राजस्थानी प्रेम कहानी : ढोला मारू

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है .

जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटरसाईकिल से !

मै यहाँ एक ऐसे स्थान की चर्चा करने जा रहा हूँ जहाँ इन्सान की मौत के बाद उसकी पूजा के साथ ही साथ उसकी बुलेट मोटर साईकिल की भी पूजा होती है.

"एलोवेरा " ब्लॉग ट्रैफिक के लिए भी है खुराक

एलोवेरा शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ ब्लॉग के लिए भी एक बढ़िया टॉनिक है , एक बढ़िया की-वर्ड जो गूगल से आसानी से पाठक झटक कर आपके ब्लॉग पर ट्रैफिक बढ़ा सकता है |.

"उबुन्टू लिनक्स" इसका नाम तो बाली होना चाहिए था

उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी.

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी शेखावत

आज भी बलजी को नींद नहीं आ रही थी वे आधी रात तक इन्ही फिरंगियों व राजस्थान के सेठ साहूकारों द्वारा गरीबों से सूद वसूली पर सोचते हुए चिंतित थे तभी उन्हें अपने छोटे भाई भूरजी की आवाज सुनाई दी |.

ज्ञान दर्पण के लेख इन्टरनेट पर दुबारा कहीं भी प्रकाशित करना सख्त मना है| पर प्रिंट मिडिया में नाम सहित छापने की खुली छूट है|

Dec 29, 2009

लाइफ शादी के पहले और शादी के बाद

अक्सर अंतरजाल पर मित्रों के बड़े रोचक और मजेदार सन्देश मिलते रहते है एसा ही एक मजेदार ई मेल आज मिला जिसमे शादी के पहले व बाद की जिन्दगी की तुलना मोबाइल दूर-संचार सेवा प्रदाता कम्पनियों से की गयी है बेशक ये सन्देश मौज लेने के उद्देश्य से बनाया गया हो पर है बड़ा सटीक व रोचक -


Life before marriage is AIRTEL
" u can express ur self ".

During honeymoon is RELIANCE-
" Always get in Touch ".

After Honeymoon is HUTCH
" Wherever u go ur wife network follows".


After one year Life is IDEA
" ur wife can change ur life ".


After 10 years Life is BSNL
" Subscriber is not reachable "?????????





ताऊ पहेली - 54 : विजेता श्री मुरारी पारीक
ग्वार पाठे ( एलोवेरा) की खासियत
शेखावाटी

Dec 20, 2009

उबुन्टू में Evolution Mail कॉन्फ़िगर कैसे करें ?

विंडो एक्सपी में ई मेल पढने के लिए आउट लुक एक्सप्रेस होती है उसी तरह उबुन्टू लिनक्स में Evolution Mail होती है | आइये चर्चा करते है इसे कोंफिगर करने के बारे -
१- सबसे पहले एवोलुशन मेल खोले |


२- अब Edit- Preferences व Preferences में Add पर क्लिक कर आगे बढे |


३- अब सर्वर टाईप में पोप सलेक्ट करें , सर्वर का नाम जैसे pop.gmail.com भरें , अपना यूजर नेम भरें व आगे बढे |

४- अब सेंड मेल के लिए सर्वर टाईप में smtp चुने व सेवर टाईप में सर्वर का पता जैसे smtp.gmail.com भरें व आगे बढे |


५- अपने खाते को कोई नाम दें व् आगे बढ़ें |

६- अब Apply पर चटका लगायें | तैयार है आपकी एवोलुशन मेल आपके सन्देश पढने व भेजने के लिए |


इन्हें भी पढ़ें
ताऊ डॉट इन: "राज ब्लागर के पिछले जन्म के" खुशदीप ने उगलवाया ताऊ की शादी का राज
मत पूछै के ठाठ भायला - कविता | मेरी शेखावाटी
क्या आप अपनी सारी टिप्पणियां पढ़ना चाहेंगे?
फॉर एवर बी प्रोपोलिस Forever Bee Propolis®

