दाहिमा
गोत्र- गार्गेय, वेद-यजुर्वेद, सूत्र - पारस्कर गृह्यसूत्र, प्रवर- पौलस्त्य, विश्वश्रवस, दंभोली, शाखा - वाजसनेयी, माध्यन्दिनी, कुलदेवी - दधिमति माता
जोधपुर ( मारवाड़) में नागौर इलाके में गोठ और मांगरोल के बीच दधिमति माता का मन्दिर है, जिससे वह क्षेत्र दधिमति क्षेत्र कहलाता है। यहाँ के होने से ये दहिमा क्षत्रिय कहलाए। ये पुरुवंश की कौशिक शाखा में माने जाते हैं, परन्तु कहीं इन्हें सूर्यवंश की शाखा भी माना गया है।
चौहान साम्राज्य के समय में इनका बड़ा महत्त्व व प्रभाव था । सम्राट पृथ्वीराज के पिता सोमेश्वर के समय में कैमास दाहिमा उसका प्रधानमंत्री था । सोमेश्वर ने उसे जागीर में नागौर का इलाका दिया था । सम्राट सोमश्वर की मृत्यु के समय पृथ्वीराज तृतीय बालक था, इसलिए साम्राज्य का कार्य उसकी माता करपूर देवी देखती थी। उसने भी अपना प्रधानमन्त्री कैमास को ही रखा । पृथ्वीराज जब कुछ बड़ा हुआ, उस समय शहाबुद्दीन गौरी ने गुजरात के शासक भीमदेव सोलंकी पर हमला किया था। भीम ने चौहानों से सहायता चाही। पृथ्वीराज को गौरी पर बड़ा क्रोध आया और यह चाहा कि गुजरात की मदद पर सेना भेजी जाए, परन्तु उस समय तक शासन कैमास के ही हाथ में था । उसने युवा सम्राट को यह कहकर शान्त किया कि हमारे तो ये दोनों ही शत्रु हैं, इसलिए गुजरात की मदद पर हमें सेना नहीं भेजनी चाहिए। कैमास जैसे महामंत्री के लिए यह बहुत ही अदूरदर्शितापूर्ण निर्णय था । नहीं तो देश का शत्रु वहीं समाप्त कर दिया जाता ।
पृथ्वीराज ने भी साम्राज्य का कार्यभार सम्भालने के बाद भी कैमास को ही अपना प्रधानमंत्री बनाए रखा। एक बार गौरी ने नागौर पर चढ़ाई की। पृथ्वीराज सेना लेकर उसके मुकाबले पर गया । यह युद्ध सारूंड में हुआ। कैमास ने एक ओर से चार हजार सेना सहित मुसलमानों पर हमला किया। कैमास इस युद्ध में घायल हुआ। इतने ही में कैमास के भाई वीरवर चामुंडराय ने दूसरी तरफ से तेजी से गौरी पर हमला करके उसे कैद कर लिया था ।
दूसरी बार शहाबुद्दीन गौरी ने दिल्ली पर हमला किया। उस समय भी चामुंडराय दाहिमा ने गौरी को हराकर कैद किया । पृथ्वीराज की यह महान् भूल थी कि माफी मांगने पर वह शहाबुद्दीन को छोड़ देता था। एक बार जब पृथ्वीरात विवाह करने अजमेर से बाहर गया, तब राजधानी की रक्षा का भार चांमुडराय दाहिमा पर छोड़ा। चामुंडराय पृथ्वीराज के सामंतों में सबसे बलिष्ठ था। एक बार पृथ्वीराज हाथियों के शिकार हेतु गया। उस समय भी वह चामुंडराय को साथ ले गया था। राजस्थान में जंगली हाथी अकबर के समय तक भी थे तथा 'अकबरनामा' के अनुसार वह उनका शिकार किया करता था ।
एक बार शहाबुद्दीन गौरी ने भारत पर चढ़ाई की, उस समय पृथ्वीराज ने 25 हजार घुड़सवार सेना सहित उसका मुकाबला घग्घर नदी पर किया था । वहाँ उसका प्रधानमंत्री कैमास घायल हुआ था। विजय सम्राट की हुई । कैमास की मृत्यु पर सम्राट पृथ्वीराज ने उसके पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया तथा उसे हांसी की जागीर दी ।
चामुंडराय पृथ्वीराज और गौरी के अन्तिम युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुआ था । चामुंडराय की वर्तमान आगरा के पास बड़ी जागीर थी। अब दाहिमा मेरठ के पास बागपत आदि कुछ गाँवों में हैं।
सन्दर्भ : "राजपूत शाखाओं का इतिहास " लेखक - देवीसिंह मंडावा
