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Friday, September 30, 2022

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भानगढ़ का सच – क्या इस किले में भूत रहते है?

राजस्थान के भानगढ़ Bhangarh का उजड़ा किला व नगर भूतों का डरावना किले के नाम से देश विदेश में चर्चित है| इस किले की यात्रा के लिए अलवर व जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा जाया जा सकता है रेल मार्ग से भी दौसा रेल्वे स्टेशन से उतर कर सड़क मार्ग से इस जगह पहुंचा जा सकता है दौसा से भानगढ़ की दुरी २२ किलोमीटर है| जबकि जयपुर व अलवर दोनों जगहों से लगभग ८० किलोमीटर है|

भानगढ़ के किले व नगर की उजड़ने की कई कहानियां प्रचलित है जिनमें रानी रत्नावती व एक तांत्रिक की कहानी प्रमुख है, प्रचलित जनश्रुतियों में किसी में रत्नावती को भानगढ़ की रानी बताया गया है तो किसी कहानी में भानगढ़ की सुन्दर राजकुमारी| पर दोनों ही कथाओं में इस पात्र के साथ सिंधु सेवड़ा नामक तांत्रिक का नाम व उसका कुकृत्य जरुर जुड़ा है|

प्रचलित कहानी के अनुसार सिंधु देवड़ा महल के पास स्थित पहाड़ पर तांत्रिक क्रियाएँ करता था वह रानी रत्नावती के रूप पर आसक्त था| एक दिन भानगढ़ के बाजार में उसने देखा कि रानी कि एक दासी रानी के लिए केश तेल लेने आई है सिंधु सेवड़ा ने उस तेल को अभिमंत्रित कर दिया कि वह तेल जिस किसी पर लगेगा उसे वह तेल उसके पास ले आएगा| कहते है रानी ने जब तेल को देखा तो वह समझ गई कि यह तेल सिंधु सेवड़ा द्वारा अभिमंत्रित है कहते है रानी भी बहुत सिद्ध थी इसलिए उसने पहचान करली और दासी से उस तेल को तुरंत फैंकने को कहा| दासी ने उस तेल को एक चट्टान पर गिरा दिया| कहते है अभिमंत्रित तेल ने चट्टान को उडाकर सिंधु सेवड़ा की और रवाना कर दिया सिंधु सेवड़ा ने चट्टान देखकर अनुमान लगाया कि रानी उस पर बैठकर उसके पास आ रही सो उसने अभिमंत्रित तेल को रानी को सीधे अपनी छाती पर उतारने का आदेश दिया|

जब चट्टान पास आई तब तांत्रिक को असलियत पता चली तो उसने आनन् फानन में चट्टान उसके ऊपर गिरने से पहले भानगढ़ नगर उजड़ने का शाप दे दिया और खुद चट्टान के नीचे दबकर मर गया| कहते है सिद्ध रानी को यह सब समझते देर ना लगी और उसने तुरंत नगर खाली कराने का आदेश दे दिया| इस तरह यह नगर खाली होकर उजड़ गया और रानी भी तांत्रिक के शाप की भेंट चढ गई|

कितनी सच्चाई है इस कहानी में

इस कहानी में कितनी सच्चाई है इसके बारे में इस बात से ही जाना जा सकता है कि जनश्रुतियों में भानगढ़ के लिए प्रचलित कहानी में कई लोग रत्नावती को राजकुमारी तो कई लोग रानी बतातें है| रानी रत्नावती का जिक्र तो हर कोई करता है पर वह किस राजा की रानी थी ?
उसके राजा व उसका शासन काल कौनसा था?
नगर किस काल में उजड़ा ?
इस प्रश्नों पर सब चुप है| अक्सर लोग इस नगर व किले को ५०० वर्ष पहले उजड़ा बताते है पर किले से मिले विभिन्न राजाओं के शिलालेखों की तारीख देखने के बाद उसके उजड़ने की समय सीमा काफी कम हो जाती है| हमने अपनी यात्रा में एक मंदिर (शायद मंगला देवी या केशवराय) के गर्भगृह के द्वार पर लगी एक बड़ी शिला पर संवत १९०२ लिखा देखा इस हिसाब से उस मंदिर के निर्माण का काल संवत १९०२ है तो जाहिर है आज से १६७ वर्ष पुर्व यह नगर आबाद था|

