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Oct 23, 2009

जुगाड़ ब्लॉग एग्रीगेटर का

पिछले दिनों जब ब्लोगवाणी ने फालतू आलोचनाओं से विचलित हो गुड बाय कह दिया तो महसूस हुआ क्यों न एक ब्लॉग एग्रीगेटर का भी जुगाड़ कर लिया जाय | जब हमारे देश में हर जगह जुगाड़ करने का प्रचलन है तो एक ब्लोगर के लिए ब्लॉग एग्रीगेटर का जुगाड़ करने में क्या बुराई है | अब देखिये न घर में कोई भी काम या समारोह हो बड़े बुजुर्ग उसकी व्यवस्था का जुगाड़ करने में लग जाते है या छोटो को सम्बंधित व्यवस्था का जुगाड़ करने का आदेश थमा देते है | चुनावों में भी नेता पहले टिकट का जुगाड़ करने में जुटते है , टिकट का जुगाड़ हो जाए तो चुनाव खर्च , कार्यकर्ताओं व वोटों का जुगाड़ और फिर जीत गए तो येन-केन प्रकारेण मंत्रिपद पाने का जुगाड़ करने में लग जाते है | पार्टियाँ भी पहले तो जिताऊ उम्मीदवारों का जुगाड़ करती है फिर सरकार बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना कर संख्या बल का जुगाड़ करने का भरसक प्रयास करती है जैसे अब इन चुनावों के बाद हरियाणा मेंभुप्पी भैया ने बहुमत से कम सीटे आने पर जुगाड़ कर सरकार बनाने का दावा ठोक दिया |कहने का मतलब हमारे यहाँ हर जगह जुगाड़ लगाना पड़ता है चाहे घर हो,राजनीती हो,कारखाने हो या व्यापार हर जगह बिना जुगाड़ कोई कार्य संपन्न होता ही नहीं |
इसी जुगाड़ तंत्र से प्रेरित होकर मैंने भी एक ब्लॉग एग्रीगेटर के जुगाड़ का मन बनाया | नेट पर फ्री में मिलने वाली कई वेब स्क्रिप्ट तलाशी लेकिन कोई काम की नहीं निकली कुन्नु जी ने भी एक स्क्रिप्ट बताई लेकिन उसके लिए जरुरी पाइथोन मेरे होस्टिंग सर्वर पर उपलब्ध नहीं है और हो भी नहीं सकता | फिर वर्डप्रेस के ऑटोब्लोगिंग प्लगिन्स खंगाले उनमे कई चीजे काम की लगी जिन्हें एग्रीगेटर के बतौर इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन वहां भी मजा नहीं आया आखिर जब ब्लोगर के विजेट्स पर दिमाग दौडाया तो पता चला यह जुगाड़ तो पहले से ही है और हर ब्लोगर आंशिक तौर पर इसका इस्तेमाल भी कर रहा है | यह तो वो बात हुई " गोद में छोरो और गांव में हेरो " | मै बात कर रहा हूँ ब्लोगर के विजेट ब्लॉग रोल की | जिसके जरिये हम अपने ब्लॉग पर पसंदीदा चिट्ठे जोड़ते है और उन चिट्ठों की फीड हमारे ब्लॉग पर अवतरित होती रहती है इसी विजेट को हम अपने ब्लॉग के मुख्य प्रष्ठ पर लगादे जिसमे जुड़े सभी चिट्ठों की फीड अपडेट होती रहेगी और एक विजेट साइड बार में लगादे जिसमे चिट्ठे की फीड का पता टिप्पणी वाला जोड़ दे जिससे वहां उन चिट्ठों पर हुई टिप्पणियाँ भी दिखाई देती रहेगी टिप्पणी की फीड http://yourblog.blogspot.com/feeds/comments/default लिख कर जोड़ी जा सकती है बस बन गया आपका ब्लॉग एग्रीगेटर | इसमें न तो पसंद का चटका होगा और न ही किसी टांग खेंचू को टांग खींचने का कोई मौका मिलगा |
तो अब यहाँ चटका लगाकर देखिये इस ब्लॉग एग्रीगेटर जुगाड़ को |


डिस्क्लेमर :- कृपया इसे गंभीरता से ना ले और ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत का इस्तेमाल करते रहे |

23 comments:

यह जुगाड़ तो ब्लागर ने पहले से ही कर रखा है। आप ने कुछ श्रम कर के इसे काम का बना दिया है। इस पर सभी हिन्दी ब्लागों को जोड़ दिया जाए तो अच्छा ब्लाग एग्रीगेटर हो गया है। आप को इस श्रम के लिए साधुवाद।

अरे वाह !! ये तो बढ़िया जुगाड़ है...

