Udaipur City

पूर्व का वेनिस और भारत का दूसरा काश्मीर माना जाने वाला उदयपुर खूबसूरत वादियों से घिरा हुआ हैं। अपनी नैसर्गिंक सौन्दर्य सुषमा से भरपूर झीलों की यह नगरी सहज ही पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर लेती है। यहाँ की खूबसूरत वादियाँ, पर्वतों पर बिखरी हरियाली, झीलों का नजारा और बलखाती सडके बरबस ही सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती हैं। महाराणा उदयसिंह ने सन् 1559 में उदयपुर नगर की स्थपना की। लगातार मुगलों के आक्रमणों से सुरक्षित स्थान पर राजधानी स्थानान्तरित किये जाने की योजना से इस नगर की स्थापना हुई। सन्1572 में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र प्रताप का राज्याभिषक हुआ। उन दिनों एक मात्र यहीं ऐसे शासक थे जिन्होंने मुगलों की अधीनता नहीं स्वीकारी थी। महाराणा प्रताप एवं मुगल सम्राट अकबर के बीच हुआ हल्दीघाटी का घमासान युद्ध मातृभूमि की रक्षा के लिए इतिहास प्रसिद्ध हैं। यह युद्ध किसी धर्म, जाति अथवा साम्राज्य विस्तार की भावना से नहीं, बल्कि स्वाभिमान एवं मातृभूमि के गौरव की रक्षा के लिए ही हुआ।
देश के आजाद होने से पूर्व रियासती जमाने में गुहिल वंश के अंतिम शासक महाराणा भोपाल सिंह थे जो राजस्थान के एकीकरण के समय 30 मार्च, 1949 में राज्य के महाराज प्रमुख रहे।

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