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उबुन्टू की इस तेज गति से नेट चलाने का कारण पूछने पर हमारे मित्र भी मौज लेते हुए बताते है कि जिस तरह से रामायण के पात्र बाली के सामने किसी भी योद्धा के आने के बाद उसकी आधी शक्ति बाली में आ जाती थी.
आज भी बलजी को नींद नहीं आ रही थी वे आधी रात तक इन्ही फिरंगियों व राजस्थान के सेठ साहूकारों द्वारा गरीबों से सूद वसूली पर सोचते हुए चिंतित थे तभी उन्हें अपने छोटे भाई भूरजी की आवाज सुनाई दी |.
आज राम सिंह को कारखाने के प्रबंधक पद से सेवा मुक्त हुए पूरा महीना बीत गया लेकिन पद पर रहते जो लोग उसके आगे पीछे घुमा करते थे वे आजतक मिलने भी नहीं आये जिन कारखाना मालिकों के फायदे के लिए राम सिंह दूसरो का बुरा करने तक में नहीं चूका उन मालिकों का भी कभी कोई फोन तक राम सिंह के पास नहीं आया | घर में अकेला बैठा राम सिंह अब अतीत में कारखाने में लिए गए अपने निर्णयों का विश्लेषण करने लगा | उस हर एक मामले के द्रश्य अब राम सिंह की दिखाई देने लगे जिनमे निर्णय करते वक्त राम सिंह ने मानवीय पक्ष दरकिनार करते हुए सिर्फ कारखाने का पक्ष देखा | आज राम सिंह को अपने द्वारा किये गए गए गलत निर्णयों का वीभत्स चेहरा नजर आने से वह अन्दर तक हिल चूका है और सोचता है कि उन मामलों में मानवीय पक्ष देखकर भी तो मै कोई निर्णय कर सकता था जैसे;- १- कारखाने में काम करने वाली एक गर्भवती महिला प्रबन्धक राम सिंह के पास गर्भावस्था अवकाश लेने आती है लेकिन राम सिंह उससे कहता कि छुट्टी नहीं मिलेगी तुम्हारी जगह काम कौन करेगा ? इसलिए मै तुम्हे नौकरी से हटा कर तुम्हारी जगह किसी और की नियुक्ति कर देता हूँ | और राम सिंह उसे नौकरी से निकल देता है | महिला राम सिंह को बुरा भला कहकर कोसती हुई , बद-दुआएं देती , रोती हुई अपने घर जाती है | उस घटना को याद कर आज राम सिंह सोचता है काश उस मामले को मैंने कुछ इस तरह निपटाया होता - जैसे ही वह गर्भवती महिला राम सिंह के कक्ष में गर्भावस्था अवकाश का आवेदन लेकर प्रवेश करने के साथ अभिवादन करती है | और राम सिंह से अपनी छुट्टी की बात करती है | राम सिंह - अच्छा आप आराम से छुट्टी कीजिए और आपके साथ काम करने वाली किसी सहकर्मी को अपना कार्य समझा दीजिए उसे आपका कार्य करने के बदले कम्पनी ओवर टाइम दे देगी जिससे उसकी भी कुछ आय बढ़ जायेगी और आपके अवकाश की वजह से कारखाने का कोई काम भी नहीं अटकेगा | और कोई दिक्कत हो तो मुझे बताइगा | महिला राम सिंह को धन्यवाद देती हुई ख़ुशी ख़ुशी अपने को लौटती है | २- कारखाने में मशीन पर काम करने वाले बनवारी का हाथ दुर्घटनावश मशीन में फंस गया जिसे डाक्टर ने ओपरेशन कर काट दिया था आज अस्पताल से छुट्टी होने के बाद बनवारी वापस कारखाने में काम पर लौटा है लेकिन राम सिंह ने यह सोचकर कि बनवारी एक हाथ कैसे मशीन चलाएगा उसकी तो अब कार्य क्षमता कम हो चुकी सो बनवारी को अपने कक्ष में बुलाकर कहता है राम सिंह - देख बनवारी ! अब एक हाथ से तू मशीन तो चला नहीं सकता इसलिए तू कारखाने में किस काम का ? मैंने तेरी जगह दूसरा आदमी भर्ती कर लिया और तेरा हिसाब बनाने के लिए बोल दिया इसलिए ऑफिस में बाबू के पास जा और अपना हिसाब लेकर अपने घर चलता बन | राम सिंह की बात सुनकर बनवारी रोंर लगता है ,राम सिंह की मिन्नते करता है गिड़गिडाता कि उसके बाल बच्चे बहुत छोटे है और हाथ काटने की वजह से उसे कही और जगह काम नहीं मिलेगा इसलिए उसे नौकरी से न निकला जाए लेकिन राम सिंह पर बनवारी के रोने पीटने का कोई असर नहीं पड़ता | और बनवारी राम सिंह को बद-दुआएं देता रोता हुआ अपने घर को रवाना होता है | आज राम सिंह उस घटना को याद करने पर अपनी गलती का अहसास होता है और वह सोचता है काश बनवारी के मामले को मैंने इस तरह निपटाया होता - अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बनवारी कारखाने काम पर लौटता है सबसे पहले वह प्रबन्धक राम सिंह से मिलने उसके कक्ष में प्रवेश कर राम सिंह को अभिवादन करता है | राम सिंह - अरे आओ आओ बनवारी ! बैठो और बताओ अब तुम्हारी तबियत कैसी है | भई तुम्हारा दुर्घटना में हाथ जाता रहा इसका मुझे बहुत अफ़सोस है तुम्हारी दुर्घटना के बाद मै कारखाने में कुछ और भी ऐसे उपाय करवा रहा हूँ ताकि इस तरह की दुर्घटना रोकी जा सके और तुम्हारी तरह किसी और श्रमिक को ये सब नहीं भुगतना पड़े खैर -- अब तुम मशीन पर तो काम कर नहीं पावोगे इसलिए मैंने तुम्हारे काम पर अन्य श्रमिक को लगा दिया है और तुम्हारे लायक दूसरा काम तलाश लिया जो तुम एक हाथ से भी आसानी से कर सकते है | इससे कारखाने का कार्य भी प्रभावित नहीं होगा और तुम्हे भी कोई तकलीफ नहीं होगी | अब जावो और अपना नया कार्यभार संभालो | कोई दिक्कत परेशानी हो तो बेझिझक मुझे बताना | और बनवारी खुश होकर राम सिंह को हार्दिक धन्यवाद देता हुआ उसके कक्ष से बाहर निकल अपने नए कार्य पर ख़ुशी ख़ुशी जुट जाता है | ऐसे ही मामलों में लिए अनेक निर्णय आज पूर्व कारखाना प्रबन्धक राम सिंह की आँखों में घूम रहे है और उनके बारे में सोच सोच कर वह बैचेन हो उठता है पर अब बैचेन होने के सिवा कर भी तो क्या सकता है आखिर वो समय तो निकल चूका जब वो मानवता के लिए कुछ कर सकता है |
