क्षमा दान : पृथ्वीराज द्वारा गौरी को माफ़ी का वर्णन

क्षमा दान : पृथ्वीराज द्वारा गौरी को माफ़ी का वर्णन

कीर्ति-स्तम्भ (कुतुबमीनार) के ठीक सामने जहाँ आजकल दर्शकों के विश्राम के लिये हरी दूब की क्यारियाँ बनी हुई हैं, वहाँ आज से लगभग पौन आठ सौ वर्ष पहले तक सुन्दर संगमरमर का छोटा सा मन्दिर बना हुआ था। उस मन्दिर के निर्माण का इतिहास भी बड़ा मनोरंजक और विचित्र है। दिल्ली के सिंहासन पर बैठने […]

भारतीय राजाओं को हर बार महंगी पड़ी उदारता

भारतीय राजाओं को हर बार महंगी पड़ी उदारता

भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही सहिष्णुता, उदारता, परमार्थ आदि गुणों के लिए प्रसिद्ध रही है| विदेशी आक्रान्ताओं के साथ भी हमारे यहाँ के शासकों ने संस्कृति अनुरूप उचित व्यवहार किया| शत्रु आक्रान्ता भले वह विदेशी हो या देशी, के पकड़े जाने पर कभी भी उसके साथ किसी राजा ने क्रूर व्यवहार नहीं किया| […]

काव्य कथा ने बना दिया एक देशभक्त राजा जयचंद को देशद्रोही

ज्ञान दर्पण पर पिछली पोस्ट में भी आपने पढ़ा कि पत्रकार, साहित्यकार डा. आनन्द शर्मा ने कैसे जयचंद पर शोध किया और उन्हें जयचंद के खिलाफ इतिहास में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले कि जिनके आधार पर जयचंद को गद्दार ठहराया जा सके| डा. आनंद शर्मा अपने ऐतिहासिक उपन्यास “अमृत पुत्र” के पृष्ठ 48 पर […]