ज्ञान दर्पण के लेख इन्टरनेट पर दुबारा कहीं भी प्रकाशित करना सख्त मना है| पर प्रिंट मिडिया में नाम सहित छापने की खुली छूट है|

May 13, 2009

ठाकुर मंगल सिंह जी ,खुड

ठाकुर उदय सिंह जी के स्वर्गवास पर उनके एक मात्र पुत्र मंगल सिंह खुड जागीर के अधिपति बने | ठाकुर मंगल सिंह जी का जन्म सन १९१२ में हुआ था और उनकी शिक्षा अजमेर के मेयो कालेज में हुई | ठाकुर मंगल सिंह जी राजस्थान में अपने प्रकार के अपने युग के एक मात्र व्यक्ति थे | स्वतंत्रता प्रेमी, समाज सुधारक, राष्ट्र भक्त, गाँधी जी के खादी ग्रामोद्योग कार्यक्रम के समर्थक, गो-सेवक, शिक्षा प्रेमी और उच्च विचारों के तपस्वी पुरुष थे | रियासत काल में उन्होंने अपने ठिकाने में कई पाठशालायें और रुपगढ़ ग्राम में श्री रामप्रताप ग्राम सुधार आवासीय हाई स्कूल की स्थापना की जिसमे खुड ठिकाने के ग्रामो के अलावा उदयपुरवाटी, सीकर वाटी , नागौर व दांता-रामगढ ठिकाने के गांवों के विद्यार्थी विद्यार्जन करते थे | ठाकुर मंगल सिंह जी महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय जयपुर के सह्पाटी, ऐ.डी.सी. और सवाई मानगार्ड में केप्टन रहे | राजकीय सेवा से त्याग पत्र देकर उन्होंने ग्राम सुधार और क्षत्रिय-संगठन के लिए अपना जीवन समर्पित किया और जीवन पर्यन्त खादी के वस्त्रों का उपयोग किया | राजस्थान स्वयं सैनिक-समाज,रामराज्य सभा आदि संस्थाओं के वे प्रमुख संस्थापकों में थे | प्रसिद्ध देश भक्त जमनालाल बजाज , प. हीरालाल शास्त्री,रावल नरेन्द्र सिंह जोबनेर, महाराव उम्मेद सिंह कोटा, महाराजा उम्मेद सिंह जोधपुर,योगिराज अरविन्द, स्वामी करपात्री जी, सदाशिव माधव राव गोलवलकर,महाराजा राम सिंह सीतामऊ,महाराजा राणा भवानी सिंह दांताभावानगढ़, भारत के प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंद्रप्रसाद आदि से आपका अति-स्नेह सम्बन्ध था | सीकर और जयपुर के मध्य १९३८ के संघर्ष और १९४२ की उदयपुर वाटी पर जयपुर की सेन्य चढाई का उन्होंने सामना कर अपने भाइयों के सम्मान और अधिकारों के लिए नेतृत्त्व ग्रहण कर जयपुर राज्य के कोपभाजन बनने का खतरा मोल लिया था |जागीर उन्मूलन के पश्चात उन्होंने अपने ठिकाने के घोडे और गायें भी सदाकत आश्रम पटना, वनस्थली विद्यापीठ जयपुर, चौपासनी विधालय जोधपुर और अपने ठिकाने के ग्रामवासियों और कवियों को प्रदान कर अपनी उदारता और समाज हितैषिता का परिचय दिया था | हिंसकजीवों की आखेट,घोडे और गो-पालन की और उनकी आजीवन रूचि बनी रही | वे सादा रहन-सहन और उच्च विचार कथनोक्ति के साक्षात् प्रतिरूप थे | उनकी देश भक्ति ,समाज प्रेम और शीलता आदि गुणों का कवि कवियों ने अपनी रचनाओं में जिक्र किया है | ४ फरवरी १९७६ को को आपका निधन हो गया |
ठा.सोभाग्य सिंह जी की कलम से



Reblog this post [with Zemanta]

6 comments:

आभार इस जानकारीपरक आलेख का.

हमेशा की तरह बहुत ही उम्दा जानकारी दी आपने.

रामराम.

ऐसे सैकडो हीरे राजस्थान को सुशोभित कर रहे है .ऐसे ही हीरो की जानकारी देते रहे

बहुत ही अच्छी जानकारी दी है । पता नही क्यों लोग सभी राजपूत शासको को अत्याचारी समझती है । आपकी यह पोस्ट पढकर उनका यह मिथ्या भ्रम दूर हो जायेगा ।

काफी महेनत से लिखा गया लेख.........अच्छी जानकारी बटोरी है..........अगले लेख के इंतजार में ........

Post a Comment

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Share

Twitter Delicious Facebook Digg Stumbleupon Favorites More