Dec 16, 2009

दैनिक जागरण में ज्ञान दर्पण का लेख

दैनिक जागरण के १३ दिसम्बर २००९ रविवारीय अंक के फ़ूड यात्रा कालम में ज्ञान दर्पण पर जोधपुर के मिर्ची बड़ों पर लिखे लेख को जगह दी गयी | इससे पहले भी अगस्त में ज्ञान दर्पण के लेख जहाँ मन्नत मांगी जाती है मोटर साईकल से दैनिक जागरण प्रकाशित किया गया था |



मजेदार और काम के लेख
ताऊ डॉट इन: "राज ब्लागर के पिछले जन्म के" खुशदीप ने फ़ंसाया ताऊ को
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Dec 14, 2009

चलता फिरता मोबाइल डी. जे. ( संगीत यंत्र )

एक जमाना था जब बरातों में नाच गाने के लिए एक पेटी बाजा (हारमोनियम) व ढोलक लिए एक मण्डली होती थी जिसमे एक व्यक्ति जनाना कपडे पहन नाचा करता था | इस मण्डली के संगीतकारों को कहीं ढोली , कहीं जांगड़ तो कहीं लंगा या मांगणियार के नामो से जाना जाता था | राजस्थान में राजपूत समाज के शादी समोरोहों में एक जगह जाजम बिछा महफ़िल जम जाया करती थी | महफ़िल के एक किनारे यही ढोली व जांगड़ पेटी बाजा से निकले सुर व ढोलक की तान पर लोक संगीत की शमा बाँध दिया करते थे | मय के प्यालों से छलकती महफ़िल में इनके द्वारा गाये जाने वाले गीत " केशरिया बालम पधारों न म्हारे देश " व "कलाळी भर ल्याए प्यालो, सेज में झूमे मतवालो " श्रोताओं को झुमने को मजबूर कर दिया करते थे | बचपन में ऐसी महफिले व संगीत लगभग हर शादी ब्याहों में देखने सुनने को मिल जाया करते थे लेकिन धीरे -धीरे इनका चलन बंद सा ही हो गया | हाँ आजकल जयपुर ,जोधपुर आदि शहरों में शादी समरोहों स्थलों पर जैसलमेर बाड़मेर के लंगा या मांगणियार गायक यदा कदा जरुर दिख जाया करते है |
शहरों की देखा देखि व आधुनिकता की होड़ के चलते बारातों में इनकी जगह बैंड बाजे ने ले ली | लेकिन टेक्नोलोजी बढ़ी तो संगीत के भी नए नए यंत्र बाजार में आ गये जिनमे से डी जे आजकल किसी भी समारोह में नाचने गाने व झुमने के लिए युवाओं की पहली पसंद है | शहरों में हर एक शादी समारोह स्थल के एक कोने में बारातियों को डी जे के संगीत पर थिरकते देखा जा सकता है |
अब जब शहरी बाराती डी जे की धुन पर थिरकने के मजे ले रहे है तो गांव वाले क्यों पीछे रहें ? गांवों में भी डी जे की बढती मांग ने मोबाइल डी जे का अविष्कार करा दिया आजकल गांवों के हर शादी समारोहों में आपको चलता फिरता मोबाइल डी जे दिख जायेगा | यह मोबाइल डी जे एक महिंद्रा जीप में स्थाई तौर पर फिट कर दिया जाता है जीप के आगे के बम्पर पर रौशनी व पावर के लिए एक छोटा जनरेटर फिट होता है , जीप के पिछले भाग में इसके बड़े बड़े स्पीकर व कुछ मरकरी लाइटें फिट होती है , बीच में एक व्यक्ति कंप्यूटर लिए बैठा रहता है जिसके लिए गर्मी से बचने के लिए एक कूलर की व्यवस्था होती है कंप्यूटर पर बैठा व्यक्ति बारातियों की फरमाइश पर उनकी मनपसन्द का गाना कंप्यूटर के एक क्लिक से बजा देता है |
हरियाणा और राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में तो डी जे वाले अपने डी जे की सुरक्षा के लिए साथ में आठ दस बाउंसर ( लठैत ) साथ लेकर चलते है | दरअसल इन गांवों में बाराती नशे में टूल्ल होने के बाद असहनशील हो जाते है उनकी फरमाइश का गाना एक सैकिंड देर होते ही डी जे वाले पर हमला बोल देते है तो कई बार बारातियों में अपनी अपनी फरमाइश को लेकर खेमा बंदी हो जाती है और वो भुगतना पड़ता है बेचारे डी जे वाले को | ऐसी ही परिस्थितयों से निपटने के लिए इन गांवों में डी जे के साथ बाउंसर चलते है |
अप्रेल 09 में रविन्द्र की शादी में भीलवाडा से आये रविन्द्र जी जाजू इस मोबाइल डी जे को देख रामोंचित व विस्मृत थे तो नरेशसिंह जी राठौड़ ने हरियाणा राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में इन डी जे के चलते शादियों में होने वाले झगड़े व तनाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अभी झुंझुनू के सूरजपुर कस्बे के आस पास तो जिलाधीश ने इनकी वजह से शादियों में होने वाले तनाव को मध्यनजर रखते हुए इन पर पाबंदी लगा रखी है |