भानगढ़ का इतिहास

अपने पास उपलब्ध इतिहास की पुस्तकों में मुझे भानगढ़ के बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं मिली पर कुंवर देवीसिंह मंडावा ने अपनी पुस्तक “राजस्थान के कछवाह” में भानगढ़ के इतिहास की संक्षिप्त जानकारी जरुर दी| अब तक मुझे मिली भानगढ़ के किले की ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर भानगढ़ का किला जो आमेर के राजा भगवंतदास ने बनाया था उनके छोटे बेटे माधवसिंह (माधोसिंह) को मिला| भगवंतदास का स्वर्गवास मंगसर सुदी ७ वि.स. १६४६, १५ दिसम्बर १५९० को लाहौर में हुआ था| इसलिए यह अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है कि इस समय के आस-पास इस किले की राजगद्दी पर माधवसिंह बैठे थे| इनके अधीन मालपुरा भी था व मुंहता नैणसी के अनुसार अजमेर भी था |माधवसिंह (माधोसिंह) अपने बड़े भाई आमेर के राजा मानसिंह की भांति ही बहुत वीर पुरुष थे उन्होंने शाही सेना में रहते हुए कई महत्वपूर्ण युद्धों में वीरता दिखाकर अपनी वीरता का लोहा मनवाया था| आमेर में इनकी वीरता के बहुत किस्से प्रचलित थे| एक बार वे आमेर आये थे कि आमेर किले के एक झरोखे से अचानक गिरने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई| जहाँ उनकी मृत्यु हुई वहां उनका एक स्मारक भी बना है| राजस्थान के इतिहासकार ओझा जी को भानगढ़ में माधवसिंह के दो शिलालेख मिले थे जिन पर माघ बदी एकम वि.स. १६५४ और दूसरे में १६५५ लिखा था|

माधवसिंह (माधोसिंह) के बाद उनका पुत्र छत्रसाल जिसे छत्रसिंह के नाम से भी जाना जाता है भानगढ़ की गद्दी पर बैठा| छत्रसिंह अपने दो पुत्रों भीमसिंह व आनंद सिंह के साथ दक्षिण में शाही सेना से बगावत करने वाले खानजहाँ लोदी से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे| छत्रसिंह का एक पुत्र अजबसिंह भी था जिसने भानगढ़ के पास ही अजबगढ़ नाम से एक नगर बसाया और वहां किला बनवाया| अजबसिंह ने बलख युद्ध में अप्रत्याशित वीरता दिखाई थी| छत्रसिंह का भानगढ़ में मिले एक शिलालेख में आषाढ़ बदी १३ वि.स.१६७६ अंकित मिला है| छत्रसिंह का एक पुत्र उग्रसेन भी था पर गद्दी पर कौन बैठा उसका पता मेरे पास उपलब्ध पुस्तकों में नहीं मिला| पर भानगढ़ में मिले एक अन्य शिलालेख में माघ बदी एकम वि.स.१७२२ में इसी वंश का एक वंशज हरिसिंह गद्दी पर बैठा|

हरिसिंह के दो बेटे या उसके वंश के दो बेटे औरंगजेब के काल में मुसलमान बन गए थे जिनका नाम मोहम्मद कुलीज व मोहम्मद दहलीज था जिन्हें भानगढ़ राज्य मिला था इन दोनों भाइयों का एक शिलालेख भानगढ़ में मिला है जिस पर जेठ सुदी १४ १७५६ अंकित है| इन दोनों भाइयों के मुसलमान बनने व दिल्ली में मुग़ल सत्ता के कमजोर होने का फायदा उठाते हुए आमेर के महाराजा सवाई जयसिंह ने इन दोनों भाइयों को मारकर भानगढ़ पर कब्ज़ा कर लिया था और इस राज्य को अपने अधीन कर माधवसिंह(माधोसिंह) के ही वंशजों को अपने अधीन जागीरदार बना दिया|

कुछ अनुतरित प्रश्न

महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वारा अपने अधीन करने के बाद इस किले का कौन कौन जागीरदार रहा?
किले का प्रबंध व नियंत्रण किस जागीरदार के हाथों में रहा ?

