जैसी करनी वैसी भरनी

अक्ल की पौशाक

बलात्कार के बाद का बलात्कार

मूंछों पर ताव

देर है अंधेर नहीं

किले का विवाह

अश्वमेघ यज्ञ का स्वांग

अश्वमेघ यज्ञ का स्वांग

संगत का असर

संगत का असर

चतुर नार

चतुर नार

बत्तीस लक्षणी औरत

जिन्दा भूत

जिन्दा भूत

मुंहणोंत नैणसीं

मुंहणोंत नैणसीं

भूतों की भूतनी

केसे कह दू

निर्भीक कवि वीरदास चारण (रंगरेलो) और उनकी रचना "जेसलमेर रो जस "

निर्भीक कवि वीरदास चारण (रंगरेलो) और उनकी रचना "जेसलमेर रो जस "