खैर जो भी है यह मोबाइल डी जे है बड़ा मजेदार जुगाड़ |

ताऊ डॉट इन: ताऊ पहेली - 52 :विजेता श्री काजलकुमार

Dec 10, 2009

namebench के साथ करें DNS Server सर्च

ज्ञान दर्पण पर पिछली पोस्ट में गूगल की पब्लिक डीएनएस सर्विस के बारे में जानकारी दी गई थी जिसे कई साथियों ने आजमाया और पाया कि उन्हें इस सर्विस से कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ | उनके इन्टरनेट पर वेब सर्फिंग की गति पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा |
दरअसल बिना कोई तुलना करने वाले औजार के हम यह पता नहीं लगा सकते कि हमारी वर्तमान डीएनएस सेवा ठीक है या गूगल की | यदि हमें कोई एसा तुलना करने वाला औजार मिल जाए तो हम गूगल डीएनएस सर्विस व अपने इन्टरनेट सेवा प्रदाता की डीएनएस सर्विस की तुलना कर जो ज्यादा बढ़िया है उसे इस्तेमाल कर सकते है |
इस काम के लिए आप Namebench नामक फ्री सोफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते है यह एक फ्री सोफ्टवेयर है और हमें डीएनएस सर्विस का तुलनात्मक अध्यन कर बताता है कि कौनसा डीएनएस हमारे लिए फायदेमंद है |
इस सोफ्टवेयर को यहाँ से डाउनलोड किया जा सकता है व इसके बारे में विस्तृत जानकारी ली जा सकती है |



इन्हें भी पढ़िए :
ताऊ डॉट इन: ताऊ की चाय मे गिरकर मक्षिका सुंदरी का परलोकगमन
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मत पूछै के ठाठ भायला - कविता | मेरी शेखावाटी

Dec 7, 2009

इन्टरनेट खरीददारी के लिए छूट कूपन कैसे तलाश करें ?

