सरकारी योजनाओं की आड़ में वामपंथी चंदा

आज से डेढ़ दो साल पहले फोन पर पता चला कि गांव में लड़कियों के लिए फॉर्म भरे जा रहे है, जिनके आधार पर लड़की को विवाह के समय पचास हजार रूपये मिलेंगे| ये फॉर्म भरते समय किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि ये फॉर्म किस योजना व किस विभाग में जमा कराया जा रहा है| ना भरवाने वालों ने बताने का कष्ट किया| बस आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मार्फत दलाल सक्रीय हो गए और तीन सौ रूपये प्रति फॉर्म लेकर सम्बंधित विभाग में जमा करा दिए गए| गांव यात्रा पर जब लोगों से जानकारी ली तो पता ही नहीं चला कि कौनसे विभाग की क्या योजना थी|
हाँ ! उस वक्त गांव प्रवास पर मेरी पुत्री ने यह जरुर बताया कि – “उसने किसी का फॉर्म पढ़ा तो वो श्रमिकों के लिए था, हो सकता है गरीब श्रमिकों की बेटियों की शादी पर आर्थिक सहायता दी जावे|”

अभी इसी हफ्ते गांव यात्रा के दौरान पता चला कि उन फॉर्म की अब डायरियां (पासबूक्स) आई है और एक वर्ष पूरा हो चूका है अत: उनका नवीनीकरण होना है| मैंने एक आवेदक की डायरी देखी तब पता चला कि वे पासबुक्स “श्रम विभाग एवं भवन व अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड” द्वारा जारी की गई थी| पासबुक पर सीकर कार्यालय का कोई पता नहीं था, हाँ जयपुर मुख्यालय का पता जरुर लिखा था, साथ ही पासबुक में वामपंथी श्रमिक संगठन “सीटू” का लाल स्टीकर लगा था| नवीनीकरण के इच्छुक एक आवेदक को साथ लेकर मैं शहर गया, उससे पहले गांव में कार्यालय का पता पूछा तो सबने कहा- कोर्ट के सामने मिलन रेस्टोरेंट वाली गली है| यानी जिसने भी बताया उसने माकपा कार्यालय के बारे में बताया|

माकपा (CPM)कार्यालय में जाकर पूछा तो किसी ने बताया कि डायरियां बनने का काम बेसमेंट में होता है, मुझे भी आश्चर्य हो रहा था कि सरकारी काम किसी राजनैतिक पार्टी के दफ्तर में कैसे ही रहा है ? बेसमेंट में काफी भीड़ थी, सीटू का बैनर लगा था, दो कार्यकर्त्ता लोगों को फॉर्म भरवाने में सहायता कर रहे थे, तीसरा रसीद बुक लेकर प्रत्येक फॉर्म की 120 रूपये की सीटू की रसीद काट रहा था| मुझे भी बताया गया कि फॉर्म भरकर ये रसीद कटवा लें, फिर एक ऑफिस का पता बताएँगे जहाँ जाकर फॉर्म जमा करवा दें| जिनकी रसीद कट चुकी थी, उन्हें रसीद काट कर रूपये उगाहने वाला बता रहा था कि ये रसीद जेब में रखे और फलां पते पर जाकर दुसरे कार्यालय में फॉर्म जमा करवा दें, वहां भी 60 रूपये की एक और रसीद कटेगी|

इस कार्य में माकपा कार्यकर्त्ता अनपढ़ श्रमिकों को फॉर्म भरवाने की सहायता का एक तरफ सराहनीय कार्य कर रहे थे दूसरी और उसी कार्य के बदले एक गरीब, अनपढ़ श्रमिक जो उन्हें वोट भी देता है, बेचारे से मुफ्त में 120 रूपये वसूल कर उसकी गरीब जेब पर आर्थिक बोझ डालकर एक घ्रणित कार्य भी कर रहे थे| और बेचारा गरीब श्रमिक उनके द्वारा वसूला गए धन को सरकारी योजना में अपने नवीनीकरण की एक साधारण प्रक्रिया समझ रहा था और कोमरेडों का मन से शुक्रिया भी अदा कर रहा था कि उनकी वजह से उसे आर्थिक सहायता मिल जायेगी|

इस तरह सीकर जिले में वामपंथी कार्यकर्त्ता सरकारी योजनाओं की आड़ में अपने श्रमिक संगठन की सदस्यता बढाने व चंदा एकत्र करने के घिनौने कार्य में सलंग्न है| हालाँकि किसी भी पार्टी द्वारा चंदा एकत्र करना या सदस्य बनाना गलत नहीं है लेकिन मैंने जो देखा उससे लगा कि जिसे सदस्य बना उसकी सदस्यता की फीस की रसीद काटी जा रही थी, उसे पता ही नहीं कि ये वामपंथी अपने लिए ले रहे है, यदि उसे पता चल जावे तो वो उनकी और झांके तक नहीं|

और हाँ इस तरह की शानदार सरकारी योजनाओं को जरुरतमंदों तक पहुंचाने में कांग्रेस, भाजपा (BJP)कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता देख मन में बड़ा दुःख हुआ, जबकि इन पार्टियों के कार्यकर्ताओं का भी कर्तव्य बनता है कि इस तरह की योजनाओं का जरुरतमंदों को लाभ दिलावे, उनकी आवेदन फॉर्म भरने में सहायता कर वे अपने पार्टी का जनधार भी बढ़ा सकते है लेकिन अफ़सोस इस मामले में वे वामपंथी कार्यकर्ताओं से बहुत पीछे है और यही कारण है कि वामपंथी विधायकों को भाजपा बिना मोदी लहर के आजतक हरा नहीं पाई|

5 Responses to "सरकारी योजनाओं की आड़ में वामपंथी चंदा"

  1. Darshan jangra   October 17, 2014 at 1:21 pm

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा – शनिवार- 18/10/2014 को नेत्रदान करना क्यों जरूरी है
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः35
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

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  2. Darshan jangra   October 17, 2014 at 1:22 pm

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा – शनिवार- 18/10/2014 को नेत्रदान करना क्यों जरूरी है
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  3. Darshan jangra   October 17, 2014 at 1:22 pm

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा – शनिवार- 18/10/2014 को नेत्रदान करना क्यों जरूरी है
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  4. नवीन जोशी @ http://navinjoshi.in/   October 17, 2014 at 2:32 pm

    आपका ब्लॉग मेरे ब्लॉग "नवीन जोशी समग्र" के हिंदी ब्लॉगिंग को समर्पित पेज "हिंदी समग्र" (http://navinjoshi.in/hindi-samagra/) में शामिल किया गया है। अन्य हिंदी ब्लॉगर भी अपने ब्लॉग को यहाँ चेक कर सकते हैं, और न होने पर कॉमेंट्स के जरिये अपने ब्लॉग के नाम व URL सहित सूचित कर सकते हैं।

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  5. HARSHVARDHAN   October 17, 2014 at 4:27 pm

    सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा मासूम श्रमिकों से क्षल करके धन वसूलना वाकई बहुत शर्मनाक और निन्दनीय है, आपने ये भी सही कहा कि बीजेपी तथा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता भी इस योजना में वाकई काफी दु:खद है। बेहतरीन रिपोर्ताज। सादर … अभिनन्दन।।

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