1903 मे लार्ड कर्जन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार मे सभी राजाओ के साथ हिन्दू कुल सूर्य मेवाड़ के महाराणा का जाना राजस्थान के जागीरदार क्रान्तिकारियो को अच्छा नही लग रहा था इसलिय उन्हे रोकने के लिये शेखावाटी के मलसीसर के ठाकुर भूर सिह ने ठाकुर करण सिह जोबनेर व राव गोपाल सिह खरवा के साथ मिल कर महाराणा फ़तह सिह को दिल्ली जाने से रोकने की जिम्मेदारी क्रांतिकारी कवि केसरी सिह बारहट को दी | केसरी सिह बारहट ने "चेतावनी रा चुंग्ट्या " नामक सौरठे रचे जिन्हे पढकर महाराणा अत्यधिक प्रभावित हुये और दिल्ली दरबार मे न जाने का निश्चय किया |और दिल्ली आने के बावजूद समारोह में शामिल नहीं हुए |
भयंकर मुसीबतों में दुःख सहते हुए मेवाड़ के महाराणा नंगे पैर पहाडों में घुमे ,घास की रोटियां खाई फिर भी उन्होंने हमेशा धर्म की रक्षा की | मातृभूमि के गौरव के लिए वे कभी कितनी ही बड़ी मुसीबत से विचलित नहीं हुए उन्होंने हमेशा मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है वे कभी किसी के आगे नहीं झुके | इसीलिए आज मेवाड़ के महाराणा हिंदुस्तान के जन जन के हृदय में बसे है |
घणा घलिया घमसांण, (तोई) राणा सदा रहिया निडर | (अब) पेखँतां, फ़रमाण हलचल किम फ़तमल ! हुवै ||2||
अनगिनत व भीषण युद्ध लड़ने के बावजूद भी मेवाड़ के महाराणा कभी किसी युद्ध से न तो विचलित हुए और न ही कभी किसी से डरे उन्होंने हमेशा निडरता ही दिखाई | लेकिन हे महाराणा फतह सिंह आपके ऐसे शूरवीर कुल में जन्म लेने के बावजूद लार्ड कर्जन के एक छोटे से फरमान से आपके मन में किस तरह की हलचल पैदा हो गई ये समझ से परे है |
गिरद गजां घमसांणष नहचै धर माई नहीं | (ऊ) मावै किम महाराणा, गज दोसै रा गिरद मे ||3||
मेवाड़ के महाराणाओं द्वारा लड़े गए अनगिनत घमासान युद्धों में जिनमे हजारों हाथी व असंख्य सैनिक होते थे कि उनके लिए धरती कम पड़ जाती थी आज वे महाराणा अंग्रेज सरकार द्वारा २०० गज के कक्ष में आयोजित समरोह में कैसे समा सकते है ? क्या उनके लिए यह जगह काफी है ?
ओरां ने आसान , हांका हरवळ हालणों | (पणा) किम हालै कुल राणा, (जिण) हरवळ साहाँ हंकिया ||4||
अन्य राजा महाराजाओं के लिए तो यह बहुत आसान है कि उन्हें कोई हांक कर अग्रिम पंक्ति में बिठा दे लेकिन राणा कुल के महाराणा को वह पंक्ति कैसे शोभा देगी जिस कुल के महाराणाओं ने आज तक बादशाही फौज के अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं को युद्ध में खदेड़ कर भगाया है |
अन्य राजा जब अंग्रेज सरकार के आगे नतमस्तक होंगे और उसे हाथ बढाकर झुक कर नजराना पेश करेंगे | उनकी तो हमेशा झुकने की आदत है वे तो हमेशा झुकते आये है लेकिन हे सिसोदिया बलशाली महाराणा उनकी तरह झुक कर अंग्रेज सरकार को नजराना पेश करने के लिए आपका हाथ कैसे बढेगा ? जो आज तक किसी के आगे नहीं बढा और न ही झुका |
हे महाराणा फतह सिंह ! जिस सिसोदिया कुल सिंहासन के आगे कई राजा,महाराजा,राव,उमराव ,बादशाह सिर झुकाते थे | लेकिन आज सिर झुके राजाओं की पंगत में शामिल होना आपको कैसे शोभा देगा ?
जिन महाराणाओं का दिया दान,बख्शिसे व जागीरे लोग अपने माथे पर लगाकर स्वीकार करते थे | जो आजतक दूसरो को बख्शीस व दान देते आये है आज वो महाराणा खुद अंग्रेज सरकार द्वारा दिए जाने वाले स्टार ऑफ़ इंडिया नामक खिताब रूपी बख्शीस लेने के लालच में कैसे आ गए ?
हे महाराणा फतह सिंह हिंदुस्तान की जनता आपको अपना हिंदुआ सूर्य समझती है जब वह आपकी तरफ यानी अपने सूर्य की और स्नेह से देखेगी तब आपके सीने पर अंग्रेज सरकार द्वारा दिया गया " तारा" (स्टार ऑफ़ इंडिया का खिताब ) देख उसकी अपने सूर्य से तुलना करेगी तो वह क्या समझेगी और मन ही मन बहुत लज्जित होगी |
जब दिल्ली की दम्भी अंग्रेज सरकार हिंदुआ सूर्य सिसोदिया नरेश महाराणा फतह सिंह को अपने आगे झुकता हुआ देखेगी तो तब उनका घमंडी मुखिया लार्ड कर्जन मन ही मन खुश होगा और सोचेगा कि मेवाड़ के जिन महाराणाओं ने आज तक किसी के आगे अपना शीश नहीं झुकाया वे आज मेरे आगे शीश झुका रहे है |
अंत बेर आखीह, पताल जे बाताँ पहल | (वे) राणा सह राखीह, जिण री साखी सिर जटा ||10||
अपने जीवन के अंतिम समय में आपके कुल पुरुष महाराणा प्रताप ने जो बाते कही थी व प्रतिज्ञाएँ की थी व आने वाली पीढियों के लिए आख्यान दिए थे कि किसी के आगे नहीं झुकना ,दिल्ली को कभी कर नहीं देना , पातळ में खाना खाना , केश नहीं कटवाना जिनका पालन आज तक आप व आपके पूर्वज महाराणा करते आये है और हे महाराणा फतह सिंह इन सब बातों के साक्षी आपके सिर के ये लम्बे केश है |
"कठिण जमानो" कौल, बाँधे नर हीमत बिना | (यो) बीराँ हंदो बोल, पातल साँगे पेखियो ||11||
हे महाराणा यह समय बहुत कठिन है इस समय प्रतिज्ञाओं और वचन का पालन करना बिना हिम्मत के संभव नहीं है अर्थात इस कठिन समय में अपने वचन का पालन सिर्फ एक वीर पुरुष ही कर सकता है | जो शूरवीर होते है उनके वचनों का ही महत्व होता है | ऐसे ही शूरवीरों में महाराणा सांगा ,कुम्भा व महाराणा प्रताप को लोगो ने परखा है |
अब लग सारां आस , राण रीत कुळ राखसी | रहो सहाय सुखरास , एकलिंग प्रभु आप रै ||12||
हे महाराणा फतह सिंह जी पुरे भारत की जनता को आपसे ही आशा है कि आप राणा कुल की चली आ रही परम्पराओं का निरवाह करेंगे और किसी के आगे न झुकने का महाराणा प्रताप के प्रण का पालन करेंगे | प्रभु एकलिंग नाथ इस कार्य में आपके साथ होंगे व आपको सफल होने की शक्ति देंगे |
हे महाराणा सिसोदिया राजनैतिक इच्छा शक्ति व बल रखना इस सरकार की गोद में बैठकर आप जिस मीठे फल की आस कर रहे है वह मीठा नहीं खट्ठा है |
