सावण आयो री सखी,मन रौ नाचै मोर

सावण आयो री सखी, मन रौ नाचै मोर । जल बरसाव बादळी, अगहन लगी चहूं और ।। झड़ लागी सावण की ,टिप -टिप बरसै मेह। यौवन पाणी भिजतां, तापे सगळी देह ।। झिर -मिर मेवो बरसता, बिजली कड़का खाय । साजन का सन्देश बिना, छाती धड़का खाय ।। काली -पीली बादळी, छाई घटा घनघोर । […]

कविता की करामात

कवि अपनी दो पंक्तियों में भी वह सब कह देता है जितना एक गद्यकार अपने पुरे एक गद्य में नहीं कह पाता,राजा महाराजाओं के राज में कवियों को अभिव्यक्ति की पूरी आजादी हुआ करती थी और वे कवि अपने इस अधिकार का बखूबी निडरता से इस्तेमाल भी करते थे|राजस्थान के चारण कवि तो इस मामले […]

निर्भीक कवि वीरदास चारण (रंगरेलो) और उनकी रचना “जैसलमेर रो जस “

राजस्थान में राजपूत शासन काल में चारण जाति के एक से बढ़कर एक कवि हुए है,इन चारण कवियों व उनकी प्रतिभा को राजपूत राजाओं ने पूर्ण सम्मान व संरक्षण दिया | पर ज्यादातर लोग इन कवियों द्वारा राजाओं के शौर्य व उनकी शान में कविताएँ बनाने को उनकी चापलूसी मानते है पर ऐसा नहीं था […]

ओजस्विता से भरपूर राजस्थानी दोहे हिंदी अनुवाद सहित

केसर निपजै न अठै,नह हीरा निकलन्त |सिर कटिया खग झालणा,इण धरती उपजंत || यहाँ केसर नहीं निपजती,और न ही यहाँ हीरे निकलते है | वरन यहाँ तो सिर कटने के बाद भी तलवार चलाने वाले वीर उत्पन्न होते है | धोरां घाट्यां ताल रो,आंटीलो इतिहास |गांव गांव थरमापली,घर घर ल्यूनीडास || यहां के रेतिले टीलों,यहां […]

दीपावली की जगमगाती शुभकामनाएँ

दीपावली के जमागते पर्व पर ज्ञान दर्पण परिवार की और से सभी को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएँ | दीप अमावस रातड़ी, दीपक लड़ी सुहाय |जाणे जगमग जगमगै, आभो धरती आय || दीपमालिका की अमावस्या की रात्री में दीपों की पंक्तियाँ ऐसी शोभायमान हो रही है ,जैसे तारों से जगमग करता आकाश ही धरती पर […]

मानव मूल्य

उपरोक्त रचना फेसबुक मित्र श्री हरिकृष्ण लाल सचदेव द्वारा ज्ञान दर्पण पर प्रकाशनार्थ भेजी गयी जो आपके सम्मुख प्रस्तुत है संघर्ष एवं क्षत्रिय | pc to phone काल करे जी मेल के द्वाराताऊ अस्पताल में बाबाश्री ललितानंद जी महाराजहिंदुस्तान का दिल है दिल्ली !

तुम सब जानती व्यथा हमारी किसको पुकारें माँ

तुम सब जानती व्यथा हमारी किसको पुकारें माँ |सपनो की नगरी सूनी है उजड़ा उपवन माँ || प्राण पपीहे ने पी पी करके नभ मंडल है छाना |प्यास बुझाने को आतुर यह जीवन एक बहाना ||चाँद सितारे दे गए धोखा ज्योति न दिखती माँ | नाज हमें है इन गीतों पर इस स्वर को ले […]

राजिया रा सौरठा -१० अंतिम भाग

नैन्हा मिनख नजीक , उमरावां आदर नही |ठकर जिणनै ठीक, रण मे पड़सी राजिया || जो छोटे आदमियों(क्षुद्र विचारो वाले) को सदैव अपने निकट रखता है और उमरावों ( सुयोग्य व सक्षम व्यक्तियों) का जहां अनादर है, उस ठाकुर (प्रसाशक) को रणभूमि (संकट के समय) मे पराजय का मुंह देखने पर ही अपनी भूल का […]

राजिया रा सौरठा -9

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया के दोहे भाग-9 आछा है उमराव,हियाफ़ूट ठाकुर हुवै |जड़िया लोह जड़ाव, रतन न फ़ाबै राजिया|| जहां उमराव तो अच्छे हो किन्तु उनके सहयोगी ठाकुर मुर्ख हो, तो हे राजिया !वे उसी प्रकार अशोभनीय लगते है जैसे रत्न जड़ित लोहा | खाग तणै बळ खाय , सिर साटा […]

भारत का मान बिन्दु

भारत का मान बिन्दु ,तिरंगा यह झंडा हमारा |मर के अमर हो जाना, पर ये झंडा ना झुकाना ||लाखों चढ़े थे शमा पर किंतु बुझने न दी ये ज्योति |बलिदानों की ये कथाएँ बातों में ना तुम भुलाना ||बूंदी की शान कुम्भा ने, मेवाड़ में लड़कर बचायी |उसने नकली किला बचाया, तुम असली निशां ना […]