आओ आरक्षण का नाम भुनाएं

आओ आरक्षण का नाम भुनाएं

इस देश में आरक्षण एक ऐसी चीज है जिसे पाने के लिए हर कोई लालायित है| कोई व्यक्ति, जाति, समाज, सम्प्रदाय अपने आपको पिछड़ा, बेचारा, शोषित, गरीब नहीं समझता| लेकिन हमारे संविधान निर्माता व नेता यह आरक्षण शब्द पता नहीं कहाँ से ले आये कि इसे पाने यानी आरक्षण व्यवस्था रूपी मलाई खाने के लिए हर व्यक्ति, जाति, समाज, सम्प्रदाय अपने आपको गरीब, लाचार, बेचारा, पिछड़ा आदि आदि पता नहीं क्या क्या साबित करने के लिए जुटे रहते है|
ये आरक्षण शब्द के आकर्षण का ही कमाल है कि कुछ वर्ष पहले अख़बारों में पढ़ा था कि अपने आपको सम्पन्न, दबंग और पूर्वकाल में शासक मानने वाली एक जाति के नेताओं ने आरक्षण रूपी मलाई का स्वाद लेने के लिए अपनी जाति को चाण्डाल की संताने साबित करने वाले तर्क दिए थे| खैर….कोई दे भी क्यों नहीं, सरकारी आयोगों, न्यायालयों के आगे अपनी जाति को एक बार बेचारी गरीब साबित करने के बाद तो पूरी जाति के युवाओं की मौजां ही मौजां है| एक बार किसी जाति को आरक्षण मिल जाये, उस जाति के लोग सरकारी सेवाओं में घुस जहाँ अपना घर बनाने में कामयाब होते है, वहीं अपनी विरोधी समझी जाने वाली या वो जाति जो कभी चुनौती दे सकती है, को गर्त में डालने के भी पुरे अवसर मिल जाते है| आजकल सरकारी दफ्तरों में अक्सर देखा जा सकता है कि कुर्सी पर बैठा आरक्षण प्राप्त व्यक्ति जहाँ अपनी जाति वालों के काम नियमों से आगे जाकर कर देता है, वहीं यदि कोई प्रतिस्पर्धा वाली जाति के व्यक्ति का काम नियमानुसार भी हो तो उसकी फाइल अटका दी जाती है|

खैर………..सरकारी व्यवस्था है और कोई सरकार इसे बदलना भी नहीं चाहती तो हम नीची गर्दन कर इस व्यवस्था से समझौता करने के सिवा कर भी क्या सकते है.

लेकिन सार्वजनिक जीवन में हमने इस आरक्षण व्यवस्था की एक और बड़ी खासियत देखी, यदि वो खासियत सभी आरक्षण वंचित समझ लें तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ, उन्हें आरक्षण व्यवस्था से कभी शिकायत नहीं रहेगी| जिन समुदायों, जातियों को आरक्षण व्यवस्था में हिस्सा नहीं मिला उस समाज, समुदाय के युवा भले सरकारी नौकरी नहीं पा सके पर भी आरक्षण का नाम जपते हुए बहुत अच्छी तरक्की कर सकते है. आरक्षण रूपी नाम के जप से इतने आगे बढ़ सकते है कि वे धन, पद के साथ तगड़ी सामाजिक प्रतिष्ठा भी पा सकते है. कैसे? तो समझने के लिए व आरक्षण के नाम को कैसे भुनाया जाए इसके कुछ टिप्स निम्न है-


– अपने समुदाय को आरक्षण रूपी मलाई का स्वाद व फायदे दिखाते हुए इसे पाने के लिए लालायित कीजिये| और जब समाज आरक्षण के लिए लालायित हो जाए तो अपने नेतृत्व में एक संगठन बनाईये और प्रचारित कीजिये कि ये तो आरक्षण पाने का मामला है आप तो कौम के लिए अपनी जान भी निछावर कर देना चाहते है| यदि इसी मामले में यदि कोई दूसरा संगठन आपके पहले से सक्रीय है तो चिंता मत कीजिये| उसके खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दीजिये, प्रतिद्वंद्वी संगठन को पटकनी देनी है तो सीधे उसे अपनी कौम, जाति का गद्दार ही घोषित कर दीजिये| याद रखिये आपके समाज के गद्दार घोषित करने पैमाना एक ही है- “जो आपको आपके विरोध में लगे वही आपकी नजर में समाज का गद्दार होना चाहिए|”

यदि आप रैलियां करने, रेल पटरियां उखाड़ने जैसे आन्दोलन करने में सक्षम नहीं है तो कोई बात नहीं| छोटी-छोटी सभाएं कीजिये, गोष्ठियां कीजिये और ये भी नहीं कर सकते तो फेसबुक व वाट्सएप पर समूह बनाईये और दिन में जब भी समय मिले आरक्षण पाने के लिए जोशीले वाक्य व नारे लिखे| सोशियल साइट्स पर लोगों को लगना चाहिए कि आप इस मामले में पुरे उद्वेलित है और जान देने से लेकर कुछ भी कर गुजरने के तैयार है| याद रखें यह सिर्फ लोगों को अहसास मात्र कराना है|

