लेखक : ठाकुर सौभाग्य सिंह जी शेखावत
डिंगल कवियों में केशवदास गाडण का उच्चस्थान है । ये मारवाड़ के गाडणों की बासणी के रहने वाले और जोधपुर के महाराजा गजसिंह के प्राश्रित थे । इनके पिता का नाम सदमाल था । इनके विषय में मारवाड के चारण समाज में यह प्रवाद प्रचलित है कि बाल्यकाल में इन्हें योगी गोरक्षनाथजी के दर्शन हुए थे और उन्हीं की कृपा से इन्हें काव्य शक्ति प्राप्त हुई थी। 2 योगिराज की कृपा के फलस्वरुप ये गृहस्थ होते हुए भी सन्यासी की भाँति गेरुग्रां वस्त्र पहनते थे । कुछ विद्वानों ने इनको प्रसिद्ध कवि ईश्वरदास बारहठ और महाराज पृथ्वीराज राठौड़ के समकालीन माना है और प्रमाण स्वरुप उपर्युक्त दोनों कवियों द्वारा इनकी प्रशंसा में कहे गए दो दोहे-सोरठे भी दिए है, पर यह कवि की रचनाओं के काल की दृष्टि से भ्रान्तिकारी हो ज्ञात होते हैं ।
ये महाराजा गजसिंह (संवत् १६७६ से १६९५) के समका- लीन कवि थे । महाराजा गजसिंह ने अन्य कई कवियों के साथ इनको भी लाख-पसाव द्रव्य देकर सम्मानित किया था । कवि की मुक्तक ऐतिहासिक रचनाओं के आधार पर इनका रचनाकाल १६५० वि० से १६९० के आस पास ठहरता है । इनकी रचनाओं में (१) गुणरुपक बंध (२) राव अमरसिंह रा दूहा (३) निसणी विवेक वार (४) गजगुण चरित और (५) फुटकर वीर गीत, दोहे तथा कवित्त आदि का विद्वानों ने उल्लेख किया है । परन्तु अभी पिछले दिनों कवि की एक लघु रचना 'महादेवजी रा छंद' प्राप्त हुई है । खोजने पर और भी ऐसी छोटी रचनाएँ मिल सकती हैं । कथित रचना ३३ छंदों की कृति है । इसमें केशवदास ने भगवान् शंकर का बड़ा सुन्दर वर्णन किया है । उनकी पौशाक, निवासस्थान, आभूषण, स्वरुप, वाहन, गंगा, चन्द्रमा, सूर्य, पार्वती प्रादि का भी चमत्कारिक शैली में वर्णन किया है। इससे कवि की भगवान् शिव के प्रति प्रगाढ़ भक्ति और नाथ सम्प्रदाय में निष्ठा विदित होती है ।
इन कवियों की रचनाएँ पढने के ठाकुर सौभाग्य सिंह जी शेखावत द्वारा लिखित पुस्तक "पूजां पाँव कविसरां" पढ़ें