इन सौरठों की सही सही व्याख्या करने की राजस्थानी भाषा के साहित्यकार आदरणीय श्री सोभाग्य सिंह जी से समझकर भरपूर कोशिश की गई फिर भी किसी बंधू को इसमें त्रुटी लगे तो सूचित करे | ठीक कर दी जायेगी |
उबुन्टू इंस्टाल करने के बाद ब्रोडबैंड इन्टरनेट बिना किसी कॉन्फिगरेशन के चालू हो जाता है लेकिन यदि आप अपने मोबाइल से लिनक्स में इन्टरनेट चलाना चाहते है तो थोडी सी कॉन्फिगरेशन करनी पड़ेगी जबकि विण्डो एक्सपी में संबंधित मोबाइल का पीसी सोफ्टवेयर इंस्टाल करना पड़ता है | लिनक्स में यह बहुत आसान है आईये आज इसी पर चर्चा करते है | १- सबसे पहले system (तंत्र)-Preferences(वरीयता) -network connections पर क्लिक करे एक विण्डो खुलेगी २- जोड़े पर चटका लगाये फिर एक विण्डो खुलेगी ३- आगे पर चटका लगाये ४-अपना मोबाइल सेवा प्रदाता का नाम चुने और आगे बढे ५- लागू करे पर चटका लगते ही कार्य पूरा हो गया अब जहाँ नेटवर्क कनेक्शन का आइकन दिखाई दे रहा है उस चटका लगाये आपके सामने दो आप्शन होंगे १- वायर्ड नेटवर्क २- मोबाइल ब्रोडबैंड . जिसमे मोबाइल ब्रोड बैंड को चुन ले बस अब आपका नेट आपके मोबाइल से चलने लगेगा |
चंडीगढ़ के यूनिस्टार पब्लिकेशन ने "सात समन्दर पार " हिंदी उपन्यास प्रकाशित किया है जिसे लिखा है अमेरिका में रहने वाली भारतीय महिला कमलेश चौहान ने | कमलेश चौहान पंजाब साहित्य सभा द्वारा प्रेस्टीयस एन आर आई एकेडमी अवार्ड जनवरी २००९ से भी सम्मानित है | उपन्यास अमेरिका में रहने वाले एक एनआरआई से शादी करने वाली महिला के जीवन की सच्ची घटना पर आधारित है | इस उपन्यास की मुख्य किरदार सुन्दरी नामक एक महिला है | साधारण परिवार में जन्मी सुन्दरी स्वतंत्र विचारों वाली ,बहादुर,चतुर ,वाक्पटु और सुन्दर महिला है | अपनी दो बहनों की शादी के खर्च के वित्तीय बोझ से दबे परिवार पर सुंदरी कभी बोझ नहीं बनना चाहती इसीलिए वह अपनी शादी की बजाए अपनी पढाई को प्राथमिकता देती है साथ ही गलत सामाजिक अवधारणाओं के खिलाफ आवाज उठाती है | सुन्दरी आकाश नाम के एक लड़के जिसे वह अपने सपनो का राजकुमार समझती है से बेइन्तहा प्यार करती है लेकिन उसके इस प्यार के रिश्ते को उसके घर वाले कभी स्वीकार नहीं करते और उसकी शादी एक एन आर आई से कर दी जाती है | अपने परिवार की आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों के चलते सुन्दरी उस एनआरआई से शादी कर लेती है और इस तरह शुरू होती है सुन्दरी की सात समंदर पार यात्रा | सुन्दरी एक पढ़ी लिखी महिला होने के बावजूद उसे महसूस कराया जाता है कि वह विदेशी वातावरण के लायक नहीं है उसका पति उसे अहसास करता है कि वह सामाजिक तौर पर उसकी बराबरी की नहीं है और वह उसकी भावनात्मक व वास्तविक इच्छाएँ कभी पूरी नहीं करता | वह हमेशा अपनी नौकरानी की तरह आज्ञाओं का पालन करवाना चाहता है लेकिन सुन्दरी इन सबके खिलाफ आवाज उठाती है और अपना एक अलग अपने खुद के उसूलों वाला व्यक्तित्व तैयार करती है | वह विदेशी कानून की मदद से तलाक़ लेकर खुद को अपने पति से अलग कर लेती है और समाज में अपनी पहचान बनाने का संघर्ष शुरू करती है इसी संघर्ष को इस पुस्तक में उकेरा गया है | इसके अलावा इस पुस्तक में भावनात्मक विषयों को छुआ गया है | जो भारतीय महिलाऐं शादी करके पश्चिमी देशो में पंहुच हिंसा, भावनात्मक व शारीरिक शोषण का शिकार बनती है उनके अनगिनत किस्से इस पुस्तक में संजोये गए है | और शोषण का शिकार बनी महिलाओं को उपन्यास के माध्यम से उनके अधिकारों से परिचित कराना व उनकी शक्ति को बढ़ाना है | उपन्यास में एक नारी के अरमानो व भावनाओं कोप गंभीरता से दर्शाने का प्रयत्न किया गया है | उपन्यास की किरदार सुन्दरी अपने प्यार से वंचित हो एक प्रेमरहित विवाह करती है ताकि वह अपने परिवार की वित्तीय सहायता व सामजिक प्रतिष्ठा बना सके लेकिन लेकिन इन प्रेमरहित बांहों के दलदल से निकलने के लिए वह जो संघर्ष कर एक ऐसी नारी बनती है जो समाज में अपना एक अलग निशान छोड़ती है |
कई सालों से मैनेजर ताऊ अपनी कम्पनी को बढ़िया तरीके से लाभ में चला रहा था | कम्पनी में काम करने वाले कई सहकर्मी मैनेजर ताऊ की इस सफलता से मन ही मन बड़े जलते थे | लेकिन ताऊ के आगे उनकी एक न चलती थी लेकिन जब से सेठ के छोरे ने विदेश से प्रबंधन की पढाई कर लौटने के बाद कम्पनी का कार्यभार संभाला ताऊ विरोधियों ने उसे ताऊ के खिलाफ बहला फुसला दिया | चापलूसों से घिरा सेठ का छोरा उनके कहने पर कम्पनी कार्यों में कई उल्टे सीधे निर्णय लेने लगा जाहिर है ऐसे में कम्पनी का नुकसान होना तय था | मेनेजर ताऊ ने सेठ के छोरे को खूब समझाया कि ये हिंदुस्तान है यहाँ सफल होने के लिए सिर्फ पढाई से काम नहीं चलता " पढाई के साथ गुणाई भी चाहिए जो विदेशों में नहीं सिर्फ ताऊ प्रबंधन विश्वविद्यालय में ही मिलती है जिसका पास आउट मै हूँ इसलिए मेरा कहना मान वर्ना इन चमचो के कहने से चलेगा तो तेरी ये कम्पनी एक दिन बंद हो जायेगी | पर चमचों से घिरे सेठ के छोरे को ताऊ की बात कहाँ समझ आने वाली थी | बदली परिस्थितियां देखा मैनेजर ताऊ ने इस्तीफा देकर किसी अन्य कम्पनी की राह पकड़ी | पर ताऊ को पता था कि अब ये चापलूस मण्डली कोई भी आने वाले मैनेजर को ढंग से काम नहीं करने देगी और घाटे में जाने के कारण बेचारे की नौकरी ना चली जाए अतः ताऊ ने नए मैनेजर को कार्यभार सौंपते हुए तीन लिफाफे यह कहते हुए दिए कि जब भी तुम्हारी नौकरी के ऊपर कोई संकट आये तब इन लिफाफों