जय जंगलधर बादशाह -1

जय जंगलधर बादशाह -1

उस दिन बादशाह औरंगजेब लम्बी बीमारी से उठ कर पहली बार दरबार में आया था | दीवाने ख़ास का वह दरबार खचाखच भरा हुआ था | बीमारी की थकावट और साम्राज्य की नित नई उत्पन्न होती समस्याओं के कारण बादशाह का चेहरा गंभीर था | बादशाह ने मयूर सिंहासन पर बैठकर ज्योंहि अपनी दृष्टि चारों […]

देवालयों की रक्षार्थ शेखावत वीरों का आत्मोत्सर्ग

देवालयों की रक्षार्थ शेखावत वीरों का आत्मोत्सर्ग

8 मार्च 1679 औरंगजेब की विशाल सेना ने जो तोपखाने और हाथी घोड़ो पर सजी थी सेनापति दाराबखां के नेतृत्व में खंडेला को घेर कर वहां के शासक राजा बहादुर सिंह को दण्डित करने के लिए कूच चुकी थी | इस सेना को औरंगजेब की हिन्दू-धर्म विरोधी नीतियों के चलते विद्रोही बने राजा बहादुरसिंह को […]

धरती माता को रक्त-पिंडदान

भड पडियो रण-खेत में,संचै पूँजी साथ |राज सांधे निज रगत सूं,पिण्ड- दान निज हाथ || वीर-योद्धा रण-क्षेत्र में धराशायी हो गया,किन्तु सत्य की संचित सम्पत्ति फिर भी उसके साथ है | इसीलिए किसी दुसरे को उसका पिंडदान कराने की आवश्यकता नहीं है | वह स्वयम ही अपने रक्त से भीगी हुई मिट्टी के पिण्ड बनाकर […]

पाबूजी राठौड़ : जिन्होंने विवाह के आधे फेरे धरती पर व आधे फेरे स्वर्ग में लिए

पाबूजी राठौड़ : जिन्होंने विवाह के आधे फेरे धरती पर व आधे फेरे स्वर्ग में लिए

फेरां सुणी पुकार जद, धाडी धन ले जाय | आधा फेरा इण धरा , आधा सुरगां खाय || उस वीर ने फेरे लेते हुए ही सुना कि दस्यु एक अबला का पशुधन बलात हरण कर ले जा रहे है| यह सुनते ही वह आधे फेरों के बीच ही उठ खड़ा हुआ और तथा पशुधन की […]

राजा मानसिंह आमेर

राजा मानसिंह आमेर

मात सुणावै बालगां, खौफ़नाक रण-गाथ |काबुल भूली नह अजै, ओ खांडो, ऎ हाथ || काबुल की भूमि अभी तक यहाँ के वीरों द्वारा किये गए प्रचंड खड्ग प्रहारों को नहीं भूल सकी है | उन प्रहारों की भयोत्पादक गाथाओं को सुनाकर माताएं बालकों को आज भी डराकर सुलाती है | महमूद गजनी के समय से […]

शर्त जीतने हेतु उस वीर ने अपना सिर काटकर दुर्ग में फेंक दिया

बिंधियो जा निज आण बस,गज माथै बण मोड़ |सुरग दुरग परवेस सथ,निज तन फाटक तोड़ || अपनी आन की खातिर उस वीर ने दुर्ग का फाटक तोड़ने के लिए फाटक पर लगे शूलों से अपना सीना अड़ाकर हाथी से टक्कर दिलवा अपना शरीर शूलों से बिंधवा लेता है और वीर गति को प्राप्त होता है […]

एक वीर जिसने दो बार वीर-गति प्राप्त की

एक वीर जिसने दो बार वीर-गति प्राप्त की

जलम्यो केवल एक बर,परणी एकज नार |लडियो, मरियो कौल पर,इक भड दो दो बार || उस वीर ने केवल एक ही बार जन्म लिया तथा एक ही भार्या से विवाह किया ,परन्तु अपने वचन का निर्वाह करते हुए वह वीर दो-दो बार लड़ता हुआ वीर-गति को प्राप्त हुआ |आईये आज परिचित होते है उस बांके […]

राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप को नमन

राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप को नमन

आज देश के हर कोने में राष्ट्र गौरव मेवाड़ के महाराणा हिंदुआ सूर्य महाराणा प्रताप को याद किया जा रहा है | देश के कई नगरों व गांवों में आज राणा प्रताप की जयंती के अवसर पर रैलियां व सभाओं का आयोजन किया जा रहा है | इस देश में अनेक राजा-महाराजा ,बादशाह व नबाब […]

स्वतंत्रता समर के योद्धा : महाराज बलवंत सिंह ,गोठड़ा

स्वतंत्रता प्रयासी योद्धाओं में हाडौती क्षेत्र के महाराज बलवंत सिंह हाड़ा गोठड़ा का अविस्मर्णीय योगदान रहा है | राजस्थान के हाडौती भू -भाग के दो राज्य कोटा और बूंदी ब्रिटिश प्रभाव की वारुणी का पान कर अभय स्वापन हो चुके थे | अंग्रेज सत्ता का स्वागत कर दोनों राज्य प्रसन्न थे | किन्तु उसी समय […]

स्वतंत्रता समर के योद्धा : श्याम सिंह, चौहटन

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जूझने वाले राजस्थानी योद्धाओं में ठाकुर श्याम सिंह राठौड़ का बलिदान विस्मृत नहीं किया जा सकता | 1857 के देशव्यापी अंग्रेज सत्ता विरोधी सशस्त्र संघर्ष के पूर्व राजस्थान में ऐसे अनेक स्वातन्त्र्यचेता सपूत हो चुके है जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता के वरदहस्त को विषैला वरदान समझा था | शेखावाटी , बिदावाटी, हाडौती […]