History of Lamiya Fort लामिया का इतिहास

ठाकुर नाहरखान आसोप जो आज भी लोकदेवता के रूप में पूजे जाते हैं

Pratihar Samrat Mihir Bhoj Dev सम्राट मिहिर भोजदेव

आचार्य चतुरसेन ने क्रांतिकारी राव गोपालसिंह से भेंट के बाद ये लिखा