रानी रत्नावती जिसके बारे में कहा जाता है कि वह पास के ही एक गांव तीतरवाडा की रहने वाली थी किस जागीरदार की रानी थी ?
नगर कब और क्यों उजड़ा ?
ऐसी कौनसी परिस्थितयां रही होगी कि जयपुर आमेर के शक्तिशाली शासकों के अधीन रहते हुए यह संपन्न और समृद्ध नगर वीरान हो उजड़ गया ?
पुरा शहर और महल उजड़ गया सभी निर्माण जमींदोज हुए पर वहां बने मंदिर सुरक्षित कैसे रहे ?
ऐसे कई प्रश्न है जिनके निवारण के लिए शोध की आवश्यकता है| एक समय समृद्ध रहे भानगढ़ नगर के इतिहास को आपके लोगों के सामने रख सकूँ इसकी मैं पुरी कोशिश करूँगा|

सिंधु सेवड़ा द्वारा नगर का नाश व भूतों का सच

इस किले व नगर के उजड़ने के संबंध प्रचलित कहानियों व जन-श्रुतियों की ऊपर चर्चा की जा चुकी है पर किले व नगर को देखने के बाद आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि किले व नगर का नाश किसी चट्टान द्वारा नहीं किया गया है बल्कि नगर उजड़ जाने व खाली हो जाने के कई वर्षों बाद तक आस-पास के ग्रामीणों व अन्य लोगों द्वारा खाली पड़ी इमारतों से जरुरत का सामान निकालने के चक्कर में इमारतें खंडहर में तब्दील हुई है वही किले व महलों को उनमें गड़े धन को निकालने के लिए चोरों द्वारा खुदाई करने के चलते नुक्सान पहुंचा है साथ ही पर्यटकों द्वारा भी नगर व महल की टूटी दीवारों पर चढ़ने के कारण नुकसान पहुंचा है|

मजे की बात यह है कि नगर में बनी हवेलियाँ व बाजार में बनी दुकानें खंडहर में तब्दील हो गई पर भानगढ़ नगर में बने प्राचीन मंदिर वैसे के वैसे सुरक्षित है हाँ उनकी मूर्तियां जरुर गायब है| यदि प्राकृतिक विपदा या तांत्रिक द्वारा अपनी शक्ति से नगर का उजड़ना माना जाय तो फिर मंदिर कैसे बच गए ?
बात साफ है एक तो मंदिरों में लगे दरवाजे आदि घरों में इस्तेमाल लायक नहीं फिर लोग मंदिरों का देवताओं के डर से नुक्सान पहुँचाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते|
किले व उजड़े नगर में भूतों की बात की सच्चाई जानने के लिए आजतक की ने टीम पैरानार्मल उपकरणों व कैमरों के साथ पुरी रात किले में भ्रमण कर गुजारी उन्हें न तो कोई भूत ही मिला न उनके उपकरणों ने कोई ऐसी बात दर्ज की कि जिसके सहारे वहां भूत होने की पुष्टि हो|

हमने भी अपनी यात्रा के दौरान वहां तैनात पुरातत्व विभाग के कर्मचारी से भूतों के अस्तित्व पर चर्चा की तो कर्मचारी ने बताया कि वहां कुल नौ कर्मचारी ऐसे है जिन्हें तीन तीन की टोली में तीन शिफ्टों में किला परिसर की सुरक्षा में तैनात रहना पड़ता है और रात्री गश्त भी वे करते है| रात्री गश्त करते समय उन्होंने कभी वहां भूत होने का अहसास नहीं हुआ और न ही उन्हें कभी डर लगा हाँ जंगल होने की वजह से जंगली जानवरों का डर जरुर है जिसके लिए उन्हें सतर्क व चौकन्ना रहना पड़ता है|

आजतक व जी टीवी के कार्यक्रम में भी कर्मचारी साथ थे तब भी उन्होंने कोई भूत नहीं देखा उसके बावजूद आजतक के इस खुलासे के बाद कि किले में कोई भूत नहीं है जी टीवी वालों ने भूत होने की झूंठी कहानी प्रचारित की जिसे महज जी टीवी द्वारा अपनी टीआरपी की भूख मिटाने का हथकंडा मात्र कहा जा सकता है|

नोट : यहाँ क्लिक कर आजतक द्वारा की जाँच पड़ताल का वीडियो देखा जा सकता है, जिसमे आजतक ने भानगढ़ किले में भूतों की कहानी को बेपर्दा किया|

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82 COMMENTS

  1. मैं भी साल बार पहले एडवेंचर करने के बहाने अपने कुछ दोस्तों के साथ गया था, पूरी रात वहाँ जंगल में गुजारी फिर भी भूत दिखा न कोई तांत्रिक!निराश होकर वापस आ गए अगली सुबह!

