राणा संग्रामसिंह (साँगा)

राणा संग्रामसिंह (साँगा)

[ads-post] Rana Sangram Singh, Rana Sanga of Mewar, Rana Sanga History in hindi देख खानवा यहाँ चढ़ी थी राजपूत की त्यौरियाँ । मतवालों की शमसीरों से निकली थी चिनगारियाँ । राणा संग्रामसिंह इतिहास में राणा साँगा के नाम से प्रसिद्ध है। राणा साँगा राणा कुम्भा का पोत्र व राणा रायमल का पुत्र था। इनका जन्म […]

राणा कुम्भा

राणा कुम्भा

Maharana Kumbha History in hindi, Rana Kumbha of Chittorgarh, Maharna Kumbha of Mewar राणा सांगा से वीर थे, कुम्भा का विजय स्तम्भ देख। टूटे हुए इन खण्डहरों में सोती हुई कहानियाँ । राणा मोकल के पश्चात् उसका ज्येष्ठ पुत्र कुम्भकर्ण (कुम्भा Rana Kumbha) वि.सं. १४९० (ई.सं. १४३३) में चित्तौड़ के राज्य सिंहासन पर बैठा। कुम्भा […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-1

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,   ममता और कर्तव्य : भाग-1

विक्रम संवत् 1360 के चैत्र शुक्ला तृतीया की रात्रि का चतुर्थ प्रहर लग चुका था । वायुमण्डल शांत था । अन्धकार शनैः शनैः प्रकाश में रूपान्तरित होने लग गया था । बसन्त के पुष्पों की सौरभ भी इसी समय अधिक तीव्र हो उठी थी । यही समय भक्तजनों के लिए भक्ति और योगियों के लिए […]

क्या महाराणा प्रताप को खानी पड़ी थी घास की रोटियां? या टॉड ने फैलाई भ्रान्ति

क्या महाराणा प्रताप को खानी पड़ी थी घास की रोटियां? या टॉड ने फैलाई भ्रान्ति

अकबर के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान महाराणा ने महल त्याग कर पहाड़ों में रहकर अकबर की शाही सेना के खिलाफ निरंतर संघर्ष जारी रखा| इस संघर्ष पर अपनी कलम चलाते हुए कई लेखकों, रचनाकारों ने कविताएं लिखी, जिनमें राणा के संघर्ष की कठिनाईयों को घास की रोटियां खाने की उपमाएं दी गई| इसी […]

कौन था चितौड़ का बणवीर ?

कौन था चितौड़ का बणवीर ?

पन्नाधाय द्वारा बणवीर (Banveer) से चितौड़ के भावी शासक उदयसिंह (Maharana Udaisingh) की रक्षा के लिए अपने पुत्र के बलिदान की कथा देश का लगभग हर नागरिक जानता है| चितौड़ के शासक राणा विक्रमादित्य की हत्या कर बणवीर चितौड़ का शासक बन बैठा था| विक्रमादित्य की हत्या के बाद बणवीर ने उसके छोटे भाई 15 […]

घास की रोटियां का बिलाव द्वारा छीन ले जाना : एक इतिहास प्रवाद, एक भ्रान्ति

भारत में इतिहास लेखन कभी रुचिकर नहीं रहा| भारतीय शासक इतिहास लेखन को लेकर प्राचीन काल से उदासीन रहे| लेकिन भारत के साहित्यकारों ने अपने साहित्य में ऐतिहासिक घटनाकर्मों का जमकर जिक्र किया| यही कारण है कि राजस्थान सहित भारत का ज्यादातर साहित्य वे ही लोग समझ सकते है जो इतिहास के जानकार है| और […]

कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान ?

कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान ?

चितौड़ की रानी पद्मिनी जिसे रानी पद्मावती के नाम से भी जाता है, अपनी बहादुरी, त्याग, बलिदान व अप्रितम सौन्दर्य के लिए इतिहास में विश्व विख्यात है, रानी पद्मावती के जौहर की कहानी बिना राजस्थान का इतिहास भी अधुरा लगता है| राजस्थान सहित भारतवर्ष के इतिहासकारों, लेखकों, साहित्यकारों ने रानी पद्मिनी के जौहर पर बहुत […]

कुम्भा महल और विजय स्तंभ : चितौडगढ़

कुम्भा के महलों के भग्नावशेष और यह पास में खड़ा हुवा विजय स्तम्भ ! एक ही चेहरे की दो आँखे है जिसमे एक में आंसू और दूसरी में मुस्कराहट सो रही है | एक ही भाग्य विधाता की दो कृतियाँ है- एक आकाश चूम रहा है और दूसरा प्रथ्वी पर छितरा गया है | एक […]

Jauhar aur Shake History of Chittorgarh in Hindi

Jauhar aur Shake History of Chittorgarh in Hindi

दुर्ग शिरोमणि चित्तोडगढ का नाम इतिहास में स्वर्णिम प्रष्टों पर अंकित केवल इसी कारण है कि वहां पग-पग पर स्वतंत्रता के लिए जीवन की आहुति देने वाले बलिदानी वीरों की आत्मोसर्ग की कहानी कहने वाले रज-कण विद्यमान है | राजस्थान में अपनी आन बान और मातृभूमि के लिए मर मिटने की वीरतापूर्ण गौरवमयी परम्परा रही […]