ऐसा करने से आपको क्या फायदा होने वाला है अब वो बताता हूँ-
– यदि आप बड़ी रैलियां करने, यातायात जाम करने आदि करने में सक्षम है तो भले आपकी रैलियों से समाज को आरक्षण ना मिले पर आप इस बहाने अपने समाज बंधुओं की भावनाओं का दोहन करते हुए, उन्हें अपनी रैलियों में उन्हीं के खर्चे पर बुलाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकते है| हो सकता है चुनाव के मौके पर आपका यह शक्ति प्रदर्शन किसी राष्ट्रीय राजनैतिक दल का आपको टिकट दिलवा दे ओर आप फिर उसी आरक्षण रूपी मलाई की समाज को झलक दिखाकर उनके वोट पा विधानसभा या संसद पहुँच जाए| इस तरह आप इस आरक्षण के नाम पर समाज की भावनाओं का दोहन कर अपना राजनैतिक कैरियर बना तरक्की की राह पर आगे बढ़ सकते है|

यदि आपके पास बड़ी रैलियां करने, रेल पटरियां उखाड़ने आदि का सामर्थ्य नहीं है तो अपना संगठन बनाईये, नित्य उसकी प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों की अपनी इकाइयाँ गठित करिए और सोशल साइट्स पर उनके नियुक्ति पत्र अपलोड कर ऐसे प्रचारित कीजिये जैसे आप से बढ़कर आपकी कौम का शुभचिंतक कोई दूसरा नहीं| इस तरह आप अपना जनसंपर्क बढ़ाकर इतने तो सक्षम हो ही सकते है कि आरक्षण के नाम पर छोटी चिंतन सभाएं, गोष्ठियां आदि कर सकें| आपके इस कदम से समाज का भला हो या नहीं हो, पर इतना तय है कि इस बहाने आपकी सामाजिक दुकानदारी जम जाएगी, आप विधायक, सांसद आदि भले ना बन सके पर पार्षद, जिला परिषद् सदस्य आदि अवश्य बन सकते है. यदि आपकी राजनीति में रूचि भी नहीं तब भी चिंता की कोई बात नहीं| इस बहाने आप इतने प्रतिष्ठित हो जायेंगे कि आपका कोई भी काम कहीं नहीं अटकेगा और अपनी लाइनिंग द्वारा धन भी अपने सामर्थ्य अनुसार कमा सकते है|

– यदि आप कोई संगठन बनाकर सामाजिक दुकानदारी नहीं चला सकते तो भी आपके पास सोशियल साइट्स पर आरक्षण पाने का अभियान चलाकर अपने आपको समाज में प्रतिष्ठित करने के पुरे मौके है| ऐसा करने से आपको कोई संगठन अप्रोच कर अपने आप आपको पद आदि से सकता है| इस तरह घर बैठे आप किसी संगठन का पद पाकर आत्म-संतुष्ट हो सकते है| यही नहीं जो मित्र आपकी पोस्ट को कभी लाइक तक नहीं करते थे, वे आपके आरक्षण पाने के तर्क पढ़कर उस पर टिप्पणियाँ करेंगे, ढेरों लाइक्स आपको मिलेंगे| आपकी हर पोस्ट पर तगड़ी बहस होगी, सोशल मित्र आपको समाज का बहुत तगड़ा चिन्तक समझेंगे और आपकी हर जगह वाह वाह होगी|


ऐसा नहीं है कि आप सिर्फ आरक्षण पाने के लिए ही यह सब जोड़तोड़ कर अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बनायें. यदि आपको आरक्षण लेना अच्छा नहीं लगता, आप अपनी जाति, समुदाय को बेचारों, गरीबों, पिछड़ों की पंक्ति में खड़ा कर अपने स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुंचा सकते तो आप आरक्षण का विरोध कीजिये| आरक्षण की जड़ को ही उखाड़कर देश के बाहर फैंकने का आव्हान कीजिये| इस अभियान में आपके साथ सिर्फ आपके स्वजातीय ही नहीं, आरक्षण से पीड़ित अन्य जाति-समुदाय भी साथ हो लेंगे जो आपको आपका जनाधार बढाने में सहायक होंगे| अब ये आप पर निर्भर है कि आप आरक्षण के खिलाफ कितना बड़ा अभियान चला सकते है और अपने इस अभियान के बलबूते कितना राजनैतिक फायदा उठा सकते है|

पर एक बात साफ़ है इस आरक्षण के बलबूते जहाँ दलित, पिछड़े अगड़ों व सवर्णों से आगे निकलने की दौड़ लगा रहे है और सफलता प्राप्त कर रहे है| आरक्षण से वंचित लोग भी इसे पाने के लिए आन्दोलन कर व इसके खिलाफ भी अभियान चलाकर फायदा उठा सकते है|
इस तरह यह आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जो पा रहा है उसको भी फायदा और जो वंचित है वह भी इसके नाम से अपनी दुकानदारी चला फायदा ले सकता है|

डिस्क्लेमर : यह लेख विशुद्ध रूप से वर्तमान में आरक्षण के नाम पर चल रही गतिविधियों पर मौज लेने हेतु है, फिर भी किसी व्यक्ति व संगठन पर किसी तरह का व्यंग्य नहीं है, सो लेख पढ़े और मजा लें|

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