पिछले सप्ताह मैंने इन्टरनेट पर एक वेब साईट से एक पैकेज ख़रीदा | इस पैकेज की खरीददारी करने के बाद मुझे कुन्नु जी से पता चला कि इस वेब साईट ने इस पैकेज के लिए २०$ के छूट कूपन इन्टरनेट पर जारी कर रखे थे यदि आप उन्हें गूगल सर्च से तलाश कर लेते तो आपके २०$ बच जाते | पर मुझे इस बात की जानकारी न होने के कारण में उस वेब साईट द्वारा दी गई छूट से वंचित रह २० $ नहीं बचा सका |
कल फिर मुझे एक वेब साईट एक वेब स्क्रिप्ट का लाइसेंस खरीदना था जो स्क्रिप्ट बनाने वाली वेब साईट २५०$ का बेच रही थी पर कुन्नु जी सलाह लेते ही वही लाइसेंस २००$ में मिल गया और मेरे सीधे ५०$ बच गए |
दरअसल इन्टरनेट पर व्यवसाय करने वाली लगभग वेब साईट अपने उत्पाद बेचने के लिए छूट कूपन जारी करती है या उनके द्वारा दूसरी अधिकृत डीलर टाईप वेब साईट होती है जो उसी उत्पाद को छूट के साथ सस्ते में बेचती है | पर इन सब बातों की जानकारी उस सम्बंधित वेब साईट पर नहीं होती और उनके द्वारा छूट कूपन जारी होने के बावजूद हम उसका फायदा नहीं उठा सकते | पर सवाल यह उठता है कि इन छूट कूपन्स का हमें पता कैसे चले | तो आईये आज चर्चा करते है इन्हें तलाश करने के तरीके पर जो कल ही मुझे कुन्नु सिंह ने बताया |
1- जब भी कोई वेब साईट अपने उत्पाद के लिए छूट कूपन तैयार करती है वह इन कूपन्स को http://www.retailmenot.com वेब साईट पर अपलोड कर जारी करती है |
हमें या तो इस वेब साईट के जरिये पता चल जाता है या फिर गूगल सर्च से |
2- गूगल सर्च से छूट कूपन तलाशना - आप जिस वेब साईट से खरीददारी कर रहे है गूगल में उस साईट का पता लिखने के बाद coupon लिखकर सर्च करें | यदि उस वेब साईट ने कोई कूपन जारी किये होंगे तो गूगल में उन कूपन्स का http://www.retailmenot.com वाला लिंक आपको मिल जायेगा | उस लिंक पर क्लिक करते ही आपको वे छूट कूपन्स मिल जायेंगे जिनका नंबर लेकर आप सम्बंधित वेब साईट से छूट का फायदा उठा सकते है |
उदहारण के तौर पर यदि आप Dewlance.com से कोई वेब होस्टिंग प्लान खरीद रहे है तो इसके छूट कूपन्स गूगल में तलाश करने के लिए Dewlance.com coupon लिखकर सर्च करें

3-सर्च लिंक पर क्लिक करते ही रिटेलमीनोट.कॉम वेब साईट में dewlance.com के छूट कूपन्स आपको इस तरह दिखेंगे |

4-अब इन छूट कूपन्स का कोड नंबर लेकर आप जहाँ यह उत्पाद खरीद रहे है वहां प्रोमोशनल कोड या कूपन कोड लिखे खाने में भर दे

अब उस कूपन में दी गई छूट की राशी आपके बिल में स्वत: ही कम हो जाएगी |
और हाँ कभी इन्टरनेट पर कुछ खरीददारी करते हुए यहाँ दी हुई जानकारी के चलते यदि आपको कोई फायदा हो जाये तो कुन्नु जी को धन्यवाद जरुर दे देना क्योंकि ये सब मुझे उन्होंने ही बताया था |

ये मजेदार लेख भी पढ़िए

ताऊ पहेली - 51 विजेता श्री दिनेशराय द्विवेदी
ब्लॉगर साथियो, अब भी वक्त है सुधर जाओ..
मत पूछै के ठाठ भायला - कविता | मेरी शेखावाटी

Dec 6, 2009

गूगल की public DNS service

गूगल ने वेब सर्फिंग को सुरक्षित ,भरोसेमंद और ज्यादा तेज गति से इस्तेमाल करने हेतु public DNS service की शुरुआत करदी है |
सामान्य तौर पर यह सुविधा हमें हमारा इन्टरनेट सेवा प्रदाता "ISP" उबलब्ध कराता है लेकिन अब हम गूगल द्वारा शुरू की गई सेवा का इस्तेमाल कर वेब सर्फिंग की गति बढाकर आनंद ले सकते है |
अपने कंप्यूटर में इस सेवा की कोंफिग्रेशन करने का तरीका गूगल ने यहाँ लिखा है | यहाँ लिखे तरीके से आप गूगल डी एन एस सेवा को अपने कंप्यूटर में सेटिंग कर जाँच सकते है यदि आपको लगे कि गूगल की यह सेवा आपके लिए फायदेमंद है तो इसे इस्तेमाल करें वरना पहले की तरह अपनी पुरानी सेटिंग वापस करले |
मैंने अपने उबुन्टू लिनक्स में इस सेवा को कोंफिगर कर देखा तो मुझे वेब सर्फिंग की गति मौजूदा गति से अधिक ही मिली |



ताऊ पहेली - 51
मत पूछै के ठाठ भायला - कविता
कितने काम का है गूगल कैलेंडर ?

