पवज ऊर्जा कम्पनियों की करतूतों में फंसा राजपूत समाज

पवज ऊर्जा कम्पनियों की करतूतों में फंसा राजपूत समाज

हाल ही जैसलमेर पुलिस द्वारा 19 वर्ष के एक नवयुवक को गोलियों से भून देने की घटना के बाद अचानक “राजपूत सोसायटी” पत्रिका के नंबर 2014 “जैसलमेर विशेषांक” में पत्रिका के प्रधान संपादक उपेन्द्रसिंह जी राठौड़ का लिखा एक लेख अनायास ही याद आ गया| उपेन्द्रसिंह जी राठौड़ ने उस लेख में जैसलमेर जिले के […]

सिरैगढ़ जैसलमेर

सिरैगढ़ जैसलमेर

मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्यसिंह शेखावत की कलम से…….. इतिहास में साढी तीन साकां री ख्यात वाळी, भड़ किंवाड़ उतराध रा बिड़दाव वाळी, राग रागण्या री महाराणी मांड राग री जळम भौम माडदेश आजकलै जैसाण जैसलमेर Jaisalmer रै नांव सूं ओळखीजै। जैसलमेर रा खांतीला माणस जठै जुगजुगां तांई प्रकृति रा रूठपणां सूं जूंझता रैया उठै […]

कविता की करामात

कविता की करामात

कवि अपनी दो पंक्तियों में भी वह सब कह देता है जितना एक गद्यकार अपने पुरे एक गद्य में नहीं कह पाता,राजा महाराजाओं के राज में कवियों को अभिव्यक्ति की पूरी आजादी हुआ करती थी और वे कवि अपने इस अधिकार का बखूबी निडरता से इस्तेमाल भी करते थे|राजस्थान के चारण कवि तो इस मामले […]

सुहाग पर भारी पड़ा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य

सुहाग पर भारी पड़ा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य

रावल अखैसिंह की मृत्युपरांत सन १७६२ में रावल मूलराज जैसलमेर की राजगद्दी पर बैठे | उनके शासन काल में उनका प्रधानमंत्री स्वरूपसिंह जैन जो वैश्य जाति का था बहुत भ्रष्ट व स्वेछाचारी था | उसके षड्यंत्रों से सभी सामंत बहुत दुखी व नाराज थे पर प्रधान स्वरूपसिंह जैन ने रावल मूलराज को अपनी मुट्ठी में […]

किले का विवाह

किले का विवाह

‘बधाई ! बधाई ! तुर्क सेना हार कर जा रही है | गढ़ का घेरा उठाया जा रहा है |” प्रधान बीकमसीं(विक्रमसिंह) ने प्रसन्नतापूर्वक जाकर यह सूचना रावल मूलराज को दे दी |“घेरा क्यों उठाया जा रहा है ?” रावल ने विस्मयपूर्वक कहा |कल के धावे ने शाही सेना को हताश कर दिया है | […]

निर्भीक कवि वीरदास चारण (रंगरेलो) और उनकी रचना “जैसलमेर रो जस “

राजस्थान में राजपूत शासन काल में चारण जाति के एक से बढ़कर एक कवि हुए है,इन चारण कवियों व उनकी प्रतिभा को राजपूत राजाओं ने पूर्ण सम्मान व संरक्षण दिया | पर ज्यादातर लोग इन कवियों द्वारा राजाओं के शौर्य व उनकी शान में कविताएँ बनाने को उनकी चापलूसी मानते है पर ऐसा नहीं था […]

ग्लोबल होता राजस्थानी साफा

ग्लोबल होता राजस्थानी साफा

पगड़ी का इस्तेमाल हमारे देश में सदियों से होता आया है | प्राचीन काल से ही हमारे यहाँ पगड़ी को व्यक्तित्व,आन,बान,शान और हैसियत का प्रतीक माना जाता रहा है | पगड़ी हमारे देश में चाहे हिन्दू शासक रहें हों या मुस्लिम शासक सभी की प्रिय रही है | आज भी पगड़ी को इज्जत का परिचायक […]