गुजराती बुखार और गुलर

वि सं. 1908 के किसी एक दिन मेहरानगढ़ (जोधपुर दुर्ग) में दरबार लगा था| जिसमें मारवाड़ के सभी सामंत, जागीरदार उपस्थित थे| उनमें गुलर ठिकाने के जागीरदार ठाकुर बिशनसिंह भी शामिल थे| कई अन्य दरबारियों व जागीरदारों से वार्ता के बाद मारवाड़ के तत्कालीन महाराजा तख़्तसिंह (1843-73) ठाकुर बिशनसिंह की ओर मुखातिब हुए और रुष्ट […]

जैताजी राठौड़

Rao Jaita Ji Rathore History in Hindi, Jaitawat Rathore history महाराणा सा सपूत पाकर धन्य हुई यह वसुन्धरा। जयमल फता जैता कूपा झाला की यह परम्परा । जैता जी, पंचायण (अखैराजोत) के पुत्र थे। ये बगड़ी के ठाकुर थे। मण्डोर पर राव जोधा का अधिकार होने पर इनके बड़े भाई अखैराज ने तत्काल अपने अँगूठे […]

राव मालदेव राठौड़, जोधपुर

राव मालदेव से मुँह की खाकर शेरशाह था घबराया। जब-जब कुचला गया धर्म तब हमने ही फुफकारा हो।| राव मालदेव जोधपुर के शासक राव गाँगा राठौड़ के पुत्र थे। इनका जन्म वि.सं. 1568 पोष बदि 1 को (ई.स. 1511 दिसम्बर ५) हुआ था। पिता की मृत्यु के पश्चात् वि.सं. 1588 (ई.स. 1531) में सोजत में […]

कवियां रौ कलपतरू मानसिंघ

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से……….. जोधांण जोध महाराजा मानसिंघ (Maharaja Man Singh, Jodhpur) आपरै समै में घणा ठणका जोमराड़ राजा बाजियां। मारवाड़ में घणौ धळ-धौकळ, गोधम-धाड़ मानसिंघ रै बखत हुयौ। मारवाड़ रा थाप उथाप सांवत सूरमावां, रावां उमरावां नै पड़ौसी जैपुर, सेखावाटी, बीकानेर रै राजावां रै साथ मानसिंघ […]

खेटां रौ खावंद-राव मालदेव

मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्यसिंह शेखावत की कलम से………. नौकूंटी मारवाड़ री गौरव पूजा में बढौतरी करबा वाळा सूर वीर नर नाहरां में मारवाड़ रा धणी राव मालदेव (Rao Maldeo Rathore Jodhpur) रौ नांव सिरै गिणीजै। जोधपुर रै माटै जितरा राजा बिराजिया, जितरा खळ खैटा हुवा उण में सगळां सूं टणका, ठाढ़ा, लूठा नै जबरा […]

राजस्थान रा इतिहास रौ वेदव्यास-नैणसी

ठाकुर सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से………… राजस्थान री धरती सूरां वीरां री कर्तव्य भौम, प्रेम रा पुजारियां री रंग-थळी, साध-संतां री साधना स्थळी नै जती-मुनियाँ री भ्रमण भौम रैयी है। जुद्ध अनै प्रेम, हिंसा नै अहिंसा, भौतिक नै आध्यात्मिक कमाँ रौ अैड़ौ अेक-दूजा सूं मेळ किणी बीजा भूखण्ड में नीं मिलै। मरुथळ रै नांव […]

मयूरधुज गढ़ : मेहरानगढ़ जोधपुर

मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्यसिंह शेखावत की कलम से………. जोधपुर रौ किलौ मोरघुज (Mehrangarh) बाजै। मारवाड़ री ख्यातां में इण रौ जलम नांव गढ़ चिंतामणी मिलै। नगर, किला, कोट कमठाणां री नींव-सींव री थरपना चौखा समूरता सूं लागै। किलो, दुरंग नै जीवरखौ जंग-जुद्ध री बिखम बेळा में राजा-रेत रा जीव नै आसरौ देवै। जीव नै […]

जब रणमल के बेटे ने बाघिन को मारा

चित्र काल्पनिक है| चितौड़ के गद्दार चाचा और मेरा द्वारा महाराणा मोकल की हत्या का समाचार जैसे ही मंडोर में रणमल को मिला, रणमल अपने भांजे की हत्या से बहुत क्रोधित हुये और उसने महाराणा मोकल को जलांजलि देकर अपने सिर से पगड़ी उतार फैंटा बाँध लिया, और प्रण किया कि जब तक वह मोकल […]

शोषक नहीं प्रजा पोषक थे राजा

आजादी के बाद देश के सभी राजनैतिक दलों द्वारा सामंतवाद और देशी रियासतों के राजाओं को कोसना फैशन के समान रहा है| जिसे देखो मंच पर माइक हाथ में आते ही मुद्दे की बात छोड़ राजाओं को कोसने में थूक उछालकर अपने आपको गौरान्वित महसूस करता है| इस तरह नयी पीढ़ी के दिमाग में देशी […]

वीर दुर्गादास राठौड़ : स्वामिभक्त ही नहीं, महान कूटनीतिज्ञ भी थे

वीर शिरोमणी दुर्गादास राठौड़ (Durgadas Rathore) को आज की नई पीढ़ी मात्र इतना ही मानती है कि वे वीर थे, स्वामिभक्त थे, औरंगजेब का बड़ा से बड़ा लालच भी उन्हें अपने पथ से नहीं डिगा सका| ज्यादातर इतिहासकार भी दुर्गादास पर लिखते समय इन्हीं बिन्दुओं के आगे पीछे घूमते रहे, लेकिन दुर्गादास ने उस काल […]

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