शेखागढ़ अमरसर : राव शेखाजी का किला अमरसर

शेखागढ़ अमरसर : साम्प्रदायिक सौहार्द और नारी सम्मान के प्रतीक राव शेखाजी का शेखागढ़ राजस्थान के अमरसर में स्थित है | अमरसर जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर व जयपुर दिल्ली राजमार्ग पर शाहपुरा से लगभग 16 किलोमीटर दूर है| किले के मुख्यद्वार में प्रवेश करते ही खाली मैदान नजर आता है, और बायीं तरफ फिर […]

यह वीर शादी की रस्में अधूरी छोड़ मातृभूमि के लिए शहीद हो गया

यह वीर शादी की रस्में अधूरी छोड़ मातृभूमि के लिए शहीद हो गया

रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी राव मित्रसेन अहीर कई मुस्लिम सेनापतियों के साथ विशाल शाही सेना लिए शेखावाटी प्रदेश की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए तैयार खड़ा था तो शेखावाटी-प्रदेश के शेखावत वीर भी अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता की रक्षार्थ उसके सामने आ डटे| शेखावत सेना को सहयोग देने के लिए […]

राव शेखा जी का आमेर से युद्ध और विजय

Rao Shekha history in Hindi, Rao Shekhaji, Shekhawati, Shekhawat Vansh राव शेखा के दादा बालाजी आमेर से अलग हुए थे | अतः अधीनता स्वरूप कर के रूप में प्रतिवर्ष आमेर को बछेरे देते थे | शेखा के समय तक यह परम्परा चल रही थी | राव शेखा ने गुलामी की श्रंखला को तोड़ना चाहा | […]

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

एक स्त्री की मान रक्षा के लिए महाराव शेखाजी ने झुन्थर के कोलराज गौड़ का सर काट कर अपने अमरसर के गढ़ के सदर द्वार पर टंगवा दिया,ऐसा करने का उनका उद्देश्य उदंड व आततायी लोगों में भय पैदा करना था हालांकि यह कृत्य वीर धर्म के खिलाफ था शेखा जी के उक्त कार्य की […]

ठा. नवल सिंह द्वारा एक वैश्य कन्या का मायरा (भात) भरना

ठा. नवल सिंह द्वारा एक वैश्य कन्या का मायरा (भात) भरना

राजस्थान के शेखावाटी आँचल के ठिकाने नवलगढ़ (वर्तमान झुंझनु जिले में) के शासक (सेकुलर गैंग की भाषा में सामंत) ठाकुर नवल सिंह शेखावत (Thakur Nawal Singh Shekhawat : 1742—1780)अपने खिराज (मामले) के साठ हजार रुपयों की बकाया पेटे बाईस हजार रूपये की हुण्डी लेकर दिल्ली जा रहे थे| उनका लवाजमा जैसे ही हरियाणा प्रान्त के […]

फौज देवरे आई

फौज देवरे आई

“बारात चल पड़ी है। गाँव समीप आ गया है इसलिए घुड़सवार घोड़ों को दौड़ाने लगे हैं। ऊँट दौड़ कर रथ से आगे निकल गए हैं । गाँव में ढोल और नक्कारे बज रहे हैं – दुल्हा-दुल्हिन एक विमान पर बैठे हैं । दुल्हे के हाथ में दुल्हिन का हाथ है । हाथ का गुदगुदा स्पर्श […]

राजा अजीत सिंह खेतड़ी

राजा अजीत सिंह खेतड़ी

शेखावाटी के झुंझनू मंडल के उत्प्थगामी मुस्लिम शासकों को पराजित कर धीर वीर ठाकुर शार्दुलसिंह ने झुंझनू पर संवत. 1787 में अपनी सत्ता स्थापित की थी। झुंझनु में कायमखानी चौहान नबाब के भाई बंधू अनय पथगामी हो गये थे। उन्हें रणभूमि में पद दलित कर शेखावत वीर शार्दुलसिंह ने झुंझनू पर अधिपत्य स्थापित किया। इस […]

राव टोडरमल-उदयपुर (शेखावाटी)

राव टोडरमल-उदयपुर (शेखावाटी)

राव भोजराज जी के यशस्वी पुत्र टोडरमल ने उदयपुरवाटी की बागडोर संभाली। टोडरमल जी भोजराज जी की जादव ठकुरानी के पुत्र थे। वि.स.1684 के करीब अपने पिता के जीवनकाल में ही वे उदयपुर में रहने लगे थे। इसके पूर्व ही उनकी वीरता प्रकट होने लग गयी थी। वि. स.1680 से पूर्व वे महाराजा जय सिंह […]

वीर दुर्गाजी शेखावत और उनकी दृढ-प्रतिज्ञा

भारतीय इतिहास में अपने पिता की राज गद्दी पाने के लिए भाइयों में खुनी संघर्ष, भाईयों का कत्ल, और बूढ़े पिता को जेल में डाल देना या मार देने के कई प्रकरण पढ़े व सुनें होंगे | पर क्या आपने भीष्म पितामह के बाद ऐसे प्रकरण के बारे में कहीं सुना या पढ़ा है जहाँ […]

वीर झुंझार सिंह शेखावत,गुढ़ा गौड़जीका

राजा रायसल दरबारी खंडेला के 12 पुत्रों को जागीर में अलग अलग ठिकाने मिले| और यही से शेखावतों की विभिन्न शाखाओं का जन्म हुआ|इन्ही के पुत्रों में से एक ठाकुर भोजराज जी को उदयपुरवाटी जागीर के रूप में मिली| इन्ही के वंशज ‘भोजराज जी के शेखावत” कहलाते है| भोजराज जी के पश्चात उनके पुत्र टोडरमल […]