Dec 5, 2009

पाबू -2

पाबू भाग १ का शेष .................
कौन जनता था कि विवाह के ढोल-धमाकों में भी कर्तव्य की क्षीण पुकार कोई सुन सकता है | मादकता के सुध बुध खोने वाले प्यालों को होटों से लगाकर भी कोई मतवाला उन्हें फेंक सकता है , वरमाला के सुरम्य पुष्पों को भी सूंघने के पहले ही पैरों तले रोंद सकता है ?
कौन जानता था कि मिलन का यह अनुपम अवसर उपस्थित होने पर ब्राह्मण कहता ही रहेगा -अभी तो तीन फेरे ही हुए है ,चौथा बाकी है ,उस समय गठजोड़े को छोड़कर सुहागरात की इन्द्रधनुषीय सतरंगी शय्या के लोभ को ठोकर मारकर ,भोग-एश्वर्य के दुर्लभ स्वाति-नक्षत्र के समय युगों का प्यासा चातक पिऊ पिऊ करता हुआ ,प्यास को ही पीकर ,रागरंग के मादक अवसर पर निमंत्रण भरे इशारों की उपेक्षा कर , कंकण डोरों को बिना खोले ही कर्तव्य मार्ग का बटोही मुक्त हो जायेगा ?
और वह चला गया -क्रोधित नारद की वीणा के तार की तरह झनझनाता हुआ ,भागीरथ के हठ की तरह बल खाता हुआ , उत्तेजित भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा के समान कठोर होकर, पर कौन जानता था कि नारद की वीणा का वह क्रोधित तार स्वरों की उत्तेजना में ही टूट जायेगा ,भागीरथ के बल खाते हट को न झुकने की इतनी कीमत चुकानी पड़ेगी ? भीष्म की प्रतिज्ञा को आलिंगन-बद्ध भोगों को बिना भोगे ही विदा करना पड़ेगा ?
कौन जानता था कि चांदे और ढेमे के बीच वह शूरमा पाबू संसार में अपने पीछे लड़ने के इतिहास का अनिर्वचनीय उदहारण रखकर ,सितारों की ऊँचाइयों को नीचा दिखाने वाली केशर कालवी पर सुन्दर स्वागत का साक्षत्कार करने के लिए अनंत की गहराइयों में सशरीर ही पहुँच जायेगा और तब दिशाएँ वियोगिनी बनकर ढूढती रह जाएगी ,मानवता विधवा बनकर सिसकती रह जाएगी ?
कौन जानता था कि जिसने अग्नि की पूरी परिक्रमाएँ ही साथ नहीं दी ,जिसके हथलेवे का हाथ पकड़ने से पहले ही छोड़ दिया गया , जिसके महावर की लगी हुई मेहँदी ने सुखकर अपनी अरुणिमा का परिचय भी नहीं दिया , जिसकी आँखे किसी का रूप देखने से पहले लज्जा के कारण अपने घूँघट को ऊँचा तक नहीं उठा सकी , वही दुल्हन अपने नए ससुराल में उसी वर से दुबारा पाणिग्रहण कराने के लिए हाथ में नारियल लेकर अपने स्वर्गस्थ पति से चिरमिलन के लिए चल देगी ?
वह चली गयी -उमरकोट के राणा सूरजमल की कोख की जीती जागती ज्योति चली गयी ,परम ज्योति से मिलने के लिए ; केशर कालवी चली गई , विस्मृति की कालिमा में खोने के लिए ; लेकिन स्मृति बाकी रह गई ; पाबू की अमर स्मृति जो आज भी कोलू के पास मरुस्थल के टीलों पर आत्मविभोर हो वीणा वादन कर रही है ; राजस्थान का जनगण उसी की स्मृति का कथाओं और गीतों की लोरों में , रावणहत्थों की धुन के साथ पड़ और पड़वारों में पूजन करता है | पड़ लगती है ,रतजगे होते है , पाबू का यशगान होता है - कि पाबू भी एक क्षत्रिय था |
-ये था बाड़मेर के पूर्व सांसद स्व. श्री तन सिंह द्वारा लिखित पुस्तक " बदलते दृश्य" में राजस्थान के लोक देवता पाबू जी राठौड़ पर आलेख |
-पाबू जी के बारे में एतिहासिक जानकारी देते हुए पिछले दिनों नरेश जी ने राजपूत वर्ल्ड पर एक श्रंखला लिखी थी वह आप यहाँ जाकर पढ़ सकते है |
-केशर कालवी - यह पाबू जी की घोड़ी का नाम था |
-पाबू जी द्वारा अपने विवाह में फेरों के उपरांत बिना सात फेरे पूरे किये ही बीच में उठकर गोरक्षा के लिए जाने व अपना बलिदान देने के बाद राजस्थान में राजपूत समुदाय में अब भी शादी में चार ही फेरे लिए जाते है |

