यह वीर शादी की रस्में अधूरी छोड़ मातृभूमि के लिए शहीद हो गया

यह वीर शादी की रस्में अधूरी छोड़ मातृभूमि के लिए शहीद हो गया

रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी राव मित्रसेन अहीर कई मुस्लिम सेनापतियों के साथ विशाल शाही सेना लिए शेखावाटी प्रदेश की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए तैयार खड़ा था तो शेखावाटी-प्रदेश के शेखावत वीर भी अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता की रक्षार्थ उसके सामने आ डटे| शेखावत सेना को सहयोग देने के लिए […]

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

एक स्त्री की मान रक्षा के लिए महाराव शेखाजी ने झुन्थर के कोलराज गौड़ का सर काट कर अपने अमरसर के गढ़ के सदर द्वार पर टंगवा दिया,ऐसा करने का उनका उद्देश्य उदंड व आततायी लोगों में भय पैदा करना था हालांकि यह कृत्य वीर धर्म के खिलाफ था शेखा जी के उक्त कार्य की […]

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी

क्रांतिवीर : बलजी-भूरजी

राजस्थान में शेखावाटी राज्य की जागीर बठोठ-पटोदा के ठाकुर बलजी शेखावत दिनभर अपनी जागीर के कार्य निपटाते,लगान की वसूली करते,लोगों के झगड़े निपटाकर न्याय करते,किसी गरीब की जरुरत के हिसाब से आर्थिक सहायता करते हुए अपने बठोठ के किले में शान से रहते ,पर रात को सोते हुए उन्हें नींद नहीं आती,बिस्तर पर पड़े पड़े […]

स्वतंत्रता समर के योद्धा : सूरजमल सांभरिया

स्वतंत्रता समर के योद्धा : सूरजमल सांभरिया

लेखक : ठा. सौभाग्य सिंह शेखावत स्वाधीनता संग्राम की ज्वाला को प्रज्वल्लित करने वाले राष्ट्रीय वीरों में गुजरात प्रान्त के भूतपूर्व ईडर राज्य के मुड़ेटी स्थान के स्वामी सूरजमल (Surajmal Chauhan)का अनुपेक्षीय स्थान है| ठाकुर सूरजमल क्षत्रियों के छतीस राजकुलों में प्रसिद्ध चौहान कुल में उत्पन्न हुआ था| समयान्तर से चौहान कुल के एक घटक […]

हल्दीघाटी का अदम्य योद्धा रामशाह तंवर

हल्दीघाटी का अदम्य योद्धा रामशाह तंवर

18 जून. 1576 को हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप और अकबर की सेनाओं के मध्य घमासान युद्ध मचा हुआ था| युद्ध जीतने को जान की बाजी लगी हुई. वीरों की तलवारों के वार से सैनिकों के कटे सिर से खून बहकर हल्दीघाटी रक्त तलैया में तब्दील हो गई| घाटी की माटी का रंग आज हल्दी नहीं […]

जब कानून पर भारी पड़ी ईमानदारी

जब कानून पर भारी पड़ी ईमानदारी

जयपुर की स्टेट चीफ कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश शीतलाप्रसाद वाजपेई का न्यायालय उस दिन खचाखच भरा था, दर्शकों की भारी भीड़ झुंझुनू के नाजिम इकराम हुसैन द्वारा बिना गवाहों के, सिर्फ पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर की रपट के आधार पर एक चोर को सुनाई सजा के खिलाफ हो रही सुनवाई को ध्यानपूर्वक सुनने में […]

वीर झुंझार सिंह शेखावत,गुढ़ा गौड़जीका

राजा रायसल दरबारी खंडेला के 12 पुत्रों को जागीर में अलग अलग ठिकाने मिले| और यही से शेखावतों की विभिन्न शाखाओं का जन्म हुआ|इन्ही के पुत्रों में से एक ठाकुर भोजराज जी को उदयपुरवाटी जागीर के रूप में मिली| इन्ही के वंशज ‘भोजराज जी के शेखावत” कहलाते है| भोजराज जी के पश्चात उनके पुत्र टोडरमल […]

मृत्यु के वक्त भी कविता

मेवाड़ के महाराणा अड़सिंहजी के वक्त मेवाड़ में जबरदस्त गृह कलह फैला हुआ था| देवगढ के रावत राघोदासजी इस गृह कलह को करवाने वालों के मुखिया था राघोदासजी के कहने से माधोराव सिंधिया भी मेवाड़ के गृह कलह में शामिल हो गया और मेवाड़ पर चढ़ाई करने के लिए चल दिया| मेवाड़ के सभी सरदारों […]

प्रणय और कर्तव्य

रणथंभौर दुर्ग पर अल्लाउद्दीन खिलजी ने पिछले तीन महीनों से घेरा डाल रखा था | उसके बागी सेनानायक महिमाशाही (मुम्मदशाह) को रणथंभौर के शासक हम्मीरदेव चौहान ने शरण दे रखी थी उसी बागी को वापस पाकर दण्डित करने के उद्देश्य से अल्लाउद्दीन ने हम्मीरदेव के किले पर आक्रमण किया और घेर लिया | किले की […]

राव चंद्रसेन

राव चंद्रसेन जोधपुर के राव मालदेव के छटे नंबर के पुत्र थे | उनका जन्म वि.स.१५९८ श्रावण शुक्ला अष्टमी (३० जुलाई १५४१ई.) को हुआ था | हालंकि इन्हें मारवाड़ राज्य की सिवाना जागीर दे दी गयी थी पर राव मालदेव ने इन्हें ही अपना उत्तराधिकारी चुना था | राव मालदेव की मृत्यु के बाद राव […]

1 2 3 6