यहाँ के वीरों के आगे भी भागी थी हुमायूँ की सेना

यहाँ के वीरों के आगे भी भागी थी हुमायूँ की सेना

मुग़ल शासकों ने भारत में अपने राज्य की जड़ें ज़माने व उसे मजबूत करने के उद्देश्य से हर छोटे-बड़े राज्य को अधीन करने के लिए सेनाएं भेजी| इसी श्रंखला में हुमायूँ की नजर राव शेखाजी द्ववारा स्थापित नवराज्य शेखावाटी पर पड़ी| हुमायूँ ने शेखावाटी के शासक राव रायमल जी के अपने सन्देश वाहक भेजकर कहलाया […]

जब राजपुतानियों के हाथों में तलवारें देख भागा था मेजर फोरेस्टर

जब राजपुतानियों के हाथों में तलवारें देख भागा था मेजर फोरेस्टर

सन 1803 में राजस्थान में जयपुर रियासत की ईस्ट इंडिया कम्पनी से मैत्रिक संधि व कुछ अन्य रियासतों द्वारा भी मराठों और पिंडारियों की लूट खसोट से तंग राजस्थान की रियासतों ने सन 1818ई में शांति की चाहत में अंग्रेजों से संधियां की| शेखावाटी के अर्ध-स्वतंत्र शासकों से भी अंग्रेजों ने जयपुर के माध्यम से […]

माण्डण का युद्ध : यूँ मिला प्रमाणिक इतिहास

माण्डण का युद्ध : यूँ मिला प्रमाणिक इतिहास

माण्डण का युद्ध (Mandan near Rewari and Narnol) सं. 1822 वि. (सन् 1775 ई.) में लड़ा गया था, जिसकी स्मृति प्रत्येक शेखावत घराने में आज भी ताजा बनी हुई है। विशेष रूप से झुंझुनू और उदयपुरवाटी परगनों का प्रत्येक Shekhawat परिवार इस बात का दावा करता है कि उसका कोई एक पुरुखा माण्डण के युद्ध […]

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा साहित्य और इतिहास के उन्नयन के लिए राजस्थान और राजपूत समाज अपने जिन साहित्य व इतिहास साधक सपूतों पर गर्व कर सकता है, उनमें सौभाग्यसिंह शेखावत का विशिष्ट स्थान है| आपने अनवरत जीवनभर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और इतिहास की मनोयोगपूर्वक मौन साधना की है| राजस्थान के पर्वतों, वनों, दुर्गों और झोंपड़ीयों के […]

शेखावाटी का माउंट : हर्षनाथ पहाड़

शेखावाटी का माउंट : हर्षनाथ पहाड़

इस माह कोई एक दशक बाद 15 दिन गांव में गुजारने को मिली छुट्टी के दौरान 6 अगस्त को गांव के पास स्थित लोसल कस्बे में बैंकिंग कार्य निपटाने के बाद वहीँ से बस पकड़ राजपूत युवा परिषद् के नव-नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष उम्मेद सिंह करीरी से मिलने सीकर आ गया, उम्मेद सिंह करीरी का कार्यालय […]

शेखावाटी

शेखावाटी

लेखक : ठा.सौभाग्य सिंह शेखावत Thakur DeviSingh, Mandawa लोक जीवन और लोकमानस में वे ही पात्र गरिमामय स्थान प्राप्त कर सकते है जिनमें सामान्यजन से कुछ विशिष्टताएँ होती है अथवा अतिमानवीय गुण होते है। ऐसे चरित्र समाज में वंदनीय बनकर युग-युगान्तर तक अजर-अमर बने रहते है। वे लोकादर्श, लोक स्मरणीय और जनमानस के प्रेरणा स्त्रोत […]