"ताऊ" साप्ताहिक पत्रिका (अंक-६)रणथम्भोर
Hindi Blog Tips: स्टाइलिश रिलेटेड पोस्ट तस्वीर के साथ

Dec 4, 2009

पाबू -1

भाद्रपद मास की बरसात सी झूमती हुई एक बारात जा रही थी | उसकी बारात जिसने विवाह पहले ही सूचना दे दी थी कि- ' मेरा सिर तो बिका हुआ है , विधवा बनना है तो विवाह करना !' उसकी बारात जिसने प्रत्युतर दिया था - जिसके शरीर पर रहने वाला सिर उसका नहीं है , वह अमर है | उसकी पत्नी को विधवा नहीं बनना पड़ता | विधवा तो उसको बनना पड़ता है जो पति का साथ छोड़ देती है |'
ढोली दुहे गा रहा था -
धरती तूं संभागणी ,(थारै) इंद्र जेहड़ो भरतार |
पैरण लीला कांचुवा , ओढ़ण मेघ मलार ||
रंग आज आणन्द घणा, आज सुरंगी नेह |
सखी अमिठो गोठ में , दूधे बूठा मह ||

गोरबंद और रमझोलो से झमक झमक करते हुए ऊँटों और घोड़ों वाली वह बारात जा रही थी , सूखे मरुस्थल की मन्दाकिनी प्रवाहित करती हुई , आनंद और मंगल से ठिठोली करती हुई | परन्तु कौन जनता था कि उस सजी सजाई बारात का वह अलबेला दूल्हा एक दिन जन जन के हृदय का पूज्य देवता बनेगा ?
कौन जानता था कि सेहरे और पाग की कलंगी और तुर्रों से सजे हुए उस दुल्हे के मन में , जरी गोटे से चमचमाते अचकन बागों में छिपे उसके हृदय में भी एक अरमान था -एक प्रतिज्ञा थी - एक जीवन था -एक तडफन थी -एक आग थी -मेरा ज्ञानार्जन ,मेरा विवाह ,मेरा कुटुंब पालन और मेरे जीवन के समस्त व्यापार एक आर्त की पुकार पर बलि होने के लिए है |
कौन जानता था कि उस मौर के समान मीठी बोली वाली ,हिरन के समान कातर नयन वाली, वायुरहित स्थान की लौ सी नासिका वाली, नंदन वन के किसी चंपा की लम्बी डाली जैसे हाथों वाली , चक्रव्यूह की लज्जा और सीता के समान शील वाली देव बाला सी, उमरकोट के बगीचों की अप्सरा सी, रूपमती दुल्हिन गठजोड़े के लिए मिलेगी ?
कौन जानता था कि स्वर्ग के सोंदर्य को लज्जित करने वाला ऐसा आकर्षक विलास भी गोरक्षा की प्रतिज्ञा के समक्ष श्रीविहीन होकर कोने में प्रतीक्षा करता रह जायेगा ?
कौन जानता था कि शहनाइयों की गमक ,मांगलिक और मधुर आभूषणों की ठुमक , मनुहारों के उल्लास भरे वातावरण की झमक-झमक में जिस समय झीने घूँघट में छिपे अनुपम और सोंदर्य के किनारों से हृदय-समुद्र की उताल तरंगे पछाड़ खाने को प्रस्तुत होगी , उस समय भाग्य का कोई क्रूर हरकारा भरे हुए प्यालों को ठुकरा कर , जीवन की मधुर हाला को आँगन में ही बिखरने को तैयार हो जायेगा ?
कौन जानता था कि चारणी भी चील का रूप धारण कर याद दिलाने आएगी - ' राही ! विधाता ने तुम्हारे लिए जो मार्ग निश्चित किया था वह तो कोई दूसरा ही मार्ग है | इस लौकिक पुष्प में जिस सोंदर्य की खोज में भंवरे बन कर आये हो वह अलौकिक सोंदर्य यहाँ नहीं है | दुल्हे ! तेरी बारात तो सजकर यहाँ आई है परन्तु तेरे विवाह की तैयारियां कहीं और हो रही है | तू इस स्वागत से आत्मविभोर हो रहा है परन्तु इससे भी अधिक सुन्दर स्वागत की तैयारियों के लिए किसी अन्य स्थान पर दौड़ धूप हो रही है - देखो , गगन की गहराइयों में , स्वर्ग की अप्सराए तुम्हारे लिए वर मालाएँ लेकर खड़ी है !'
बाड़मेर के पूर्व सांसद स्व. श्री तनसिंह जी द्वारा लिखित
क्रमश:

