कांम ई रांम है = काम ही राम है
केवल चार शब्दों की नन्ही मुन्ही कहावत में प्रागैतिहासिक युग से भी बहुत पहले की झांकी मिल जाती है कि किसी ईश्वरीय चमत्कार से मनुष्य-मनुष्य नहीं बना ,बल्कि वह मेहनत और काम का ही करिश्मा है कि उसने मनुष्य के अगले दो पांवों को हाथों में तब्दील कर दिया ,अन्यथा वह अब तक चौपाया का ही जीवन जीता | पांवों का स्थान छोड़कर हाथ स्वतंत्र हुए तो पत्थर फैंकना ,लकडी थामना और पत्थरों के औजार व हथियार बनाने में मनुष्य कामयाब हो गया | उसकी कमर सीधी होते ही वह सीना तान कर आकाश कि और सिर उठाये सीधा स्तर खडा हो गया तो प्रकृति ने भी उसके अदम्य पौरुष में माँ कि तरह हाथ बंटाना शुरू कर दिया | और जब मेहनत या काम ने वाणी का अविष्कार किया तो उसकी कल्पना में अनेक देवताओं का अवतरण हुआ - इन्द्र ,वरुण ,सूर्य आदि आदि | मनुष्य की मेहनत ही वह आद्यशक्ति है , जिस से ब्रह्म और ब्रह्मांड का रहस्य उद्घाटित हुआ |
विजयदान देथा द्वारा लिखित
कांम ई रांम है = काम ही राम है
Ratan Singh Shekhawat, Sep 18, 2009
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बहुत अच्छी बात कही आप ने धन्यवाद
बहुत छोटी सी बात और छोटी सी पोस्ट है पर सीख एवरेस्ट पर्वत जितनी बडी है. बहुत शुभकामनाएं.
रामराम.
चंद शब्दों मे जीवन का सार बता दिया बहुत बहुत धन्यवाद्
विजयदान देथा की कहानी पर बनी फिल्म "पहेली" मेरी पसंदीदा फिल्म है
बहुत सुन्दर बात कही है आभार ।