में से लिखे नंबर के अनुसार बारी बारी से खोलना तुम्हे संकट से निकलने का रास्ता मिलेगा | साल भर बाद जैसे ही कम्पनी का लाभ-हानि खाता बना कम्पनी घाटे में थी इस वजह से अपनी नौकरी पर लटकी तलवार का संकट देख नए मैनेजर को ताऊ के लिफाफे याद आये उसने तुंरत लिफाफा न. १ खोला जिसमे लिखा था - " अपनी नाकामयाबियों का सारा दोष मेरे ऊपर डाल दो " | मैनेजर ने यही किया सेठ को कह दिया कि " ताऊ के कार्यकाल में उसके द्वारा लिए गए गलत निर्णयों की वजह से कम्पनी में घाटा हुआ है यह तो मै था सो कम्पनी को कुछ संभाल लिया वरना ताऊ तो पूरी कम्पनी को ही डुबोने का काम कर गया था | इस तरह मैनेजर ने अपनी नाकामयाबी का दोष ताऊ के सिर मढ़ अपनी नौकरी बचा ली | पर अगले साल फिर कम्पनी घाटे में | फिर मैनेजर ने ताऊ का लिफाफा खोला | लिखा था -" सारा दोष सरकारी नीतियों पर डाल दो " मैनेजर पढ़कर समझ गया और उसने यही किया सारा दोष सरकार की बदली नीतियों पर डाल कर फिर नौकरी बचा ले गया | तीसरी साल कम्पनी फिर घाटे में | मैनेजर ने ताऊ द्वारा दिया तीसरा लिफाफा खोला जिसमे लिखा था| "अब बहुत हो गया इसलिए अब इस्तीफा देकर नए मैनेजर के लिए तू भी ऐसे ही तीन लिफाफे तैयार करले "
पिछले दिनों जब ब्लोगवाणी ने फालतू आलोचनाओं से विचलित हो गुड बाय कह दिया तो महसूस हुआ क्यों न एक ब्लॉग एग्रीगेटर का भी जुगाड़ कर लिया जाय | जब हमारे देश में हर जगह जुगाड़ करने का प्रचलन है तो एक ब्लोगर के लिए ब्लॉग एग्रीगेटर का जुगाड़ करने में क्या बुराई है | अब देखिये न घर में कोई भी काम या समारोह हो बड़े बुजुर्ग उसकी व्यवस्था का जुगाड़ करने में लग जाते है या छोटो को सम्बंधित व्यवस्था का जुगाड़ करने का आदेश थमा देते है | चुनावों में भी नेता पहले टिकट का जुगाड़ करने में जुटते है , टिकट का जुगाड़ हो जाए तो चुनाव खर्च , कार्यकर्ताओं व वोटों का जुगाड़ और फिर जीत गए तो येन-केन प्रकारेण मंत्रिपद पाने का जुगाड़ करने में लग जाते है | पार्टियाँ भी पहले तो जिताऊ उम्मीदवारों का जुगाड़ करती है फिर सरकार बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना कर संख्या बल का जुगाड़ करने का भरसक प्रयास करती है जैसे अब इन चुनावों के बाद हरियाणा मेंभुप्पी भैया ने बहुमत से कम सीटे आने पर जुगाड़ कर सरकार बनाने का दावा ठोक दिया |कहने का मतलब हमारे यहाँ हर जगह जुगाड़ लगाना पड़ता है चाहे घर हो,राजनीती हो,कारखाने हो या व्यापार हर जगह बिना जुगाड़ कोई कार्य संपन्न होता ही नहीं | इसी जुगाड़ तंत्र से प्रेरित होकर मैंने भी एक ब्लॉग एग्रीगेटर के जुगाड़ का मन बनाया | नेट पर फ्री में मिलने वाली कई वेब स्क्रिप्ट तलाशी लेकिन कोई काम की नहीं निकली कुन्नु जी ने भी एक स्क्रिप्ट बताई लेकिन उसके लिए जरुरी पाइथोन मेरे होस्टिंग सर्वर पर उपलब्ध नहीं है और हो भी नहीं सकता | फिर वर्डप्रेस के ऑटोब्लोगिंग प्लगिन्स खंगाले उनमे कई चीजे काम की लगी जिन्हें एग्रीगेटर के बतौर इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन वहां भी मजा नहीं आया आखिर जब ब्लोगर के विजेट्स पर दिमाग दौडाया तो पता चला यह जुगाड़ तो पहले से ही है और हर ब्लोगर आंशिक तौर पर इसका इस्तेमाल भी कर रहा है | यह तो वो बात हुई " गोद में छोरो और गांव में हेरो " | मै बात कर रहा हूँ ब्लोगर के विजेट ब्लॉग रोल की | जिसके जरिये हम अपने ब्लॉग पर पसंदीदा चिट्ठे जोड़ते है और उन चिट्ठों की फीड हमारे ब्लॉग पर अवतरित होती रहती है इसी विजेट को हम अपने ब्लॉग के मुख्य प्रष्ठ पर लगादे जिसमे जुड़े सभी चिट्ठों की फीड अपडेट होती रहेगी और एक विजेट साइड बार में लगादे जिसमे चिट्ठे की फीड का पता टिप्पणी वाला जोड़ दे जिससे वहां उन चिट्ठों पर हुई टिप्पणियाँ भी दिखाई देती रहेगी टिप्पणी की फीड http://yourblog.blogspot.com/feeds/comments/default लिख कर जोड़ी जा सकती है बस बन गया आपका ब्लॉग एग्रीगेटर | इसमें न तो पसंद का चटका होगा और न ही किसी टांग खेंचू को टांग खींचने का कोई मौका मिलगा | तो अब यहाँ चटका लगाकर देखिये इस ब्लॉग एग्रीगेटर जुगाड़ को |
डिस्क्लेमर :- कृपया इसे गंभीरता से ना ले और ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत का इस्तेमाल करते रहे |
आज से तीन साल पहले एक मित्र ने सहारा का नया लेपटोप ख़रीदा था | तीन चार महीने बाद जब भी लेपटोप चालू किया जाता माइक्रोसोफ्ट का एक चेतावनी भरा सन्देश आता you may be a victim of software counterfeiting | सन्देश देखकर मित्र घबरा गए उन्होंने मुझसे भी सलाह मांगी लेकिन उस वक्त मुझे भी कंप्यूटर के सम्बन्ध में प्रयाप्त ज्ञान नहीं था कई और जानकार मित्रों ने यही बताया कि लेपटोप विक्रेता ने हो सकता है एक्सपी का ट्राइल वर्जन इंस्टाल कर दिया होगा जिसकी मियाद ख़त्म होने के बाद अब माइक्रोसोफ्ट आपको चेतावनी सन्देश भेज रही है और आप कभी भी फंस सकते है आखिर कईयों की सलाह और डर के मारे मित्र ने लेपटोप किसी हार्डवेयर इंजिनियर को बुला कर फोर्मेट ही करवा डाला | अब जब हम भी कंप्यूटर के बारे में थोडा जानने लगे है तब पता लगा कि इस तरह का सन्देश देने वाली फ़ाइले तो पहले ही विण्डो एक्सपी में मौजूद रहती है और इन्हें आसानी से हटाया जा सकता है | तो आईये अब चर्चा करते है इन्हें हटाने के तरीके पर - १- सबसे पहले my computer की C Drive खोले २- अब windows नाम का फोल्डर खोलकर उसमे system32 नाम का फोल्डर खोलें | ३- system32 फोल्डर में ये दो फ़ाइले खोजे - 1- Wgalogon.dll 2- WgaTray ४- हमें इन दोनों फाइल्स को हटाना है लेकिन हम कितनी भी कोशिश करे ये डिलीट नहीं होती अतः इन्हें १-यहाँ से कट कर कहीं अन्य जगह पेस्ट कर दे २- या इनका नाम बदल दें अब कंप्यूटर रिस्टार्ट करे उपरोक्त सन्देश आना बंद हो जायेगा |;
