भारतीय राजाओं को हर बार महंगी पड़ी उदारता

भारतीय राजाओं को हर बार महंगी पड़ी उदारता

भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही सहिष्णुता, उदारता, परमार्थ आदि गुणों के लिए प्रसिद्ध रही है| विदेशी आक्रान्ताओं के साथ भी हमारे यहाँ के शासकों ने संस्कृति अनुरूप उचित व्यवहार किया| शत्रु आक्रान्ता भले वह विदेशी हो या देशी, के पकड़े जाने पर कभी भी उसके साथ किसी राजा ने क्रूर व्यवहार नहीं किया| […]

इतिहास प्रसिद्ध ताकतवर दासी : रामप्यारी

राजस्थान में दास और दासी प्रथा सदियों तक चलती रही| इस कुप्रथा के परिणाम भी बड़े गंभीर और जहरीले निकले| इन दास दासियों ने भी राजस्थान के रजवाडों की राजनीती में कई महत्त्वपूर्ण कार्य किये|जोधपुर के शासक मालदेव की रानी को अपनी ही दासी भारमली के कारण अपने पति से जीवन भर रूठे रहना पड़ा […]

अलवर की साहित्य साधक महारानी आनंद कुंवरी राणावत

राजस्थान की राजकुलीन महिला कवयित्रियों में महारानी आनंद कुंवरी का उल्लेखनीय स्थान है| यह महारानी शाहपुरा (मेवाड़) राज्य के राजधिराज माधव सिंह की बहन, राजाधिराज अमरसिंह की राजकुमारी थी और कछवाहों की अलवर रियासत के महाराजा विजयसिंह के साथ विवाही थी| महाराजा विजयसिंह का शासनकाल 1871 से 1914 विक्रमाब्द है| यही अवधि महारानी के काव्य […]

राघोगढ़ की साहित्य साधक कवयित्री रानी छत्र कुंवरी राठौड़

साहित्य साधक राजपूत महिलाओं में राणी छत्रकुमारी की गणना की जाती है| यह किशनगढ़ के महाराजा सावंतसिंह की पौती और रूपनगढ़ के महाराज सरदारसिंह की पुत्री थी| इनकी भुआ सुन्दर कुंवरी थी| छत्रकुमारी का विवाह भी राघोगढ़ के खींची महाराजा बहादुर सिंह के साथ हुआ था| इनका “प्रेम विनोद” नामक एक ग्रंथ प्राप्त है| यह […]

राघोगढ़ की कवयित्री रानी सुन्दर कुंवरी राठौड़

यह किशनगढ़ के महाराजा राजसिंह की पुत्री थी| इनका जन्म महाराणी बांकावतजी की कुक्षि से वि.स.१७९१,कार्तिक सुदि ९ के दिन मथुरा में हुआ था| सुन्दरकुंवरी का विवाह राघोगढ़(मालवा) के खींची नरेश महाराजा बलभद्र सिंह के राजकुमार बलवंत सिंह के साथ हुआ था| इस सम्बन्ध में इन्होंने अपने ग्रन्थ रस्पुंज में लिखा है कि- यह ग्रन्थ […]

मीरांबाई

मीरांबाई

साहित्यिक क्षेत्र में भक्ति भागीरथी मीरांबाई राजपूत समाज ही नहीं भारतीय नारी समाज की माला की सुमेरु-मणि है| मध्यकालीन संत तथा भक्त-कवियों में कबीर, तुलसीदास और सूरदास के समकक्ष साहित्य जगत में उसका स्थान है| वह राजस्थान के राठौड़ कुल की मेड़तिया शाखा के राव दूदा की पोत्री तथा ठाकुर रतन सिंह बजोली की पुत्री […]

राजपूत नारियों की साहित्य साधना

राजपूत नारियों की साहित्य साधना

भारतीय इतिहासकारों ने शासक जाति राजपूत नारियों के द्वारा शासन सञ्चालन में योगदान, युद्ध बेला में शत्रु सामुख्य जौहर तथा शाकों में आत्म-बलिदान और पति की मृत्यु पर चितारोहण कर प्राण विसर्जन करने आदि अति साहसिक कार्यों पर तो प्रकाश डाला है परन्तु उनके द्वारा सर्वसाधारण के हितार्थ किये गए विशिष्ट सेवा कार्यों की ओर […]

आखिर क्यों भारी है फैशन की दुनियां पर “राजपूती पारंपरिक पौशाकें” ?

आखिर  क्यों भारी है फैशन की दुनियां पर “राजपूती पारंपरिक पौशाकें” ?

ज्ञान दर्पण.कॉम पर पिछले लेख में पढ़ा कि- कैसे फैशन की दुनियां में नित नए डिजाईनस के परिधान आते है उसके बावजूद राजपूत महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली विशेष पारंपरिक “राजपूती पौशाक” का कोई मुकाबला नहीं है | आखिर क्यों भारी है फैशन की दुनियां में “राजपूती पारंपरिक पौशाकें” ? व्यक्ति के पहनावे से उसकी […]

शादी में सात की जगह चार फेरों की परम्परा

शादी में सात की जगह चार फेरों की परम्परा

शादी विवाह एक ऐसी परंपरा है जहाँ केवल स्त्री-पुरुष का मिलन ही नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन भी होता है| हिन्दू धर्म में अलग-अलग क्षेत्रों में विवाह संस्कारों की अलग-अलग विधि पाई जाती है, पर अक्सर सुनने को मिलता है कि “सात फेरे” एक ऐसी रस्म है जिसके बिना किसी भी क्षेत्र में विवाह […]

नहीं बदलते राजपूत समाज में महिलाओं के सरनेम

नहीं बदलते राजपूत समाज में महिलाओं के सरनेम

हमारे देश में लगभग समुदायों में महिला का शादी के बाद सरनेम बदल जाता है, उसे अपने पिता के सरनेम से पति का सरनेम रखना पड़ता है| जिससे महिला की अपने खानदान की पहचान खत्म हो जाती है| पिछले दिनों हिंदुस्तान में भी इस सम्बन्ध में दो लेख पढ़ने को मिले- एक लेख में एक […]