एक ताना बना पूरे राज्य के विनाश का कारण | बड़गूजर राजवंश का दर्दनाक इतिहास

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 "ताने मारना व्यक्ति के स्वभाव में है पर कई बार छोटे छोटे तानों का व्यक्ति के जीवन पर व्यापक असर हो जाता है।  इतिहास में ताने मारने की घटनाएं नए राज्यों की स्थापना और स्थापित राज्यों के खात्मे की वजह बनी है।  इसलिए व्यक्ति को बोलने में सावधानी बरतनी चाहिए और किसी पर बाते बेबात पर ताने नहीं मारने चाहिए। ताना मारने की ऐसी ही एक घटना ने बड़गूजर राजवंश के राजौर, माचेड़ी और देवती से राज्य छीन लिया। इस घटना के बारे में कर्नल टॉड और बड़गूजर राजवंश इतिहास पुस्तक में महेंद्रसिंह तलवाना ने विस्तार से उल्लेख किया है। घटना इस प्रकार है- 

उस वक्त माचेड़ी पर बड़गूजर क्षत्रिय राजवंश के राजा अद्योत सिंह का शासन था। राजा अद्योत सिंह जी बादशाह औरंगजेब के मनसबदार थे और बादशाह की तरफ से अनूपशहर में तैनात थे। राजा ने अपने राज्य की रक्षा का भार अपने छोटे भाई जोरावर सिंह को सौंप रखी थी। हालाँकि जोरावर उस वक्त अल्पवयस्क थे। एक दिन जोरावर सिंह ने जंगल में शिकार पर जाने की योजना बनाई और अपनी भाभी राजा अद्योत सिंह की रानी के पास जाकर जल्दी से भोजन कराने का आग्रह किया।  तब रानी ने उनका उतावलापन देखकर कहा कि- देवर जी आप उतावले तो ऐसे हो रहे हो जैसे आमेर के राजा जैसिंघ जी के साथ युद्ध में उनके सीने पर भाला मारने जा रहे हो ! 

रानी के ऐसे बोल सुनकर जोरावर सिंह को मन में बड़ा आघात लगा, और उसने सोचा और भाभी द्वारा ताना मारने के पीछे का कारण कछवाहों द्वारा बड़गूजरों का राज्य छीनना लगा। और दुल्हेराय जी कछावा द्वारा बड़गूजरों से दौसा छीनने की घटना का स्मरण करते हुए प्रतिज्ञा की कि - अब मैं सवाई जयसिंह के सीने में भाले का आघात करने के बाद ही आपके हाथों का खाना खाऊंगा। ऐसी प्रतिज्ञा कर जोरावर सिंह अपने कुछ साथियों सहित आमेर के लिए रवाना हुए।  वहां मौके की तलाश में कई दिन रुके, आखिर एक दिन उन्हें अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का मौका मिला।  उस दिन अक्समात किले से बाहर आते हुए राजा जयसिंह जी पर जोरावर सिंह ने भाला फेंका पर वह भाला जयसिंह जी को नहीं लगा और उनके अंगरक्षकों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए जोरावर सिंह बड़गूजर को पकड़ा लिया। 

राजा जयसिंह जी के सामने जब बड़गूजर राजकुमार को पेश किया गया, तब उसने अपना परिचय देते हुए भाला फेंकने के पीछे का कारण और अपनी प्रतिज्ञा के बारे में विस्तार से बताया। राजा जयसिंह जी ने अपने मन के गुस्से को छुपाते हुए बड़गूजर राजकुमार के साहस की सराहना की, उसे भेंट दी और अपने सैनिकों के संरक्षण में उसके राज्य में भेज दिया।  जब ये घटना रानी यानी उसकी भाभी ने सुनी तो उसने कहा - आपने सोते हुए विषैले सांप को उकसाया है। इसके कारण अब हमारा यह राज्य नष्ट हो जायेगा। 

राजौरगढ़ के अनुभवी लोगों ने अब आसन्न खतरे को भांप कर राजपरिवार के सदस्यों को अनूपशहर में अपने राजा के पास भेज दिया और राजा जयसिंह के भावी आक्रमण का जबाब देने के लिए सैनिक तैयारियां शुरू कर दी। राजा जयसिंह इस राज्य पर तभी से अधिकार करने के अवसर की तलाश में थे, जब यह राज्य उनसे छीनकर औरंगजेब ने वापस बड़गूजरों को दे दिया था। इस घटना से अब जयसिंह जी को बहाना मिल गया और उन्होंने अपने सामंतों से इस विषय पर चर्चा की। उस वक्त आमेर के प्रधान सामंत चौमू के ठाकुर मोहन सिंह जी ने देवती माचेड़ी राज्य पर आक्रमण करना ठीक नहीं समझा, उनका कहना था कि बड़गूजर राजा बादशाह का मनसबदार है इसलिए सोच समझकर कदम उठायें।  आपको बता दें चौमू के ठाकुर मोहन सिंह जी बड़गूजर रानी नाथावत जी के भाई थे। अत: वे नहीं चाहते थे कि उनकी बहन के राज्य पर हमला हो। 

तब राजा जैसिंघ जी ने ठाकुर फ़तेह सिंह बणवीरपोता के नेतृत्व में पांच हजार घुड़सवारों को माचेड़ी राज्य पर हमला करने भेजा। गणगौर उत्सव के दिन आमेर की सेना अचानक बड़गूजरों पर हमला किया और राजकुमार जोरावर सिंह को कैद कर लिया गया। बड़गूजर सेना आमेर की सेना का मुकाबला नहीं कर सकीय और हार गई। फतेहसिंह ने जोरावर सिंह का मस्तक काटा और उसे राजा जयसिंह जी के समक्ष प्रस्तुत किया। महेंद्र सिंह तलवाना ने अपनी किताब में लिखा है कि आमेर दरबार में प्रधान सामंत मोहन सिंह जी ने जब अपने रिश्तेदार का कटा मस्तक देखा तो उनकी आँखों से आंसू निकल आये। जिसे देख जयसिंह जी को बहुत असंतोष हुआ कि मेरे प्रधान सामंत शत्रु के कटे सिर को देखकर अश्रुपात कर रहे हैं और उन्होंने मोहन सिंह जी से यह कहते हुए चौमूं की जागीर जब्त कर ली कि - आज मेरे शत्रु का कटा मस्तक देख आपके आंसू निकल रहे हैं और जब इसने मुझ पर हमला किया तब आपकी आँखों से एक भी आंसू नहीं टपका। 

इस युद्ध के समय ही कुछ दिन पूर्व रानी नाथावत जी को पुत्र हुआ था और वे प्रसूति गृह में थी।  रानी ने आमेर से आये फ़तेह सिंह जी को बुलाकर अपना पुत्र सौंपा और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। इसी समय रानी को याद कि इस आक्रमण का मूल कारण उसके द्वारा देवर जोरावर सिंह को ताना मारना था। सो अपने आपको इस आक्रमण का कारण मानते हुए रानी ने अपने पेट में कटार मार कर प्राण त्याग दिए। 

इस तरह एक ताने ने माचेड़ी के बड़गूजर राज्य और राजपरिवार पर ग्रहण लगा दिया। "  


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