देवी-देवताओं द्वारा मुराद पूरी होने के पीछे का रहस्य

देवी-देवताओं द्वारा मुराद पूरी होने के पीछे का रहस्य

हमारी सनातन परम्परा में हर वर्ग व हर कुल अपना एक कुलदेवता, कुलदेवी और रक्षक देवता मानता आया है और उनकी आराधना करता आया है| लोगों को विश्वास है कि उनके कुलदेवता, कुलदेवी जहाँ उनकी मांगी हुई मुराद पूरी करते है, वहीं रक्षक देवता उनकी रक्षा करते है|

मेरे एक मित्र अर्द्ध सैनिक बल में अधिकारी है और उनके विभाग में उन्हें बेस्ट परफोर्मर माना जाता है| पर अक्सर वे ड्यूटी समय में कई सामाजिक कार्यों में व्यस्त हो जातें है, कई सामाजिक सभाओं में भी वे शामिल होने चले जाते है| मैं अक्सर ऐसे मौकों पर उन्हें पूछ लेता हूँ कि आपका कार्य कौन देखेगा? तब जबाब होता है- श्री कृष्ण| मैंने उनके साथ बहुत बार अनुभव किया कि जब तक सामाजिक कार्य में वे संलग्न रहते है, कार्यालय से उनके पास किसी का काम को लेकर कोई फोन नहीं आता और जैसे ही वे उस कार्य से निवृत होते है, उनके कार्यालय से फोन आ जाता है और वे मुस्करा कर कह देते है कि श्री कृष्ण का काम (समाज सेवा) मैं कर रहा था उससे मैं निवृत हो गया और बदले में श्री कृष्ण मेरा कार्य कर रहे थे वे भी मेरे कार्य से निवृत हो गए|

दरअसल उन्हें भरोसा है कि जब वे किसी अन्य सामाजिक कार्य में व्यस्त है तो कृष्ण इस बीच कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं होने देंगे और हर बार उनका भरोसा मजबूत होता है|
जब वे अपना हर कार्य निर्विध्न पूरा कर आते है| ठीक इसी तरह के मामले में अलादीन के चिराग के जिन्न की चर्चा करते हुए “रहस्य” “The Secret” नामक पुस्तक के लेखक Rhonda Byrne रांण्डो बर्न लिखते है “याद रखें, अलादीन को अपनी मनचाही चीजें मांगनी होती है| फिर ब्रह्माण्ड जिन्न बन जाता है| विभिन्न परम्पराओं ने इसके अलग-अलग नाम दिए है- आपका रक्षक देवदूत, आपका उच्चतर स्वरूप| हम इस पर कोई भी लेबल लगा सकते है और अपने लिए सबसे अच्छी तरह काम करने वाले लेबल को चुन सकते है, लेकिन हर परम्परा ने हमें बताया है, कि कोई चीज है, जो हमसे ज्यादा बड़ी है| और जिन्न हमेशा एक ही बात कहता है : “आपकी इच्छा ही मेरा आदेश है|”

जिन्न की कहानी के उदाहरण से बर्न समझाता है कि आप जो मांगेंगे, किसी कार्य के लिए जो सोचेंगे वह आकर्षण के नियम के तहत अवश्य पूरा होगा| अर्थात आप जो मनोकामना करेंगे, जिससे करेंगे वो ब्रह्मांड अवश्य पूरी करेगा| जिसे आप कोई भी लेबल दे सकते है जैसे- मेरा रक्षक देवता, मेरा कुलदेवता या इच्छा पूरी करने वाला जिन्न ही सही|

बर्न के अनुसार जिन्न आकर्षण का नियम है और यह हमेशा मौजूद है आप भी जो भी सोचते, बोलते और करते है, उसे यह जिन्न हमेशा सुन रहा होता है| और आप जो पाना चाहते है वह आपके आदेशों के आदेशों की पालना करते हुए आपको उपलब्ध करा देता है| आपके मन में जैसे ही विचार आता है, जिन्न व्यक्तियों, परिस्थितियों और घटनाओं के माध्यम से आपकी इच्छा पूरी करने के लिए ब्राह्मण को फ़ौरन सक्रीय कर देता है|

यदि हम बर्न के रहस्य नियम को सही माने तो हमारी सनातन परम्परा में कुलदेवता, रक्षक देवता आदि से मांगने व इच्छा पूरी होनी वाली अवधारणा व विश्वास पर विश्वास किया जा सकता है| दरअसल हम जैसा सोचेंगे, वैसा अवश्य होता है, जिसकी कामना करते है वह अवश्य मिलता है| इच्छा पूरी होने पर आप उसे कोई लेबल दे सकते है जैसे- मेरे कुलदेवता ने दिया, मेरे रक्षक देवता ने दिया या किसी और ने|

अत: सकारात्मक सोचें, अच्छा पाने की सोचे, मन में अच्छे विचार सोचें| आपको सब कुछ मिलेगा|

3 Responses to "देवी-देवताओं द्वारा मुराद पूरी होने के पीछे का रहस्य"

  1. सार्थक प्रस्तुति।

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (12-01-2015) को "कुछ पल अपने" (चर्चा-1856) पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ…
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. Kavita Rawat   January 12, 2015 at 5:44 am

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..

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  3. Aadi Nyk   January 22, 2015 at 2:31 pm

    Maangane se sab kuch milta to Bhikhari ko to ab tak amir ban jana chahiye

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