पाबू -2

पाबू भाग १ का शेष ……………..कौन जनता था कि विवाह के ढोल-धमाकों में भी कर्तव्य की क्षीण पुकार कोई सुन सकता है | मादकता के सुध बुध खोने वाले प्यालों को होटों से लगाकर भी कोई मतवाला उन्हें फेंक सकता है , वरमाला के सुरम्य पुष्पों को भी सूंघने के पहले ही पैरों तले रोंद […]

पाबू -1

भाद्रपद मास की बरसात सी झूमती हुई एक बारात जा रही थी | उसकी बारात जिसने विवाह पहले ही सूचना दे दी थी कि- ‘ मेरा सिर तो बिका हुआ है , विधवा बनना है तो विवाह करना !’ उसकी बारात जिसने प्रत्युतर दिया था – जिसके शरीर पर रहने वाला सिर उसका नहीं है […]