जब फेसबुक मय होगा ज़माना

जब फेसबुक मय होगा ज़माना

आजकल हमारे देश में ही नहीं दुनियां के लगभग देशों में फेसबुक का चलना उतरोतर बढ़ता ही जा रहा है| फेसबुक के इस्तेमाल में हर आयु वर्ग के लोगों के साथ साथ सरकारें व सरकारी विभाग भी जुड रहें है| पुलिस सहित कई सरकारी विभाग है जिन्होंने फेसबुक पर अपना पेज बनाकर अपनी उपस्थित दर्ज की है| मिश्र, सीरिया, लीबिया आदि देशों में क्रांति के साथ भारत में अन्ना व केजरीवाल के आंदोलन में फेसबुक की भूमिका के बाद सरकार ने भी फेसबुक पर पैनी नजर रखी हुई| अख़बारों में कई मामले ऐसे पढ़ने को मिलते है कि फलां व्यक्ति को न्याय दिलवाने के लिए फेसबुक से सहारा मिला| फेसबुक पर लोग किसी को न्याय दिलवाने या अपने लिए सहायता मांगने के लिए पेज बनाकर लोगों का समर्थन जुटाते अक्सर देखे जाते है| सूचनाओं व ख़बरों के आदान प्रदान में भी आजकल फेसबुक मीडिया को पीछे छोड़ रही है क्योंकि फेसबुक का हर उपयोगकर्ता अपनी वाल पर नई नई जानकारियां व अपने क्षेत्र की ताजा ख़बरें अपडेट कर एक जागरूक पत्रकार की भूमिका निभा रहा है|

राजनैतिक पार्टियां, नेता अपना चुनाव प्रचार करने या अपनी विचारधारा लोगों तक पहुँचाने के लिए फेसबुक का सहारा ले रहें तो उपभोक्ता उत्पाद बनाने व बेचने वाली कंपनियां भी अपने उत्पादों का विज्ञापन करने के लिए फेसबुक का सहारा ले रही है|

यदि इसी तरह फेसबुक की भूमिका बढती रही तो वो दिन दूर नहीं जब सारी दुनियां फेसबुक मय नजर आएगी| लोग आपसी चर्चा करने के लिए गली, चौपाल, चौराहे पर एकत्रित होकर चर्चा करने के बजाय फेसबुक खोलकर अपने घर बैठे आपस में विचार-विमर्श करते नजर आयेंगे| पत्नी अपने पति से घर का सामान मंगवाने के लिए सामान की सूची उसकी वाल पर अपडेट कर देगी| घर के सदस्य भी आपसी सूचनाओं का आदान प्रदान अपने अपने कंप्यूटर पर बैठे बैठे फेसबुक पर चैटिंग का इस्तेमाल करते हुए करेंगे| शादी ब्याह के लिए भी लड़के लड़किया फेसबुक पर ही पसंद किये जायेंगे|

किसी को न्याय पाना होगा या सरकार से अपनी कोई मांग मनवानी होगी वो फेसबुक पर ही एक पेज बनाकर घर बैठे समर्थक जुटा कर अपने पेज की लाइक संख्या के प्रभाव से सरकार पर दबाव डालकर अपनी मांग मनवाकर सहायता प्राप्त कर लेगा| किसी भी तरह का आंदोलन करने वालों को भी जंतर-मंतर पर जाकर धरना-प्रदर्शन करने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी| बस फेसबुक पर अपने आंदोलन का एक पेज बनायेंगे और उनका समर्थन करने वाले भी धड़ाधड़ लाइक या कमेन्ट कर चलते बनेंगे, सरकार भी लोगो द्वारा लाइक की संख्या देखकर आंदोलन से घबरायेगी और उसी आधार पर आंदोलनकारियों से समझौता करने की सोचेगी| फेसबुक द्वारा निभाई जाने वाली इस तरह की भूमिका से लोगों को भी किसी आंदोलन में बसें भरकर आने की जरुरत नहीं पड़ेगी जिससे उनके समय व धन दोनों की बचत होगी| आंदोलन की खबर देने वाले न्यू चैलन व समाचार पत्र भी सम्बंधित पेज पर बढती लाइक संख्या की पल पल खबर देते रहेंगे| इस तरह बड़े बड़े आंदोलन बिना धरना प्रदर्शन के फेसबुक पर ही निपटा दिए जायेंगे, लोगों की भीड़ ना आने के चलते प्रशासन भी चैन से कंप्यूटर पर बैठ आंदोलन से निपटता रहेगा|