दीपावली आई अपने साथ ढेरों खुशियाँ और उपहारों के साथ ढेरों शुभकामना सन्देश लाई लेकिन इन सब खुशियों का इजहार करने के लिए हम ने जो पटाखे छोड़े उन्होंने प्रदूषण भी जम कर फैलाया | दीपावली वाली रात्री को प्रदूषण का आलम यह था कि घर के बाहर निकलते दम घुट रहा था चारों और धुँवा ही धुँवा | सुबह जब उठे तो देखा घर के बाहर सड़क पटाखों के कूड़े से पटी पड़ी है | इस प्रदूषण की मर तो सह गए लेकिन इस त्यौहार पर ब्लॉग के ट्रेफिक पड़े साइड इफेक्ट का दर्द अभी भी कचोट करा है | दीवाली के एक दिन पहले से ही ब्लॉग पर ट्रेफिक का ग्राफ गिरने लग गया था जो अभी भी संभलने की ही कोशिश कर रहा है | ;
एक सुबह जब किसान अपने खेतों में पहुंचे तब रेत के धोरों पर उगी अपनी बाजरे की तहस नहस फसल देख बड़े निराश हुए और जब फसल उजाड़ने वाले की तलाश की तो किसानो को खेत में किसी जानवर के बड़े-बड़े गोल-गोल आकृति के पदचिन्ह दिखाई दिए जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखे थे इस तरह अनजान पदचिन्ह देख किसान घबरा कर उल्टे पांव गांव दौड़ आये और अपनी समस्या से हमेशा की तरह ताऊ बुझागर को अवगत करा समाधान खोजने का आग्रह किया | ताऊ बुझागर जी गाँव के बुजुर्ग व्यक्ति थे और गांव वालों की नजर में सबसे बुद्धिमान और हर विषय के जानकर | गांव में चाहे कोई महामारी फैले , किसी में भुत-प्रेत की छाया आये , कोई बीमार हो या किसी और समस्या से पीड़ित | सबका इलाज और आसरा ताऊ बुझागर जी ही थे | किसानो के आग्रह पर ताऊ बुझागर जी खेतो में वे बड़े-बड़े पदचिन्ह देखने गए लेकिन ऐसे पदचिन्ह तो ताऊ बुझागर जी ने भी पहली बार देखे थे लेकिन बुझागर जी ठहरे पक्के ताऊ सो बुझागर जी ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए किसानो से कहा - ताऊ बुझागर जी :- अरे भाई गांव वालो ! जिस दिन हूँ मर ज्यासूं जद थारौ कांई हुसी ! अरे बावली बुचौ तुम इन पदचिन्हों को भी नहीं पहचान सके | तुम्हारा तो भगवान् ही मालिक है | अरे बिना अक्ल वालो यह तो घटियों के पदचिन्ह है | तुम्हारे गाँव की घटियां रात को चरने के लिए खेतों में आने लग गयी है आज रात उन्हें रस्सों से कस कर बाँध देना | (घटियां पत्थर से बनी छोटी छोटी हाथ से चलने वाली चक्कियों को कहा जाता है गांवों में छोटी चक्कियां अभी भी दलिया वगैरह दलने के लिए इस्तेमाल की जाती है |) ताऊ बुझागर जी की सलाह पर गाँव वालों ने अपने अपने घरों में रखी घटियों को रस्सों से बाँध दिया लेकिन जब दुसरे दिन खेतों में गए तब फिर अपनी उजड़ी फसल देख हैरान हो गए | ताऊ बुझागर जी ने फिर कह दिया - कि तुम्हारी घटियां जादुई हो गयी है अतः अपने आप रस्सों से खुलकर खेतो में पहुँच जाती है अतः आज रात अपनी अपनी घटियों पर पहरा रखो | गांव वाले ताऊ की बात मान रात भर घटियों की पहरेदारी करते रहे और उधर वह बड़ा जानवर उनके खेतो में खड़ी फसल तबाह करता रहा | आखिर परेशान हो गांव के किसानो ने खेतों में पहरा देने का निश्चय किया | चांदनी रात थी पहरा देते किसानो ने देखा एक बहुत बड़ा काले रंग का भीमकाय जानवर जिसके आगे पीछे दोनों और पूछ थी अपनी अगली पूंछ से बाजरे की फसल को तोड़-तोड़ कर खा रहा था और अपने बड़े बड़े पैरों से कुचल कर फसल उजाड़ रहा था | किसानो ने ऐसा जानवर पहले कभी नहीं देखा था अतः वे डर के मारे वहीँ दुबक गए और एक व्यक्ति को ताऊ बुझागर जी को बुलाने भेजा ताकि वे इस मुसीबत से उन्हें बचा सके | ताऊ बुझागर जी भी अपनी लाठी व लालटेन हाथ में ले वहां आ गए लेकिन यह जानवर तो उन्होंने भी जिन्दगी में पहली बार देखा था | लेकिन ताऊ कैसे मान ले कि उन्होंने उस जानवर को नहीं पहचाना | सो ताऊ बुझागर जी ने उस भीमकाय जानवर को देख वहां उपस्थित किसानो को कहा - ताऊ बुझागर जी :- अरे बावली बुचौ ! कभी अपना दिमाग भी इस्तेमाल करना सीख जावो वरना ' जिस दिन हूँ मर ज्या सूं जद थारौ कांई हुसी | अरे बावलों ! यो या तो चाँद रौ चन्द्रोल्यों हुसी नहीं तो बैतो(चलता हुआ) सूरजी तुय गयो हुसी |
यदि किसी पुस्तक में विषय सूची ही ना हो तो उस पुस्तक में किसी विषय को ढूँढना कितना दुष्कर होगा ठीक यही बात हमारे ब्लॉग पर भी लागू होती है बिना लेख सूची के पाठक को पता ही नहीं चलता कि हमने अपने ब्लॉग पर किन-किन विषयों पर क्या-क्या लिख रखा है | इसी लेख सूची या विषय सूची के ना होने से पाठक ब्लॉग एग्रीगेटर से किसी पोस्ट का शीर्षक देख कर आता है और वही पोस्ट पढ़कर चलता बनता है लेकिन यदि हमारे ब्लॉग पर अपने सभी लेखों की एक लेख सूची हो तो उसमे देखकर पाठक अपनी रूचि अनुसार आपका लिखा और भी पढेगा और आपके ब्लॉग पर पेज व्यू बढ़ेंगे | तो आईये आज अपने ब्लॉग पर प्रकाशित सभी लेखों की एक सूची बनाने के बारे में जानते है | दो चरणों में बनने वाली यह लेख सूची बनाना बहुत आसान है | पहला चरण - १- अपने ब्लोगर खाते में लोग इन करे | २- डेशबोर्ड में Layout. पर चटका लगायें | ३- अब edit HTML पर चटका लगायें | ४- किसी भी संभावित अनहोनी से बचने के लिए अपने ब्लॉग टेम्पलेट का बेकअप जरुर ले ले | ५- Expand Widget Templates. पर चटका लगाएं |