  2. फेसबुक पर सुरेन्द्र जी ग्रोवर की इस लेख पर टिप्पणी :-
    बहुत अच्छा लिखा मगर इस भूतों के भानगढ़ के उजड़ने में जयपुर के बसने की कथा का इतिहास भी जुड़ा है. जयपुर में माना जाता है कि जयपुर की बसावट के बाद भानगढ़ के मीणों को जयपुर बसने का आदेश था और इसलिए वहा की सारी आबादी जयपुर आ गई और आबादी के आभाव में भानगढ़ सुनसान हो गया. यह किवदंती भी इस लेख में जुड़ जाती तो सोने में सुहागा हो जाता|
    @ सुरेन्द्र जी
    आपकी बात में दम है जयसिंह जी ने यह नगर जीता था तो हो सकता है जयपुर में आबादी के लिए सबको यहाँ बुला लिया गया हो| इस सम्बन्ध में कोई और जानकारी हो तो कृपया भेजें|

  3. इस रहस्यमयी स्थान का प्रत्यक्ष शोध पूरण आलेख और भी बहुत गहन अध्ययन की आवश्यकता को प्रस्तुत कर रहा है ।काफी अनुतरित प्रश्न अभी भी-ज्यों के त्यों समक्ष खड़े है।

  4. असामाजिक‍ तत्‍व भूतों की कहानी प्रचलित करते हैं। जब भी भारत का लेखक सुप्‍त हुआ है, इतिहास लुप्‍त हुआ है। वर्तमान में भी लेखक और साहित्‍यकारों के स्‍थान पर राजनीति को वरीयता दी जा रही है, परिणाम भविष्‍य में दिखायी देंगे, जब हम इतिहास से वंचित हो जाएंगे।

  5. बहुत दुख होता है ऐसी धरोहरों को जमींदोज़ होते देखकर। सरकार को तो मुगलों के वो महल बचाने से ही फुर्सत नहीं जो किसी मंदिर या किले को तोड़कर बनाए गये थे

  6. सायद भूत का डर फैला कर ईस स्थान को उस समय बचाने की भी कोसीस कि गई हो|

    – भूत के डर से चोरीयों पर कुछ रोक लग गया होगा या पुराना महल होने के कारण भी धीरे धीरे ये अफवाह फैलता गया होगा की ईस महल मे भूत रहता है|

  7. भानगढ की सच्चाई जो भी हो…ताऊ टीवी का काम ही सनसनी फ़ैलाना है. आपने एक उम्दा और तथ्यपरक जानकारी भानगध पर जुटाई है वर्ना तो भानगढ के नाम से ही भूत दिखने लगते हैं. कुंवर देवीसिंहजी मंडावा की पुस्तक के बारे में भी जानकारी मिली, बहुत आभार.

    रामराम

    • ताऊ जी
      जब तक आमिर खान इस किले में पहुंचे उससे पहले ताऊ टीवी के एंकर रामप्यारे को वहां की स्टोरी कवर करने के लिए भेज दीजिये 🙂

  8. m bhi bhangarh ja chuka hu mujhe vahan kuch nhi dikha, mgr m yeh nahin kahunga k vaha kuch bhi nhi h kyuki kuch cheeze insaan ki samjh se bahar h jinhe hum maanna hi nhi chahte, hum sab maante h k bhagwaan h to agr bhagwaan h to bhoot bhi h kyuki agr positive h to ngtive bhi hoga or bhangarh ka sach kya h ye koi nhi jaanta agr koi sach jaanta h to pls mujhe btaye my email is atlaysidhus88@gmail.com

