बीकानेर का राजकुमार वीर अमरसिंह

बीकानेर का राजकुमार वीर अमरसिंह

बीकानेर के राजा रायसिंहजी का भाई अमरसिंह किसी बात पर दिल्ली के बादशाह अकबर से नाराज हो बागी बन गया था और बादशाह के अधीन खालसा गांवों में लूटपाट करने लगा इसलिए उसे पकड़ने के लिए अकबर ने आरबखां को सेना के साथ जाने का हुक्म दिया | इस बात का पता जब अमरसिंह के […]

कल्ला राठौड़ जिसने अकबर के आगे भरे दरबार में इसलिए दिया था मूंछों पर ताव

कल्ला राठौड़ जिसने अकबर के आगे भरे दरबार में इसलिए दिया था मूंछों पर ताव

कल्ला राठौड़ : आगरा के किले में अकबर का खास दरबार लगा हुआ था | सभी राजा, महाराजा, राव, उमराव, खान आदि सभी खास दरबारी अपने अपने आसनों पर जमे हुए थे | आज बादशाह अकबर बहुत खुश था, सयंत रूप से आपस में हंसी-मजाक चल रहा था | तभी बादशाह ने अनुकूल अवसर देख […]

किले का विवाह

किले का विवाह

‘बधाई ! बधाई ! तुर्क सेना हार कर जा रही है | गढ़ का घेरा उठाया जा रहा है |” प्रधान बीकमसीं(विक्रमसिंह) ने प्रसन्नतापूर्वक जाकर यह सूचना रावल मूलराज को दे दी |“घेरा क्यों उठाया जा रहा है ?” रावल ने विस्मयपूर्वक कहा |कल के धावे ने शाही सेना को हताश कर दिया है | […]

अश्वमेघ यज्ञ का स्वांग

जयपुर के महाराजा जयसिंह जी ने बड़ी लगन और हसरतों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए जयपुर नगर बसाया | देश विदेश से नगर बसाने के लिए विशेषज्ञ व कारीगर बुलवाए | पुर्तगाल तक से शहर के मानचित्र बनवाये,पंडित विद्याधर जैसे उच्च कोटि के शिल्पी के मार्गदर्शन में हजारों कारीगरों ने जयपुर नगर की भव्य […]

निर्भीक कवि और शक्तिशाली सर प्रताप

निर्भीक कवि और शक्तिशाली  सर प्रताप

सर प्रतापसिंह जी जोधपुर के महाराजा तख़्तसिंह जी के छोटे पुत्र थे,वे जोधपुर के राजा तो नहीं बने पर जोधपुर राज्य में हुक्म,प्रतिष्ठा और रोबदाब में उनसे आगे कोई नहीं था | उनके जिन्दा रहते जोधपुर के जितने राजा हुए वे नाम मात्र ही थे असली राज्य सञ्चालन तो सर प्रताप ही करते थे थे […]

नमक का मोल

नमक का मोल

मारवाड़ में उस वर्ष सूखा पड़ा था,खेतों में पुरे वर्ष खाने लायक बाजरा तक पैदा नहीं हुआ ऐसे में जोधपुर से कुछ कोस दुरी पर एक ढाणी में रहने वाले गरीब राजपूत खेतसिंह ने लकड़ियाँ इक्कठा कर उन्हें जोधपुर शहर आकर बेचना शुरू कर दिया ताकि लकड़ी बेचने से हुई आमदनी से अपने घर का […]

जब ठाकुर साहब ने की कविराज की चाकरी

जब ठाकुर साहब ने की कविराज की चाकरी

संवत १७४० के आसपास मेवाड़ के सूळवाड़ा नामक गांव में चारण जाति के कविया गोत्र में कवि करणीदान जी का जन्म हुआ वे राजस्थान की डिंगल भाषा के महाकवि तो थे ही साथ ही पिंगल,संस्कृत व ब्रज भाषा के भी विद्वान थे इन भाषाओँ में उन्होंने कई ग्रन्थ लिखे | उनके लिखे “सुजस प्रकास” व […]

स्वाभिमानी कवि का आत्म बलिदान

स्वाभिमानी कवि का आत्म बलिदान

बादशाह औरंगजेब मेवाड़ के महाराणा राजसिंह से बहुत ईर्ष्या रखता था |वह मेवाड़ पर आक्रमण हेतु हमेशा किसी न किसी बहाने की तलाश में रहता था | उन दिनों औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया कर लगा दिया था उसका एलान था कि या तो इस्लाम स्वीकार करो या जजिया कर चुकाओ | महाराणा राजसिंह ने […]

वो वीर मर मिटा नकली बूंदी पर भी

वो वीर मर मिटा नकली बूंदी पर भी

मेवाड़ के महाराणा लाखा किसी बात पर बूंदी राज्य के हाड़ों से नाराज हो गए और उन्होंने प्रण कर लिया कि जब तक वे बूंदी नहीं जीत लेते अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे | महाराणा के सरदारों ने महाराणा लाखा को बहुत समझाया कि इतनी जल्दी किसी राज्य को जीतना इतना आसान नहीं और वो […]

जय जंगलधर बादशाह -2

जय जंगलधर बादशाह -2

भाग एक शेष ………..” हैं ? परसों ही ?”” हाँ ! परसों ही,कटक नदी के इसी तट पर हमें कलमा पढाया जायेगा,हमारे मुंह में गौ-मांस और मौलवियों का थूक ठूँसा जायेगा | हमारी सुन्नत की जाएगी और फिर उस काली संध्या की भयावनी छाया में हम सूर्य,चन्द्र और अग्नि कुल के अंतिम भग्नावशेषों को मुहम्मद […]