हठीलो राजस्थान -2

बहु धिन भाग वसुन्धरा,धिन धिन इणरो तन्न |दुरगा लिछमी सुरसती ,तिन्युं जठै प्रसन्न ||१०|| इस वसुन्धरा(राजस्थान)का भाग्य धन्य है,और इसका शरीर भी धन्य है,क्योंकि इस पर दुर्गा,लक्ष्मी और सरस्वती तीनों देवियाँ प्रसन्न है |(यहाँ पर वीरों की अधिकता से शौर्य की देवी दुर्गा की प्रसन्नता,धनवानों की अधिकता से धन की देवी लक्ष्मी की प्रसन्नता और […]

हठीलो राजस्थान -1

दीधा निज गुण देवता,रिखियां दी आसीस |जिण दिन सिरजी मरुधरा,सोणी नायो सीस ||१|| जिस दिन विधाता ने इस मरुधरा (राजस्थान)का सृजन किया ,उस दिन देवताओं ने उसे अपने गुण प्रदान किये तथा ऋषियों ने आशीर्वाद दिया एवं पृथ्वी ने अपना शीश झुकाया | धरमराज दीधो धरम,भिखम प्रण बलवान |विष्णु खमा शिव रोस निज ,सुरसत वाणी […]

वीर रस से सरोबार दोहे : “हठीलो राजस्थान”

वीर रस के दोहों का संग्रह : वर्ष 1954 से 1959 तक श्री क्षत्रिय युवक संघ के संघप्रमुख रहे स्व.श्री आयुवानसिंह जी शेखावत ,हुडील एक उच्च कोटि के लेखक, कवि व विचारक थे उन्होंने समाज को राह दिखाने के लिए राजपूत और भविष्य ,ममता और कर्तव्य ,मेरी साधना और वीर रस से भरपूर दोहों का […]

वीर क्षत्राणी पन्ना मेवाडी़ सिहंनी

बलीदान हाेने वालाे की, अमर ज्याेत जलती है । पुरे विश्व में एेसी मिसाल, कहीं नहीं मिलती है ।। वतन पर मर कर जिन्दगी, युं देखाे फक्र करती हैं । दुनिया पन्ना ओर बेटे का, तभी ताे जिक्र करती हैं ।। ना पुत्र बली पर आंसु बहाया, ऐसा उद्दाहरण कहीं नहीं पाया। राजवंश का अन्स […]

महकती धोरो की धरती, काेई आये शैलानी ।

महकती धोरो की धरती, काेई आये शैलानी। स्वागत करे राजस्थानी, राजस्थानी । हिन्वा सूरज राणा प्रताप, कभी नहीं हार मानी। दुश्मन की छाती पे चढ़ा, घाेड़ा चेतक मस्तानी। अभेदगढ़ चितौड़ का, कहता अपनी कहानी। अस्सी घाव लगे सांगा के, जंग लडी़ मैदानी। महकती धाेराे………………. पृथ्वीराज चाैहान तेरी, कमाल तीर निशानी। गौरी के तीर मारा, करदी […]

जन्मी, अजन्मी इन्सानी दास्तां

मैया मेरी, मेहरबानिया तेरी, ससांर मुझे भी दिखाना । मेरा जीवन नहीं छीनना, तू नारी का धर्म निभाना ।। तुझे घाेर पाप लगेगा मैया, मत पाप में शामिल हाेना । देख, मैं अजन्मी कन्या हुं, दामन ममता का फैलाना ।। खुशियाें का गला ना घाेटना, कन्या काे दुध पिलाना । मासूम ने क्या बिगाडा़ हैं, […]

बुलन्द इरादे ,फलाैदी ताकत,

दाे बार एेवरेस्ट विजेता Deepika Rathore”शेर दिल ” व माताश्री सन्ताेष कंवर व पिताश्री गणपत सिंह जी राठौड़ काे यह कविता तहेदिल से समर्पित करता हूँ । धन्यवाद । बुलन्द इरादे ,फलाैदी ताकत, लेकर जाे ,आगे बढ़ते है । हिमालय झुक जाता है उनके सामने ,जाे उस पर चढ़ते है ।। काेटी कोटी धन्य सन्ताेषकवंर, […]

नींव मजबुत कराे, दरारें आ रही मीनाराे में ।

नींव मजबुत कराे, दरारे आ रही मीनाराे में । समझदार काे नसीयत काफी है, कुछ इसाराे में । सुई आम से, खास हाे गई, अब गुण कहां तलवाराे में । अब लुट गया गुलस्ता, भँवरे राे रहे बहारो में । बुजु्र्ग बेगाने हाे गये, अपने ही परिवाराे में । घाेडे़ भी अड़ने लगे अब, कमीया […]

महान वीरांगना क्षत्राणी हाडी़ रानी

“महान वीरांगना क्षत्राणी Hadi Rani” काे मैं काेटी काेटी प्रणाम करता हूँ। आेर उनके चाहने वालाे काे यह मेरी कविता समर्पित करता हुं । हाे सके ताे आप इस कविता काे दुनिया के हर भाई बहन व मिलने वाले तक पहुंचा दाे। नारी की इज्जत मांगी हैं, इज्जत की खातीर जाना हैं । दुश्मन की […]

महाराव शेखाजी

Maharao Shekha ji सू्र्य जैसी चमक आपकी, शेखा तेरा नाम है । लाखाे तेरे सगे संबंधी, अमर तेरा नाम है ।1। सुसंस्कृत विचार आपके, जीवन गीता जैसा सार है । सुकुर्मो से शेखा सपना, कर गया साकार है ।2। शाही, स्वामी, समाजसेवी, अनेक आपके नाम है । कुशल याेद्धा, सुकुमार, तुझे बार बार प्रणाम है […]