राजनैतिक पार्टियां भी अपना अपना चुनावी प्रचार फेसबुक पर ही निबटा लेगी| उन्हें फेसबुक पर मिले समर्थन के आधार पर ही मीडिया ख़बरें देंगा- कि फलां पार्टी फेसबुक पर प्रचार में आगे है तो फलां पीछे| उस पार्टी ने फेसबुक पर आक्रामक प्रचार शुरू किया तो वह पार्टी उस मुद्दे पर फेसबुक प्रचार में रक्षात्मक मुद्रा में है| फेसबुक पर ही एक्जिट पोल संपन्न हो जाया करेंगे| इस तरह पोस्टरबाजी में व्यय होने वाला पार्टियों का धन भी बचेगा शायद यह बचत देश में नेताओं द्वारा किये जाने वाले भ्रष्टाचार में कमी कर दे !!
फिल्म स्टार भी अपने अपने फेसबुक पेज या प्रोफाइल पेज पर लाइकस, सबस्क्राइब आदि संख्या बढ़ाकर अपनी हैसियत व अहमियत बढ़ने का दावा साबित करते रहेंगे|

टीवी अख़बारों में व सड़कों के किनारे बड़े बड़े होर्डिंग्स लगाकर प्रचार करने वाले व्यापारिक संस्थान भी प्रचार के इन माध्यमों को छोड़कर अपने उत्पादों का प्रचार फेसबुक पर करने लगेंगे| अपने उत्पादों का हर कम्पनी फेसबुक पर पेज बना देगी किसी उपभोक्ता को कोई शिकायत होगी तो वह कम्पनी के कस्टमर केयर पर शिकायत करने के बजाय उसके फेसबुक पेज पर ही दर्ज कर देगा| इस तरह कंपनियों को अलग से कस्टमर केयर विभाग नहीं रखना पड़ेगा| उपभोक्ता का भी किसी घटिया उत्पाद के बारे में लंबी चौड़ी फोन वार्ता के बजाय सिर्फ लाइक अनलाइक बटन पर चटका लगाने मात्र से ही काम चल जायेगा|

चूँकि फेसबुक का हर उपयोगकर्ता अपने आस-पास की हर सूचना और खबर अपनी वाल पर अपडेट कर पत्रकार की भूमिका निभायेगा| लोगों को ताज़ा ख़बरें देखने पढ़ने के लिए टीवी व अख़बारों की जरुरत ही नहीं पड़ेगी| ऐसे हालात में हो सकता है आज सरकारी विज्ञापनों की मलाई खाने वाले कई टीवी चैनल व अखबार बंद ही हो जायें जो बचेंगे वे अपना खर्च कम करने के लिए रिपोर्टरों की छंटनी कर देंगे क्योंकि उन्हें एकदम ताजा ख़बरें फेसबुक पर लोगों द्वारा अपडेट किये स्टेटस से मिल जाया करेगी| अभी अख़बारों की ख़बरों पर कार्यालय संवाददाता, विशेष संवाददाता या खबर देने वाले का नाम लिखा होता है तब लिखा मिलेगा- “यह खबर फलां फेसबुक यूजर की वाल से|” इस तरह फेसबुक ख़बरों के लिए पेपर के इस्तेमाल को कम करते हुए पेड़ बचाकर जंगल बचायेगी| जिससे पर्यायवरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी|

पुलिस को ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए जो अभियान चलाने पड़ते है वह नहीं चलाने पड़ेंगे| आज भी लोग पुलिस द्वारा बनाये फेसबुक पेजों पर ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के फोटो अपलोड कर उनका चालान कटवा देते है, जिससे दिल्ली में तो बहुत लोग ट्रैफिक नियम तोड़ने से डरने लगे है, पुलिस वाला वहां हो हो या ना हो कोई फेसबुक यूजर फोटो लेकर फेसबुक पर अपलोड कर चालान घर ना भिवा दे, यह डर ज्यादातर या भुक्तभोगी चालकों को जरुर सताता है| जब जमाना फेसबुक मय होगा तो लोग इस तरह के अपराधों व अपराधियों की ढेरों जानकारी पुलिस के पेज पर अपलोड करेंगे| तब पुलिस को गलियों व सड़कों पर ख़ाक छानते हुए गश्त करने के बजाय फेसबुक पर नजर गड़ाए बैठा रहना होगा| कब किस अपराधी की जानकारी फेसबुक पर मिल जाए| जिस थाने के पुलिसकर्मी जितने फेसबुक फ्रेंडली होंगे अपराध रोकने में उतने ही सफल होंगे|

