क्षत्रिय वंदना

क्षत्रिय कुल में जन्म दिया तो ,क्षत्रिय के हित में जीवन बिताऊं |धर्म के कंटकाकीर्ण मग पर ,धीरज से में कदम बढ़ाऊँ ||भरे हलाहल है ये विष के प्याले ,दिल में है दुवेष के हाय फफोले |जातीय गगन में चंद्र सा बन प्रभु, शीतल चांदनी में छिटकाऊँ ||विचारानुकुल आचार बनाकर ,वास्तविक भक्ति से तुम्हे रिझाऊँ […]