ठा. नवल सिंह द्वारा एक वैश्य कन्या का मायरा (भात) भरना

ठा. नवल सिंह द्वारा एक वैश्य कन्या का मायरा (भात) भरना

राजस्थान के शेखावाटी आँचल के ठिकाने नवलगढ़ (वर्तमान झुंझनु जिले में) के शासक (सेकुलर गैंग की भाषा में सामंत) ठाकुर नवल सिंह शेखावत (Thakur Nawal Singh Shekhawat : 1742—1780)अपने खिराज (मामले) के साठ हजार रुपयों की बकाया पेटे बाईस हजार रूपये की हुण्डी लेकर दिल्ली जा रहे थे| उनका लवाजमा जैसे ही हरियाणा प्रान्त के […]

फौज देवरे आई

फौज देवरे आई

“बारात चल पड़ी है। गाँव समीप आ गया है इसलिए घुड़सवार घोड़ों को दौड़ाने लगे हैं। ऊँट दौड़ कर रथ से आगे निकल गए हैं । गाँव में ढोल और नक्कारे बज रहे हैं – दुल्हा-दुल्हिन एक विमान पर बैठे हैं । दुल्हे के हाथ में दुल्हिन का हाथ है । हाथ का गुदगुदा स्पर्श […]

क्षमा दान : पृथ्वीराज द्वारा गौरी को माफ़ी का वर्णन

क्षमा दान : पृथ्वीराज द्वारा गौरी को माफ़ी का वर्णन

कीर्ति-स्तम्भ (कुतुबमीनार) के ठीक सामने जहाँ आजकल दर्शकों के विश्राम के लिये हरी दूब की क्यारियाँ बनी हुई हैं, वहाँ आज से लगभग पौन आठ सौ वर्ष पहले तक सुन्दर संगमरमर का छोटा सा मन्दिर बना हुआ था। उस मन्दिर के निर्माण का इतिहास भी बड़ा मनोरंजक और विचित्र है। दिल्ली के सिंहासन पर बैठने […]

नकली बूंदी

नकली बूंदी

केवल बीस पच्चीस घुड़सवारों को लेकर महाराणा लाखा ‘‘बूंदी’’ फतह करने को चल पड़े। सूरजपोल से निकल कर उन्होंने बूंदी पर आक्रमण कर दिया। चित्तौड़ दुर्ग की दुन्दुभियों ने विजयराग अलापा। नौबत पर विजयाभियान का डंका पड़ा और नकीबों ने चित्तौड़पति के जयघोष से आकाश गूंजा दिया। “हर-हर महादेव” के कुल-घोष के साथ ही घोड़ों […]

जब कवियों ने मनाई मित्र राजा की रूठी प्रेयसी

जब कवियों ने मनाई मित्र राजा की रूठी प्रेयसी

जोधपुर के राजा मानसिंह को इतिहास में शासक के रूप में कठोर, निर्दयी, अत्यंत क्रूर और कूटनीतिज्ञ माना जाता है पर साथ ही उनके व्यक्तित्त्व का एक दूसरा रूप भी था वे भक्त, कवि, कलाकार, उच्च कोटि के साहित्यकार, कला पारखी व कलाकारों, साहित्यकारों, कवियों को संरक्षण देने वाले दानी व दयालु व्यक्ति भी थे|  […]

कवि ने सिर तुड़वाया पर सम्मान नहीं खोया

कवि ने सिर तुड़वाया पर सम्मान नहीं खोया

अक्सर लोग चारण कवियों पर आरोप लगा देते है कि वे राजपूत वीरों की अपनी रचनाओं में झूंठी वीरता का बखाण करते थे पर ऐसा नहीं था| राजपूत शासन काल में सिर्फ चारण कवि ही ऐसे होते थे जो निडर होकर अपनी बात अपनी कविता में किसी भी राजा को कह डालते थे| यदि राजा […]

वीर दुर्गाजी शेखावत और उनकी दृढ-प्रतिज्ञा

भारतीय इतिहास में अपने पिता की राज गद्दी पाने के लिए भाइयों में खुनी संघर्ष, भाईयों का कत्ल, और बूढ़े पिता को जेल में डाल देना या मार देने के कई प्रकरण पढ़े व सुनें होंगे | पर क्या आपने भीष्म पितामह के बाद ऐसे प्रकरण के बारे में कहीं सुना या पढ़ा है जहाँ […]

जलाल – बूबना : प्रेम कहानी

जलाल – बूबना : प्रेम कहानी

सिंध के नबाब के दो बेटियां थी| मुमना और बूबना| मुमना सीधी सादी और गृह कार्य में उलझी रहे| बूबना तेज व चंचल, रूप के साथ गुणों का भी खान|सब तरफ उसके रूप और गुणों के चर्चे| नबाब को दोनों बेटियों की शादी की चिंता| पर नबाब चाहता था कि बूबना की शादी उसके माफिक […]

गीदड़ों वाला तालाब

गीदड़ों वाला तालाब

“रामगढ़ सेठान” शेखावाटी का महत्तवपूर्ण व प्रमुख क़स्बा है यह क़स्बा बनियों (सेठों) द्वारा बसाया हुआ है, हालाँकि राजस्थान में एक कहावत प्रचलित है कि- “गांव बसावै बाणियो, पार पड़े जद जाणियौ” अब ये कहावत कब और किस कस्बे के लिए पड़ी ये तो मुझे पता नहीं पर इस रामगढ़ शेखावाटी कस्बे ने इस कहावत […]

भाग्य में जो लिखा वो मिला -2 : कहानी

भाग एक से आगे…………. होळी के रंगीले त्यौहार पर राजा ने होळी खेलने का अपने बगीचे में कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमे दींगल को सपत्नीक आमंत्रित किया गया| कुंवरी ने फिर चतुराई से काम लिया, उसने सात रथ एक साथ जोड़े जो एक के साथ एक चिपके थे, सातों रथों में अंदर से एक दूसरे में […]