परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-3

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-3

भाग-2 से आगे ….Parmar Rajvansh ka itihas जगनेर के बिजौलिया के परमार- मालवा पर मुस्लिम अधिकार के बाद परमारों चारों ओर फैल गये। इनकी ही एक शाखा जगनेर आगरा के पास चली गई। उनके ही वंशज अशोक मेवाड़ आये। जिनको महाराणा सांगा ने बिजौलिया की जागीर दी। जगदीशपुर और डुमराँव का पंवार वंश- भोज के […]

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-2

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-2

भाग-1 से आगे ………….. राजस्थान का प्रथम परमार वंश – राजस्थान में ई 400 के करीब राजस्थान के नागवंशों के राज्यों पर परमारों ने अधिकार कर लिया था। इन नाग वंशों के पतन पर आसिया चारण पालपोत ने लिखा है-परमारा रुंधाविधा नाग गया पाताळ। हमै बिचारा आसिया, किणरी झुमै चाळ।।मालवा के परमार- मालव भू-भाग पर […]

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-1

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-1

परमार अग्नि वंशीय हैं। श्री राधागोविन्द सिंह शुभकरनपुरा टीकमगढ़ के अनुसार तीन गोत्र हैं-वशिष्ठ, अत्रि व शाकृति। इनकी शाखा वाजसनेयी, सूत्र पारसकर, ग्रहसूत्र और वेद यजुर्वेद है। परमारों की कुलदेवी दीप देवी है। देवता महाकाल, उपदेवी सिचियाय माता है। पुरोहित मिश्र, सगरं धनुष, पीतध्वज और बजरंग चिन्ह है। उनका घोड़ा नीला, सिलहट हाथी और क्षिप्रा […]

राजर्षि रणसीजी तंवर

राजर्षि रणसीजी तंवर

नरेना रेल्वे स्टेशन से कस्बे को जो सड़क आती है उस पर सड़क से करीब एक किमी दूरी पर राजर्षि रणसीजी तंवर का मन्दिर बना हुआ है। इस मन्दिर पर प्रतिवर्ष आश्विन शुक्ला द्वितीया को एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के गाँवों के हजारों लोग आते हैं। मेला प्रतिवर्ष धूमधाम से […]

क्रांतिवीर मोड़सिंह चौहान

क्रांतिवीर मोड़सिंह चौहान

अगस्त 1942 के एक दिन अहमदाबाद में चारों ओर अग्रेजों भारत छोड़ो के नारे लग रहे थे, नन्हें मुन्नें बालक भी ट्राफिक सिग्नल की ओर पत्थर फैंक रहे थे| तभी वहां आईबारा नाम के एक पुलिस निरीक्षक के नेतृत्व में पुलिस आई और सीधे भीड़ पर गोली चला दी| पुलिस गोली से साईकिल सवार एक […]

शौर्य, भक्ति व कला का संगम महाराजा सावंतसिंह (नागरीदास)

शौर्य, भक्ति व कला का संगम महाराजा सावंतसिंह (नागरीदास)

शौर्य, भक्ति कला का संगम महाराजा सावंतसिंह (नागरीदास) वि.स. 1766 (1709 ई.) का एक दिन दिल्ली में बादशाह का एक हाथी बिगड़ कर महावतों के काबू से बाहर हो रास्ते पर दौड़ता चला जा रहा था| लोग हाहाकार मचाते, चिल्लाते रास्ता छोड़कर भाग रहे थे| उसी रास्ते में एक 10 वर्षीय क्षत्रिय बालक बेकाबू हाथी […]

पुस्तक समीक्षा : जयचंद्र गद्दार नहीं परमदेशभक्त बौद्ध था

पुस्तक समीक्षा : जयचंद्र गद्दार नहीं परमदेशभक्त बौद्ध था

15 जनवरी 2017 को दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित पुस्तक मेले में सम्यक प्रकाशन दिल्ली ने बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध द्वारा लिखित पुस्तक “जयचंद्र गद्दार नहीं परमदेशभक्त बौद्ध था” का विमोचन किया गया| शांति स्वरूप बौद्ध 21 वर्ष केंद्र सरकार के राजपत्रित पद पर कार्य करने के बाद बौद्ध धर्म के इतिहास, सांस्कृतिक, कलात्मक […]

अपने विरोधी के प्रति ऐसा सद्भाव एक सामंत ही रख सकता है

अपने विरोधी के प्रति ऐसा सद्भाव एक सामंत ही रख सकता है

यह एक विडम्बना ही कहिये कि महाराजा बीकानेर सर गंगासिंह और व्यासजी (Jai Narayan Vyas)एक-दूसरे के जन्मजात शत्रु माने जाते थे परन्तु जब सर गंगासिंह को यह मालूम पड़ा कि व्यासजी की बम्बई में आर्थिक स्थिति अति नाजुक है और वे फिल्म लाइन में जाने की सोच रहे हैं तो उन्हें बड़ा सदमा पहुँचा। उस […]

यह वीर शादी की रस्में अधूरी छोड़ मातृभूमि के लिए शहीद हो गया

यह वीर शादी की रस्में अधूरी छोड़ मातृभूमि के लिए शहीद हो गया

रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी राव मित्रसेन अहीर कई मुस्लिम सेनापतियों के साथ विशाल शाही सेना लिए शेखावाटी प्रदेश की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए तैयार खड़ा था तो शेखावाटी-प्रदेश के शेखावत वीर भी अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता की रक्षार्थ उसके सामने आ डटे| शेखावत सेना को सहयोग देने के लिए […]

कुंवर विजयसिंह नंदेरा

कुंवर विजयसिंह नंदेरा

Kunwar Vijay Singh, Nandera कुंवर विजयसिंह नंदेरा का जन्म 12 अक्टूबर 1930 को कल्यानोत कछवाह ठाकुर जयसिंह जी ग्राम नंदेरा (जिला दौसा, तत्कालीन जयपुर राज्य) के घर में हुआ. आपने सन 1951 में बी.ए. महाराजा कालेज जयपुर से व सन 1955 में एल.एल.बी. की परीक्षा ला कालेज जयपुर से उतीर्ण कर अपने ग्राम के प्रथम […]