्रतीक्षा कर रही है |
चित्रगुप्त भावावेश में धाराप्रवाह रूप से कहे जा रहा था -
' चंद्रसेन देवकोर के किले में चला गया परन्तु जलाल खां की मौत शिमाल खां के गाल पर करारी चपत थी और इसलिए शाही सेना ने देवकोर के किले की ईंट ईंट बिखेर दी परन्तु भीतर चंद्रसेन नहीं केवल निराशा मिली | शिमाल खां सिर पीट कर रह गया | यह चंद्रसेन तो तूफान के समान शत्रु पर आता था और घात करके पलक मारते ही पवन के समान उड़ जाता था | शत्रु विस्मय विमुग्ध थे |'
यमराज सुन रहा था और चित्रगुप्त कहे जा रहा था -
' पिपलोद के पहाड़ों में शाही सेना से फिर मुटभेड हो गई | चंद्रसेन की तलवार से शत्रुओं की संख्या निरंतर कम होती जा रही थी | सैकड़ों कठिनाईयां सह कर स्वतंत्रता का यह अद्वितीय प्रेमी अकबर के आगे झुकना राष्ट्रिय पाप समझता था | शाही सेना टूट गई , दिन टूट गए , पर्वत टूट गए , आशाओं के बाँध टूट गए पर चंद्रसेन नहीं टुटा |'
चित्रगुप्त ने चंद्रसेन की ओर देख कर फिर कहना शुरू किया ---
क्रमश:
ताऊ डॉट इन: ताऊ पहेली - 59एलो वेरा के बारे में महापुरुषों के विचार |