  9. m bhi bhangarh ja chuka hu mujhe vahan kuch nhi dikha, mgr m yeh nahin kahunga k vaha kuch bhi nhi h kyuki kuch cheeze insaan ki samjh se bahar h jinhe hum maanna hi nhi chahte, hum sab maante h k bhagwaan h to agr bhagwaan h to bhoot bhi h kyuki agr positive h to ngtive bhi hoga or bhangarh ka sach kya h ye koi nhi jaanta agr koi sach jaanta h to pls mujhe btaye my email is atlaysidhus88@gmail.com

  10. m bhi bhangarh ja chuka hu mujhe bhi vahaan kuch nhi dikha mgr m ye nhi kahunga k vha kuch nhi h, kyuki kuch cheeze insaan ki smjh se bahar h agr bhagwan h to bhoot prett bhi h agr positive h to negtive bhi jaroor hota h, or bhangarh ka sach kya h ye koi nhi janta ya fir rajkumari ki kahani hi is mahal ki sachai h m maanta hu k bht se teams bhangarh me raat guzaar chuki h m sirf ye kehna chahunga agr sach jaana hi h to akele jayo tab sach saamne aayega, din me vahan koi akela nhi ja skta vahan din me bhi darr lggta h. agr koi sach jaanta h to pls mujhe btaye my email atlaysidhus88@gmail.com

  11. Hi! frnds I like bhoot. Funny na. but mujhe horror story of places me bahut interst hai.Iska matlab yah nahi ki me Andhvishwasi hu. bilkul nahi, Main bhoot ya Aise kisi cheez per bharosa nahi karta. Lekin jab kuch logo ko in per bharosa karte dekhta hu to mujhe tajjub jaroor hota h. Isliye me chahta hu ki Agar Aise koi cheez ho to mujhe jaroor mahsoos ho. Log bhangarh ya kisi or jagah jate h jo ki hunted h] dekhne ki waha bhoot h ya nahi. Lekin wo bhoot h yar, koi Musuam me rakhi murti nahi jo koi bhi aye or darshan kar le, Bhoot] Atma ya koi bhi ho apni marji se hi kisi ko dikh sakti h. Har kisi ko nahi. Kyu frnds. So Kuch to Hai!

    • ऐसी जगहों पर इन्हे महसूस किया जा सकता है। यह रूहें हमेशा अपने आप को आम दुनिया से अलग रखना चाहती है। जब हम कभी किसी ऐसी जगह पर एकांत में होते हैं तो इन रूहों का आभास हमें होता है। इनकी भी प्रकृति बिलकुल सांपों से मिलती जुलती है, जब इंसान के सामने कोई सांप अचानक आ जाता है तो वो इंसानों के पैरों के कदमों के आहट के अनुसार चल कर उस जगह से भागना चाहता है, लेकिन एक शब्द जिसे डर कहते हैं उसे इंसानी स्वाभाव नहीं छोड़ पाता है और उसके फलस्वरूप वो सांप को दुश्मन मान कर उन्हे छेड़ता है या मार देता है।
      यही वो समय होता है जब सांप भी "डर" के वशीभूत इंसान पर हमला करता है फुफकारता और इंसान को दूर करने का प्रयास करता है। ठिक वैसे ही रूहें भी एकेले इंसान या शांत जगहों पर जहां उनका बसेरा होता है वहां से इंसान को हटाने के लिए अपने होने का आभास कराती हैं। ये रूहें शरीर विहीन होती हैं इसलिए प्रत्यक्ष रूप से आपके समाने नहीं आ सकती, लेकिन आस पास के वातावरण में बदलाव करके, अजीब सी खुश्बु पैदा कर, हवा का सहारा लेकर वो इंसानों को डराने का प्रयास करती हैं अमेरिका के ऐसे घर अपने ही लोगों की मौत, हत्या और उनकी आत्महत्याओं की कहानी बयां करती है। इस घर के लोग तो आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी रूहें आज भी इन घरों में मौजूद हैं। अमेरिका के लुसियाना प्रांत के सेंट फ्रेसिसविले में मौजूद इस घर को आज मिर्लेस प्लांटेशन के नाम से जाना जाता है।

