हुडील.कॉम : एक गांव की वेब साईट

अंतरजाल पर भटकते हुए आज एक गांव की वेब साईट मिली | देश के लगभग सभी शहरों के अपने कई कई पोर्टल है लेकिन गांवों पर पोर्टल अभी बहुत दूर की बात है लेकिन आज एक गांव की वेब साईट देखकर लगा कि गांव वासियों ने भी इन्टरनेट जैसी महत्वपूर्ण सूचना तकनीकी का उपयोग करते हुए गांवों की जानकारी देती वेब साईट बनाकर इस क्षेत्र में भी शहरो का अनुशरण करने का आगाज कर दिया है |
हुडील गांव मेरे गांव भगतपुरा से थोडी ही दुरी पर एक पहाड़ी के पास स्थित है इस गांव के कई लड़के मेरे स्कूल के सहपाठी थे इस गांव में कई बार जाना भी हुआ अतः इन्टरनेट पर इस गांव की वेब साईट देखकर मेरा ख़ुशी के साथ रोमांचित होना लाजिमी ही था सो लिंक पर चटका लगा पहुँच गए http://www.hudeel.com पर |
वेब साईट काफी सिंपल बनाई हुई है लेकिन प्रयास बहुत अच्छा है इस साईट में जहाँ इस गांव के संस्थापकों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है वही शेखावत वंश और शेखावाटी के प्रवर्तक महाराव शेखा जी के इतिहास प्रसिद्ध घाटवा युद्ध जिसकी रणभूमि का हुडील गांव भी हिस्सा था का विस्तार से जिक्र किया गया है | वेब साईट की फोटो गैलरी में गांव के चित्रों के साथ एक ग्रामीण महिला सुप्यार कँवर के घर हुई एक विदेशी जोड़े की शादी के चित्र भी लगे है |
आजकल हुडील गांव विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बनता जा रहा है उम्मीद है यह वेब साईट हुडील को विदेशी पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने में सहयोग करेगी |
हुडील स्थित विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा होटल फतह विलास के बारे में जानने के लिए यहाँ चटका लगाएँ |

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Comments :

20 comments to “हुडील.कॉम : एक गांव की वेब साईट”
Udan Tashtari said...
on 

सार्थक और अनुकरणीय प्रयास है.

Arvind Mishra said...
on 

बहुत खूब !

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...
on 

अच्छी जानकारी मिली जिससे और भी प्रोहत्सान मिलेगा।

आभार

हे प्रभू यह तेरापन्थ
SELECTION & COLLECTION

ताऊ रामपुरिया said...
on 

ये आपने अच्छी जानकारी दी. अबकी बार चक्कर लगेगा तो साक्षात देखेंगे जी इस गांव को.

रामराम.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
on 

गाँव के बारे में अच्छी वेबसाइट है। बताने के लिए धन्यवाद!

संगीता पुरी said...
on 

मैंने देखा और पढा है .. अपनी टिप्‍पणी भी दर्ज कर आयी हूं .. हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में ऐसे अन्‍य ब्‍लोगों की जरूरत है !!

पी.सी.गोदियाल said...
on 

बहुत अच्छी बात है ! खुशी हुई यह जानकार कि कोई तो अपने गांवो को महत्व दे रहा है ! यही शिक्षा का मूल मन्त्र भी है !

Pankaj Mishra said...
on 


काबिले तारीफ़ प्रयास आपके गाव क लोगो द्वारा

काजल कुमार Kajal Kumar said...
on 

अच्छी बात है अपने कल को याद करना भी चाहिये

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...
on 

बहुत अच्छा प्रयास.. अगर यह जाग्रति देशभर में फैल जाए तो बहुत अच्छा ई-दस्तावेजीकरण होगा

हैपी ब्लॉगिंग

हर्षवर्धन said...
on 

अच्छा प्रयास

Dipti said...
on 

वेबासइट सुन्दर है। एक सार्थक प्रयास हैं जिसे आगे बढ़ाने की ज़रूरत है।

राज भाटिय़ा said...
on 

बहत सुंदर लगा. अच्छी जानकारी दी आप ने धन्यवाद

P.N. Subramanian said...
on 

इस नयी जानकारी के लिए आभार. अच्छा लगा.

प्रकाश पाखी said...
on 

excusive n somthing different..great !

प्रवीण जाखड़ said...
on 

रतन सा बहुत ही सुंदर खोज। मैंने इस वेब को देखा वाकई अच्छी और सोबर तो बनाई ही हुई है हमारे शेखावाटी की पारंपरिक और जीवन शैली की ओर भी ध्यान खींचती है। कल टिप्पणी देना चाह रहा था, लेकिन जिस कंप्यूटर पर बैठा था वहां किसी भी ब्लॉग पर टिप्पणी करना बैन था, इसलिए देरी के लिए क्षमा चाहता हंू। शेखावाटी की ऐसी ही नई-नवेली चीजों, खोजों, प्रतिभाओं के बारे में बताते रहें।

आपकी इस पोस्ट को पढऩे के बाद मुझे भी शेखावाटी पर लिखने का मन कर रहा है। बस एक आध दिन में आपके सामने होगा।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...
on 

रोचक! मैं तो उन गांव वालों की सोच रहा हूं - बहुत सनसनी में होंगे वे!
एक गांव के वैश्वीकरण का मामला है यह!

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...
on 

बढिया खबर सुनाई है आपने |

प्रयास अनुकरणीय है |

सतीश सक्सेना said...
on 

शुभकामनायें !

नरेश सिह राठौङ said...
on 

बहुत सुन्दर कार्य है । आपने इस वेब साइट के बारे मे बता कर पाठको का ज्ञानवर्धन किया है अभार ।

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