६- अब अपने टेम्पलेट के कोड में निम्नलिखित कोड ढूंढे | <b:include data='post' name='post'/> ७- उपरोक्त कोड की जगह नीचे लिखा कोड पेस्ट कर दे |
पहला चरण पूरा हुआ | अब दूसरा चरण १- Layout. में Add a Page element. पर चटका लगाकर HTML/JavaScript. क्लिक करे | २- अब नीचे लिखा कोड HTML/JavaScript. में पेस्ट कर दे | <a href="http://YourBlogName.blogspot.com/search?max-results=200">Show all post »»</a>
३- YourBlogName की जगह अपने ब्लॉग का पता भरदे | जैसे :- http://bhagatpura.blogspot.com कोड में जो 200 संख्या लिखी गयी है वह आपने जितनी पोस्ट दिखानी है उसके हिसाब से घटा बढा लें |
४- सेव चेंज पर चटका लगाकर इसे सहेज ले | अब तैयार है आपके ब्लॉग की लेख सूची या विषय सूची | जो इस तरह दिखाई देंगी |
यदि आप उपरोक्त कोड से विषय सूची नहीं बना पाते है तो दूसरा तरीका जानने के लिए यहाँ चटका लगाये
ताऊ रामजीलाल गन्ने के खेतों में काम करते करते उकता गया अतः ताऊ रामजीलाल ने कहीं घूम कर आने के उद्देश्य से अपने छोरे की ससुराल जाने का प्रोग्राम बना लिया | ताऊ ने सोचा एक घूमना हो जायेगा और दूसरा समधियों से मिलना भी | और आते वक्त कुछ न कुछ उपहार भी मिल जायेगा |अब छोरे की ससुराल जाना है तो साथ मिठाई आदि भी तो ले जानी पड़ती है अतः ताऊ रामजीलाल कौनसी मिठाई ले जानी चाहिए इस पर गहन विचार करने लगा ताऊ को कुछ समझ नहीं आ रहा था और फिर ताऊ सस्ते में भी निपटने के चक्कर में था | आखिर ताऊ को एक आईडिया आया कि सभी मिठाइयाँ तो चीनी (मीठे) से बनती है और चीनी (मीठा) गन्ने से बनती है अतः क्यों ना छोरे की ससुराल वालों के लिए गन्ने का ही एक गट्ठर ले जाया जाय | गन्ना ताऊ के खेत में खूब था सो ताऊ गन्ने एक गट्ठर बाँध सिर पर रख पहुँच गया अपने छोरे की ससुराल | वहां पहुँच ताऊ गन्ने का गट्ठर समधन को देते हुए बोला - ताऊ :- समधन जी ! जै राम जी की ! यह लीजिये यह गन्ने का गट्ठर | दरअसल में मिठाई की जगह ये ही ले आया हूँ अब आप देखिए ना गन्ने से ही चीनी बनती है और चीनी से ही मिठाई बनती है अतः जब सब कुछ बनना ही गन्ने से है तो मिठाई आदि लाने का क्या फायदा ? समधन भी किसी ताई से कम नहीं थी मिठाई की जगह गन्ने की गठरी देख मन ही मन सोचने लगी कि इस कंजूस ताऊ को तो इसका जबाब विदाई के समय दूंगी | आखिर दो दिन की मेहमानवाजी कराने के बाद जब ताऊ अपने गांव आने के लिए रवाना होने लगा तो समधन ताऊ को विदाई के साथ एक कपास(रुई) की गठरी थमा बोली - समधन :- हे समधी ताऊ ! इसी कपास से धागे बनते है और धागों से ही कपडा बनता है अतः यह कपास की गठरी आपका विदाई उपहार है अपने लिए धोती कुरता बनवा लेना |
कम वर्षा ,रेतीली अनुपजाऊ भूमि में भी अच्छी पैदावार देने की वजह से बाजरा राजस्थान में होने वाली फसलों में मुख्य फसल है | राजस्थान के हर घर में बाजरा बड़े शौक से खाया जाता है खास कर सर्दियों में तो बाजरा हर एक की खाने में पहली पसंद होता है | बाजरे की रोटी को मारवाड़ जोधपुर में तो सोगरे के नाम से जाना जाता है | सस्ता होने की वजह से बाजरा गरीबों मजदूरों का मुख्य खाद्य अनाज है | राजस्थान में हर कार्य स्थल पर बाजरे की रोटी प्याज की घंटी के साथ खाते श्रमिक अक्सर दिखाई दे जाते है | गवार की फलियों की सब्जी , मुली की पत्तियों सहित सब्जी , सरसों का साग या मांसाहारी लोगों के लिए तरीदार मांस के साथ यदि खाने में सोगरे ( बाजरे की रोटियां ) हो तो खाने का स्वाद ही निराला हो जाता है | यही नहीं सुबह के नाश्ते में ठंडी बाजरे की रोटी दही में चूर कर खाने का तो लुफ्त ही अलग है | पोष्टिक और स्वास्थ्य वर्धक होने के बावजूद सस्ता होने की वजह से किसानो के लिए बाजरे की फसल मुनाफादायक नहीं होती इसीलिए सिंचित भूमि वाले किसान बाजरे की बजाय अन्य फसलों की खेती को तरजीह देते है | जोधपुर पर आक्रमण के समय रास्ते में ही जोधपुर के सेनापति राव जैता और कुम्पा द्वारा दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी की आधी फौज को मौत के घाट उतार देने पर विचलित हो वापस लौटते हुए शेरशाह सूरी ने भी बाजरे का नाम ले अपनी हार पर टिप्पणी की - " एक मुट्ठी बाजरे की खातिर मै दिल्ली की सल्तनत खो बैठता |
कल इसी बाजरे की लहलहाती फसल जब मैंने उत्तर प्रदेश के खेतो में देखि तो मुझे लगा मै राजस्थान के खेतो में तो नहीं पहुँच गया |ग्रेटर नॉएडा की गगन चुम्बी इमारतों ,सुन्दर उद्यानों और शानदार ताज एक्सप्रेस वे से परी-चोक के आगे कासना होते हुए जैसे ही मै सिरसा गांव से खेतो से होकर गुजरने वाली १० की.मी.लम्बी सिकंदराबाद जाने वाली सड़क पर पहुंचा | धान,ज्वार व बाजरे की लहलहाती फसल के खेत देख मन प्रफुल्लित हो गया | उत्तर प्रदेश के खेतो में बाजरे की फसल देख मुझे आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी हुई | खेतो और गांवों के बीच गुजरते हुए तालाबो व नहर में नहाती भेंसों के द्रश्य , बिटोडो (गोबर के कंडो का ढेर ) पर व छप्परों पर उगी लोकी ,तोरई आदि की बेलें देख अपने ग्राम्य जीवन का बचपन याद आ गया | हम भी बचपन में ऐसे ही कच्चे छप्परों व बिटोडो पर वर्षा ऋतू में लोकी ,तोरई ,पेठे आदि की बेलें लगाने के साथ ही घर के पिछवाडे में मक्का ,ज्वार आदि के पौधे उगाते थे | हमारे गांव में मक्का व ज्वार की खेती करने का चलन नहीं था अतः जब अपनी उगाई मक्की के भुट्टे खाने के बाद जो आनन्द और संतुष्टि मिलती थी उसका वर्णन तो शब्दों में करना मुश्किल है |;