इस तरह जिधर देखो उधर माहौल फेसबुक मय ही फेसबुक मय नजर आयेगा| सरकारी एजेंसियां, पुलिस, मीडिया सब फेसबुक पर नजरें गड़ाए बैठे रहेंगे तो फेसबुक यूजर अपनी वाल पर हर सूचना अपडेट करने के लिए बैठा मिलेगा| और हमारे जैसे ब्लॉग लेखक भी अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट ठेलने के बाद फेसबुक पर उसका प्रचार करते हुए फेसबुक के माध्यम से पाठक आने के इंतजार मैं बैठे दिखाई देंगे| लोग अपने घरों दफ्तरों के कंप्यूटर पर फेसबुक के आगे बैठे नजर आयेंगे तो सड़कों पर चलने वाले भी मोबाइल से फेसबुक अपडेट करते दिखेंगे| बसों, रेलों, हवाई जहाजों में बैठे यात्री अपने लेपटॉप आदि उपकरणों के सहारे फेसबुक खोल अपने परिजनों, मित्रों को अहसास दिलाएंगे कि वे उनसे दूर नहीं पास ही है|

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12 Responses to "जब फेसबुक मय होगा ज़माना"

  1. आज कल सभी लोग फेश बुक के दीवाने हो रहे है,,,

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  2. HARSHVARDHAN   December 20, 2012 at 3:14 pm

    अगर सारी दुनिया फेसबुकिया हो गई तो शायद कुछ लोगो को दुनिया में घुटन सी महसूस होगी ।

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  3. HARSHVARDHAN   December 20, 2012 at 3:19 pm

    यह मेरे अपने विचार है ।

    कृपया हो सके तो मेरे समाचार ब्लॉग "समाचार NEWS" की नई पोस्ट "समाचार : ऑस्कर ,टाइम पत्रिका ,बराक ओबामा" पर भी पधारे । धन्यवाद ।

    ब्लॉग पता :- smacharnews.blogspot.com

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  4. प्रवीण पाण्डेय   December 20, 2012 at 4:47 pm

    सबको उनका फेस दिखाता..

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  5. liveaaryaavart.com   December 20, 2012 at 5:41 pm

    बढ़िया, साधुवाद !!

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  6. Rajput   December 21, 2012 at 4:54 am

    आजकल तो ये सोशल साइट्स ही चर्चा में हैं, किसी को कुछ कहना हो तो ट्विट करदो , बहस करनी हो तो फेसबुक में आ जाओ .आने वाले दिनों में एग्जिट पोल भी फेसबुक पे ही होंगे जो आजकल के छुट भैया टाइप टीवी चैनल से तो बेहतर ही रजल्ट देंगे .

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  7. Pagdandi   December 21, 2012 at 5:26 am

    ak din hkm ak rog bhi aayena nai bimari jiska nam hoga facebookiya 🙂 …. aapki kalam se nikli shandar vayngatmak post …..aabhar

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  8. ZEAL   December 21, 2012 at 7:27 am

    फेसबुक का शानदार ज़माना ! ट्वीट-फ्वीट सबको पीछे छोड़ दिया !

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  9. Pallavi saxena   December 21, 2012 at 10:21 am

    सही भी है उसमें बुराई ही क्या है… 🙂 बढ़िया पोस्ट शुभकामनायें

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  10. नुक्‍कड़   December 22, 2012 at 12:55 am

    एकदम सटीक आकलन। भविष्‍य का हथियार है फेसबुक। आज मजबूत हो रहा है।

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  11. dharam tang   December 23, 2012 at 5:11 am

    हा रतन जी ,आजकल सभी इस पेज के दीवाने है ,jukerberg ने सोचा भी नही होगा ऐसा ,मैं भी अपने ब्लॉग का ट्रैफिक फेसबुक से ही बढ़ा रहा हु .
    khotej.blogspot.in

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  12. swamiji tiwari   May 12, 2013 at 10:00 pm

    fesbook

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