चिणौ

चिणौ

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह शेखावत की कलम से…. आजकाल लोगबाग म्हनै भूंगड़ौ कैवै है। पैली चिणौ कैवता। पण, इण सूं म्हनै किणी रीत-भांत री नाराजगी कोनी। औ प्रक्रति रौ धारौ इज है। समै रै सागै सागै जिण भांत उमर ढळे अर काया में पलटाव आवै उणी भांत नांव भी पलटीजता रैवै। गाय […]