अब बाजरे की इतनी सारी महिमा पढ़ली है तो जोधपुर के लोक गायक कालू राम प्रजापत द्वारा बाजरे की महिमा में गाया यह गीत भी सुन लीजिए | बाजरिया थारो खिचडो लागै घणो स्वाद
बाजरिया थारो खिचडो लागै घणो स्वाद
बाजरे पर ताऊ का एक किस्सा जब बाजरे के खिचडे की बात चलती ताऊ अपने भतीजो से अक्सर कहा करते थे - ताऊ - कहीं हम मेहमान बनकर गए हो और वहां खाने में थाली में बाजरे का खिचड़ा परोसा हो जिसमे खूब घी डाला गया हो | भतीजा - तो ताऊ वहां अपना क्या हो ? ताऊ - अरे भतीजे ! अपनी तो सिर्फ उस खिचडे की थाली में अंगुलिया ही हो |
Twitter की तरह माइक्रोब्लोगिंग के लिए याहू ने भी Yahoo Meme के नाम से सेवा की शुरुआत की है जिसमे ट्विटर से भी ज्यादा सुविधाएँ दी गयी है इसमें सन्देश में ट्विटर से ज्यादा शब्द लिखे जा सकते है साथ ही फोटो वीडियो व संगीत आदि भी जोड़ा जा सकता है | ;
सर्च इंजिन गूगल में हमारे ब्लॉग की जितनी ज्यादा पोस्ट की इंडेक्सिंग होगी उतने ही सर्च के जरिए हमें गूगल से पाठक मिलेंगे | और यह कार्य हम ब्लॉग का एक साईट मैप बना कर गूगल वेब मास्टर औजार का इस्तेमाल कर आसानी से कर सकते है | आईये आज गूगल में साईट मैप जमा करने के बारे में चर्चा करते है :- १-सबसे पहले यदि आप गूगल वेब मास्टर टूल इस्तेमाल नहीं करते है तो यह टूल अपने गूगल खाते में जोड़े | २- यहाँ चटका लगाकर इस साईट मैप बनाने वाली वेब साईट से अपने ब्लॉग का साईट मैप बनाएं | अपने ब्लॉग का वेब पता लिखते समय ध्यान रखे ब्लॉग पते के आखिर में स्लेश जरुर लगाये '/' जैसे http://yourblog.blogspot.com/ create Blogger sitemap पर चटका लगाते ही साईट मैप इस तरह दिखाई देगा | 3-आपने ब्लॉग का साईट मैप atom.xml?redirect=false&start-index=1&max-results=500 कॉपी कर नोटपेड पर सहेज ले 4-और अब अपने गूगल खाते में लोग इन कर वेब मास्टर टूल खाता खोले | और site configuration में sitemap पर क्लिक करे 5-नोटपेड पर सहेजा अपना साईट मैप चित्र के अनुसार भर कर सबमिट साईट मैप पर चटका लगा दीजिए हो गया आपका साईट मैप सबमिट | आमतोर पर साईट मैप जमा होने के बाद इंडेक्सिंग होने में एक दो दिन का समय लगता है अतः एक दो दिन बाद आप अपने वेब मास्टर औजार खाते में लोग इन कर साईट मैप में कितने यु आर एल जमा हुए आसानी से देख सकते है | याहू और बिंग में साईट मैप जमा करने के लिए साईट मैप बनाने वाली वेब साईट पर ही चित्र में दिखाई अनुसार चटका लगा दे आपका साईट मैप अपने आप जमा हो जायेगा
ताऊ लोग हर क्षेत्र में मिलेंगे कुछ ताऊ तेज तर्रार होते है कुछ बड़े भोले भाले | गांवों में अक्सर ऐसे भोले भाले ताऊ अपनी हरकतों व कार्यकलापों से गांव वासियों की ठिठोली व मजाक के पात्र बनते रहते है और इस हंसी ठिठोली का खुद भी गांव वालों के साथ भरपूर लुफ्त उठाते है | पेश है ऐसे ही कुछ ताऊओं के कुछ असली किस्से | सारी कमाई तो मै कर ल्याया अब आसाम में क्या रखा है : ताऊ मेरे पडोसी गांव राजपुरा के कुछ लड़के बस पकड़ने के लिए गांव से ३ की. मी. दूर मुख्य सड़क पर बने बस स्टैंड की और आ रहे थे उनमे से कुछ को रोजगार के लिए आसाम जाना था तो कुछ उन्हें बस स्टैंड तक छोड़ने के लिए साथ आ रहे थे | रास्ते में उन्हें उनके ही गांव का एक ताऊ मिला जो आसाम में नौकरी से छुट्टी लेकर वापस गांव जा रहा था | लड़कों के पास आने और यथा अभिवादन करने के बाद ताऊ ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए पूछा :- ताऊ :- अरे ! आज ये सामान उठाकर कहाँ जा रहे हो बच्चो | एक लड़का :- ताऊ श्री ! हम कमाई करने के लिए आसाम जा रहे है | ताऊ :- अरे बावली बूचो ! अब आसाम में क्या रखा है ? वहां तो जितनी कमाई थी वो सारी तुम्हारा ये ताऊ कर लाया | ( राजपुरा के ये ताऊ बहुत भोले इंसान थे आसाम से जो कुछ कमा कर लाये उसके बारे में समझ रहे थे कि आसाम में तो बस इतना ही था जो वह ले आये | इन ताऊ जी के कई असली किस्से उसी गांव के पदम सिंह जी जो कालेज में हमारे वरिष्ठ थे अक्सर सुनाते रहते थे | उन्ही किस्सों में एक था ऊपर लिखे किस्से ) उन्ही ताऊ का एक और असली किस्सा उसने एक तोडा मै दो तोडूंगा ताऊ कुँए से पानी के दो मटके कंधो पर रखकर घर ला रहे थे , रास्ते में किसी का एक टुटा मटका पड़ा था जिसे देख ताऊ रुके और पास खड़े लोगो से पूछा - ये रास्ते में मटका किसने तोड़ दिया | वहां खड़े लोगों में से एक ने ताऊ को बताया कि यह मटका तो आप ही के परिवार की एक दरोगी (दासी ) से टूट गया | यह सुनते हुए ताऊ ने आव देखा न ताव और अपने कन्धों पर रखे दोनों मटके गिराकर तोड़ दिए और बोले :- दरोगी एक मटका तोड़ सकती है मै दो क्यों नहीं ? अल्ला वल्ला कुछ नहीं करेगा माई अब तो ऊपर वाले को याद कर घटना लगभग पच्चीस साल पुरानी है ताऊ जय किशन जी हमारे गांव में डाकिया का काम करते थे गर्मियों का मौसम था अतः गांव की डाक बड़े पोस्ट ऑफिस खूड में जमा कराने के लिए जाने हेतु आज डाकिया ताऊ पैदल न जाकर बस स्टैंड पर बस का इन्तजार कर रहे थे कि बस स्टैंड से कुछ ही दूर अचानक एक जोंगा गाड़ी सड़क से नीचे उतर एक बड़े खेजडी के पेड़ से जा टकराई | टक्कर इतनी जोरदार थी कि टक्कर के बाद पेड़ के सभी डाल टूट कर जोंगा गाड़ी के ऊपर गिर गए | यह दुर्घटना देख बस स्टैंड पर डाकिया ताऊ जय किशन जी के साथ बैठे सभी लोग मदद के लिए दौड़ पड़े और घायलों को गाड़ी के अन्दर से निकलने लगे जिनमे अधिकतर की मृत्यु