श्री भैरों सिंह शेखावत की प्रशस्ति में -3

श्री भैरों सिंह जी शेखावत के जन हित कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्वान कवि डा. उदयवीर शर्मा द्वारा रचित कुछ दोहे – था कुदरत रो दिवाला,था कुदरत री जोत |के था कुदरत कोराणी,थारो उजलो गोत ||२२ मरुधर माटी मुलकरी,चितचधिया चतुरेश |गावे गीत गुमानिया,गावे गीत गणेश ||२३ हे नरपुंगव सरल चित,गौरव गावे गीत |हे मरुधर […]

श्री भैरों सिंह शेखावत की प्रशस्ति में -2

श्री भैरों सिंह जी शेखावत के जन हित कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्वान कवि डा. उदयवीर शर्मा द्वारा रचित कुछ दोहे – सस्ती सगुणी ओपती,सहज सरल साधार |शिक्षा देवन गांव में,खोल्या शिक्षा द्वार ||१३ ज्ञान बिना जीवन निफल,ज्ञान बिना के जात |ज्ञान बिना जनतंत्र के,थे समझी या बात ||१४ उन्नत शिक्षा नै सुगम,आप करी […]

श्री भैरों सिंह जी शेखावत की प्रशस्ति में- 1

श्री भैरों सिंह जी शेखावत के जन हित कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्वान कवि डा. उदयवीर शर्मा द्वारा रचित कुछ दोहे – शेखा-कुल रा लाडला,धाकड़ धुनी सुजान | उजला सूरज-कुल-रतन,भैरूं सिंघ मतिमान ||१ मरुधर-माटी री महक,जन-मन का सरदार | दीन-हीन-रक्षक सुधी,थे भारत-गल-हार ||२ भोग्यो जीवन गांव रो,देख्या घणा अभाव | पण सांचा अनथक पथिक,राख्यो […]

Rao Shiv Singh, Sikar राव शिव सिंह जी, सीकर

सीकर शेखावाटी राज्य का महत्वपूर्ण ठिकाना था, राजा रायसल जी शेखावत के पुत्र राव तिरमल के वंशज दौलत सिंह जी थे, दौलत सिंह जी ने सं. 1687 में सीकर को अपनी राजधानी बनाकर गढ़ की नीवं डाली | सं. 1721 में दौलत सिंह के निधन के बाद शिव सिंह जी Rao Shiv Singh सीकर के […]

शेखावत वंश की शाखाएँ -3

-रायसलोत शेखावत :- लाम्याँ की छोटीसी जागीर जागीर से खंडेला व रेवासा का स्वतंत्र राज्य स्थापित करने वाले राजा रायसल दरबारी के वंशज रायसलोत शेखावत कहलाये !राजा रायसल के १२ पुत्रों में से सात प्रशाखाओं का विकास हुवा जो इस प्रकार है !A- लाड्खानी :- राजा रायसल जी के जेस्ठ पुत्र लाल सिंह जी के […]

शेखावत वंश की शाखाएँ -2

*सातलपोता शेखावत -शेखाजी के पुत्र कुम्भाजी के वंशज सातलपोता शेखावत कहलाते है ! *रायमलोत शेखावत -शेखाजी के सबसे छोटे पुत्र रायमल जी के वंशज रायमलोत शेखावत कहलाते हैइनकी भी कई शाखाएं व प्रशाखाएँ है जो इस प्रकार है !-तेजसी के शेखावत -रायमल जी पुत्र तेज सिंह के वंशज तेजसी के शेखावत कहलाते है ये अलवरजिले […]

महाराव शेखाजी

महाराव शेखाजी

वीरवर राव शेखाजी Rao Shekhajiका जनम विजयादशमी वि. सं. 1490 में बरवाडा व नान अमरसर के शासक मोकल सिंघजी की रानी निरबान जी से हुवा, पिता की मृत्य के बाद 12 साल की उम्र में वि. सं. 1502 में नान अमरसर की 24 गाँवो की जागीर संभाली| अपने आसपास के छोटे जागीरदारों को जीत कर […]