    • ऐसी जगहों पर इन्हे महसूस किया जा सकता है। यह रूहें हमेशा अपने आप को आम दुनिया से अलग रखना चाहती है। जब हम कभी किसी ऐसी जगह पर एकांत में होते हैं तो इन रूहों का आभास हमें होता है। इनकी भी प्रकृति बिलकुल सांपों से मिलती जुलती है, जब इंसान के सामने कोई सांप अचानक आ जाता है तो वो इंसानों के पैरों के कदमों के आहट के अनुसार चल कर उस जगह से भागना चाहता है, लेकिन एक शब्द जिसे डर कहते हैं उसे इंसानी स्वाभाव नहीं छोड़ पाता है और उसके फलस्वरूप वो सांप को दुश्मन मान कर उन्हे छेड़ता है या मार देता है।
      यही वो समय होता है जब सांप भी "डर" के वशीभूत इंसान पर हमला करता है फुफकारता और इंसान को दूर करने का प्रयास करता है। ठिक वैसे ही रूहें भी एकेले इंसान या शांत जगहों पर जहां उनका बसेरा होता है वहां से इंसान को हटाने के लिए अपने होने का आभास कराती हैं। ये रूहें शरीर विहीन होती हैं इसलिए प्रत्यक्ष रूप से आपके समाने नहीं आ सकती, लेकिन आस पास के वातावरण में बदलाव करके, अजीब सी खुश्बु पैदा कर, हवा का सहारा लेकर वो इंसानों को डराने का प्रयास करती हैं। अमेरिका के ऐसे घर जो अपने ही लोगों की मौत, हत्या और उनकी आत्महत्याओं की कहानी बयां करती है। इस घर के लोग तो आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी रूहें आज भी इन घरों में मौजूद हैं। अमेरिका के लुसियाना प्रांत के सेंट फ्रेसिसविले में मौजूद इस घर को आज मिर्लेस प्लांटेशन के नाम से जाना जाता है।

  12. Hi! frnds I like bhoot. Funny na. but mujhe horror story of places me bahut interst hai.Iska matlab yah nahi ki me Andhvishwasi hu. bilkul nahi, Main bhoot ya Aise kisi cheez per bharosa nahi karta. Lekin jab kuch logo ko in per bharosa karte dekhta hu to mujhe tajjub jaroor hota h. Isliye me chahta hu ki Agar Aise koi cheez ho to mujhe jaroor mahsoos ho. Log bhangarh ya kisi or jagah jate h jo ki hunted h] dekhne ki waha bhoot h ya nahi. Lekin wo bhoot h yar, koi Musuam me rakhi murti nahi jo koi bhi aye or darshan kar le, Bhoot] Atma ya koi bhi ho apni marji se hi kisi ko dikh sakti h. Har kisi ko nahi. Kyu frnds. So Kuch to Hai!

  13. श्री शेखावत जी के लेख पढ़ कर अच्छा लगा किन्तु आप एक बात बताना भूल गए |भानगढ़ की बसावट हु -बहु जयपुर बसावट की शैली में है | बाज़ार चुराहे जयपुर शहर की तरह हैं | फिर भी लेख बहुत ज्ञानवर्धक है | मुरली बाबू भार्गव ,अलवर ,राजस्थान

  14. First of all let me clear your doubt please that There is no such word s haunting or haunted. That story is fake told by people I don't believe. Although I am a warlock type of guy but I do not keep faith in these

  15. First of all let me clear your doubt please that There is no such word s haunting or haunted. That story is fake told by people I don't believe. Although I am a warlock type of guy but I do not keep faith in these

  16. Dosto Bhangarh ka sach sirf ye h k vahan koi bhut pret ni h. Ye sb aafvah Bhangarh ke kile ko vahan k logo se bachane ke liye falai gyi h taki vahan rat me koi chori karne na aa sake.kyu k vahan pr kecda aadi ke trees h to is se log dar k vahan na jaye. Mahal me khudai (digging) na kre khajane ke liye. Us fort ki safty ke liye logo me aisi Batein falai hui h.
    Sushil choudhary