हो चुकी थी कुछ की हालत गंभीर थी सभी लोग हमारे पास के एक कस्बे के एक मुस्लिम परिवार के लोग थे | उनके साथ एक बुजुर्ग महिला भी जिसे दुर्घटना में कोई चोट नहीं आई लेकिन अपने बेटों पोतों को घायल देख बुढिया ने छाती पीट-पीट कर अल्लाह अल्लाह कहते हुए विलाप करना शुरू दिया जो स्वाभाविक भी था , अन्य सभी लोग घायलों की मदद में लगे थे और किसी ने ताऊ जय किशन जी को बुढिया को सांत्वना देकर समझाने को कहा | बुढिया का विलाप सुन ताऊ जय किशन जी उसे सांत्वना के साथ शांत करने की कोशिश करते हुए समझाने के उद्देश्य से कहने लगे - ताऊ जय किशन जी :- अरे माई ! जो होना था सो हो गया अब रोने पीटने से क्या होगा और अब अल्लाह वल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा बस तू तो ऊपर वाले को याद कर वही सब ठीक कर देगा |
अब ताऊ जय किशन जी तो ठहरे ताऊ उन्होंने यह तो सोचा ही नहीं कि बेचारी बुढिया तो अल्लाह के रूप में ऊपर वाले को ही याद कर रही है | आज ताऊ जय किशन जी बूढे हो चुके है पर अक्सर चौपाल पर उनके आते ही कभी न कभी कोई न कोई ताऊ के साथ ठिठोली करने के लिए इस घटना की चर्चा छेड़ देते है और ताऊ खुद भी इस ठिठोली का भरपूर मजा लेते है कभी नाराज नहीं होते |
आज गूगल पर सर्च करते हुए अपने ब्लॉग की एक पोस्ट का लिंक मिला जिस पर चटका लगाते ही सुरेखा.कॉम का एक ब्लॉग एग्रीगेटर खुला जहाँ अंग्रेजी ब्लोग्स के साथ ही हिंदी ब्लोग्स की पोस्ट्स के लिंक भी मिले | जिज्ञासा वश सुलेखा.कॉम का यह एग्रीगेटर खंगालने पर इसके कई फीचर बढ़िया लगे यहाँ राज्य , शहर आदि के हिसाब से ब्लॉग तलाश कर पढ़े जा सकते है | सुलेखा .कॉम का यह एग्रीगेटर भी हिंदी ब्लॉग जगत को आगे बढ़ाने में सहायक होगा यही अपेक्षा है | अपने ब्लॉग एग्रीगेटर के बारे में सुलेखा.कॉम वाले लिखते है :-Voice of Indians - All Indian Blogs right here
Voice of Indians is an initiative by sulekha.com to aggregate all Indians Blogs & Bloggers across various blogging sites. The Blog Aggregator Web service is designed by Sulekha.com and uses the atom/RSS feed to aggregate blogs on topics that is of interest to Indians. Every blog found here will point to the original blog link. तो आइए सुलेखा.कॉम के इस ब्लॉग एग्रीगेटर का भी स्वागत करे |
ताऊ रामजीलाल के मन में समाज के भले के लिए कुछ करने की बड़ी तमन्ना थी लेकिन ताऊ किसी भी काम धंधे में कामयाब नहीं हो पा रहा था तो समाज सेवा कहाँ से करे फिर ताऊ कुछ पढ़ा लिखा भी बहुत कम था | किसी भी काम धंधे में कामयाब नहीं होने का कारण भी ताऊ अपनी शिक्षा की कमी को ही मानता था अतः ताऊ के मन में शिक्षा के लिए कुछ करने का जज्बा जागा उसने तय किया कि भले ही वह पढ़ लिख नहीं पाया लेकिन इस क्षेत्र में कुछ करके अपना रोजगार भी चलाया जा सकता है और समाज का भला भी | इसी योजना के तहत ताऊ एक दूर दराज के गांव में पहुँच गया जहाँ स्कूल दूर दूर तक नहीं था वहां पहुँच ताऊ ने "ताऊ स्कूल " खोल दिया जिसमे गांव वालों ने अपने बच्चो को बड़े खुश होकर भरती भी करा दिया | चूँकि ताऊ खुद तो पढ़ा लिखा था नहीं जो बच्चो को कुछ पढ़ा पाता | लेकिन ताऊ भी तो आखिर ताऊ था सो उसने एक बच्चे को दुसरे को पढाने को कह दिया अब बच्चे आपस में ही एक दुसरे को पढाते रहे और ताऊ का स्कूल चलता रहा | गांव वाले भी खुश थे कि उनके बच्चों के लिए गांव में ही स्कूल खुल गया और बच्चे खुश कि मास्टर जी से डांट नहीं खानी पड़ती | ऐसे ही करके कोई चार छह महीने निकल गए | एक दिन एक औरत के पति का जो फौज में था एक टेलीग्राम आया | अब गांव में कोई दूसरा इतना पढ़ा लिखा तो था नहीं इसलिए औरत टेलीग्राम पढ़वाने के लिए स्कूल में ताऊ मास्टर जी के पास चली आई | अब अंग्रेजी में टेलीग्राम देख ताऊ मास्टर जी के तो पसीने छुट गए और आखों के आगे अँधेरा छा गया | पढना आये तो टेलीग्राम पढ़े ना ! आखिर ताऊ को अपनी इस हालत पर रोना आ गया | ताऊ को रोता देख औरत ने सोचा शायद मेरा पति कही आतंकवादियों से लड़ता हुआ शहीद हो गया है और इसीलिए दुःख भरी खबर पढ़ कर मास्टर जी रो रहे है | सो उसने भी दहाड़े मार मार कर रोना शुरू कर दिया और थोडी देर में गांव में कोहराम मच गया हर कोई उस औरत के पति को मृत ही समझ रहा था | इसी बीच उसी गांव का एक पढ़ा लिखा नौजवान शहर से गांव पहुंचा और शोक प्रकट करने वह भी उस फौजी के घर चला आया वहां उसने जिज्ञासा वश उसने टेलीग्राम मांग लिया और पढने लगा | उस टेलीग्राम में उस फौजी की प्रमोशन होने व अगले हफ्ते छुट्टी आने की सुचना थी | ख़ुशी की खबर सुन उस औरत सहित सबकी जान में जान आई | और गांव के सरपंच सहित वह पढालिखा नौजवान टेलीग्राम ले मास्टर ताऊ के पास पहुंचे और ताऊ से झूंठ बोलने का कारण पूछा | सरपंच - अरे ताऊ मास्टर जी ! इस टेलीग्राम में तो फौजी की तरक्की और छुट्टी आने की सुचना थी आपने उसके मरने की खबर क्यों सुना दी ? ताऊ - सरपंच जी ! मैंने तो उस औरत को कुछ नहीं कहा | बस मुझे रोता देख वह यही समझी कि उसके पति के मरने की खबर होगी | सरपंच - तो ताऊ मास्टर जी आप टेलीग्राम पढ़कर रोये क्यों ? ताऊ - सरपंच जी दरअसल बात यह है कि मुझे कुछ भी लिखना पढना नहीं आता इसलिए जब मै वह टेलीग्राम नहीं पढ़ पाया तो मुझे अपनी स्थिति पर रोना आ गया , में तो इसलिए रो रहा था कि काश आज में पढ़ा लिखा होता तो मुझे यह दिन नहीं देखना पड़ता | ;