राजिया रा सौरठा -9

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया के दोहे भाग-9 आछा है उमराव,हियाफ़ूट ठाकुर हुवै |जड़िया लोह जड़ाव, रतन न फ़ाबै राजिया|| जहां उमराव तो अच्छे हो किन्तु उनके सहयोगी ठाकुर मुर्ख हो, तो हे राजिया !वे उसी प्रकार अशोभनीय लगते है जैसे रत्न जड़ित लोहा | खाग तणै बळ खाय , सिर साटा […]

भारत का मान बिन्दु

भारत का मान बिन्दु ,तिरंगा यह झंडा हमारा |मर के अमर हो जाना, पर ये झंडा ना झुकाना ||लाखों चढ़े थे शमा पर किंतु बुझने न दी ये ज्योति |बलिदानों की ये कथाएँ बातों में ना तुम भुलाना ||बूंदी की शान कुम्भा ने, मेवाड़ में लड़कर बचायी |उसने नकली किला बचाया, तुम असली निशां ना […]

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