'आपातकाल' में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है :)

सुन्दर जानकारी शेखावत साहब , और मैं समझता हूँ कि इसी तरह से ब्लॉग पर लिखने वाले हर साहित्यकार को अपनी अमूल्य रचनाये भी नेट पर मौजूद दो-तीन स्थानों पर संजो कर रखनी चाहिये, किसी एक का क्या भरोसा ! अब कल की ही तो बात है जब आधे-एक घंटे तक गूगल ब्लॉग ठप्प रहे , किसी दिन पूरी ही ठप्प हो गए तो ?

अरे वाह ये जुगाड़ तो वाकई मस्त है, ताऊ को भी बताओ, उनको बहुत प्रसन्नता होगी।

हमारा ब्लॉग तो उसमें दिखा ही नहीं :(

इसीलिये शेखावाटी के वीर आज दुनियां के केपीटल मार्केट के बादशाह हैं. सुंदर चीज.

रामराम.

अरे वाह .. अच्‍छा लगा यह जुगाड .. पर चिट्ठे की फीड का पता टिप्पणी वाला समझ में नहीं आया !!

आप तो बहुत जुगाड़ू हो जी ।

यह जुगाड़ तंत्र तो जोरदार है. आभार..

समीर जी उड़नतस्तरी इस एग्रीगेटर पर मौजूद है | बिना उड़नतस्तरी के तो कोई भी यज्ञ अधुरा है |

बहुत बढिया जुगाड़ है जी।आभार।

"जय जुगाड़ की-ना रजिस्ट्रेशन की जरुरत ना नम्बर की
धरती छोटी पड़ेगी तो ही जरुरत पड़ेगी ना अम्बर की"
भाई रतन सिंग जी का जुगाड़ काम का सै, राम-राम

अजी देर किस बात की है, लेकिन मेरा नाम मत भुले....अब लगता है ब्लांग जगत ने भी खुब तरक्की कर ली है जुगाड चला कर, बहुत अच्छा.

इस जुगाड़ को बताने के लिए धन्यवाद!

" गोद में छोरो और गांव में हेरो "
एकदम सही...यह बात तो मैंने भी कभी नहीं सोची थी.
प्ढ़ कर अच्छा लगा.

आपही के इस ब्लोग को हमने सेव कर लिया है अन्य अग्रिगेटर्स के साथ खोलने के लिये..जुगाड जिंदाबाद...बताईये तो भला हो सकता है ई सब इंग्रेजी ब्लोग्गिंग में...अरे जुगाड का ही इंग्रेजी नहीं मिलेगा जी ..करेंगे कहां से

शेखावत जी अच्छा जुगाड़ , अगर रजिस्ट्रेशन होता तो अब तक मै भी अपना ब्लॉग रजिस्टर करवा चुका होता अब तो आपके हाथ में है , जैसी मर्जी :)

शास्त्री जी आज जीवित होते तो जय जवान,जय किसान का नारा
नहीं...जय तिगाड़, जय जुगाड़...का नारा देश में लगता देखते...

जय हिंद...

वाह.. हम तो इसे बहुत गंभीरता से लेंगे :)

जुगाड़ अच्छा है..

हैपी ब्लॉगिंग

ये हुई ना बात रतनजी......इंडिया में जुगाड़ ही तो है |

पर ये डाटाबेस मे सेव नही करता है बस अपडेट कर देता है

पर ईसकेलिये भी कोई जूगाड होगा जिससे ये डाटाबेस मे सेव करे।

कुन्नु जी अब डाटाबेस वाला जुगाड़ तो आपने तलाश करना है |

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