बैंक खाते को मेलावेयर व हैकिंग से बचाने के लिए लिनक्स लाइव सी डी का इस्तेमाल करें

बैंक खाते को  मेलावेयर व हैकिंग से बचाने  के लिए लिनक्स लाइव सी डी का इस्तेमाल करें


आजकल नेट बेंकिंग व ऑनलाइन खरीददारी करने का चलन बढ़ता जा रहा है जब एक क्लिक पर घर बैठे कंप्यूटर से बैंक खाता संचालित किया जा सकता है तो हम बैंक जाकर वहां क्यों भीड़ बढ़ाये व अपना समय बरबाद करें | और आजकल तो टेलीफोन बिल ,क्रेडिट कार्ड का भुगतान , बीमा पालिसी सब कुछ ऑनलाइन जमा हो जाता है | लेकिन इस सुविधा के साथ सबसे बड़ा खतरा सायबर क्राइम का है | ज्यादातर लोग अपने घरों में अपने कंप्यूटर में सस्ता या फिर फ्री का एंटी वायरस इन्स्टाल करके रखते है जो मेलावेयर व ट्रोजन आदि को नहीं रोक सकते | चूँकि ये मेलावेयर या ट्रोजन कंप्यूटर को ख़राब नहीं करते इसलिए जब तक हमारा कम्पुटर virus से ख़राब नहीं हो जाता हम भी निश्चिंत रहते है और ये ट्रोजन और मेलावेयर आपके कंप्यूटर की सभी महत्त्वपूर्ण सूचनाएं अपने मालिक को भेजते रहते है | फलस्वरूप आपके बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड आदि के पासवर्ड हैक होने का पूरा इंतजाम रहता है |
पर क्या इससे डरकर हम ऑनलाइन बैंकिंग करना छोड़ दे ? में तो कहूँगा नहीं !
इसके लिए सायबर जालसाजों से बचने के बहुत सारे तरीके है पर मुझे तो विंडो उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे ज्यादा बढ़िया लगा जब भी ऑनलाइन लेन देन करना हो लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम की लाइव सी डी का इस्तेमाल करते हुए अपना कंप्यूटर चला ऑनलाइन लेन-देन करें | लिनक्स एक एसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो बिना इंस्टाल किये सीधा सी डी से बूट होकर कंप्यूटर चलाता है जिसमे न तो कोई virus आने का डर है और ना ही किसी मेलावेयर या ट्रोजन घुसने का |
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10 Responses to "बैंक खाते को मेलावेयर व हैकिंग से बचाने के लिए लिनक्स लाइव सी डी का इस्तेमाल करें"

  1. ललित शर्मा   November 28, 2009 at 3:42 am

    रतन सिंग जी बढि्या जानकारी राम-राम

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  2. Udan Tashtari   November 28, 2009 at 3:55 am

    उम्दा जानकारी है!!

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  3. सुशील कुमार छौक्कर   November 28, 2009 at 5:53 am

    बहुत ही उम्दा जानकारी।

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  4. जानकारी बढ़िया है!
    शुक्रिया!

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  5. राज भाटिय़ा   November 28, 2009 at 1:13 pm

    रत्न जी मै करीब दस साल से ऑनलाइन नेट बेंकिंग कर रहा हुं, करीब करीब इन दस सालो मै मै एक या दो बार ही गया हूं, बेंक मै.
    यह सब इतना आसान नही है, होम बेंकिंग के लिये भी हमे तीन चार अलग अलग ना० मिलाने पडते है, ओर एक ना० का तो हमे भी नही पता होता कि कोन सा ना० अब मांगेगा हमरा पी सी.फ़िर बेंक वालो की भी बहुत जिओम्मेदारी होती है, हा यह पहले पहल था, लेकिन अब नही, बहुत पहले मेरा ना० भी हेंक हो गया था, ओर मेरा खाता अपने आप बन्द हो गया, फ़िर बेंक जा कर पता चला कि किसी ने हेंक कर के पेसे निकालने चाहे थे, लेकिन पता नही केसे बेंक वालो के एंटी वायरस बहुत तेज थे या किसी ओर उपाय से उन्होने उसे पकडा तो नही लेकिन पेसो को रोक लिया, ओर अब हमे तीन चार अलग अलग ना० मिलाने पडते है, इस से बहुत लाभ है सब से बडा लाभ समय की बचत, फ़िर याता यात से छुटकारा.
    आप का धन्यवद इस सुंदर जान्कारी के लिये

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  6. ज्ञानदत्त G.D. Pandey   November 28, 2009 at 3:10 pm

    कहां मिलेगी जी यह सीडी?

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  7. काजल कुमार Kajal Kumar   November 28, 2009 at 4:48 pm

    मैं सलैक्स 6.1.2 डाउनलोड करके देखता हूं..

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  8. Ratan Singh Shekhawat   November 28, 2009 at 7:06 pm

    ज्ञान जी आप उबुन्टू लिनक्स इस लिंक http://www.ubuntu.com/ से डाउनलोड कर सी डी बना सकते है , और सबसे आसान तरीका है आप मुझे अपना पता ई मेल करदे में आपको सी डी कोरियर से भेज दूंगा |http://www.ubuntu.com/

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  9. Ratan Singh Shekhawat   November 28, 2009 at 7:20 pm

    भाटिया जी
    आप बढ़िया एंटी virus इस्तेमाल करते है और विंडो भी आप खरीदी हुई इस्तेमाल करते है और आपके वहां बैंको में सुरक्षा उपाय भी अच्छे है पर यहाँ भारत में तो ९०%लोग पायरेटेड विंडो का इस्तेमाल करते है और फ्री का एंटी virus इस्तेमाल करते है जिसमे न फायर वाल होती और ना ही ट्रोजन और मेलावेयर से सुरक्षा | यहाँ तो बैंक खाते से ऑनलाइन पैसे निकालने की ख़बरें अक्सर अख़बारों में पढने को मिल जाती है |
    मेरे पास भी एक बार फर्जी मेल आया था जिसमे एक लिंक दिया हुआ था और लिखा था कि यहाँ क्लिक कर अपने खाते में लोगिन कर अपना खाता अपडेट करें | यदि में उस लिंक पर क्लिक करता तो बैंक की एक फर्जी वेबसाइट खुलती जिसमे जैसे ही में लोग इन करता तो बैंक की असली वेब साईट में मेरा असली खाता खुल जाता पर तब तक मेरा यूजर आई डी और पासवर्ड उस मेल भेजने वाले के पास चला जाता जिससे वह कभी भी मेरा खाता हैक कर सकता था |
    इस तरह की फर्जी वेब साईट बनाना बहुत आसान है एक बार मैंने पूरा इसका ऑरकुट की किसी कम्युनिटी में पढ़ा था और उसे अपनी ही वेब साईट की फर्जी वेब साईट बनाकर पूरा आजमाया भी था |

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  10. नरेश सिह राठौङ   December 17, 2009 at 3:08 pm

    बढ़िया जानकारी है अभी तक इस जंजाल से मुक्त है जब ओन लाईन काम करेंगे तब देखा जायेगा ।

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