अपने विरोधी के प्रति ऐसा सद्भाव एक सामंत ही रख सकता है

अपने विरोधी के प्रति ऐसा सद्भाव एक सामंत ही रख सकता है

यह एक विडम्बना ही कहिये कि महाराजा बीकानेर सर गंगासिंह और व्यासजी (Jai Narayan Vyas)एक-दूसरे के जन्मजात शत्रु माने जाते थे परन्तु जब सर गंगासिंह को यह मालूम पड़ा कि व्यासजी की बम्बई में आर्थिक स्थिति अति नाजुक है और वे फिल्म लाइन में जाने की सोच रहे हैं तो उन्हें बड़ा सदमा पहुँचा। उस […]

राजा मानसिंह और महाराणा प्रताप के मध्य सम्बन्ध

राजा मानसिंह और महाराणा प्रताप के मध्य सम्बन्ध

राजा मानसिंह आमेर वैसा नहीं था जैसा आज जन सामान्य में प्रचलित है। यह तो उस समय की राजनीतिक मजबूरी थी जो उसे मुगल साम्राज्य की सेवा में रहना पड़ा था। अन्यथा मानसिंह स्वयं स्वतंत्रता प्रिय व धर्मवान शासक था। मैं यहाँ पुनः हल्दी घाटी के युद्ध की बात कर रहा हूँ जिसमें कहने को […]

जब राजा मानसिंह आमेर ने लंका विजय की ठानी

जब राजा मानसिंह आमेर ने लंका विजय की ठानी

Raja Mansingh Amer History in Hindi अफगानिस्तान के जिन कबीलों को वर्तमान विश्व महाशक्ति अमेरिका और सोवियत रूस अपने अत्याधुनिक हथियारों के बल पर हराना तो दूर, झुका तक नहीं सके, उन्हीं अफगानिस्तान के शासकों, कबीलों को आमेर के Raja Man Singh ने नाकों चने चबवा दिए थे| सन 1585 में काबुल के शासक मिर्जा […]

भानगढ़ के राजा माधोसिंह

भानगढ़ के राजा माधोसिंह

भानगढ़ का किला दुनिया की चर्चित व प्रसिद्ध भूतहा जगहों में से एक है| उस किले में भूत है या नहीं, उसके उजड़ने से जुड़ी कहानियां कितनी सच है उस पर ज्ञान दर्पण पर पहले ही लिखा जा चुका है आज हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे है भानगढ़ के वीर राजा माधोसिंह का परिचय- आमेर […]

जब पशु बलि राज्य खोने का कारण बनी

जब पशु बलि राज्य खोने का कारण बनी

पशु बलि की परम्परा क्षत्रियों में कब शुरू हुई, क्या क्षत्रिय प्राचीन काल से मांसाहारी थे? क्षत्रियों में अपनी कुलदेवी के लिए पशु बलि देने व शराब चढाने की परम्परा कब शुरू हुई यह शोध का विषय है| लेकिन क्षत्रिय चिंतकों व विद्वानों के अनुसार क्षत्रियों में पशु बलि व मदिरा चढाने की पूर्व में […]

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच हुये युद्ध

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच हुये युद्ध

किंवदंतियों के अनुसार पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार मोहम्मद गौरी को पराजित किया और हर बार गौरी ने उससे पैरों में गिरकर क्षमा मांगी और पृथ्वीराज ने उसे छोड़ दिया। यदि तार्किक रूप से भी देखें तो यह ठीक नहीं लगता। यह सही है कि पृथ्वीराज युवा था, उच्च्श्रन्ख्ल था लेकिन वह 21 भीषण युद्ध […]

अधूरा ज्ञान प्रमाणिक इतिहास में बाधक : एक उदाहरण

अधूरा ज्ञान प्रमाणिक इतिहास में बाधक : एक उदाहरण

अधकचरा यानी अधूरा ज्ञान हमेशा हर जगह नुकसानदायक होता है और यह तब और ज्यादा नुकसान करता है जब अधूरे ज्ञान वाला स्वयंभू ज्ञानी शिक्षक, नेता, साधू के रूप में अपने अधूरे ज्ञान को अपने उद्बोधनों में बांटते फिरते है तथा लेखक आने वाली पीढ़ी के लिए अपने अधूरे ज्ञान के सहारे पुस्तकें लिखकर भ्रांतियां […]

क्या क्षत्रिय ब्राह्मण ऋषियों की संतति है ?

भारतीयों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने, भारतीय संस्कृति को तबाह करने, भारतीयों को मानसिक रूप से गुलाम बनाने के लिए, उन्हें यह जताने के लिए कि वे जंगली थे, गंवार थे, के लिए झूंठा साहित्य व इतिहास रचा गया| मनघडंत काल्पनिक कहानियां लिखी गई| यहाँ की शासक जाति को विदेशी मूल का साबित करने के […]