  17. sare resaearch ke bad manna h ki bhangarh me koi bhoot ni h koi pret ni u to waha ke log bhangarh ke name se kese drte wha kyo ni jate or bhangarh ko worlds top 10 hunted palace me name kaise diya jata…..
    agar wha pe kuch ni h to us kille ko tod kr sab kuch khatam kyo ni kr dete…..
    wha ke guard khte h hmne aaj tak kuch ni dekha to logo sham ke 6 bje bad entry band kyo h…
    mene aaj tk koi bhoot pret ni dhekhe h fir bhi me ye mannta hu ki aisa kch hota to h ….
    me bhi ye chata hu ki mujhe bhi kbi is chij ka pta chlae ki aakhir bhoot hote kese h kya krte h akshar logo ko sunta hu ki usne bhoot dekha h usko feel hua h ya cir kuch anhoni bate bate h jo ki unke sath phle kbhi ni hui pr jb wo koi anjaan jagh jate h to feel krte h…
    Kya bhangarh me koi tantrik ni h jo in bato ko janta ho or bta ske ki kya h…aakhir aisa kya hua h….
    Ise to dhongi baba bhut gumte h.
    khte h wha jane ke bad koi waps lot ke ni aata……
    agr koi wha pe bhoot dekhe to jrur btana
    mail me …
    prajapatcoolboy@gmail.com

    • dear i m from alwar and one thing i want to tell u that since my childhood hearing these things bhangarh is no ordinary place u notice something if u went thr the place is so neat and clean how? municipality wale alwar me saaf nahi karte wahan kyun karenge and bhangarh trip has its side affect some can feel them early but others may be later

  18. sare resaearch ke bad manna h ki bhangarh me koi bhoot ni h koi pret ni u to waha ke log bhangarh ke name se kese drte wha kyo ni jate or bhangarh ko worlds top 10 hunted palace me name kaise diya jata…..
    agar wha pe kuch ni h to us kille ko tod kr sab kuch khatam kyo ni kr dete…..
    wha ke guard khte h hmne aaj tak kuch ni dekha to logo sham ke 6 bje bad entry band kyo h…
    mene aaj tk koi bhoot pret ni dhekhe h fir bhi me ye mannta hu ki aisa kch hota to h ….
    me bhi ye chata hu ki mujhe bhi kbi is chij ka pta chlae ki aakhir bhoot hote kese h kya krte h akshar logo ko sunta hu ki usne bhoot dekha h usko feel hua h ya cir kuch anhoni bate bate h jo ki unke sath phle kbhi ni hui pr jb wo koi anjaan jagh jate h to feel krte h…
    Kya bhangarh me koi tantrik ni h jo in bato ko janta ho or bta ske ki kya h…aakhir aisa kya hua h….
    Ise to dhongi baba bhut gumte h.
    khte h wha jane ke bad koi waps lot ke ni aata……
    agr koi wha pe bhoot dekhe to jrur btana
    mail me …
    prajapatcoolboy@gmail.com

  19. Ye sahi hai ki vanha jana khatre se khali nahi hai. parantu din me us kile ki khubsoorti dekhte banti hai.
    main khud vanha ja kar ye anubhav kiya hai ki ruhey abhi bhi vanha bhatakti hai
    ajabgarh ka pura gaon aaj tak basa nahi

  20. dosto maine bhangarh ka rahasya pada mujhe lagta hai ye ek dilchasp va darawana rahasya hai. bhoot pret jo sadiyo se aam insan ke piche pade hai jinka koi ilaj nhi bhangarh ek rahasyanuma place hai isliye jo bhi vaha jaye sarkar ke dwara diye notice ke rules ka palan karna chaiye .

  21. हा भानगढ़ की जो भी कहानी हैं। उसे सुनकर तो ऐसा लगता की वहा वास्तव में भुत प्रेतों का निवास स्थान है। नहीं तो किस कारणसे भानगढ़ शहर रातो रात उजड़ सकता था। और भारत सरकार सुचना बोर्ड के माध्यम से आम जन को क्यों सतर्क करती क्योंकि वहा पर वास्तव में बुरी आत्माओ का प्रवेस हो सकता है।और भानगढ़ का किला तो ऐसे ही डरावनी जगहों विख्यात किला हैं । क्योकि ऐसी डरावनी जगहों अकेले रहकर महसुस करो तो ऐक अजीब सा डर महसुस करेगे।

  22. Hi frnds kal hi mere pass ek pic aai h meri frnd ne send ki thi .unki jankar me se koi the wo sab. unke groups me se hi ek ne wo pic li thi .usne bataya ki jisne pic li thi wo tabhi behosh ho gya or abhi tak coma me h .baki all are dead. 🙁 isme kitna such h kitna jhuth nhi janti .ye pic bhangarh k fort ki hi h .

