Lion of the chittore : मेड़ता राे याैद्धा

संदेशो मिल्याे महाराणा राे, पहुंच गयाे चिताैड़ । परवाह नहीं की प्राणा री, जयजय जयमल राठौड़ ।1। ताेड़ता दीवार न दुश्मण, जयमल रात्यूं चिणताे हाे । भेद सक्या न गढ़न दुश्मण, शेर रात्यु फिरताे हाे ।2। दाेन्यु हाथा में तलवारा, कल्ला के कांधे बैठ्याे हाे । चिर दियाे दुश्मण राे कलेजाे, एडाे़ वीर मेड़तियाे हाे […]

हठीलो राजस्थान-18

सूरापण सु-नसों सकड़,ढील न लागै ढिंग्ग |पीवै नीं वो डगमगै ,पीधां बणे अडिग्ग ||११५|| शौर्य का नशा भी बड़ा प्रबल है | जिसके चढ़ने पर व्यक्ति अडिग व चुस्त हो जाता है | जो इस शौर्य के नशे को नहीं पीता वह ही डगमगाता रहता है और जो पी लेता है वह अविचलित हो जाता […]

हठीलो राजस्थान-17

गूद गटककै गोधणयां, हड्ड चटककै स्याल |बूथ बटककै बैरियाँ, मंडै रण मतवाल ||९४|| जब रण के मतवाले शूरवीर क्रुद्ध होकर युद्ध करते है,तो उनके द्वारा किए गए प्रचंड नर-संहार से युद्ध-भूमि धडों व सिरों से भर जाती है | यहाँ विचरण करने वाली गिधनियाँ तृप्त होकर मांस गटकती है तथा सियार हड्डियाँ चटकते हुए छककर […]

हठीलो राजस्थान-16

सुत गोदी ले धण खड़ी,जौहर झालां जोर |झालां हिड़दे धव जलै,लाली नैणा कोर || जौहर के समय वीर नारी अपने पुत्र को लिए जौहर की प्रचंड ज्वाला में कूदने हेतु खड़ी है | उधर उसके वीर पति के हृदय में भी वीरत्व की ज्वाला धधक रही है तथा उसकी आँखों की कोरों में रोष की […]

हठीलो राजस्थान-15

नर चंगा निपजै घणा,घणा थान देवात |दिल्ली सामी ढाल ज्यूँ ,धरा धींग मेवात ||८८|| जिस मेवात की वीर-भूमि में उत्कृष्ट वीर पैदा होते है ,जहाँ अनेक देवालय है तथा जो दिल्ली के आक्रान्ताओं के लिए ढाल स्वरूप रही है ; ऐसी यह प्रबल और प्रचंड मेवात की धरती है | कांपै धर काबुल तणी,पतशाही पलटाय […]

Hathilo Rajasthan- 14

होतो नह मेवाड़ तौ,होती नह हिन्दवाण |खान्ड़ो कदै न खडकतौ,भारत छिपतो भाण ||८२|| यदि मेवाड़ नहीं होता तो कभी युद्ध भी नहीं होता व हिंदुत्व भी रक्षित नहीं होता; व इस प्रकार भारत का सूर्य भी अस्त हो जाता है | बागड़ धर बैसाख में,आम घणेरा आय |चावल निपजै चाव सूं,सुराई सजलाय ||८३|| बागड़ की […]

हठीलो राजस्थान-13

रगत बहायौ रोसतां,रंगी धर, फण सेस |दिल्ली-जड़ ढिल्ली करी,मारू मुरधर देस ||७६|| मरुधर देश राजस्थान ने जब क्रोध किया ,तो रक्त बह उठा जिसने शेषनाग के फण पर टिकी धरती रंग गई और दिल्ली की जड़े ढीली हो गई | अर्थात दिल्ली के शासकों को भी विचलित कर दिया | सूरां सतियाँ सेहरो,सेखा धरती सान […]

हठीलो राजस्थान-12

डिगीयौ नह गढ़ डीग रो,तोपां ताव पड़ंत |कोरां खांडी नीं हुई,गोरां डिंग गलन्त ||७०|| वीर सूरजमल का शौर्य स्मारक डीग का दुर्ग तोपों की मार से भी डिगा नहीं | यद्धपि गोरों (अंग्रेजों) की डींग(बड़ी-बड़ी बातें) नष्ट हो गयी परन्तु इस दुर्ग की कोर भी खंडित नहीं हुई | वीर धरा रजथान री,सूरां में सिर […]

हठीलो राजस्थान-11

तीनों पोल्यां देवल्यां,देवल तीन खड़ीह |धव पहली सुत दूसरी,तीजी आप लड़ीह ||६४|| दुर्ग के तीनों द्वारों की देहलियों पर तीन देवलियां है | पहली पति पर,दूसरी पुत्र पर तथा तीसरी स्वयं पर है जहाँ पर वह लड़ी थी | चारों जुग तिहूँ लोक में,ठावी एकज ठौड़ |सूर-सती सुमरै सदा,तीर्थ गढ़ चितौड़ ||६५|| चारों युगों व […]

हठीलो राजस्थान-10

देणी धरती दान में,देणी नह खग जोर |लेणों भाला नोक सूं,वा धर रहणी ठौर ||५८|| धरती दान में तो देनी चाहिए किन्तु तलवार के जोर इसे किसी को नहीं देनी चाहिए | भालों की नोक के बल पर जो इस धरती को लेता है,यह उसी के पास रहती है | अर्थात पृथ्वी वीर भोग्या है […]