स्व. भैरोंसिंह जी शेखावत की जयंती 23 अक्टूबर को, सर्वधर्म प्रार्थना सभा में आप सभी आमंत्रित

स्व. भैरोंसिंह जी शेखावत की जयंती 23 अक्टूबर को, सर्वधर्म प्रार्थना सभा में आप सभी आमंत्रित

राजस्थान के सबसे ज्यादा लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे, पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत, जो राजस्थान में जन मानस में बाबोसा के नाम से प्रसिद्ध है, की 94 वीं जयन्ती के अवसर पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जायेगा| स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत के दोहिते और युवा भाजपा नेता अभिमन्यु सिंह राजवी के अनुसार 23 […]

औरंगजेब की धर्म विरोधी नीतियों का खण्डेला के राजा बहादुरसिंह ने किया था विरोध

औरंगजेब की धर्म विरोधी नीतियों का खण्डेला के राजा बहादुरसिंह ने किया था विरोध

Raja Bahadur Singh, Khandela : खण्डेला के राजा वरसिंहदेव के निधन के बाद वि.सं. 1720 में उनके ज्येष्ठ राजकुमार बहादुरसिंह खण्डेला की राजगद्दी पर आसीन हुए| राजा वरसिंहदेव का ज्यादातर समय शाही सेना के साथ दक्षिण में बिता था अत: उनकी अनुपस्थिति में खण्डेला राज्य का प्रबंधन राजकुमार बहादुरसिंह के ही हाथों में लंबे समय […]

इस राजा के आगे नम्रता से झुका था वनराज सिंह

वह दिन बादशाह के शिकार अभियान का बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन था, क्योंकि उस दिन बादशाह के शिकारी दल ने एक जिन्दा शेर को पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी| शेर को पकड़कर पिंजरे में बंद कर दिया गया था| जिन्दा शेर के पकड़े जाने पर शिकारी दल में मौजूद लोगों में चर्चा हो रही […]

माण्डण युद्ध : जब राजपूत-जाट सेना के आगे भागी मुगल सेना

माण्डण युद्ध : जब राजपूत-जाट सेना के आगे भागी मुगल सेना

माण्डण युद्ध : अपनी मातृभूमि शेखावाटी-प्रदेश की स्वतंत्रता की रक्षार्थ 6 जून, 1775 ई. को रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शेखावतों तथा शाही सेनाधिकारी के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ था। जिसमें आक्रान्ता शाही सेनाधिकारी राव मित्रसेन अहीर को पराजित हो युद्धस्थल से भागना पड़ा था और शेखावत पक्ष की विजय हुई| यद्यपि […]

राव शेखा जी का आमेर से युद्ध और विजय

Rao Shekha history in Hindi, Rao Shekhaji, Shekhawati, Shekhawat Vansh राव शेखा के दादा बालाजी आमेर से अलग हुए थे | अतः अधीनता स्वरूप कर के रूप में प्रतिवर्ष आमेर को बछेरे देते थे | शेखा के समय तक यह परम्परा चल रही थी | राव शेखा ने गुलामी की श्रंखला को तोड़ना चाहा | […]

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

एक स्त्री की मान रक्षा के लिए महाराव शेखाजी ने झुन्थर के कोलराज गौड़ का सर काट कर अपने अमरसर के गढ़ के सदर द्वार पर टंगवा दिया,ऐसा करने का उनका उद्देश्य उदंड व आततायी लोगों में भय पैदा करना था हालांकि यह कृत्य वीर धर्म के खिलाफ था शेखा जी के उक्त कार्य की […]

जब राजपुतानियों के हाथों में तलवारें देख भागा था मेजर फोरेस्टर

जब राजपुतानियों के हाथों में तलवारें देख भागा था मेजर फोरेस्टर

सन 1803 में राजस्थान में जयपुर रियासत की ईस्ट इंडिया कम्पनी से मैत्रिक संधि व कुछ अन्य रियासतों द्वारा भी मराठों और पिंडारियों की लूट खसोट से तंग राजस्थान की रियासतों ने सन 1818ई में शांति की चाहत में अंग्रेजों से संधियां की| शेखावाटी के अर्ध-स्वतंत्र शासकों से भी अंग्रेजों ने जयपुर के माध्यम से […]

माण्डण का युद्ध : यूँ मिला प्रमाणिक इतिहास

माण्डण का युद्ध : यूँ मिला प्रमाणिक इतिहास

माण्डण का युद्ध (Mandan near Rewari and Narnol) सं. 1822 वि. (सन् 1775 ई.) में लड़ा गया था, जिसकी स्मृति प्रत्येक शेखावत घराने में आज भी ताजा बनी हुई है। विशेष रूप से झुंझुनू और उदयपुरवाटी परगनों का प्रत्येक Shekhawat परिवार इस बात का दावा करता है कि उसका कोई एक पुरुखा माण्डण के युद्ध […]

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी

राजस्थान में शेखावाटी राज्य की जागीर बठोठ-पटोदा के ठाकुर बलजी शेखावत दिनभर अपनी जागीर के कार्य निपटाते,लगान की वसूली करते,लोगों के झगड़े निपटाकर न्याय करते,किसी गरीब की जरुरत के हिसाब से आर्थिक सहायता करते हुए अपने बठोठ के किले में शान से रहते ,पर रात को सोते हुए उन्हें नींद नहीं आती,बिस्तर पर पड़े पड़े […]

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा साहित्य और इतिहास के उन्नयन के लिए राजस्थान और राजपूत समाज अपने जिन साहित्य व इतिहास साधक सपूतों पर गर्व कर सकता है, उनमें सौभाग्यसिंह शेखावत का विशिष्ट स्थान है| आपने अनवरत जीवनभर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और इतिहास की मनोयोगपूर्वक मौन साधना की है| राजस्थान के पर्वतों, वनों, दुर्गों और झोंपड़ीयों के […]

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