    • hello rachna, muje aap vo pic send kr skti ho jo apki frnd ne bhangarh me pic li thi jisko dekh kr vo coma me chali gyi thi plz i m waiting. send me on my email id – (amitdv46@gmail.com) or whatsapp me – 09990021900.

  23. Its all crap, there is no Ghost or Evil forces in Bhangarh, also I have a question that why ghosts appears in Night? Do they work in NIGHT shifts in Bhangarh…. Its all nonsense there is no ghost or evil around. Believe in GOD and positive energy..

  24. भानगढ़ का किला अपने ईतिहास के लिये भारत में बहुत ही प्रसिद्ध हे आप ने अपने पोस्ट में इसका बहुत रोचक वर्णन किया हे

  25. yeh ek din ki baat hai jab ham bhangarh kila dekhne gye the ham 4 dost gaye the ham subah gaye the magar ham ko wahan kile ko dekhte dekhte saam dhalne lagi waha uss kile ke karamchari mike se awaz laga rahe the ke sbhi kile se bhar aa jao saam ho rahi hai yeh awwaz sun kar sabhi log kile se bhar ane lage magar ham 4ro dost kile se bhar nah nikle ham wahi saam ko jagal mai chup gaye saam hote hi uss area ka main darwaja band kar diya gaya magar ham wahi jangal main cip kar bhtathe they achank raat hone lagi saam dhalne lagi ham sabhi ko dar ka khoff mehsoos hone laga tha magar ham kese na kese kar ke raat ko uss kile ki nigrani parrahe the dekhte hi dekte raat ka pehra Charon taraf badhne laga yha deree dhree raat ka ek ek lamha mano hame saloon ke barabar lag raha tha ese hi byanak awazo ke bich sari raat kat gai hame wahoan bhayana k awazo ke siwa or kuch nahi dikhatha ……………………

  26. Ha mne bhi suna h ki yha bhut rhte h bt sai khu to mjhe ni lgta ki yha kch aisa hoga…m abhi 9 jan ko wha hokr aya hu mje khi bhi bhut nai dikhe
    ….

  27. Mjhe nai lgta ki yha kch aisa h bt mne bhi suna h ki yha bhoot rhte h….m abhi 5 din phle hi yha hokr aya huor mjhe wha koi bhi bhoot nai dikha….

  28. एक बार जाना पड़ेगा जो आँखों से देखेंगे उसी पर विश्वास होगा

  29. ho sakta hai jis samay bhangar ko chhoda jaa raha ho uska naamakran bhut ka bhangarh kar diya ho matalab ki raja maharajaon ka bhutkaal ka bhangarh or ab ke logo ne socha ki ye bhuton ka bhangarh hai yahan bhut rehte honge

  30. Muje aesa lagta he kiv ahapar koy bhut nahihe koyo ki mebhi ak vesi jaga par Jake aya hu to mene vaha par chard di or pach rate gujarit ti thi to muje pata chala ki vahapar koy asi bat nahi he abhi to me USA me hu jabhi me vapish avuga to vahape jarur javuga or mere dost bhi ane vale he ham asi sab jaga jaki bekhate he

  31. में यहाँ बगल का सहर है बांदीकुई में रहता हु। और इन बातो को में नही मानता कितनी बार घूमने गया हु । कोई देखना चाहता है। तो में उसके लिए गाइड का काम क्र सकता हूँ। मुझे मेल क्र सकते है आप premmeenak1premmeenak17@gmail.com
    या मेरे नो 7792022680 बस देखने वाली जगह है। सुपर

  32. प्रेम मीना भाई में अभी 20/04/2016 को गया था भानगढ़ का किला देखने के लिए एक दो जगह पर बहुत अँधेरा और चमगढ़रो का शोर था बहुत अँधेरा तह वहां पर में एकला था मेरे बाकी साथी तब तक निचे थे और वो निचे बेस्मेंट देखा आप ने …..जहा पर शोर मचते चम्गादर आप को डरने के लिए मजबूर कर देंगे ………….कितना अँधेरा हे वह्जन पर

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