ताऊ, करवा ले न्याय तेरे ब्लाग पंचों से ही.... !
फेवआइकन लगाया क्या?
मत पूछै के ठाठ भायला - कविता

Dec 2, 2009

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्दति

शरीर के विभिन्न हिस्सों खासकर हथेलियों और पैरों के तलवों के महत्वपूरण बिन्दुओं पर दबाव डालकर विभिन्न रोगों का इलाज करने की विधि को एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्दति कहा जाता है | चिकित्सा शास्त्र की इस पद्दति का मानना है कि शरीर में हजारों नसों ,रक्त धमनियों ,मांसपेसियों ,स्नायू और हड्डियों के साथ कई अन्य चीजे मिलकर इस शरीर रूपी मशीन को चलाते है | अत : किसी बिंदु पर दबाव डालने से उससे सम्बंधित जुड़ा भाग प्रभावित होता है इस पद्दति के लगातार अध्ययनों के बाद मानव शरीर के दो हजार ऐसे बिंदु पहचाने गए है जिन्हें एक्यू पॉइंट कहा जाता है जिस एक्यू पॉइंट पर दबाव डालने से उसमे दर्द हो उसे बार बार दबाने से उस जगह से सम्बंधित बीमारी ठीक हो जाती है | इस पद्दति में हथेलियों ,पैरों के तलवों ,अँगुलियों और कभी कभी कोहनी अथवा घुटनों पर हल्के और मध्यम दबाव डालकर शरीर में स्थित उन उर्जा केन्द्रों को फिर से सक्रीय किया जाता है जो किसी कारण अवरुद्ध हो गई हों |
बिना दवा के इलाज करने वाली यह पद्दति सरल ,हानिरहित, खर्च रहित व अत्यंत प्रभावशाली व उपयोगी है जिसे कोई भी थोड़ी सी जानकारी हासिल कर कभी भी कहीं भी कर सकता है | बस शरीर से सम्बंधित अंगों के बिंदु केन्द्रों की हमें जानकारी होनी चाहिए | निचे दिए दो चित्रों में आप शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों से सम्बंधित बिन्दुओं (एक्यू पॉइंट ) के बारे जान सकते है | चित्र को बड़ी साइज में देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें |


इस पद्धति का विकास चीन में होने के कारण इसे चीनी पद्धति के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसकी उत्पत्ति को लेकर काफी विवाद भी हैं। एक ओर जहां चीन का इतिहास यह बताता है कि यह पद्धति 2000 वर्ष पहले चीन में विकसित होकर सारी दुनिया के सामने आई। वहीं, भारतीय मतों के अनुसार आयुर्वेद में 3000 ई.पू. ही एक्यूप्रेशर में वर्णित मर्मस्थलों का जिक्र किया जा चुका है। वर्तमान में भारत और चीन के साथ ही हांगकांग, अमरीका आदि देशों में भी कई रोगों के उपचार में एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति काम में लाई जाती है।

विजेट्स की परेशानियां : काम जारी है...
ताऊ गोल्डन जुबिली पहेली : विजेता श्री विवेक रस्तोगी
स्वस्थ रहे एलोवेरा के साथ ;

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