भानगढ़ के राजा माधोसिंह

भानगढ़ के राजा माधोसिंह

भानगढ़ का किला दुनिया की चर्चित व प्रसिद्ध भूतहा जगहों में से एक है| उस किले में भूत है या नहीं, उसके उजड़ने से जुड़ी कहानियां कितनी सच है उस पर ज्ञान दर्पण पर पहले ही लिखा जा चुका है आज हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे है भानगढ़ के वीर राजा माधोसिंह का परिचय- आमेर […]

सम्राट हर्षवर्धन

सम्राट हर्षवर्धन

Samrat Harshvardhan History In Hindi, Read Raja Harshvardhan history in Hindi हर्षवर्धन अपने बड़े भाई की मृत्यु के बाद वि.सं. ६६३ (ई.स. ६०६) में १६ वर्ष की आयु में थानेश्वर की गद्दी पर बैठे। यह वैस वंश का क्षत्रिय थे। हर्ष की बहिन राज्यश्री का विवाह कन्नौज के शासक गृहवर्मन (मौखरी वंश) के साथ हुआ […]

राजा पुलकेशिन

राजा पुलकेशिन

पुलकेशी हित हर्ष चले थे, सबका हर्ष जगेगा रे। संघ ने शंख बजाया भैया सत्यजयी अब होगा रे॥ Raja Pulkeshin II, राजा पुलकेशिन द्वितीय वातापी (बादामी) के शासक थे। यह चातुक्य (सोलंकी) वंश से थे। अपने चाचा मंगलीश के मारे जाने पर वि.सं. ६६७ (ई.स. ६१०) में वातापी के राजा बने। सोलंकी वंश में इसके […]

गौरी का इतिहास और पृथ्वीराज

गौरी का इतिहास और पृथ्वीराज

अपनी क्रूरता, बर्बरता और पाशविकता में मोहम्मद गौरी Mohmmad Ghori अपने से पूर्व आये मलेच्छ मुस्लिम आक्रमणकारियों मुहम्मद बिन कासिम और महमूद गजनवी से जरा भी भिन्न न था। लेकिन इतना अंतर था कि पूर्ववती मुस्लिम आक्रमणकारियों का उद्देश्य मात्र लूटपाट और इस्लाम का प्रचार था। जबकि उनसे भिन्न मोहम्मद गौरी भारत में मुस्लिम सत्ता […]

ऐतिहासिक व्यक्तित्व: गोपालदास जी गौड़

ऐतिहासिक व्यक्तित्व: गोपालदास जी गौड़

Gopaldas Gaur Story in Hindi, History of Gaur Rajput in Hindi गौड़ बंगाल का राजा रणजीत गौड़ हिन्दाल से युद्ध करता हुआ मारा गया। उसके चंपावत नगर को एक रानी बाघेली थी। रानी बाघेली के हरचन्द नाम का पुत्र हुआ। हरचन्द के दो जुडवा पुत्र थे उनके नाम (1) वत्सराज एवं (2) वामन था। ये […]

अधूरा ज्ञान प्रमाणिक इतिहास में बाधक : एक उदाहरण

अधूरा ज्ञान प्रमाणिक इतिहास में बाधक : एक उदाहरण

अधकचरा यानी अधूरा ज्ञान हमेशा हर जगह नुकसानदायक होता है और यह तब और ज्यादा नुकसान करता है जब अधूरे ज्ञान वाला स्वयंभू ज्ञानी शिक्षक, नेता, साधू के रूप में अपने अधूरे ज्ञान को अपने उद्बोधनों में बांटते फिरते है तथा लेखक आने वाली पीढ़ी के लिए अपने अधूरे ज्ञान के सहारे पुस्तकें लिखकर भ्रांतियां […]

स्वतंत्रता समर के योद्धा : सूरजमल सांभरिया

स्वतंत्रता समर के योद्धा : सूरजमल सांभरिया

लेखक : ठा. सौभाग्य सिंह शेखावत स्वाधीनता संग्राम की ज्वाला को प्रज्वल्लित करने वाले राष्ट्रीय वीरों में गुजरात प्रान्त के भूतपूर्व ईडर राज्य के मुड़ेटी स्थान के स्वामी सूरजमल (Surajmal Chauhan)का अनुपेक्षीय स्थान है| ठाकुर सूरजमल क्षत्रियों के छतीस राजकुलों में प्रसिद्ध चौहान कुल में उत्पन्न हुआ था| समयान्तर से चौहान कुल के एक घटक […]

समस्त भारत के ओज और गौरव का प्रतिबिम्ब हैं राजा भोज

समस्त भारत के ओज और गौरव का प्रतिबिम्ब हैं राजा भोज

लेखक : सचिन सिंह गौड़, संपादक, “सिंह गर्जना” हिंदी पत्रिका राजा भोज (Raja Bhoj) जो अपने समय के भारतवर्ष के सर्वश्रेष्ठ सम्राट थे, विलक्षण योद्धा थे, अद्भुत पराक्रमी तथा कुशल प्रशासक थे। जिनका शासन लगभग पूरे भारतवर्ष पर था। राजा भोज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी तुलना सम्राट विक्रमादित्य से होती है। […]

स्थानीय संस्कृति समझे बिना लिखा इतिहास भ्रामक ही होगा

स्थानीय संस्कृति समझे बिना लिखा इतिहास भ्रामक ही होगा

कर्नल टॉड ने राजस्थान का इतिहास लिखा, ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़कर लिखने की उसकी मंशा भले ना हो पर उसने बिना शोध किये, सुनी सुनाई बातों पर लिखकर कई ऐतिहासिक भ्रांतियां फैला दी| राजस्थान के मूर्धन्य इतिहासकारों, साहित्यकारों का मानना है कि जब तक राजस्थान की संस्कृति, राजस्थानी साहित्य की जिस व्यक्ति को जानकारी […]

राणा सांगा के चित्र में सांप का रहस्य

राणा सांगा के चित्र में सांप का रहस्य

आपने इतिहास प्रसिद्ध मेवाड़ के शासक राणा सांगा (Maharana Sangram Singh) का पेड़ ने नीचे सोते हुए एक चित्र अवश्य देखा होगा, इस चित्र में अपना फन उठाये एक सांप भी नजर आता है| चित्र को देखकर हर व्यक्ति के मन में आता होगा कि सांगा के जंगल में पेड़ के नीचे सोते हुए चित्र […]

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